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संघवाद

संघवाद वह व्यवस्था है जिसमें सत्ता केंद्र सरकार और राज्य (व स्थानीय) सरकारों में बँटी होती है और हर स्तर के अधिकार संविधान तय करता है। भारत में कानून के विषय तीन सूचियों में बँटे हैं, सब भाषाओं का सम्मान है और 1992 से पंचायतों व नगरपालिकाओं को असली अधिकार मिले।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो मीनारें देखिए। एकात्मक देश में एक ही असली सरकार होती है, बाकी आदेश मानते हैं। संघीय देश में दो या ज़्यादा स्तर होते हैं और हर स्तर के अपने अधिकार होते हैं।
  2. क्यूब गिरते देखिए। संविधान विषयों को तीन सूचियों में बाँटता है: संघ, राज्य और समवर्ती। बचे हुए विषय, जैसे कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर, संघ के पास जाते हैं।
  3. कोई भी स्तर ये नियम अकेले नहीं बदल सकता। बड़े बदलाव के लिए संसद और कम से कम आधे राज्यों की सहमति चाहिए। झगड़ा हो तो सर्वोच्च न्यायालय अंपायर है।
  4. ब्लॉक गिनिए: संविधान में 22 भाषाएँ दर्ज हैं। किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं गई और कई राज्य भाषा के आधार पर बने।
  5. सत्ता एक कदम और नीचे: पंचायत और नगरपालिका। 1992 से यहाँ नियमित चुनाव होते हैं और एक-तिहाई सीटें महिलाओं की हैं।
  6. अब आपकी बारी। कोई विषय चुनें और क्यूब गिरने से पहले अंदाज़ा लगाएँ कि वह किस सूची में जाएगा।

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🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

संघीय और एकात्मक देश में क्या फ़र्क है?

संघीय में हर स्तर के पक्के अधिकार होते हैं; एकात्मक में केंद्र बाकी को आदेश दे सकता है।

कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर पर कानून कौन बनाता है?

यह अवशिष्ट विषय है, इसलिए संसद।

क्या संघ जब चाहे राज्य के अधिकार छीन सकता है?

नहीं। बदलाव के लिए संसद और आधे राज्यों की सहमति चाहिए; अदालतें दुरुपयोग रोक सकती हैं।

क्या हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है?

नहीं। यह राजभाषा है; संविधान में कोई राष्ट्रभाषा नहीं।

1992 के संशोधन से क्या बदला?

स्थानीय चुनाव नियमित हुए, एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए और राज्य चुनाव आयोग बने।

शिक्षा किस सूची में है?

समवर्ती सूची। आखिरी कदम में 'शिक्षा' चुनकर देखें।

संघवाद क्या है?

संघवाद यानी सत्ता पूरे देश की सरकार और उसके हिस्सों (राज्यों) की सरकारों में बँटी हो। दोनों स्तर एक ही नागरिकों पर, पर अलग विषयों पर शासन करते हैं।

एकात्मक व्यवस्था में एक ही स्तर होता है, या नीचे के स्तर केंद्र के आदेश मानते हैं।

संघवाद की मुख्य विशेषताएँ

संघ बनने के दो रास्ते

साथ आकर: स्वतंत्र राज्य मिलकर बड़ी इकाई बनाते हैं (अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड)। साथ रहकर: बड़ा देश अपनी सत्ता हिस्सों में बाँटता है (भारत, स्पेन, बेल्जियम)। इसमें केंद्र आम तौर पर ज़्यादा ताकतवर होता है।

भारत संघीय देश कैसे है?

संविधान में 'संघ' (फ़ेडरेशन) शब्द नहीं है, पर व्यवस्था संघीय है। शुरू में दो स्तर थे (संघ और राज्य), बाद में पंचायत और नगरपालिका का तीसरा स्तर जुड़ा।

केंद्रशासित प्रदेशों के पास कम अधिकार हैं। सत्ता-बँटवारे की मूल व्यवस्था बदलने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम आधे राज्यों की मंज़ूरी चाहिए। न्यायपालिका विवाद सुलझाती है।

संघवाद व्यवहार में

भाषाई राज्य

1956 से कई राज्य इस तरह बने कि एक भाषा बोलने वाले एक राज्य में रहें। कुछ राज्य संस्कृति, भूगोल या जातीयता के आधार पर भी बने। पहले डर था कि इससे देश बँटेगा, पर देश और मज़बूत हुआ और शासन आसान हुआ।

भाषा नीति

किसी भाषा को 'राष्ट्रभाषा' का दर्जा नहीं दिया गया। हिंदी राजभाषा है, जो लगभग 40% लोगों की मातृभाषा है। 22 भाषाएँ अनुसूचित भाषाएँ हैं। सरकारी काम में हिंदी के साथ अंग्रेज़ी भी चलती रही। गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी थोपी नहीं गई। राज्यों की अपनी राजभाषाएँ हैं।

केंद्र–राज्य संबंध

लंबे समय तक केंद्र और ज़्यादातर राज्यों में एक ही दल की सरकार रही, तो राज्यों को कम आज़ादी मिली। कभी-कभी केंद्र ने विरोधी दल की राज्य सरकारें भंग कीं। 1990 के बाद क्षेत्रीय दल बढ़े और केंद्र में गठबंधन सरकारें आईं। इससे राज्य सरकारों के सम्मान की नई संस्कृति बनी। 1994 के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले से बिना कारण राज्य सरकार भंग करना कठिन हुआ।

भारत में विकेंद्रीकरण

विकेंद्रीकरण यानी केंद्र और राज्य से सत्ता लेकर स्थानीय सरकार को देना। टूटे हैंडपंप जैसी समस्याएँ वहाँ रहने वाले लोग सबसे अच्छे से सुलझा सकते हैं।

1992 के संविधान संशोधन से

पंचायती राज

गाँव (या कुछ गाँवों) की ग्राम पंचायत होती है, जिसका मुखिया सरपंच होता है। यह ग्राम सभा (गाँव के सभी मतदाता) की निगरानी में काम करती है। कई पंचायतें मिलकर पंचायत समिति (प्रखंड) और ज़िले की सभी समितियाँ मिलकर ज़िला परिषद बनाती हैं। शहरों में नगरपालिका और बड़े शहरों में नगर निगम होते हैं, जिनका मुखिया मेयर होता है।

कमियाँ: ग्राम सभा की बैठकें नियमित नहीं होतीं और राज्य कम पैसा देते हैं। फिर भी यह लोकतंत्र का बड़ा प्रयोग है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. शिक्षा पर राज्य का और संसद का अलग-अलग कानून हो तो कौन-सा मान्य होगा?

शिक्षा समवर्ती सूची में है। टकराव होने पर संघ का कानून मान्य होगा।

2. कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर संघ का विषय क्यों है?

यह संविधान बनने के बाद आया, इसलिए किसी सूची में नहीं। ऐसे अवशिष्ट विषय संघ के पास जाते हैं।

3. भारत 'साथ आकर' बना संघ है या 'साथ रहकर'?

साथ रहकर। भारत एक बड़ा देश था जिसने सत्ता राज्यों में बाँटी।

4. भाषा के आधार पर राज्य बनाने से भारत टूटा क्यों नहीं?

लोगों को लगा उनकी भाषा-संस्कृति का सम्मान है, इसलिए देश पर भरोसा बढ़ा। एक भाषा वाले राज्य में शासन भी आसान हुआ।

5. स्थानीय सरकार के दो फ़ायदे बताइए।

स्थानीय लोग अपनी समस्याएँ सबसे अच्छे से जानते हैं, और ज़्यादा लोग फ़ैसलों में शामिल होते हैं, जिससे लोकतंत्र गहरा होता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. रक्षा किस सूची में है?
2. संविधान में कितनी अनुसूचित भाषाएँ हैं?
3. स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
4. भारत किस तरह का संघ है?
5. संघ और राज्य के विवाद कौन सुलझाता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संघवाद आसान शब्दों में क्या है?

केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में सत्ता का बँटवारा, जिसमें हर स्तर के अधिकार संविधान तय करता है।

भारतीय संविधान की तीन सूचियाँ कौन-सी हैं?

संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।

सरकार का तीसरा स्तर कौन-सा है?

स्थानीय सरकार: गाँवों में पंचायत और शहरों में नगरपालिका।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 10राजनीति विज्ञान: लोकतांत्रिक राजनीति – II
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