सत्ता की साझेदारी क्या है?
सत्ता यानी दूसरों के लिए फ़ैसले लेने का अधिकार। सत्ता की साझेदारी यानी यह अधिकार कई लोगों और संस्थाओं में बँटा हो। किसी एक के पास पूरा अधिकार न हो।
लोकतंत्र जनता का शासन है, इसलिए सत्ता जनता और उनकी चुनी हुई संस्थाओं में बँटनी चाहिए।
बेल्जियम की कहानी
बेल्जियम यूरोप का छोटा देश है। लगभग 59% लोग डच, लगभग 40% फ्रेंच और लगभग 1% जर्मन बोलते हैं। राजधानी ब्रसेल्स में फ्रेंच बोलने वाले बहुमत में हैं।
पहले फ्रेंच भाषी समुदाय ज़्यादा अमीर और ताकतवर था। डच भाषियों को आर्थिक विकास और शिक्षा बाद में मिली, इसलिए वे नाराज़ थे। 1950 और 1960 के दशक में तनाव बढ़ा।
बेल्जियम ने सत्ता कैसे बाँटी (समायोजन)
- केंद्र सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर है। कुछ कानूनों के लिए दोनों समूहों के ज़्यादातर सदस्यों का समर्थन चाहिए।
- दोनों क्षेत्रों की राज्य सरकारों को बहुत से अधिकार मिले। वे केंद्र के अधीन नहीं हैं।
- ब्रसेल्स की अलग सरकार है जिसमें दोनों समुदायों का बराबर हिस्सा है।
- सामुदायिक सरकार एक भाषा-समूह के लोग चुनते हैं। यह संस्कृति, शिक्षा और भाषा के फ़ैसले लेती है।
व्यवस्था पेचीदा है, पर सफल रही। बेल्जियम गृहयुद्ध से बचा और एक रहा।
श्रीलंका की कहानी
श्रीलंका एक द्वीप देश है। लगभग 74% लोग सिंहली और लगभग 18% तमिल बोलते हैं। ज़्यादातर सिंहली बौद्ध हैं; ज़्यादातर तमिल हिंदू या मुसलमान। दोनों में कुछ ईसाई भी हैं।
बहुसंख्यकवाद
बहुसंख्यकवाद यानी बहुमत वाला समूह सोचे कि वह देश को जैसे चाहे चला सकता है और छोटे समूहों की परवाह न करे।
- 1956 के कानून से सिंहली अकेली राजभाषा बनी।
- विश्वविद्यालय और सरकारी नौकरियों में सिंहली भाषियों को तरजीह मिली।
- संविधान में लिखा गया कि सरकार बौद्ध धर्म को संरक्षण देगी।
तमिलों को लगा उनकी भाषा और संस्कृति की अनदेखी हो रही है। उन्होंने तमिल को राजभाषा, नौकरियों में बराबरी और अपने इलाकों को ज़्यादा अधिकार माँगे। माँगें ठुकराई गईं, अविश्वास बढ़ा। 1980 के दशक से लंबा गृहयुद्ध चला जो 2009 में ख़त्म हुआ। हज़ारों लोग मारे गए।
सत्ता की साझेदारी क्यों अच्छी है?
- युक्तिपरक (समझदारी वाला) तर्क: सत्ता बाँटने से समूहों में टकराव घटता है और देश स्थिर रहता है। बेल्जियम इसका उदाहरण है।
- नैतिक तर्क: लोगों का हक़ है कि उनसे पूछा जाए कि उन पर शासन कैसे हो। सत्ता बाँटना लोकतंत्र की आत्मा है।
सत्ता की साझेदारी के रूप
1. सरकार के अंगों में (क्षैतिज)
विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका सरकार चलाती है, न्यायपालिका विवाद सुलझाती है। तीनों एक ही स्तर पर हैं और एक-दूसरे पर अंकुश रखते हैं। इसे नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था कहते हैं।
2. सरकार के अलग-अलग स्तरों में (ऊर्ध्वाधर)
पूरे देश के लिए संघ सरकार, हर राज्य के लिए राज्य सरकार और गाँव-शहर के लिए स्थानीय सरकार।
3. सामाजिक समूहों में
धार्मिक और भाषाई समूहों को हिस्सा मिलता है, जैसे बेल्जियम की सामुदायिक सरकार। भारत में कमज़ोर वर्गों के लिए आरक्षित सीटें भी यही करती हैं।
4. दलों, दबाव समूहों और आंदोलनों में
चुनाव में दल होड़ करते हैं, इसलिए सत्ता हाथ बदलती रहती है। कभी दल गठबंधन बनाकर सत्ता बाँटते हैं। व्यापारियों, किसानों, मज़दूरों के दबाव समूह भी फ़ैसलों पर असर डालते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सत्ता की साझेदारी: फ़ैसले लेने की ताकत को कई लोगों, समूहों और संस्थाओं में बाँटना।
- बहुसंख्यकवाद: बहुमत अपनी मर्ज़ी से शासन करे और अल्पसंख्यकों की ज़रूरतें अनदेखी करे।
- समायोजन: हर समूह की ज़रूरतों के लिए जगह बनाना (बेल्जियम का तरीका)।
- क्षैतिज वितरण: एक ही स्तर पर विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका में (नियंत्रण और संतुलन)।
- ऊर्ध्वाधर वितरण: संघ, राज्य और स्थानीय सरकारों में।
- युक्तिपरक तर्क = टकराव घटता है; नैतिक तर्क = लोकतंत्र की आत्मा।
- गृहयुद्ध: एक ही देश के अंदर समूहों के बीच हिंसक संघर्ष।
हल किए गए उदाहरण
1. डच भाषी ज़्यादा होने पर भी बेल्जियम ने केंद्र में बराबर मंत्री क्यों रखे?
अगर सिर्फ़ गिनती से सीटें मिलतीं तो फ्रेंच भाषी हमेशा हारते और असुरक्षित महसूस करते। बराबर सीटों से दोनों में भरोसा बना और देश जुड़ा रहा।
2. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद दिखाने वाला एक कानून बताइए।
1956 का कानून जिसने सिंहली को अकेली राजभाषा बनाया। इसमें लगभग 18% लोगों की तमिल भाषा की अनदेखी हुई।
3. अदालत संसद का बनाया कानून रद्द कर दे, तो यह कौन-सा रूप है?
क्षैतिज बँटवारा। न्यायपालिका एक ही स्तर पर विधायिका पर अंकुश रखती है।
4. ग्राम पंचायत तय करे कि कुआँ कहाँ बनेगा, यह कौन-सा रूप है?
ऊर्ध्वाधर बँटवारा। स्थानीय स्तर की सरकार अपने हिस्से की सत्ता का उपयोग करती है।
5. सत्ता की साझेदारी का एक युक्तिपरक और एक नैतिक तर्क दीजिए।
युक्तिपरक: समूहों में टकराव घटता है (बेल्जियम गृहयुद्ध से बचा)। नैतिक: जनता का हक़ है कि शासन के बारे में उससे पूछा जाए।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि बेल्जियम में फ्रेंच भाषी बहुमत में हैं। वे सिर्फ़ ब्रसेल्स में बहुमत में हैं; पूरे देश में डच भाषी ज़्यादा हैं।
- सामुदायिक सरकार को राज्य सरकार समझना। इसे एक भाषा-समूह चुनता है और यह संस्कृति, शिक्षा, भाषा देखती है।
- संघ-राज्य-स्थानीय को क्षैतिज बँटवारा कहना। यह ऊर्ध्वाधर है; क्षैतिज अंगों के बीच होता है।
- यह सोचना कि सत्ता बाँटने से देश कमज़ोर होता है। बेल्जियम और भारत बताते हैं कि इससे देश ज़्यादा स्थिर होता है।