Poland Liceum ogólnokształcące, klasa III Civics (extended level)
अध्याय: 5
1. Civil society
Civil society and its organisations
- नागरिक सहभागिता: नागरिक कैसे भाग लेते हैं – नागरिक सहभागिता यानी अपने समुदाय और देश के जीवन में भाग लेना। यह एक सीढ़ी जैसी है: जानकारी रखें, वोट दें, समूहों से जुड़ें, स्वेच्छा से सेवा करें, फिर आयोजन और अभियान करें। नागरिक चुनाव में प्रतिनिधि चुनते हैं और जनमत संग्रह में एक प्रश्न का सीधा उत्तर देते हैं। वे राजनीतिक दलों (जो सरकार चलाना चाहते हैं), मज़दूर संघों (जो मज़दूरों की रक्षा करते हैं) और संगठनों या NGO (जो साझा उद्देश्य के लिए काम करते हैं) से जुड़ते हैं। चुनावों के बीच वे याचिका पर हस्ताक्षर करते हैं, सेवा करते हैं, स्थानीय झगड़ों में मध्यस्थता करते हैं और तथ्य जाँचकर ऑनलाइन अभियान चलाते हैं। व्हिसलब्लोअर छिपे ग़लत काम उजागर करते हैं, और स्वतंत्र प्रेस व जनमत उसे कार्रवाई में बदलते हैं। कोई सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करना ये सब कौशल सिखाता है: योजना, टीमवर्क और ज़िम्मेदारी।
2. Migration and demography in Poland and the world
Migration · Demography
- प्रवास (Migration) – प्रवास लोगों का एक जगह से दूसरी जगह कुछ समय या हमेशा के लिए रहने जाना है। छोड़ी गई जगह उद्गम है; पहुँचने की जगह गंतव्य। लोग प्रतिकर्ष कारकों (घर की समस्याएँ) और अपकर्ष कारकों (दूसरी जगह का आकर्षण) से जाते हैं, पर खर्च, दूरी और कानून जैसी बाधाएँ कुछ को रोकती हैं। प्रवास आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय, अस्थायी या स्थायी, स्वैच्छिक या बलात हो सकता है, और यह उद्गम व गंतव्य दोनों को बदलता है।
- जनांकिकीय परिवर्तन: जन्म, मृत्यु, प्रवास और वृद्धावस्था – जनांकिकी (demography) जनसंख्या का अध्ययन है। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है: परिवर्तन = (जन्म − मृत्यु) + (आप्रवासी − उत्प्रवासी)। दरें प्रति 1,000 लोग प्रति वर्ष दी जाती हैं। ज़्यादातर देश जनांकिकीय संक्रमण से गुज़रते हैं: पहले मृत्यु दर गिरती है, फिर जन्म दर, इसलिए बीच में वृद्धि तेज़ और अंत में धीमी होती है। जनसंख्या पिरामिड आयु और लिंग संरचना दिखाता है: चौड़ा आधार = युवा जनसंख्या, संकरा आधार और चौड़ा शिखर = वृद्ध होती जनसंख्या। वृद्धावस्था कम जन्म और लंबी उम्र से आती है। इससे वृद्ध निर्भरता अनुपात बढ़ता है और बुज़ुर्गों की देखभाल परिवार, समुदाय, नियोक्ता और राज्य (पेंशन, स्वास्थ्य सेवा, सुगम शहर) की साझा ज़िम्मेदारी बनती है। धक्का और खिंचाव कारकों से होने वाला प्रवास ज़्यादातर युवाओं को ले जाता है और दोनों जगहों की आयु संरचना बदलता है।
3. Politics and political culture
Political thought · Totalitarianism, fascism, populism · Democracy and political culture in Poland
- सर्वसत्तावाद (Totalitarianism) – सर्वसत्तावादी शासन एक-दलीय राज्य है जो जीवन के हर हिस्से — राजनीति, अर्थव्यवस्था, अख़बार, स्कूल और लोगों के विचार तक — को एक नेता, प्रचार और आतंक के सहारे नियंत्रित करना चाहता है। पहले विश्व युद्ध और 1929 की मंदी के बाद ऐसे शासन फ़ासीवादी इटली (1922), स्तालिन के सोवियत संघ (1920 के दशक का अंत) और नाज़ी जर्मनी (1933) में आए। उनके विचार अलग थे पर तरीक़े मिलते-जुलते, और उनका उदय दूसरे विश्व युद्ध की एक वजह बना।
- लोकतंत्र – लोकतंत्र का मतलब है जनता का शासन। लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपने शासक चुनते हैं, हर वयस्क का एक वोट होता है जिसका मूल्य बराबर है, और सरकार को कानून मानना और अधिकारों का सम्मान करना होता है। लोकतंत्र प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि हो सकता है। भारत में लोकतंत्र की जड़ें पुरानी हैं; आज यहाँ संसदीय प्रणाली है, जबकि अमेरिका में अध्यक्षात्मक। गरीबी, निरक्षरता, भ्रष्टाचार और असमानता इसकी मुख्य चुनौतियाँ हैं।
- लोकतंत्र के परिणाम – लोकतंत्र को उसके नतीजों से परखते हैं। यह जवाबदेह, उत्तरदायी और वैध सरकार देता है और गरिमा व आज़ादी की रक्षा में सबसे अच्छा है। आर्थिक वृद्धि में यह तानाशाही जितना ही है। असमानता और गरीबी घटाने में इसने काफ़ी नहीं किया। जब बहुमत और अल्पमत बदलते रहें, तो यह सामाजिक मतभेद अच्छे से सँभालता है।
4. Social communication
Media, propaganda and free speech
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
5. Law
Legal systems and human rights
- कानून के स्रोत: हमारे नियम कहाँ से आते हैं – कानून का स्रोत वह है जहाँ से कोई कानूनी नियम आता है और बल पाता है। आज मुख्य स्रोत हैं: विधान (संसद के अधिनियम, जो विधेयक के तय चरण पार करके बनते हैं), प्रत्यायोजित या अधीनस्थ विधान (मूल अधिनियम की शक्ति से बने नियम और उपनियम), और न्यायिक पूर्व-निर्णय (ऊँची अदालतों के पुराने फ़ैसले जो निचली अदालतों पर बाध्यकारी हैं)। अन्य स्रोत हैं रीति-रिवाज, धार्मिक मानदंड (कुछ क्षेत्रों और देशों में), सामूहिक समझौते जैसे मानक अनुबंध, अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और मार्गदर्शक के रूप में विधि-विद्वानों के लेख। अधिनियम लागू करने के लिए जज व्याख्या के नियम अपनाते हैं। सिविल-लॉ देश मुख्यतः लिखित संहिताओं पर चलते हैं; भारत और ब्रिटेन जैसे कॉमन-लॉ देशों में पूर्व-निर्णय की बड़ी भूमिका है।