चुनाव क्यों ज़रूरी हैं
लोकतंत्र में जनता राज करती है, पर करोड़ों लोग एक साथ बैठकर शासन नहीं चला सकते। इसलिए वे प्रतिनिधि चुनते हैं।
- चुनाव से लोग चुनते हैं कि कानून कौन बनाए और सरकार कौन बनाए।
- लोग सरकार के काम को परखते हैं और बिना हिंसा के उसे बदल सकते हैं।
- चुनाव सरकार को वैधता देते हैं: लोग उसकी सत्ता मानते हैं क्योंकि उन्होंने उसे चुना।
चुनाव लोकतांत्रिक तभी है जब सबका एक वोट हो, असली विकल्प हों, चुनाव नियमित हों, जनता की पसंद से विजेता तय हो, और चुनाव स्वतंत्र-निष्पक्ष हों।
चुनाव प्रणालियाँ
सर्वाधिक मत से जीत (FPTP)
हर निर्वाचन क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है। जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें वह जीतता है, चाहे 50% न मिले हों। लोकसभा और विधानसभाओं में यही प्रणाली है। यह सरल है और हर इलाके का अपना प्रतिनिधि होता है, पर कोई दल कम वोट-हिस्से से भी बहुत सीटें जीत सकता है।
आनुपातिक प्रतिनिधित्व
सीटें वोटों के अनुपात में मिलती हैं। किसी दल को 30% वोट मिलें तो लगभग 30% सीटें। नीदरलैंड और इज़राइल जैसे देश सूची वाली आनुपातिक प्रणाली अपनाते हैं। भारत में राज्यसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में इसका खास रूप (एकल संक्रमणीय मत) है।
हल किया हुआ उदाहरण
एक इलाके में वोट: A 40%, B 35%, C 25%। FPTP: अकेली सीट A जीतता है। 10 सीटों वाली आनुपातिक प्रणाली: लगभग A 4, B 3-4, C 2-3।
परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्र
निर्वाचन क्षेत्र वह इलाका है जिसके मतदाता एक प्रतिनिधि चुनते हैं। लोकसभा के 543 निर्वाचन क्षेत्र हैं।
परिसीमन यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ ऐसे खींचना कि हर एक की आबादी लगभग बराबर हो। यह काम स्वतंत्र परिसीमन आयोग करता है, और इसके आदेश को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
कुछ क्षेत्र अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं, ताकि इन्हें उचित आवाज़ मिले। आरक्षित सीट पर सिर्फ़ SC/ST उम्मीदवार लड़ते हैं, पर वोट सभी देते हैं। 2023 के एक कानून में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है, जो अगले परिसीमन के बाद लागू होगा।
भारत निर्वाचन आयोग
भारत निर्वाचन आयोग संविधान (अनुच्छेद 324) से बना है। इसके प्रमुख मुख्य चुनाव आयुक्त होते हैं, साथ में अन्य आयुक्त। यह स्वतंत्र है: सत्ताधारी दल इसे आदेश नहीं दे सकता।
- मतदाता सूची बनाता और अपडेट करता है, मतदाता पहचान पत्र (EPIC) देता है।
- चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है: नामांकन, मतदान और गिनती की तारीखें।
- आदर्श आचार संहिता लागू करता है: जैसे तारीखें घोषित होने के बाद नई सरकारी योजना नहीं, सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग नहीं।
- नामांकन पत्र और उम्मीदवारों के खर्च की सीमा जाँचता है।
- EVM और VVPAT से मतदान कराता है, चुनाव ड्यूटी वाले अधिकारियों पर नियंत्रण रखता है, और दोबारा मतदान का आदेश दे सकता है।
- वोट गिनकर परिणाम घोषित करता है; दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न भी देता है।
मतदाता सूची और मतदान की प्रक्रिया
मतदाता सूची किसी निर्वाचन क्षेत्र के उन लोगों की सरकारी सूची है जो वोट दे सकते हैं। तय तारीख पर 18 साल का हर नागरिक नाम जुड़वाने का आवेदन कर सकता है। सूची नियमित रूप से सुधारी जाती है: नए मतदाता जोड़े जाते हैं, मृत या दूसरी जगह गए लोगों के नाम हटाए जाते हैं।
प्रक्रिया: सूची तैयार → कार्यक्रम घोषित → उम्मीदवार नामांकन भरते हैं → प्रचार (मतदान से 48 घंटे पहले रुकता है) → मतदान का दिन (उँगली पर स्याही, EVM पर वोट, VVPAT पर्ची दिखती है) → गिनती → परिणाम।
दलीय व्यवस्था, गठबंधन और दल-बदल विरोधी कानून
दलीय व्यवस्था
भारत में बहुदलीय व्यवस्था है: कई राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय दल होड़ करते हैं। निर्वाचन आयोग वोट और सीटों के आधार पर दलों को राष्ट्रीय या राज्य दल की मान्यता देता है।
गठबंधन
सरकार बनाने के लिए बहुमत (आधे से ज़्यादा सीटें, लोकसभा में 543 में से 272) चाहिए। अगर किसी दल के पास यह न हो, तो कई दल मिलकर गठबंधन बनाते हैं और साझा कार्यक्रम के साथ सत्ता बाँटते हैं।
दल-बदल विरोधी कानून
1985 में संविधान में जोड़ा गया (दसवीं अनुसूची)। जो चुना हुआ सदस्य अपनी मर्ज़ी से दल छोड़े या दल के निर्देश (व्हिप) के खिलाफ़ वोट दे, उसे अध्यक्ष (स्पीकर) अयोग्य ठहरा सकते हैं। इससे पैसे या पद के लिए पाला बदलना रुकता है। अपवाद: दल के दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरे दल में विलय को मानें।
घर पर करके देखें
परिवार या दोस्तों में 10 लोगों से तीन नाश्तों में से एक के लिए वोट करवाएँ। पहले सर्वाधिक मत से विजेता चुनें, फिर 10 'प्लेटें' आनुपातिक तरीके से बाँटें। क्या सर्वाधिक मत में छोटी पसंद को कुछ मिला? अगर आप 17 साल के हैं, तो अगले साल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का तरीका पता करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निर्वाचन क्षेत्र: वह इलाका जो एक प्रतिनिधि चुनता है।
- परिसीमन: निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ तय करना ताकि आबादी लगभग बराबर हो।
- मतदाता सूची: वोट देने वालों की सरकारी सूची।
- सर्वाधिक मत प्रणाली: सबसे ज़्यादा वोट वाला सीट जीते (लोकसभा, विधानसभा)।
- आनुपातिक प्रतिनिधित्व: सीटें ≈ वोट का हिस्सा (राज्यसभा, राष्ट्रपति, खास रूप में)।
- लोकसभा में बहुमत: 543 में से 272 सीटें।
- दल-बदल विरोधी कानून: दल छोड़ने या व्हिप तोड़ने पर सीट जा सकती है (दसवीं अनुसूची, 1985)।
- आदर्श आचार संहिता: चुनाव के दौरान दलों और सरकार के लिए नियम।
हल किए गए उदाहरण
1. एक क्षेत्र में वोट: A 42,000, B 38,000, C 20,000। सर्वाधिक मत प्रणाली में कौन जीतेगा और उसे कितना हिस्सा मिला?
कुल = 1,00,000। सबसे ज़्यादा वोट A के, इसलिए A जीता। हिस्सा = 42,000 ÷ 1,00,000 = 42%। A बिना आधे वोटों के जीत गया।
2. इन्हीं हिस्सों (42%, 38%, 20%) पर आनुपातिक प्रणाली में 10 सीटें कैसे बँटेंगी?
10 का 42% = 4.2 → 4; 10 का 38% = 3.8 → 4; 10 का 20% = 2। यानी A 4, B 4, C 2।
3. क्षेत्र X में 30 लाख और Y में 10 लाख लोग हैं, दोनों एक-एक सांसद चुनते हैं। क्या गलत है और कौन ठीक करेगा?
Y का एक वोट X के वोट से तीन गुना भारी है। परिसीमन आयोग सीमाएँ दोबारा खींचेगा ताकि दोनों की आबादी लगभग बराबर हो।
4. लोकसभा में 543 सीटें हैं। दल P ने 240, Q ने 30, R ने 15 जीतीं। क्या P अकेले सरकार बना सकता है?
बहुमत = 272। P के पास सिर्फ़ 240 हैं, अकेले नहीं। Q के साथ 270, फिर भी कम; Q और R के साथ 285, जो 272 से ज़्यादा है। तो P, Q, R गठबंधन बना सकते हैं।
5. चुनाव घोषित होने के बाद एक मंत्री नई सड़क योजना शुरू करता है। निर्वाचन आयोग क्या करेगा?
यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है, जो घोषणा के बाद नई योजनाओं पर रोक लगाती है। आयोग घोषणा रोक सकता है और कार्रवाई कर सकता है।
6. दल A के टिकट पर जीता विधायक विश्वास मत में A के व्हिप के खिलाफ़ वोट देता है। क्या हो सकता है?
दल-बदल विरोधी कानून के तहत अध्यक्ष उसे अयोग्य ठहरा सकते हैं और उसकी सीट चली जाएगी।
आम गलतियाँ
- सोचना कि सर्वाधिक मत प्रणाली में विजेता को 50% से ज़्यादा वोट चाहिए। बस सबसे ज़्यादा वोट चाहिए।
- सोचना कि सरकार चुनाव कराती है। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग कराता है।
- सोचना कि आरक्षित क्षेत्र में सिर्फ़ SC/ST लोग वोट देते हैं। वोट सब देते हैं; सिर्फ़ उम्मीदवार SC/ST होते हैं।
- परिसीमन (सीमाएँ खींचना) और मतदाता सूची (वोटरों की सूची) को एक समझना।