कार्यपालिका क्या है?
सरकार के तीन अंग हैं: विधायिका (कानून बनाती), कार्यपालिका (कानून लागू करती और प्रशासन चलाती) और न्यायपालिका (विवाद सुलझाती)। कार्यपालिका सिर्फ़ प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं है: इसमें नीति लागू करने वाले सभी लोग आते हैं।
- राजनीतिक कार्यपालिका: चुने हुए नेता, जैसे प्रधानमंत्री और मंत्री। ये मोटी नीति तय करते हैं और चुनाव के बाद बदलते हैं।
- स्थायी कार्यपालिका: सिविल सेवक, जो रोज़ का काम चलाते हैं और कई वर्षों तक रहते हैं।
कार्यपालिका के प्रकार
- अध्यक्षात्मक प्रणाली (अमेरिका, ब्राज़ील): राष्ट्रपति ही राज्य और सरकार दोनों का प्रमुख होता है, तय कार्यकाल के लिए सीधे चुना जाता है, और ऐसे मंत्री चुनता है जो विधायिका के सदस्य नहीं होते। विधायिका उसे आसानी से हटा नहीं सकती।
- संसदीय प्रणाली (भारत, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान): एक नाममात्र का राज्य प्रमुख (राष्ट्रपति या राजा) और सरकार का प्रमुख प्रधानमंत्री। प्रधानमंत्री और मंत्री विधायिका से आते हैं और तभी तक रहते हैं जब तक उसका समर्थन है।
- अर्ध-अध्यक्षात्मक प्रणाली (फ़्रांस, श्रीलंका): सीधे चुने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के पास असली शक्तियाँ। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अलग पार्टियों के भी हो सकते हैं।
भारत ने संसदीय प्रणाली इसलिए चुनी क्योंकि इसमें कार्यपालिका रोज़ जनता के प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह रहती है, और भारतीय इसे अंग्रेज़ी शासन से जानते थे। निर्माताओं को डर था कि एक बहुत ताक़तवर राष्ट्रपति के इर्द-गिर्द व्यक्ति-पूजा हो सकती है।
भारत में संसदीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति राज्य के प्रमुख हैं। उन्हें निर्वाचित सांसदों और विधायकों का निर्वाचक मंडल 5 वर्ष के लिए अप्रत्यक्ष रूप से चुनता है, और संविधान के उल्लंघन पर केवल महाभियोग से हटाया जा सकता है।
सारे कार्यकारी काम राष्ट्रपति के नाम पर होते हैं, पर अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करना होता है। फिर भी कुछ विवेकाधिकार (अपनी पसंद) हैं:
- सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं (फिर मानना होगा)।
- किसी विधेयक को बिना समय सीमा के रोक सकते हैं (पॉकेट वीटो), धन विधेयक और संविधान संशोधन को छोड़कर।
- जब किसी पार्टी या गठबंधन को साफ़ बहुमत न हो, तो प्रधानमंत्री चुन सकते हैं।
उपराष्ट्रपति (5 वर्ष के लिए सांसद चुनते हैं) राज्यसभा के सभापति होते हैं और ज़रूरत पर राष्ट्रपति का काम करते हैं।
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
राष्ट्रपति उस पार्टी या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं जिसके पास लोकसभा में बहुमत हो। प्रधानमंत्री मंत्री चुनता है, विभाग बाँटता है और उन्हें हटा सकता है। जो मंत्री सांसद नहीं है, उसे 6 महीने में सांसद बनना होता है।
- मंत्रिपरिषद में लोकसभा के सदस्यों के अधिकतम 15% हो सकते हैं (91वाँ संशोधन, 2003)।
- मंत्रिमंडल (कैबिनेट) वरिष्ठ मंत्रियों का छोटा समूह है जो मुख्य फ़ैसले लेता है।
- सामूहिक उत्तरदायित्व: सभी मंत्री मिलकर लोकसभा के प्रति जवाबदेह हैं। अगर लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पास करे, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफ़ा देना होता है।
प्रधानमंत्री की शक्ति राजनीति पर निर्भर है: एक पार्टी का बहुमत हो तो प्रधानमंत्री बहुत मज़बूत; गठबंधन में साथियों से सलाह करनी पड़ती है। राज्यों में यही ढाँचा राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ है।
स्थायी कार्यपालिका: नौकरशाही
नौकरशाही प्रशिक्षित, स्थायी अधिकारियों का समूह है जो सरकार की नीतियाँ लागू करते हैं। इसे राजनीतिक रूप से तटस्थ होना चाहिए: जो भी सरकार चुनी जाए, उसकी सेवा करे।
- अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS, भारतीय वन सेवा) राज्य सरकारों के अधीन काम करती हैं पर भर्ती केंद्र करता है।
- केंद्रीय सेवाएँ (जैसे भारतीय विदेश सेवा, आयकर) और राज्य सेवाएँ।
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) खुली परीक्षा से केंद्रीय अधिकारी चुनता है; राज्यों में राज्य लोक सेवा आयोग। SC, ST, OBC और EWS के लिए आरक्षण लागू है।
चिंताएँ: बहुत ज़्यादा लालफ़ीताशाही और देरी, अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव, और आम नागरिकों से दूरी। सूचना का अधिकार कानून (2005) लोगों को अधिकारियों से जवाब माँगने में मदद करता है।
करके देखें: आपके शहर में कौन क्या करता है?
अपने पास की कोई एक सेवा चुनें: स्कूल, राशन की दुकान या सड़क मरम्मत। पता करें (किसी बड़े से पूछें या ख़बरें देखें) कि कौन-सा मंत्री ज़िम्मेदार है और कौन-सा अधिकारी (जैसे ज़िलाधिकारी या खंड विकास अधिकारी) इसे चलाता है। दो कॉलम में लिखें: राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका। फिर 3D के आख़िरी चरण के स्लाइडर से देखें कि लोकसभा का समर्थन जाने पर मंत्रियों का क्या होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कार्यपालिका = राजनीतिक कार्यपालिका (प्रधानमंत्री, मंत्री) + स्थायी कार्यपालिका (सिविल सेवक)
- अध्यक्षात्मक: राज्य और सरकार का एक ही प्रमुख; संसदीय: नाममात्र प्रमुख + प्रधानमंत्री
- राष्ट्रपति: सांसद और विधायक अप्रत्यक्ष रूप से चुनते हैं; 5 वर्ष; महाभियोग से हटाना
- अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं
- मंत्रिपरिषद ≤ लोकसभा सदस्यों का 15%
- लोकसभा बहुमत = 543 में 272; अविश्वास प्रस्ताव → पूरी मंत्रिपरिषद का इस्तीफ़ा
हल किए गए उदाहरण
1. लोकसभा में 543 सदस्य हैं। मंत्रिपरिषद अधिकतम कितनी बड़ी हो सकती है?
543 का 15% = 81.45, इसलिए अधिकतम 81 मंत्री (प्रधानमंत्री सहित)।
2. चुनाव के बाद किसी पार्टी के पास 272 सीटें नहीं हैं। राष्ट्रपति की क्या भूमिका है?
राष्ट्रपति अपने विवेक से उस नेता को बुलाते हैं जिसके बहुमत जुटाने की सबसे ज़्यादा संभावना हो (अक्सर सबसे बड़ी पार्टी या चुनाव-पूर्व गठबंधन), और उसे लोकसभा में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं।
3. मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को अध्यादेश पर हस्ताक्षर की सलाह देता है। राष्ट्रपति उसे लौटा देते हैं। मंत्रिमंडल बिना बदलाव दोबारा भेजता है। अब क्या होगा?
अब राष्ट्रपति को इसे मानना होगा। पुनर्विचार के लिए वे केवल एक बार लौटा सकते हैं।
4. एक मंत्री मंत्रिमंडल के फ़ैसले से निजी तौर पर असहमत है। क्या वह सार्वजनिक आलोचना करके मंत्री बनी रह सकती है?
नहीं। सामूहिक उत्तरदायित्व के कारण उसे सार्वजनिक रूप से फ़ैसले का समर्थन करना होगा या इस्तीफ़ा देना होगा।
5. ज़िले की पुलिस के लिए राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका बताइए।
राजनीतिक: राज्य के गृह मंत्री और मुख्यमंत्री। स्थायी: IPS अधिकारी (पुलिस अधीक्षक) और पुलिस कर्मचारी।
6. अमेरिकी राष्ट्रपति विधायिका के वोट को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं, भारतीय प्रधानमंत्री क्यों नहीं?
अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल तय है और वे विधायिका के विश्वास पर निर्भर नहीं। भारतीय प्रधानमंत्री तभी तक रहते हैं जब तक लोकसभा सरकार का समर्थन करे।
आम गलतियाँ
- सोचना कि असली शक्ति भारत के राष्ट्रपति के पास है। असली शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास है।
- कहना कि राष्ट्रपति को जनता सीधे चुनती है। सांसद और विधायक अप्रत्यक्ष रूप से चुनते हैं।
- मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद को एक समझना। मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद का भीतरी, वरिष्ठ हिस्सा है।
- सोचना कि हर सरकार के साथ अधिकारी बदल जाते हैं। वे स्थायी हैं और उन्हें तटस्थ रहना चाहिए।