सरकार के तीन अंग और उन्हें अलग क्यों रखा जाता है
राजनीतिक संस्था नियमों और पदों का ऐसा ढाँचा है जिससे देश फ़ैसले लेता है: संसद, मंत्रिमंडल, न्यायालय, राष्ट्राध्यक्ष, चुनाव।
- विधायिका (संसद): चुने हुए प्रतिनिधि जो क़ानून बनाते हैं, बजट पास करते हैं और सरकार पर नज़र रखते हैं।
- कार्यपालिका: सरकार का मुखिया और मंत्री, जो रोज़ का काम चलाते हैं।
- न्यायपालिका: अदालतें, जो झगड़े सुलझाती हैं और देखती हैं कि क़ानून संविधान के अनुसार हों।
शक्तियों का पृथक्करण (separation of powers) का मतलब है कि तीनों काम एक के हाथ में न हों। हर अंग दूसरे को रोक सकता है: इसे नियंत्रण और संतुलन (checks and balances) कहते हैं।
प्रतिनिधित्व
हर नागरिक हर क़ानून पर वोट नहीं दे सकता, इसलिए हम प्रतिनिधि चुनते हैं। चुनाव प्रणाली तय करती है कि वोट सीटों में कैसे बदलें: "सबसे ज़्यादा वोट वाला जीते" (FPTP) या आनुपातिक प्रतिनिधित्व, जिसमें दलों को वोट के हिस्से के हिसाब से सीटें मिलती हैं। आनुपातिक प्रणाली में अक्सर गठबंधन सरकार बनती है।
संसदीय, अध्यक्षीय और अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली की तुलना
संसदीय प्रणाली
लोग विधायिका चुनते हैं। कार्यपालिका (प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल) विधायिका में से बनती है और उसे सदन का विश्वास (बहुमत) चाहिए। राष्ट्राध्यक्ष (राजा या अप्रत्यक्ष रूप से चुना राष्ट्रपति) ज़्यादातर औपचारिक होता है। उदाहरण: भारत, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, जर्मनी।
अध्यक्षीय प्रणाली
लोग राष्ट्रपति और विधायिका को अलग-अलग चुनते हैं। राष्ट्रपति ही राष्ट्राध्यक्ष और सरकार का मुखिया होता है, उसका कार्यकाल तय होता है और मंत्री आम तौर पर संसद के सदस्य नहीं होते। उदाहरण: अमेरिका, ब्राज़ील, मेक्सिको, इंडोनेशिया।
अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली
सीधे चुना गया राष्ट्रपति एक प्रधानमंत्री के साथ सत्ता बाँटता है, और प्रधानमंत्री संसद के प्रति उत्तरदायी होता है। अगर राष्ट्रपति के दल का संसद में बहुमत न हो, तो उसे विरोधी दल का PM बनाना पड़ सकता है: इसे सहवास (cohabitation) कहते हैं। उदाहरण: फ़्रांस, पुर्तगाल।
| संसदीय | अध्यक्षीय | अर्ध-अध्यक्षीय | |
|---|---|---|---|
| सरकार का मुखिया कौन चुनता है? | संसद का बहुमत | मतदाता | राष्ट्रपति PM चुनता है; PM को संसद का भरोसा चाहिए |
| तय कार्यकाल? | नहीं (पहले गिर सकती है) | हाँ | राष्ट्रपति हाँ; PM नहीं |
| हटाना | अविश्वास प्रस्ताव | सिर्फ़ महाभियोग | PM अविश्वास से; राष्ट्रपति महाभियोग से |
| ताक़त | क़ानून जल्दी बनते हैं | स्थिरता | लचीलापन |
| कमज़ोरी | कई दलों में अस्थिरता | दोनों अंगों में टकराव से काम रुकना | राष्ट्रपति और PM में टकराव |
कार्यपालिका की कार्यकाल सीमा
कार्यकाल वह तय समय है जिसके बाद नया चुनाव होता है। कार्यकाल सीमा बताती है कि एक व्यक्ति कुल कितनी बार पद पर रह सकता है। अमेरिका का राष्ट्रपति ज़्यादा से ज़्यादा दो बार (4-4 साल) चुना जा सकता है।
क्यों ज़रूरी? पद पर बैठा नेता सरकारी ताक़त से बार-बार जीत सकता है। सीमा ऊपर बदलाव लाती है और लोकतंत्र की रक्षा करती है।
विरोध में तर्क: लोग किसी लोकप्रिय नेता को दोबारा नहीं चुन पाते, और आख़िरी कार्यकाल वाला नेता जनता की परवाह कम कर सकता है ("lame duck")।
संसदीय प्रणाली में अक्सर PM पर कोई सीमा नहीं होती, क्योंकि संसद उसे कभी भी हटा सकती है और हर 4–5 साल में चुनाव होते हैं। ख़तरे का संकेत: कोई नेता संविधान बदलकर अपनी सीमा हटा दे।
कार्यपालिका को हटाना: अविश्वास प्रस्ताव और महाभियोग
अविश्वास प्रस्ताव (संसदीय): अगर निचले सदन के आधे से ज़्यादा सदस्य कहें कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं, तो PM और मंत्रिमंडल को इस्तीफ़ा देना होता है या चुनाव होते हैं। इसके लिए कोई अपराध ज़रूरी नहीं। जर्मनी में रचनात्मक अविश्वास होता है: साथ में नया PM भी चुनना पड़ता है।
महाभियोग (अध्यक्षीय): गंभीर ग़लत काम के लिए एक क़ानूनी-राजनीतिक प्रक्रिया। आम तौर पर निचला सदन आरोप लगाता है, ऊपरी सदन सुनवाई करता है, और हटाने के लिए बड़ा बहुमत (अक्सर दो-तिहाई) चाहिए। यह जानबूझकर कठिन रखा गया है।
नेता और तरीक़ों से भी पद छोड़ता है: चुनाव हारना, इस्तीफ़ा, मृत्यु या बीमारी, और कुछ जगह नागरिकों का वापस बुलाने (recall) वाला वोट।
स्वतंत्र विधायिका और सरकार पर नियंत्रण
विधायिका स्वतंत्र तब है जब कार्यपालिका उसे क़ाबू न कर सके: सदस्य खुले चुनाव से आएँ, वह अपना एजेंडा ख़ुद तय करे, उसे मनमर्ज़ी से बंद न किया जा सके, और सदस्य बिना डर बोल और वोट कर सकें।
- क़ानून बनाना: विधेयक बदलना या ठुकराना।
- बजट: उसकी मंज़ूरी के बिना न टैक्स, न ख़र्च।
- प्रश्न और बहस: मंत्रियों को सबके सामने जवाब देना पड़ता है (भारत में प्रश्नकाल)।
- समितियाँ: छोटे समूह विधेयकों और विभागों की जाँच करते हैं।
अध्यक्षीय प्रणाली में विधायिका ज़्यादा स्वतंत्र होती है क्योंकि राष्ट्रपति उसे भंग नहीं कर सकता। संसदीय प्रणाली में बड़े बहुमत वाली सरकार संसद पर हावी हो सकती है, इसलिए विपक्ष और समितियाँ बहुत ज़रूरी हैं। द्विसदनीय विधायिका (दो सदन) एक और जाँच जोड़ती है।
खुद करो: अपने देश को पहचानो
किसी भी देश के बारे में चार सवाल पूछो: 1) क्या लोग सरकार के मुखिया को सीधे चुनते हैं? 2) क्या संसद उसे बिना अपराध के हटा सकती है? 3) क्या कार्यकाल सीमा है? 4) क्या कार्यपालिका संसद भंग कर सकती है? फिर 3D मॉडल के आख़िरी चरण में जाँचो कि कौन-सी प्रणाली मेल खाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विधायिका = क़ानून बनाती है, बजट पास करती है, सरकार पर नज़र रखती है
- कार्यपालिका = सरकार का मुखिया + मंत्री, जो क़ानून लागू करते हैं
- विश्वास = निचले सदन का बहुमत समर्थन (PM के लिए ज़रूरी)
- अविश्वास प्रस्ताव = साधारण बहुमत से सरकार को हटाना
- महाभियोग = गंभीर ग़लत काम पर आरोप + सुनवाई; अक्सर दो-तिहाई वोट
- कार्यकाल सीमा = एक व्यक्ति के अधिकतम कार्यकाल
- सहवास (cohabitation) = राष्ट्रपति और PM विरोधी दलों से
- शक्तियों का पृथक्करण + नियंत्रण और संतुलन = किसी एक के पास पूरी ताक़त नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. देश X में 300 सीटों की संसद है। दल A को 160 सीटें मिलीं और उसका नेता सरकार का मुखिया बना। यह कौन-सी प्रणाली है?
संसदीय। मुखिया संसद के बहुमत (160 > 150) से आया है, अलग वोट से नहीं।
2. 545 सदस्यों वाले सदन में सब वोट दें, तो अविश्वास प्रस्ताव पास करने को कितने वोट चाहिए?
आधे से ज़्यादा: 545 ÷ 2 = 272.5, यानी कम से कम 273 वोट।
3. एक राष्ट्रपति 2020 में और फिर 2024 में चुना गया। नियम: 4-4 साल के दो कार्यकाल। नया व्यक्ति कब आएगा?
पहला कार्यकाल 2020–2024, दूसरा 2024–2028। वह फिर नहीं लड़ सकता, इसलिए 2028 में नया राष्ट्रपति।
4. अर्ध-अध्यक्षीय देश में राष्ट्रपति का दल संसद का चुनाव हार गया। क्या होगा?
राष्ट्रपति को नए बहुमत से PM बनाना होगा, क्योंकि PM को संसद का भरोसा चाहिए। इसे सहवास कहते हैं।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि जिस देश में राष्ट्रपति है, वहाँ अध्यक्षीय प्रणाली है। भारत में राष्ट्रपति है, पर असली ताक़त PM और संसद के पास है।
- महाभियोग और अविश्वास प्रस्ताव को एक समझना। महाभियोग गंभीर ग़लती पर, बड़े बहुमत से; अविश्वास साधारण राजनीतिक वोट है।
- सोचना कि अध्यक्षीय राष्ट्रपति संसद भंग कर सकता है। शुद्ध अध्यक्षीय प्रणाली में कोई अंग दूसरे का कार्यकाल ख़त्म नहीं कर सकता।
- मानना कि हर जगह कार्यकाल सीमा है। ज़्यादातर संसदीय देशों में PM पर कोई सीमा नहीं।