South 고등학교 3학년 Politics and Law
अध्याय: 6
1. Democracy and the constitution
Politics and ideals of law · The constitution · Basic rights
- क़ानून का शासन (Rule of Law) – क़ानून के शासन (विधि का शासन) का अर्थ है कि सरकार और उसके नेता समेत हर व्यक्ति एक-से, पहले से ज्ञात क़ानून माने, जिन्हें निष्पक्ष और स्वतंत्र अदालतें बराबरी से लागू करें। मुख्य सिद्धांत हैं: क़ानून की सर्वोच्चता, क़ानून के सामने समानता, साफ़ और सार्वजनिक क़ानून, निष्पक्ष सुनवाई, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों का पृथक्करण। क़ानून खुली प्रक्रिया से बनते-बदलते हैं, अदालतें उन्हें संविधान या अधिकार-पत्र पर परख सकती हैं, और देश संधियों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून मानते हैं।
- संविधान: क्यों और कैसे? – संविधान किसी देश की बुनियादी नियम-पुस्तिका है। यह भरोसा बनाता है, बताता है कि शक्ति किसके पास है, उस शक्ति पर सीमा लगाता है और लोगों की आकांक्षाएँ बताता है। भारत का संविधान 1946 से 1949 तक संविधान सभा ने खुली बहस से लिखा और दूसरे संविधानों से अच्छे विचार लेकर उन्हें भारत के अनुसार ढाला।
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
2. Democratic government
Forms of government · Three branches · Local government
- शासन प्रणालियाँ: सरकार के अंग, नियंत्रण और संतुलन – हर आधुनिक राज्य सत्ता को तीन अंगों में बाँटता है: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका लागू करती है, न्यायपालिका व्याख्या करती है। नियंत्रण और संतुलन से हर अंग दूसरे को सीमित कर सकता है। लोकतंत्र विधायिका और कार्यपालिका को अलग तरह से जोड़ते हैं। संसदीय प्रणाली में सरकार संसद से बनती है और उसके विश्वास पर टिकी रहती है (भारत, ब्रिटेन, जर्मनी)। अध्यक्षीय प्रणाली में जनता राष्ट्रपति और विधायिका को अलग-अलग तय अवधि के लिए चुनती है (अमेरिका, ब्राज़ील)। अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली में चुने हुए राष्ट्रपति और संसद के प्रति ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री में सत्ता बँटी है (फ़्रांस)। राजतंत्र और स्विट्ज़रलैंड की समिति प्रणाली दूसरे रूप हैं।
- स्थानीय शासन – स्थानीय शासन लोकतंत्र को गाँव और शहर के स्तर तक लाता है, जहाँ लोग अपनी समस्याएँ सबसे अच्छी तरह जानते हैं। भारत में स्थानीय निकाय 1882 से थे, पर दशकों तक कमज़ोर रहे। 1992 के 73वें (ग्रामीण) और 74वें (शहरी) संशोधनों ने पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा, नियमित चुनाव, महिलाओं, SC और ST के लिए आरक्षण, और विषयों की सूची व धन दिया।
3. Political process and participation
Political process · Elections · Parties, interest groups, media
- नागरिक सहभागिता: नागरिक कैसे भाग लेते हैं – नागरिक सहभागिता यानी अपने समुदाय और देश के जीवन में भाग लेना। यह एक सीढ़ी जैसी है: जानकारी रखें, वोट दें, समूहों से जुड़ें, स्वेच्छा से सेवा करें, फिर आयोजन और अभियान करें। नागरिक चुनाव में प्रतिनिधि चुनते हैं और जनमत संग्रह में एक प्रश्न का सीधा उत्तर देते हैं। वे राजनीतिक दलों (जो सरकार चलाना चाहते हैं), मज़दूर संघों (जो मज़दूरों की रक्षा करते हैं) और संगठनों या NGO (जो साझा उद्देश्य के लिए काम करते हैं) से जुड़ते हैं। चुनावों के बीच वे याचिका पर हस्ताक्षर करते हैं, सेवा करते हैं, स्थानीय झगड़ों में मध्यस्थता करते हैं और तथ्य जाँचकर ऑनलाइन अभियान चलाते हैं। व्हिसलब्लोअर छिपे ग़लत काम उजागर करते हैं, और स्वतंत्र प्रेस व जनमत उसे कार्रवाई में बदलते हैं। कोई सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करना ये सब कौशल सिखाता है: योजना, टीमवर्क और ज़िम्मेदारी।
- भारत में चुनाव – चुनाव से करोड़ों लोग प्रतिनिधि चुनते हैं और शांति से सरकार बदल सकते हैं। लोकसभा और विधानसभाओं के लिए भारत में सर्वाधिक मत से जीत (FPTP) प्रणाली है, और राज्यसभा व राष्ट्रपति के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व का एक रूप। परिसीमन से निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी लगभग बराबर रखी जाती है। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग मतदाता सूची बनाता है और चुनाव कराता है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है, गठबंधन सरकारें आम हैं, और दल-बदल विरोधी कानून चुने हुए सदस्यों को पाला बदलने से रोकता है।
- राजनीतिक दल – राजनीतिक दल ऐसे लोगों का समूह है जो चुनाव लड़ने और सत्ता पाने के लिए साथ आते हैं। दल सात मुख्य काम करते हैं, चुनाव लड़ने से लेकर लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तक। भारत में राष्ट्रीय और राज्य दलों वाली बहुदलीय व्यवस्था है। दलों के सामने अंदरूनी लोकतंत्र की कमी, धनबल जैसी चुनौतियाँ हैं और कुछ सुधार हुए हैं।
4. Private life and law
Civil law · Contracts and torts · Family law
- दीवानी (सिविल) कानून: लोगों के बीच अधिकार और कर्तव्य – दीवानी (सिविल) कानून, जिसे निजी कानून भी कहते हैं, आम व्यक्तियों के आपसी रिश्तों का कानून है: लोग, कंपनियाँ, और कभी-कभी सरकार जब वह आम पक्ष की तरह सौदा करती है। इसमें आता है: अधिकार किसके हो सकते हैं (व्यक्ति और उनकी क्षमता), वस्तुएँ और संपत्ति, दायित्व (अनुबंध से या नुकसान पहुँचाने से बने कर्तव्य), परिवार और उत्तराधिकार। जब कोई दीवानी कर्तव्य तोड़ता है, तो मकसद सज़ा नहीं, भरपाई है: पीड़ित अदालत से मुआवज़ा (वास्तविक नुकसान और खोया लाभ), अपनी चीज़ वापस, या गलत काम रोकने का आदेश माँग सकता है। अपकृत्य (टॉर्ट) अनुबंध के बाहर का दीवानी गलत काम है, जैसे लापरवाही से चोट या नुकसान। आम तौर पर गलती करने वाला भरता है; छोटे बच्चों की जगह माता-पिता या अभिभावक ज़िम्मेदार होते हैं। दावा तय समय (परिसीमा अवधि) के अंदर करना होता है। कई देश ये नियम एक सिविल संहिता में लिखते हैं; कुछ अदालती फ़ैसलों से बनाते हैं; मूल विचार एक जैसे हैं।
- पारिवारिक क़ानून: विवाह, माता-पिता और बच्चे – पारिवारिक क़ानून दीवानी (निजी) क़ानून का हिस्सा है जो विवाह, पति-पत्नी के संबंध, माता-पिता और बच्चे, तलाक़, भरण-पोषण, संरक्षकता और गोद लेने से जुड़ा है। ज़्यादातर देशों में वैध विवाह के लिए दो वयस्क चाहिए जो अपनी मर्ज़ी से सहमत हों, पहले से विवाहित न हों, नज़दीकी रिश्तेदार न हों, और विवाह पंजीकृत हो। पति-पत्नी के अधिकार और कर्तव्य बराबर हैं। माता-पिता बच्चे की देखभाल, भरण-पोषण और पढ़ाई करते हैं, और बच्चे से जुड़ा हर फ़ैसला 'बच्चे के सर्वोत्तम हित' से होता है। बिना माता-पिता की देखभाल वाले बच्चों को संरक्षकता, पालक देखभाल और गोद लेने से सुरक्षा मिलती है।
5. Social life and law
Criminal law · Criminal procedure and rights · Workers' rights
- आपराधिक कानून (Criminal Law): अपराध और बचाव – आपराधिक कानून बताता है कि राज्य किन कामों को अपराध मानता है और उनकी सज़ा क्या है। ज़्यादातर अपराधों के दो हिस्से होते हैं: दोषी कार्य (actus reus) और दोषी मन (mens rea)। अपराध व्यक्ति के विरुद्ध (घातक जैसे हत्या; गैर-घातक जैसे हमला) या संपत्ति के विरुद्ध (चोरी, लूट, सेंधमारी, धोखाधड़ी, संपत्ति को नुकसान) हो सकते हैं। अपराध करने की कोशिश (प्रयास) भी अपराध है। आत्मरक्षा, दबाव, पागलपन या आपराधिक ज़िम्मेदारी की उम्र से कम होना जैसे बचाव दोष हटा या घटा सकते हैं। अभियुक्त निर्दोष माना जाता है; अभियोजन को उचित संदेह से परे दोष साबित करना होता है।
- रोज़गार क़ानून: किसी के लिए काम करने के नियम – रोज़गार क़ानून (श्रम क़ानून) नियोक्ता और कर्मचारी के रिश्ते के नियम हैं। रोज़गार अनुबंध तब बनता है जब कोई व्यक्ति वेतन के बदले, नियोक्ता के निर्देश में (अधीनता) काम करता है। अनुबंध स्थायी, निश्चित अवधि, एजेंसी के ज़रिए अस्थायी, अंशकालिक या दूरस्थ हो सकता है; सिविल या फ़्रीलांस अनुबंध नौकरी नहीं है। कर्मचारी के अधिकार हैं (कम से कम न्यूनतम वेतन, सीमित घंटे, आराम और सवेतन छुट्टी, सुरक्षित कार्यस्थल, बराबर व्यवहार, उत्पीड़न से मुक्ति) और कर्तव्य हैं (सावधान काम, वैध निर्देश मानना, वफ़ादारी, सुरक्षा नियम)। नियोक्ता क़ानून के भीतर काम व्यवस्थित कर सकता है और अनुशासन दे सकता है। सकल वेतन कर और सामाजिक बीमा से पहले का है, शुद्ध बाद का; नियोक्ता की कुल लागत ज़्यादा होती है। ट्रेड यूनियन सामूहिक समझौते करती हैं। अनुबंध इस्तीफ़े, वैध कारण और निष्पक्ष प्रक्रिया वाली बर्ख़ास्तगी, आपसी सहमति या अवधि ख़त्म होने से समाप्त होता है।
6. International relations and the peninsula
Changing international relations · International problems · Korea's international relations
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।