संघवाद क्या है?
संघवाद यानी सत्ता पूरे देश की सरकार और उसके हिस्सों (राज्यों) की सरकारों में बँटी हो। दोनों स्तर एक ही नागरिकों पर, पर अलग विषयों पर शासन करते हैं।
एकात्मक व्यवस्था में एक ही स्तर होता है, या नीचे के स्तर केंद्र के आदेश मानते हैं।
संघवाद की मुख्य विशेषताएँ
- सरकार के दो या ज़्यादा स्तर।
- हर स्तर के कानून, कर और प्रशासन में अपने अधिकार।
- अधिकार संविधान में लिखे; कोई एक स्तर अकेले नहीं बदल सकता।
- स्तरों के विवाद अदालतें सुलझाती हैं।
- हर स्तर की अपनी आमदनी के स्रोत।
- लक्ष्य: देश की एकता और क्षेत्रीय विविधता दोनों का सम्मान।
संघ बनने के दो रास्ते
साथ आकर: स्वतंत्र राज्य मिलकर बड़ी इकाई बनाते हैं (अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड)। साथ रहकर: बड़ा देश अपनी सत्ता हिस्सों में बाँटता है (भारत, स्पेन, बेल्जियम)। इसमें केंद्र आम तौर पर ज़्यादा ताकतवर होता है।
भारत संघीय देश कैसे है?
संविधान में 'संघ' (फ़ेडरेशन) शब्द नहीं है, पर व्यवस्था संघीय है। शुरू में दो स्तर थे (संघ और राज्य), बाद में पंचायत और नगरपालिका का तीसरा स्तर जुड़ा।
- संघ सूची: राष्ट्रीय महत्व के विषय – रक्षा, विदेश मामले, बैंकिंग, मुद्रा। केवल संसद कानून बनाती है।
- राज्य सूची: स्थानीय विषय – पुलिस, राज्य के अंदर व्यापार, कृषि, सिंचाई। राज्य विधानमंडल कानून बनाते हैं।
- समवर्ती सूची: साझा विषय – शिक्षा, वन, विवाह, गोद लेना। दोनों कानून बना सकते हैं; टकराव में संघ का कानून मान्य।
- अवशिष्ट विषय: जो किसी सूची में नहीं, जैसे कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर – संघ के पास।
केंद्रशासित प्रदेशों के पास कम अधिकार हैं। सत्ता-बँटवारे की मूल व्यवस्था बदलने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम आधे राज्यों की मंज़ूरी चाहिए। न्यायपालिका विवाद सुलझाती है।
संघवाद व्यवहार में
भाषाई राज्य
1956 से कई राज्य इस तरह बने कि एक भाषा बोलने वाले एक राज्य में रहें। कुछ राज्य संस्कृति, भूगोल या जातीयता के आधार पर भी बने। पहले डर था कि इससे देश बँटेगा, पर देश और मज़बूत हुआ और शासन आसान हुआ।
भाषा नीति
किसी भाषा को 'राष्ट्रभाषा' का दर्जा नहीं दिया गया। हिंदी राजभाषा है, जो लगभग 40% लोगों की मातृभाषा है। 22 भाषाएँ अनुसूचित भाषाएँ हैं। सरकारी काम में हिंदी के साथ अंग्रेज़ी भी चलती रही। गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी थोपी नहीं गई। राज्यों की अपनी राजभाषाएँ हैं।
केंद्र–राज्य संबंध
लंबे समय तक केंद्र और ज़्यादातर राज्यों में एक ही दल की सरकार रही, तो राज्यों को कम आज़ादी मिली। कभी-कभी केंद्र ने विरोधी दल की राज्य सरकारें भंग कीं। 1990 के बाद क्षेत्रीय दल बढ़े और केंद्र में गठबंधन सरकारें आईं। इससे राज्य सरकारों के सम्मान की नई संस्कृति बनी। 1994 के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले से बिना कारण राज्य सरकार भंग करना कठिन हुआ।
भारत में विकेंद्रीकरण
विकेंद्रीकरण यानी केंद्र और राज्य से सत्ता लेकर स्थानीय सरकार को देना। टूटे हैंडपंप जैसी समस्याएँ वहाँ रहने वाले लोग सबसे अच्छे से सुलझा सकते हैं।
1992 के संविधान संशोधन से
- स्थानीय निकायों के नियमित चुनाव ज़रूरी।
- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए सीटें आरक्षित।
- कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए।
- चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र राज्य चुनाव आयोग।
- राज्य कुछ अधिकार और पैसा स्थानीय निकायों को देंगे।
पंचायती राज
गाँव (या कुछ गाँवों) की ग्राम पंचायत होती है, जिसका मुखिया सरपंच होता है। यह ग्राम सभा (गाँव के सभी मतदाता) की निगरानी में काम करती है। कई पंचायतें मिलकर पंचायत समिति (प्रखंड) और ज़िले की सभी समितियाँ मिलकर ज़िला परिषद बनाती हैं। शहरों में नगरपालिका और बड़े शहरों में नगर निगम होते हैं, जिनका मुखिया मेयर होता है।
कमियाँ: ग्राम सभा की बैठकें नियमित नहीं होतीं और राज्य कम पैसा देते हैं। फिर भी यह लोकतंत्र का बड़ा प्रयोग है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संघवाद: संविधान द्वारा केंद्र और राज्य (व स्थानीय) सरकारों में सत्ता का बँटवारा।
- संघ सूची: राष्ट्रीय विषय (रक्षा, बैंकिंग, मुद्रा, विदेश मामले)।
- राज्य सूची: स्थानीय विषय (पुलिस, कृषि, सिंचाई, राज्य का व्यापार)।
- समवर्ती सूची: दोनों कानून बनाएँ (शिक्षा, वन, विवाह); टकराव में संघ का कानून मान्य।
- अवशिष्ट विषय: किसी सूची में नहीं; संघ के पास।
- साथ आकर बने संघ बनाम साथ रहकर बने संघ।
- विकेंद्रीकरण: स्थानीय सरकार को सत्ता (1992 संशोधन; एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए)।
हल किए गए उदाहरण
1. शिक्षा पर राज्य का और संसद का अलग-अलग कानून हो तो कौन-सा मान्य होगा?
शिक्षा समवर्ती सूची में है। टकराव होने पर संघ का कानून मान्य होगा।
2. कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर संघ का विषय क्यों है?
यह संविधान बनने के बाद आया, इसलिए किसी सूची में नहीं। ऐसे अवशिष्ट विषय संघ के पास जाते हैं।
3. भारत 'साथ आकर' बना संघ है या 'साथ रहकर'?
साथ रहकर। भारत एक बड़ा देश था जिसने सत्ता राज्यों में बाँटी।
4. भाषा के आधार पर राज्य बनाने से भारत टूटा क्यों नहीं?
लोगों को लगा उनकी भाषा-संस्कृति का सम्मान है, इसलिए देश पर भरोसा बढ़ा। एक भाषा वाले राज्य में शासन भी आसान हुआ।
5. स्थानीय सरकार के दो फ़ायदे बताइए।
स्थानीय लोग अपनी समस्याएँ सबसे अच्छे से जानते हैं, और ज़्यादा लोग फ़ैसलों में शामिल होते हैं, जिससे लोकतंत्र गहरा होता है।
आम गलतियाँ
- हिंदी को राष्ट्रभाषा कहना। संविधान किसी भाषा को यह दर्जा नहीं देता; हिंदी राजभाषा है।
- शिक्षा को राज्य सूची में रखना। यह समवर्ती सूची में है।
- यह सोचना कि केंद्र अकेले सत्ता-बँटवारा बदल सकता है। इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की मंज़ूरी चाहिए।
- ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को एक समझना। ग्राम सभा सभी मतदाता हैं; पंचायत चुनी हुई परिषद।