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विधायिका

संसद वह जगह है जहाँ चुने हुए प्रतिनिधि कानून बनाते हैं, मुद्दों पर बहस करते हैं, बजट पास करते हैं और सरकार को जवाबदेह रखते हैं। भारत की संसद के दो सदन हैं: जनता द्वारा चुनी लोकसभा और राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा। विधेयक वाचन, समिति की जाँच और दोनों सदनों के मतदान से गुज़रकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून बनता है। समितियाँ बारीक काम करती हैं और दल-बदल विरोधी कानून जैसे नियम संसद में अनुशासन रखते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो सदन: लोकसभा (543, जनता चुनती) और राज्यसभा (अधिकतम 250, राज्यों का प्रतिनिधित्व)।
  2. लोकसभा ज़्यादा ताक़तवर है: धन विधेयक वहीं शुरू होते हैं और वही सरकार हटा सकती है।
  3. विधेयक कदम-दर-कदम चलता है: पहला वाचन, समिति, दूसरा वाचन और मतदान, दूसरा सदन, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर।
  4. सांसद प्रश्नकाल, बहस, बजट की मंज़ूरी और अविश्वास प्रस्ताव से सरकार को जवाबदेह रखते हैं।
  5. समितियाँ विधेयक और ख़र्च की बारीकी से जाँच करती हैं; अध्यक्ष और दल-बदल विरोधी कानून अनुशासन रखते हैं।
  6. खुद खेलें: विधेयक को हर चरण से आगे बढ़ाएँ और उसे कानून बनते देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सिर्फ़ एक सदन क्यों नहीं?

एक सदन जल्दबाज़ी में कानून पास कर सकता है और राज्यों का अलग प्रतिनिधित्व नहीं होगा। दो सदन दोबारा जाँच और राज्यों को आवाज़ देते हैं।

अगर राज्यसभा असहमत हो, तो क्या वह कानून रोक सकती है?

सामान्य विधेयक पर वह देरी कर सकती है, फिर संयुक्त बैठक हो सकती है। धन विधेयक पर सिर्फ़ 14 दिन की देरी। इसलिए आम तौर पर लोकसभा की चलती है।

विधेयक को समिति में क्यों भेजते हैं?

कई पार्टियों के सांसदों का छोटा समूह पूरे सदन के शोर से दूर, शांति से उसकी बारीकी से जाँच कर सकता है, विशेषज्ञों को सुन सकता है और बदलाव सुझा सकता है।

अगर मंत्री सवालों के ठीक जवाब न दें तो?

सांसद बहस में मुद्दा उठा सकते हैं, प्रस्ताव ला सकते हैं, और आख़िर में लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पास कर सकती है।

सांसद शोर मचाएँ तो अनुशासन कौन रखता है?

अध्यक्ष (राज्यसभा में सभापति), जो सदन स्थगित कर सकते हैं या हंगामा करने वाले सदस्यों को निलंबित कर सकते हैं।

संसद की ज़रूरत क्यों?

विधायिका वह चुनी हुई संस्था है जो कानून बनाती है। भारत में राष्ट्रीय विधायिका संसद है (राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा); राज्यों में राज्य विधानमंडल हैं। संसद लोकतंत्र का दिल है क्योंकि यह:

दो सदन क्यों?

दो सदनों वाली विधायिका द्विसदनीय कहलाती है। भारत ने इसे इसलिए चुना क्योंकि देश बड़ा और विविध है: एक सदन सीधे जनता का और दूसरा राज्यों का प्रतिनिधित्व करे। इससे हर फ़ैसले पर दोबारा नज़र पड़ती है, जिससे जल्दबाज़ी के कानून रुक सकते हैं। केवल छह राज्यों में दो सदन (विधानसभा के साथ विधान परिषद) हैं।

लोकसभा (लोगों का सदन)

राज्यसभा (राज्यों की परिषद)

संसद कानून कैसे बनाती है

विधेयक प्रस्तावित कानून का मसौदा है। मंत्री द्वारा रखा गया विधेयक सरकारी विधेयक; किसी और सांसद का निजी सदस्य विधेयक। धन विधेयक केवल कर और ख़र्च से जुड़ा होता है और केवल लोकसभा में पेश हो सकता है।

  1. पेश करना / पहला वाचन: विधेयक किसी एक सदन में रखा जाता है।
  2. समिति चरण: अक्सर इसे समिति को भेजा जाता है, जो इसकी जाँच करती और विशेषज्ञों को सुनती है।
  3. दूसरा वाचन: सदन हर धारा पर बहस करता और मतदान करता है।
  4. दूसरा सदन: दूसरे सदन में यही प्रक्रिया। सामान्य विधेयक पर दोनों असहमत हों तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकते हैं, जहाँ बड़ी लोकसभा आम तौर पर जीतती है।
  5. राष्ट्रपति की स्वीकृति: राष्ट्रपति हस्ताक्षर करते हैं (या एक बार लौटाते हैं), और यह अधिनियम बन जाता है।

कानून बनाने का बहुत-सा असली काम सदन के बाहर भी होता है: पार्टियों, मंत्रालयों, हित समूहों और मीडिया से बातचीत।

संसद कार्यपालिका पर नियंत्रण कैसे रखती है

यह नियंत्रण तब सबसे अच्छा काम करता है जब संसद पर्याप्त दिन चले और सांसद हाज़िर रहकर बहस करें; बार-बार हंगामा और बहुत बड़ा बहुमत इसे कमज़ोर कर सकता है।

समितियाँ और स्व-नियंत्रण

समितियाँ

पूरा सदन हर चीज़ की जाँच नहीं कर सकता, इसलिए संसद अलग-अलग पार्टियों के सांसदों की समितियाँ बनाती है। स्थायी समितियाँ हमेशा रहती हैं: जैसे लोक लेखा समिति सरकारी ख़र्च जाँचती है, और विभाग से जुड़ी स्थायी समितियाँ हर मंत्रालय के विधेयक और बजट देखती हैं। ख़ास मामलों या घोटालों की जाँच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समितियाँ बनाई जा सकती हैं।

स्व-नियंत्रण

संसद अपनी प्रक्रिया के नियम ख़ुद बनाती है। लोकसभा के अध्यक्ष (और राज्यसभा के सभापति) सदन चलाते हैं, तय करते हैं कौन बोलेगा, और बाधा डालने वाले सदस्यों को निलंबित कर सकते हैं। दल-बदल विरोधी कानून (52वाँ संशोधन, 1985) कहता है कि जो सदस्य अपनी पार्टी छोड़े या पार्टी के निर्देश के ख़िलाफ़ वोट दे, वह अयोग्य ठहराया जा सकता है; फ़ैसला अध्यक्ष करते हैं। यह पैसे या पद के लिए पार्टी बदलने से रोकने के लिए बना।

करके देखें: एक असली विधेयक का पीछा करें

ख़बरों में हाल ही में संसद से पास हुआ कोई एक विधेयक खोजें। लिखें: वह किस सदन में शुरू हुआ, क्या वह समिति को गया, कितना समय लगा, और राष्ट्रपति ने कब हस्ताक्षर किए। फिर 3D का आख़िरी चरण खेलें और अपने विधेयक को सभी 7 चरणों से आगे बढ़ाएँ।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. राज्यसभा में अभी 245 सदस्य हैं। हर दो साल में लगभग कितने रिटायर होते हैं?

लगभग 245 का एक-तिहाई करीब 82 है, यानी हर दो साल में लगभग 80 सदस्य रिटायर होते हैं (चुनाव राज्यवार बँटे होते हैं)।

2. लोकसभा 1 मार्च को धन विधेयक पास करती है। राज्यसभा कुछ नहीं करती। दोनों सदनों से पास कब माना जाएगा?

14 दिन बाद विधेयक उसी रूप में दोनों सदनों से पास माना जाएगा जिस रूप में लोकसभा ने पास किया।

3. लोकसभा एक सामान्य विधेयक पास करती है, पर राज्यसभा उसे ठुकरा देती है। क्या हो सकता है?

राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकते हैं। लोकसभा में 543 और राज्यसभा में लगभग 245 सदस्य हैं, इसलिए आम तौर पर लोकसभा की राय जीतती है।

4. पार्टी A के टिकट पर जीता सांसद पार्टी B में चला जाता है। क्या हो सकता है?

दल-बदल विरोधी कानून के तहत पीठासीन अधिकारी उसे अयोग्य ठहरा सकते हैं और उसकी सदस्यता चली जाती है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. धन विधेयक केवल कहाँ पेश हो सकते हैं?
2. राष्ट्रपति राज्यसभा में कितने सदस्य मनोनीत करते हैं?
3. दल-बदल विरोधी कानून में अयोग्यता का फ़ैसला कौन करता है?
4. कार्यपालिका पर संसदीय नियंत्रण का साधन कौन-सा है?
5. राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकसभा और राज्यसभा में क्या अंतर है?

लोकसभा 5 वर्ष के लिए सीधे चुनी जाती है, धन विधेयक देखती है और सरकार हटा सकती है। राज्यसभा को राज्यों के विधायक चुनते हैं, यह स्थायी है, राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और राज्य विषयों पर विशेष शक्ति रखती है।

निजी सदस्य विधेयक क्या है?

ऐसा विधेयक जो मंत्री नहीं, कोई और सांसद पेश करे। कम ही कानून बनते हैं, पर मुद्दों पर ध्यान खींचते हैं।

शून्यकाल क्या है?

प्रश्नकाल के ठीक बाद का समय जब सांसद बिना पहले सूचना के ज़रूरी मुद्दे उठा सकते हैं। यह एक परंपरा है, लिखित नियम नहीं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IVSystem of government of the Third Republic
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार
इंग्लैंडYear 123.1.1 The government of the UK
इंग्लैंडYear 133.2.1 Government and politics of the USA
अमेरिकाGrade 12Political Institutions

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