Netherlands HAVO 5 (eindexamenjaar) Social Sciences
अध्याय: 3
1. Relations
Social inequality · Power and authority · Conflict and cooperation · Social ladder in the Netherlands · Developments and policy on inequality
- सामाजिक विषमता और बहिष्कार के स्वरूप – सामाजिक विषमता का मतलब है कि कुछ समूहों को पैसा, सम्मान और पहचान ज़्यादा मिलती है, और कुछ को कम। यह योग्यता से नहीं, जन्म वाले समूह से तय होता है। सामाजिक बहिष्कार का मतलब है लोगों को समाज के पूरे जीवन से बाहर रखना। इस पाठ में जाति और अस्पृश्यता, जनजाति और आदिवासी संघर्ष, अन्य पिछड़ा वर्ग, स्त्रियों की समानता की लड़ाई और दिव्यांगों के अधिकार आसान शब्दों में समझेंगे।
- सत्ता: उचित शक्ति कहाँ से आती है? – शक्ति दूसरों से काम करवाने की क्षमता है; सत्ता वह शक्ति है जिसे लोग उचित (वैध) मानते हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र और शुक्रनीति जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों ने कहा कि शासक दंड (उचित सज़ा), न्याय और बल (रक्षा की ताक़त) से सत्ता बनाए रखता है। आज भारत में सत्ता संविधान से आती है, जो न्याय और सुरक्षा का वादा करता है और हर पद की सीमा तय करता है। नागरिक चुनाव से संस्थाओं को सत्ता देते हैं, और संस्थाएँ उन्हें जवाब देती हैं। सत्ता पारंपरिक, करिश्माई या कानूनी-तार्किक हो सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
2. Binding
Social cohesion and control · Political institutions and representation · (In)security and crime · Crime policy and party views
- सामाजिक बंधन: लोग आपस में कैसे जुड़ते हैं – सामाजिक बंधन वह रिश्ता है जो एक व्यक्ति को दूसरों से जोड़ता है और उसे सहारा और अपनापन देता है। हमारे बंधन परिवार, दोस्ती, काम और साझा नागरिकता के होते हैं। दुर्खीम ने दो तरह की एकजुटता बताई: यांत्रिक (लोग एक जैसे हों, जैसे छोटे गाँव में) और सावयवी (लोग अलग-अलग हों पर एक-दूसरे पर निर्भर हों, जैसे बड़े शहर में)। आज के जीवन में वैयक्तिकरण (रिश्ते चुनने की ज़्यादा आज़ादी) और डिजिटल रिश्ते (चौड़े पर अक्सर हल्के) बढ़े हैं। नौकरी जाना, गरीबी, भेदभाव, दूर जाना या झगड़े से रिश्ते टूटते हैं। स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, सामाजिक सुरक्षा और भेदभाव के विरुद्ध लड़ाई समाज को जोड़े रखती है।
- राजनीतिक संस्थाएँ: संसदीय, अध्यक्षीय और अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली – हर लोकतंत्र में सत्ता तीन हिस्सों में बँटी होती है: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका सरकार चलाती है और न्यायपालिका विवाद सुलझाती है। देशों में फ़र्क़ इस बात का है कि सरकार का मुखिया कैसे चुना और हटाया जाता है। संसदीय प्रणाली में लोग संसद चुनते हैं और प्रधानमंत्री को संसद का भरोसा चाहिए, इसलिए संसद उसे हटा सकती है। अध्यक्षीय प्रणाली में लोग राष्ट्रपति और संसद को अलग-अलग चुनते हैं; राष्ट्रपति का कार्यकाल तय होता है और उसे सिर्फ़ महाभियोग से हटाया जा सकता है। अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली दोनों का मेल है। कार्यकाल सीमा किसी एक व्यक्ति को बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहने से रोकती है। स्वतंत्र विधायिका क़ानून, बजट, प्रश्न और समितियों से सरकार पर नज़र रखती है।
- अपराध और दंड: अपराध क्यों होते हैं और समाज क्या करता है – अपराध क़ानून के ख़िलाफ़ काम है। इरादा अच्छा या बुरा हो सकता है और यह फ़ैसले पर असर डालता है। अपराध के कारणों में ग़रीबी, परवरिश, नशा, मानसिक बीमारी, लालच, नफ़रत और अन्यायी क़ानून का विरोध हैं; घृणा अपराध पहचान के कारण निशाना बनाता है और हत्या सबसे गंभीर अपराध है। सज़ा के उद्देश्य: प्रतिशोध, निवारण, सुधार, सुरक्षा और क्षतिपूर्ति। सज़ाओं में जेल, सामुदायिक सेवा और शारीरिक दंड आते हैं; अधिकतर धर्म अपराधी से भी गरिमापूर्ण व्यवहार चाहते हैं। क्षमा बदला छोड़ती है पर न्याय नहीं हटाती। मृत्युदंड पर बहस है: समर्थक प्रतिशोध और निवारण, विरोधी जीवन की पवित्रता, ग़लती की संभावना और सुधार की आशा बताते हैं।
3. Change
Rationalisation, individualisation, institutionalisation · State formation, democratisation, globalisation · Effects of change and political views
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।