अंतरराष्ट्रीय संबंध क्या है?
अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) यह पढ़ाई है कि देश और दूसरे कर्ता आपस में कैसे व्यवहार करते हैं: युद्ध और शांति, व्यापार, क़ानून, पर्यावरण और मानवाधिकार।
- राज्य: वह देश जिसके पास जनता, भू-भाग, सरकार और संप्रभुता (अपने मामलों पर अंतिम अधिकार) हो।
- यूरोप में 1648 की शांति संधियों के बाद यह विचार फैला कि राज्य बराबर हैं और एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में दख़ल न दें। 1945 के बाद कई उपनिवेश स्वतंत्र राज्य बनकर इस व्यवस्था में जुड़े।
- कोई विश्व सरकार नहीं है। IR में इसे अराजकता कहते हैं: गड़बड़ी नहीं, बस राज्यों के ऊपर कोई शासक नहीं।
- ग़ैर-राज्य कर्ता भी मायने रखते हैं: संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, स्वयंसेवी संस्थाएँ (NGO) और आतंकी गुट भी।
राष्ट्रीय हित और विदेश नीति
राष्ट्रीय हित = राज्य क्या चाहता है: सुरक्षा, आर्थिक विकास, ऊर्जा, विदेश में नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान। विदेश नीति उसे पाने की योजना है। साधन:
- कूटनीति: राजदूतों, शिखर सम्मेलनों और दूतावासों से बातचीत।
- आर्थिक साधन: व्यापार समझौते, निवेश, सहायता और प्रतिबंध (दबाव के लिए व्यापार सीमित करना)।
- गठबंधन: एक-दूसरे की रक्षा का वादा।
- सॉफ़्ट पावर: संस्कृति, फ़िल्मों, शिक्षा, योग या खेल से आकर्षण।
- सैन्य बल: आख़िरी और सबसे महँगा साधन।
देश की अंदरूनी राजनीति भी विदेश नीति बनाती है: चुनाव, अर्थव्यवस्था और जनमत।
संघर्ष क्यों होते हैं
- संसाधन: पानी, तेल, गैस, खेती की ज़मीन, खनिज।
- भू-भाग: विवादित ज़मीन या समुद्री क्षेत्र।
- शक्ति और सुरक्षा: सुरक्षा दुविधा: जब एक राज्य सुरक्षित होने के लिए हथियार बढ़ाता है, पड़ोसी कम सुरक्षित महसूस कर वह भी हथियार बढ़ाता है, और दोनों कम सुरक्षित हो जाते हैं (हथियारों की होड़)।
- पहचान: जातीय, धार्मिक या राष्ट्रीय भेद, अक्सर एक ही देश के अंदर (गृहयुद्ध), जिसमें बाहरी देश भी खिंच आते हैं।
- विचार और नेता: विचारधाराएँ, ग़लतफ़हमी और ग़लतियाँ।
आज की समस्याएँ सीमाएँ पार करती हैं: जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद, शरणार्थी और साइबर हमले। कोई राज्य अकेले इन्हें हल नहीं कर सकता।
राज्य सहयोग कैसे करते हैं
राज्य तब सहयोग करते हैं जब सबको खोने से ज़्यादा मिले।
- संधियाँ: लिखित समझौते, जैसे व्यापार, हथियार नियंत्रण, नदी या जलवायु पर (2015 का पेरिस समझौता)।
- अंतरराष्ट्रीय क़ानून: राज्यों द्वारा माने गए नियम, जैसे समुद्री क़ानून और मानवाधिकार क़ानून। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जैसी अदालतें कुछ विवाद सुलझाती हैं।
- अंतरराष्ट्रीय संगठन: शांति और विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र (193 सदस्य देश); व्यापार नियमों के लिए विश्व व्यापार संगठन; स्वास्थ्य के लिए WHO।
- क्षेत्रीय संगठन: यूरोपीय संघ (साझा बाज़ार और कुछ साझा क़ानून), अफ़्रीकी संघ, आसियान, सार्क।
परस्पर निर्भरता: जब देश आपस में बहुत व्यापार करते हैं तो युद्ध दोनों के लिए महँगा हो जाता है, जो शांति को बढ़ावा दे सकता है।
सिद्धांत: यथार्थवाद और उदारवाद
| यथार्थवाद | उदारवाद | |
|---|---|---|
| मुख्य कर्ता | राज्य | राज्य के साथ संगठन, कंपनियाँ, लोग |
| मुख्य लक्ष्य | शक्ति और अस्तित्व | समृद्धि, कल्याण, सहयोग |
| शांति कैसे | शक्ति संतुलन, गठबंधन, निवारण | व्यापार, क़ानून, संस्थाएँ, लोकतंत्र |
| दुनिया की छवि | प्रतिस्पर्धी | सहयोगी बन सकती है |
एक और नज़रिया: रचनावाद कहता है कि साझा विचार और पहचान तय करते हैं कि राज्य कैसे व्यवहार करें।
बदलती विश्व व्यवस्था और शांति
1945 के बाद दुनिया द्विध्रुवीय थी (शीत युद्ध में दो महाशक्तियाँ)। 1991 के बाद एक महाशक्ति आगे रही (एकध्रुवीय)। आज शक्ति कई केंद्रों में बँटी है, जैसे अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, भारत और अन्य: बहुध्रुवीय दुनिया।
संघर्ष सुलझाने के तरीक़े: वार्ता (सीधी बातचीत), मध्यस्थता (तटस्थ सहायक), पंचाट या अदालत, प्रतिबंध, और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (भारत सबसे ज़्यादा शांति सैनिक भेजने वालों में है)। स्थायी शांति के लिए न्याय, विकास और मेल-मिलाप भी ज़रूरी है। विश्व नागरिक के रूप में हम दूसरों को समझ सकते हैं, नफ़रत ठुकरा सकते हैं और न्यायपूर्ण हल का साथ दे सकते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राज्य = जनता + भू-भाग + सरकार + संप्रभुता
- अराजकता (IR) = राज्यों के ऊपर कोई विश्व सरकार नहीं
- सुरक्षा दुविधा: A हथियार बढ़ाए → B असुरक्षित → B हथियार बढ़ाए → दोनों कम सुरक्षित
- विदेश नीति के साधन: कूटनीति, आर्थिक साधन, गठबंधन, सॉफ़्ट पावर, बल
- यथार्थवाद = शक्ति और सुरक्षा; उदारवाद = सहयोग और संस्थाएँ
- द्विध्रुवीय → एकध्रुवीय → बहुध्रुवीय
हल किए गए उदाहरण
1. दो पड़ोसी देश एक नदी साझा करते हैं। ऊपर वाला देश बड़ा बाँध बनाना चाहता है। संघर्ष या सहयोग कैसे हो सकता है?
संघर्ष: नीचे वाला देश पानी घटने से डरता है (संसाधन टकराव), विरोध करता है और सेना बढ़ा सकता है; अविश्वास बढ़ता है। सहयोग: दोनों पानी बँटवारे की संधि करते हैं, आँकड़े साझा करने के लिए संयुक्त आयोग बनाते हैं, और ऊपर वाला देश बाँध की बिजली नीचे वाले को बेचता है। दोनों को फ़ायदा।
2. देश X सुरक्षित महसूस करने के लिए सेना बढ़ाता है। समझाइए कि इससे X कम सुरक्षित क्यों हो सकता है।
पड़ोसी Y को X के इरादों पर भरोसा नहीं होता, इसलिए Y भी सेना बढ़ाता है। अब X के सामने ज़्यादा ताक़तवर Y है। दोनों ज़्यादा ख़र्च करते हैं और दोनों ख़तरा महसूस करते हैं: सुरक्षा दुविधा।
3. दो व्यापारिक साझेदारों के बीच शांति को यथार्थवादी और उदारवादी कैसे समझाएँगे?
यथार्थवादी: शांति इसलिए है कि कोई भी आसानी से जीतने लायक़ ताक़तवर नहीं (शक्ति संतुलन) या उनका साझा दुश्मन है। उदारवादी: शांति इसलिए है कि व्यापार युद्ध को महँगा बनाता है, और साझा संस्थाएँ व क़ानून विवाद शांति से सुलझाने देते हैं।
4. एक गृहयुद्ध से दस लाख शरणार्थी पड़ोसी देशों में जाते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मुद्दा क्यों बन जाता है?
पड़ोसियों को शरणार्थियों को रहने और खाने की व्यवस्था करनी पड़ती है, बजट पर बोझ पड़ता है और तनाव हो सकता है। हथियारबंद गुट भी पार आ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी, दानदाता और क्षेत्रीय संगठन जुड़ते हैं, इसलिए अंदरूनी संघर्ष अंतरराष्ट्रीय बन जाता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि IR में "अराजकता" का मतलब गड़बड़ी है। इसका मतलब सिर्फ़ इतना है कि कोई विश्व सरकार नहीं।
- यह सोचना कि संयुक्त राष्ट्र विश्व सरकार है। वह देशों के लिए क़ानून नहीं बना सकता; सदस्यों की सहमति पर निर्भर है।
- यह सोचना कि विदेश नीति सिर्फ़ युद्ध के बारे में है। ज़्यादातर यह कूटनीति, व्यापार और सहयोग है।
- यह सोचना कि यथार्थवाद और उदारवाद देश की अंदरूनी दलगत राजनीति हैं। ये अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के सिद्धांत हैं।