लोकतंत्र क्या है?
डेमोक्रेसी शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों से बना है: डेमोस (जनता) और क्रेटिया (शासन)। यानी लोकतंत्र = जनता का शासन।
लोकतंत्र में शासक जनता चुनती है। शासक को ताक़त इसलिए मिलती है क्योंकि जनता ने दी, न कि जन्म, पैसे या हथियार से।
एक मशहूर परिभाषा: जनता की, जनता द्वारा, जनता के लिए सरकार।
लोकतंत्र की विशेषताएँ
- अंतिम फ़ैसले चुने हुए लोग लें। अगर सेना प्रमुख या कोई विदेशी ताक़त फ़ैसले करे तो वह लोकतंत्र नहीं।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव। लोगों के पास असली विकल्प हो, और सत्ताधारी दल हार भी सकता हो।
- एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य। हर वयस्क नागरिक (भारत में 18+) का एक वोट, और हर वोट का वज़न बराबर।
- कानून का राज और अधिकार। सरकार संविधान के दायरे में काम करे। नागरिकों को बोलने की आज़ादी जैसे अधिकार हों और स्वतंत्र अदालतें उनकी रक्षा करें।
- जवाबदेही। सरकार जनता को जवाब दे और अगले चुनाव में बदली जा सके।
लोकतंत्र के प्रकार
प्रत्यक्ष लोकतंत्र
सारे नागरिक मिलकर खुद कानून बनाते हैं। यह छोटे समूहों में ही चलता है, जैसे गाँव की ग्राम सभा या स्विट्ज़रलैंड के कुछ कैंटन।
प्रतिनिधि (अप्रत्यक्ष) लोकतंत्र
नागरिक प्रतिनिधि चुनते हैं जो उनकी ओर से फ़ैसले करते हैं। भारत में 95 करोड़ से ज़्यादा मतदाता हैं, इसलिए यही व्यावहारिक तरीका है।
लोकतंत्र गणराज्य भी हो सकता है (राष्ट्र का मुखिया चुना जाता है, जैसे भारत के राष्ट्रपति) या संवैधानिक राजतंत्र (राजा केवल प्रतीक, असली शासन चुने हुए लोगों का, जैसे ब्रिटेन)।
भारत में लोकतंत्र की जड़ें
भारत के लिए लोकतांत्रिक विचार नए नहीं हैं।
- वैदिक काल: सभा और समिति में मामलों पर चर्चा होती थी।
- गण और संघ (लगभग 600 ई.पू.): वैशाली के लिच्छवि जैसे गणराज्य किसी एक राजा से नहीं, परिवार-प्रमुखों की सभा से चलते थे।
- ग्राम स्वशासन: तमिलनाडु के उत्तरमेरूर के शिलालेख (10वीं सदी) बताते हैं कि गाँव की समितियों के सदस्य पर्ची डालकर कैसे चुने जाते थे और उनकी योग्यता क्या होनी चाहिए।
- बौद्ध संघ: भिक्षु चर्चा करके और वोट से फ़ैसले करते थे।
- आधुनिक भारत: स्वतंत्रता आंदोलन ने स्वराज माँगा। संविधान (1950) ने एक साथ हर वयस्क को वोट का अधिकार दिया (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार), जबकि कई पुराने लोकतंत्रों को इसमें दशकों लगे।
संसदीय बनाम अध्यक्षात्मक प्रणाली
| संसदीय (भारत, ब्रिटेन, जापान, कनाडा) | अध्यक्षात्मक (अमेरिका, ब्राज़ील, मेक्सिको) | |
|---|---|---|
| सरकार कौन चलाता है? | प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद | राष्ट्रपति |
| कैसे चुना जाता है? | लोकसभा में बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है | जनता राष्ट्रपति को सीधे चुनती है (अमेरिका में निर्वाचक मंडल के ज़रिए) |
| विधायिका से संबंध | मंत्री संसद के सदस्य और उसके प्रति जवाबदेह | राष्ट्रपति विधायिका का सदस्य नहीं |
| हटाया जा सकता है? | हाँ, अविश्वास प्रस्ताव से | केवल गंभीर गलती पर महाभियोग से; तय कार्यकाल |
| राष्ट्र का मुखिया | अलग (भारत के राष्ट्रपति / ब्रिटेन के राजा) | राष्ट्रपति ही राष्ट्र और सरकार दोनों का मुखिया |
संसदीय की ताक़त: सरकार रोज़ संसद को जवाब देती है। अध्यक्षात्मक की ताक़त: तय कार्यकाल वाली स्थिर सरकार।
लोकतंत्र की चुनौतियाँ
- गरीबी: भूखा मतदाता पैसे या खाने के बदले वोट बेच सकता है।
- निरक्षरता और जागरूकता की कमी: मतदाता अपने अधिकार और नीतियाँ ठीक से न समझ पाएँ।
- भ्रष्टाचार और राजनीति में अपराधी: पैसा और बाहुबल चुनाव बिगाड़ते हैं।
- सामाजिक असमानता: जाति, धर्म और लिंग भेदभाव से कुछ लोग बराबरी से भाग नहीं ले पाते।
- फ़ेक न्यूज़: सोशल मीडिया के झूठे संदेश मतदाताओं को भटका सकते हैं।
उपाय: शिक्षा, स्वतंत्र संस्थाएँ, आज़ाद प्रेस, और जागरूक नागरिक जो वोट दें और सवाल पूछें।
घर पर करके देखें
रविवार को क्या पकेगा, इस पर परिवार में दो बार फ़ैसला करें। पहले सिर्फ़ सबसे बड़े सदस्य को तय करने दें। फिर हर किसी को एक पर्ची देकर वोट करवाएँ। सोचें: किस तरीके से ज़्यादा लोग खुश हुए? पूरे देश के लिए आप किस तरीके पर भरोसा करेंगे?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लोकतंत्र: जनता का शासन (डेमोस = जनता, क्रेटिया = शासन)।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: हर वयस्क नागरिक (भारत में 18+) को वोट का अधिकार।
- प्रत्यक्ष लोकतंत्र: नागरिक खुद फ़ैसला करें। प्रतिनिधि लोकतंत्र: नागरिक फ़ैसला करने वालों को चुनें।
- संसदीय प्रणाली: कार्यपालिका विधायिका से आती है और उसी के प्रति जवाबदेह।
- अध्यक्षात्मक प्रणाली: राष्ट्रपति तय कार्यकाल के लिए अलग से चुना जाता है।
- जवाबदेही: सत्ता में बैठे लोगों को जनता को जवाब देना होता है।
- गणराज्य: राष्ट्र का मुखिया चुना जाता है, जन्म से नहीं बनता।
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश में चुनाव होते हैं, पर सेना प्रमुख चुनी हुई सरकार का फ़ैसला पलट सकता है। क्या यह लोकतंत्र है?
नहीं। लोकतंत्र में अंतिम फ़ैसले जनता द्वारा चुने गए लोग लेते हैं। अगर सेना उन्हें पलट सके तो असली ताक़त जनता के पास नहीं है।
2. किसी देश में शहर के लोगों का वोट दोगुना गिना जाता है। कौन-सी विशेषता टूटी?
एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य। हर वोट का वज़न बराबर होना चाहिए, चाहे कोई भी डाले।
3. भारत प्रत्यक्ष नहीं, प्रतिनिधि लोकतंत्र क्यों है?
चरण 1: भारत में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं। चरण 2: वे सब हर कानून पर बहस के लिए मिल नहीं सकते। चरण 3: इसलिए वे लोकसभा के 543 सदस्य चुनते हैं जो उनकी ओर से बहस और फ़ैसला करते हैं।
4. लोकसभा सरकार के खिलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पास कर देती है। भारत में क्या होगा, और क्या अमेरिका में ऐसा होगा?
भारत (संसदीय) में प्रधानमंत्री और मंत्रियों को इस्तीफ़ा देना होगा, क्योंकि सदन का समर्थन खत्म हो गया। अमेरिका (अध्यक्षात्मक) में कांग्रेस इस तरह राष्ट्रपति को नहीं हटा सकती; सिर्फ़ गंभीर गलती पर महाभियोग से।
5. प्राचीन भारत में लोकतांत्रिक व्यवहार के दो उदाहरण दीजिए।
(1) वैशाली के लिच्छवि जैसे गणराज्य सभाओं से चलते थे। (2) उत्तरमेरूर के शिलालेख गाँव की समिति के सदस्य चुनने के नियम बताते हैं।
6. एक मतदाता ₹500 लेकर किसी उम्मीदवार को वोट देता है। यह कौन-सी चुनौती है और इसे कैसे कम करें?
यह गरीबी और भ्रष्टाचार दिखाता है। मतदाता जागरूकता, चुनाव आयोग की सख़्त कार्रवाई और बेहतर रोज़गार से इसे कम किया जा सकता है, ताकि वोट बिके नहीं।
आम गलतियाँ
- सोचना कि जहाँ भी चुनाव होते हैं वह लोकतंत्र है। चुनाव स्वतंत्र-निष्पक्ष हों और चुने हुए लोगों के पास असली ताक़त हो।
- भारत में राष्ट्र के मुखिया और सरकार के मुखिया को मिला देना। राष्ट्रपति राष्ट्र का मुखिया है; सरकार प्रधानमंत्री चलाते हैं।
- मानना कि भारत ने लोकतंत्र सिर्फ़ पश्चिम से सीखा। भारत में बहुत पहले सभाएँ, गणराज्य और ग्राम चुनाव थे।
- कहना कि अध्यक्षात्मक प्रणाली में संसद साधारण वोट से राष्ट्रपति को हटा सकती है। सिर्फ़ महाभियोग से, और वह भी कभी-कभार।