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द्विध्रुवीयता का अंत

द्विध्रुवीयता यानी दुनिया में दो शक्ति-केंद्र: अमेरिका और सोवियत संघ। सोवियत प्रणाली ने नौकरी और सुविधाएँ दीं, पर आज़ादी कम थी और अर्थव्यवस्था पिछड़ गई। गोर्बाचेव के सुधारों से व्यवस्था खुली और 1991 में सोवियत संघ 15 देशों में टूट गया। 'शॉक थेरेपी' से पूँजीवाद में जाना बहुत दर्दनाक रहा। शीत युद्ध ख़त्म हुआ, अमेरिका अकेली महाशक्ति बना, और भारत ने रूस व मध्य एशिया के नए देशों से मज़बूत रिश्ते रखे।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1945 के बाद दुनिया में दो बड़ी ताक़तें थीं: अमेरिका और सोवियत संघ। झूले पर दो बराबर वज़न: यही द्विध्रुवीयता है।
  2. सोवियत संघ में एक दल और सरकार सब कुछ चलाते थे: कारख़ाने, खेत, दाम और ख़बरें। सबको नौकरी, पर आज़ादी कम।
  3. 1985 में गोर्बाचेव ने खुलापन (ग्लासनोस्त) और पुनर्गठन (पेरेस्त्रोइका) शुरू किया। दिसंबर 1991 तक सोवियत संघ 15 देशों में बँट गया।
  4. बाईं ओर कारण, दाईं ओर परिणाम: कमज़ोर अर्थव्यवस्था, आज़ादी की चाह और राष्ट्रवाद से शीत युद्ध ख़त्म हुआ और अमेरिका सबसे ऊपर आया।
  5. शॉक थेरेपी: स्लाइडर खिसकाइए। सरकारी कंपनियाँ जल्दी बिकीं, पैसे की क़ीमत गिरी, नौकरियाँ गईं, और कुछ लोग बहुत अमीर हुए।
  6. खुला खेल: भारत और रूस के हर रिश्ते (रक्षा, ऊर्जा, UN में समर्थन, व्यापार) को चुनिए और देखिए दोस्ती क्यों टिकी रही।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

इसे 'शीत' युद्ध क्यों कहा गया?

अमेरिका और सोवियत संघ आपस में सीधे नहीं लड़े। उन्होंने हथियारों, गुटों और दूसरी जगहों के युद्धों से होड़ की।

जब सबको नौकरी मिलती थी, तो लोग ख़िलाफ़ क्यों हुए?

नौकरी थी, पर आज़ादी कम थी, लंबी कतारें थीं और असली चुनाव नहीं थे। लोग अपनी आवाज़ और बेहतर ज़िंदगी चाहते थे।

क्या गोर्बाचेव सोवियत संघ तोड़ना चाहते थे?

नहीं। वे सुधार चाहते थे। खुलेपन से लोग ज़्यादा माँगने लगे और गणराज्यों ने अलग होना चुना।

सबसे बड़ा कारण कौन-सा था?

कई विद्वान गणराज्यों के राष्ट्रवाद को सबसे बड़ा मानते हैं, जो कमज़ोर अर्थव्यवस्था के साथ मिलकर असरदार हुआ।

शॉक थेरेपी इतनी दर्दनाक क्यों थी?

सब कुछ एक साथ बदला। कोई सुरक्षा-जाल नहीं था, नए कारोबार बनने से पहले ही दाम बढ़े और नौकरियाँ गईं।

क्या 1991 के बाद भारत ने अपना दोस्त खो दिया?

नहीं। भारत ने रूस और मध्य एशिया के देशों से रक्षा, ऊर्जा और व्यापार में मज़बूत रिश्ते बनाए।

द्विध्रुवीयता क्या थी?

द्विध्रुवीयता का मतलब है दुनिया में दो ध्रुव, यानी दो बड़े शक्ति-केंद्र। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ये थे अमेरिका (पूँजीवादी, बाज़ार वाली अर्थव्यवस्था) और सोवियत संघ (साम्यवादी, सरकार द्वारा चलाई जाने वाली अर्थव्यवस्था)। दोनों की लंबी होड़, बिना आमने-सामने युद्ध के, शीत युद्ध कहलाई। सोवियत संघ दूसरी दुनिया का नेता था: पूर्वी यूरोप के समाजवादी देश, जो वारसा संधि में जुड़े थे।

सोवियत प्रणाली

विशेषताएँ

कमज़ोरियाँ

गोर्बाचेव और विघटन

मिखाइल गोर्बाचेव 1985 में महासचिव बने। वे व्यवस्था को सुधारना चाहते थे, ख़त्म नहीं करना।

1989 में पूर्वी यूरोप के देशों ने साम्यवादी सरकारें हटा दीं और बर्लिन की दीवार गिरी। अगस्त 1991 में कट्टरपंथियों ने तख़्तापलट की कोशिश की; बोरिस येल्तसिन के नेतृत्व में लोगों ने इसे रोका। रूस, यूक्रेन और बेलारूस ने सोवियत संघ के अंत की घोषणा की और स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल (CIS) बना। दिसंबर 1991 में सोवियत संघ ख़त्म होकर 15 स्वतंत्र देशों में बँट गया। रूस उसका उत्तराधिकारी बना और सुरक्षा परिषद की सीट उसे मिली।

सोवियत संघ क्यों टूटा? (कारण)

  1. आर्थिक कमज़ोरी: पैसा हथियारों और दूसरे देशों पर लगा; लोगों की ज़रूरतें पूरी नहीं हुईं।
  2. राजनीतिक कमज़ोरी: एक दल, कोई जवाबदेही नहीं, धीमी नौकरशाही।
  3. सुधारों से उम्मीदें बढ़ीं: बोलने की छूट मिली तो लोग तेज़ बदलाव चाहने लगे।
  4. राष्ट्रवाद: एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, यूक्रेन, जॉर्जिया जैसे गणराज्य अपना देश चाहते थे। कई विद्वान इसे सबसे बड़ा कारण मानते हैं।
  5. जानकारी: लोगों को पता चला कि पश्चिम ज़्यादा अमीर और आज़ाद है।

विघटन के परिणाम

शॉक थेरेपी

शॉक थेरेपी यानी 1990 के दशक में रूस, मध्य एशिया और पूर्वी यूरोप में साम्यवादी अर्थव्यवस्था से पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में अचानक बदलाव। इसे विश्व बैंक और IMF ने दिशा दी।

क्या हुआ

नतीजे

2000 के बाद रूस की अर्थव्यवस्था सुधरी, मुख्यतः तेल और गैस बेचकर।

नए देश और तनाव

15 नए देशों में रूस, यूक्रेन, बेलारूस, बाल्टिक देश, कॉकेशस के देश (जॉर्जिया, आर्मेनिया, अज़रबैजान) और मध्य एशिया के पाँच देश (कज़ाख़स्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान) शामिल हैं। कई देशों में जातीय तनाव, कमज़ोर लोकतंत्र और नदियों-तेल पर विवाद रहे। तेल और गैस के कारण मध्य एशिया अहम बना, और बाहरी ताक़तें वहाँ असर बढ़ाना चाहती थीं।

भारत के रूस और सोवियत-बाद के देशों से संबंध

करके देखें

15 सिक्कों का ढेर बनाइए, यह एक 'संघ' है। एक-एक सिक्का निकालिए और हर बार एक नए देश का नाम बोलिए। फिर ढेर बिखरने का एक कारण और एक परिणाम लिखिए। अब 3D में शॉक थेरेपी का स्लाइडर खिसकाइए और बताइए कौन-सा खंभा बढ़ा और कौन-से घटे।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. सोवियत प्रणाली की दो विशेषताएँ बताइए।

(1) अर्थव्यवस्था सरकार के हाथ में थी और योजना से चलती थी। (2) केवल कम्युनिस्ट पार्टी का शासन था; नागरिकों को नौकरी, घर और इलाज मिलता था, पर आज़ादी कम थी।

2. सोवियत संघ के विघटन के कोई तीन कारण समझाइए।

(1) पैसा हथियारों पर लगने से अर्थव्यवस्था ठहर गई। (2) गोर्बाचेव के खुलेपन से उम्मीदें तेज़ी से बढ़ीं। (3) बाल्टिक जैसे गणराज्यों में राष्ट्रवाद ने अलग देश की माँग की।

3. शॉक थेरेपी क्या थी? इसके दो प्रभाव बताइए।

IMF और विश्व बैंक की सलाह से साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर अचानक बदलाव। प्रभाव: रूबल गिरा और महँगाई बढ़ी; कल्याण व्यवस्था टूटी और असमानता बढ़ी।

4. भारत रूस से अपने रिश्ते को क्यों महत्त्व देता है?

रूस रक्षा सामान और ऊर्जा देता है, UN और कश्मीर पर भारत का साथ देता है, और दोनों बहुध्रुवीय दुनिया चाहते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. द्विध्रुवीयता का अर्थ है:
2. ग्लासनोस्त का अर्थ है:
3. सोवियत संघ का अंत कब हुआ?
4. सोवियत संघ से कितने देश बने?
5. शॉक थेरेपी को मुख्य रूप से किसने दिशा दी?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्विध्रुवीयता के अंत का क्या अर्थ है?

1991 में सोवियत संघ के टूटने से दो-शक्ति वाली दुनिया ख़त्म हुई और अमेरिका अकेली महाशक्ति बचा।

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान में शॉक थेरेपी क्या है?

1990 के दशक में पूर्व साम्यवादी देशों में सरकारी अर्थव्यवस्था से खुले बाज़ार की ओर अचानक बदलाव, जिसे IMF और विश्व बैंक का समर्थन था।

सोवियत संघ टूटने के बाद कौन-से देश बने?

पंद्रह देश, जैसे रूस, यूक्रेन, बेलारूस, बाल्टिक देश, जॉर्जिया, आर्मेनिया, अज़रबैजान, मोल्दोवा और मध्य एशिया के पाँच देश।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12समकालीन विश्व राजनीति

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