National Year 13 Politics
अध्याय: 4
1. 3.2.1 Government and politics of the USA
The constitutional framework of US government · The legislative branch of government: Congress · The executive branch of government: President · The judicial branch of government · The electoral process and direct democracy · Political parties · Pressure groups · Civil rights
- संविधान: क्यों और कैसे? – संविधान किसी देश की बुनियादी नियम-पुस्तिका है। यह भरोसा बनाता है, बताता है कि शक्ति किसके पास है, उस शक्ति पर सीमा लगाता है और लोगों की आकांक्षाएँ बताता है। भारत का संविधान 1946 से 1949 तक संविधान सभा ने खुली बहस से लिखा और दूसरे संविधानों से अच्छे विचार लेकर उन्हें भारत के अनुसार ढाला।
- विधायिका – संसद वह जगह है जहाँ चुने हुए प्रतिनिधि कानून बनाते हैं, मुद्दों पर बहस करते हैं, बजट पास करते हैं और सरकार को जवाबदेह रखते हैं। भारत की संसद के दो सदन हैं: जनता द्वारा चुनी लोकसभा और राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा। विधेयक वाचन, समिति की जाँच और दोनों सदनों के मतदान से गुज़रकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून बनता है। समितियाँ बारीक काम करती हैं और दल-बदल विरोधी कानून जैसे नियम संसद में अनुशासन रखते हैं।
- कार्यपालिका शक्ति: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उन पर सीमाएँ – कार्यपालिका वह शाखा है जो कानून लागू करती है और रोज़ का शासन चलाती है। अध्यक्षात्मक व्यवस्था (जैसे अमेरिका) में चुना हुआ राष्ट्रपति इसका प्रमुख है, जो विधायिका से अलग है। संसदीय व्यवस्था (जैसे ब्रिटेन, भारत) में प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल विधायिका से आते हैं और उसका विश्वास बनाए रखना पड़ता है। राष्ट्रपति की औपचारिक शक्तियाँ (वीटो, सेनापति, संधि, नियुक्ति, क्षमादान), निहित शक्तियाँ और अनौपचारिक शक्तियाँ (मनाना, दल नेतृत्व, जनादेश) होती हैं। विधायिका और न्यायालय इन पर नियंत्रण रखते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय: न्यायिक पुनरावलोकन, सक्रियता, संयम और स्वतंत्रता – सर्वोच्च न्यायालय सबसे ऊँची अदालत है। जहाँ संविधान लिखित और सर्वोच्च है (जैसे अमेरिका, भारत), वहाँ यह संविधान तोड़ने वाले कानून और कार्य रद्द कर सकता है: न्यायिक पुनरावलोकन। सख़्त व्याख्याकार शब्दों और मूल अर्थ पर टिके रहते हैं; उदार व्याख्याकार संविधान को जीवित दस्तावेज़ मानते हैं। न्यायिक सक्रियता = शक्तियों का खुलकर उपयोग; न्यायिक संयम = फ़ैसले चुनी हुई संस्थाओं पर छोड़ना। अमेरिका में राष्ट्रपति नामित करता है, सीनेट पुष्टि करती है, न्यायाधीश जीवन भर रहते हैं। ब्रिटेन का सर्वोच्च न्यायालय (2009 से) स्वतंत्र है पर संसदीय संप्रभुता के कारण संसद के अधिनियम रद्द नहीं कर सकता।
- लोकतंत्र: सिद्धांत, चुनाव और सत्ता पर रोक – लोकतंत्र में आख़िरी ताक़त जनता के पास होती है। इसके मुख्य सिद्धांत हैं: राजनीतिक समानता, बहुमत का शासन पर अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित, विधि का शासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, और सत्ता पर सीमाएँ। लोग सीधे (जनमत संग्रह) या चुने हुए प्रतिनिधियों के ज़रिए फ़ैसला करते हैं। चुनाव का नियम (FPTP या आनुपातिक प्रणाली) तय करता है कि सीटें किसे मिलेंगी। संविधान सत्ता को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में बाँटता है ताकि हर अंग दूसरे पर नज़र रखे। चुनावों के बीच भी नागरिक मीडिया, दबाव समूह, अदालत, याचिका और शांतिपूर्ण विरोध से नीति पर असर डालते हैं।
- राजनीतिक दल: विचारधारा, संगठन, गुट और तीसरे दल – राजनीतिक दल ऐसे लोगों का समूह है जो एक जैसे विचार रखते हैं और चुनाव जीतकर सत्ता पाना चाहते हैं। हर दल की एक विचारधारा होती है: अर्थव्यवस्था, समाज और सरकार की भूमिका पर मूल विचार। दल का एक ढाँचा होता है, ऊपर राष्ट्रीय नेता से नीचे स्थानीय सदस्यों तक। एक ही दल में कई गुट होते हैं जो नीति और नेतृत्व पर मुक़ाबला करते हैं। दलों का समर्थन गिरता भी है (पतन) और लौटता भी है (नवीनीकरण)। बड़े दलों के सामने तीसरे दल और निर्दलीय उम्मीदवार होते हैं। "सबसे ज़्यादा वोट वाला जीते" प्रणाली में ये कम जीतते हैं, पर वोट काटकर नतीजा बदल सकते हैं।
- दबाव समूह (Pressure Groups) – दबाव समूह लोगों का संगठित समूह है जिसका एक साझा उद्देश्य होता है और जो चुनाव लड़े बिना सरकार की नीति पर असर डालना चाहता है। हित (वर्गीय) समूह अपने सदस्यों की बात करते हैं; उद्देश्य (प्रचारक) समूह पूरे समाज के लिए किसी विचार के लिए लड़ते हैं। अंदरूनी समूहों से सरकार सलाह लेती है; बाहरी समूह प्रदर्शन और मीडिया से काम करते हैं। तरीक़े: लॉबिंग, अभियान, याचिका, प्रत्यक्ष कार्रवाई और अदालत। लॉबिस्ट, थिंक टैंक, कंपनियाँ और मीडिया भी असर डालते हैं। बहुलवादी कहते हैं समूह शक्ति बाँटकर लोकतंत्र मज़बूत करते हैं; अभिजनवादी कहते हैं अमीर, पहुँच वाले समूह हावी रहते हैं।
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
2. 3.2.2 Comparative politics (UK and USA)
Constitutional arrangements · The executives · The judiciaries · Electoral and party systems · Pressure groups · Civil Rights
- संविधान: क्यों और कैसे? – संविधान किसी देश की बुनियादी नियम-पुस्तिका है। यह भरोसा बनाता है, बताता है कि शक्ति किसके पास है, उस शक्ति पर सीमा लगाता है और लोगों की आकांक्षाएँ बताता है। भारत का संविधान 1946 से 1949 तक संविधान सभा ने खुली बहस से लिखा और दूसरे संविधानों से अच्छे विचार लेकर उन्हें भारत के अनुसार ढाला।
- कार्यपालिका शक्ति: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उन पर सीमाएँ – कार्यपालिका वह शाखा है जो कानून लागू करती है और रोज़ का शासन चलाती है। अध्यक्षात्मक व्यवस्था (जैसे अमेरिका) में चुना हुआ राष्ट्रपति इसका प्रमुख है, जो विधायिका से अलग है। संसदीय व्यवस्था (जैसे ब्रिटेन, भारत) में प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल विधायिका से आते हैं और उसका विश्वास बनाए रखना पड़ता है। राष्ट्रपति की औपचारिक शक्तियाँ (वीटो, सेनापति, संधि, नियुक्ति, क्षमादान), निहित शक्तियाँ और अनौपचारिक शक्तियाँ (मनाना, दल नेतृत्व, जनादेश) होती हैं। विधायिका और न्यायालय इन पर नियंत्रण रखते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय: न्यायिक पुनरावलोकन, सक्रियता, संयम और स्वतंत्रता – सर्वोच्च न्यायालय सबसे ऊँची अदालत है। जहाँ संविधान लिखित और सर्वोच्च है (जैसे अमेरिका, भारत), वहाँ यह संविधान तोड़ने वाले कानून और कार्य रद्द कर सकता है: न्यायिक पुनरावलोकन। सख़्त व्याख्याकार शब्दों और मूल अर्थ पर टिके रहते हैं; उदार व्याख्याकार संविधान को जीवित दस्तावेज़ मानते हैं। न्यायिक सक्रियता = शक्तियों का खुलकर उपयोग; न्यायिक संयम = फ़ैसले चुनी हुई संस्थाओं पर छोड़ना। अमेरिका में राष्ट्रपति नामित करता है, सीनेट पुष्टि करती है, न्यायाधीश जीवन भर रहते हैं। ब्रिटेन का सर्वोच्च न्यायालय (2009 से) स्वतंत्र है पर संसदीय संप्रभुता के कारण संसद के अधिनियम रद्द नहीं कर सकता।
- चुनाव प्रणाली और दल प्रणाली: वोट के नियम दलों को कैसे बनाते हैं – चुनाव प्रणाली वह नियम है जो वोटों को सीटों में बदलता है। "सबसे ज़्यादा वोट वाला जीते" (FPTP) में हर इलाक़े में पहले नंबर वाला सीट जीतता है। "विजेता सब ले" निर्वाचक मंडल में राज्य जीतने वाले को उस राज्य के सारे वोट मिलते हैं। आनुपातिक (PR, STV) और मिश्रित (AMS) प्रणालियाँ सीटें वोट के हिस्से के क़रीब बाँटती हैं। ये नियम दल प्रणाली बनाते हैं: FPTP से अक्सर दो बड़े दल बनते हैं (ड्यूवर्जे का नियम), PR से कई दल और गठबंधन। "वोट बेकार जाएगा" के डर से तीसरे दल दब जाते हैं। चुनावी चंदे पर बराबरी बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी की बहस है।
- दबाव समूह (Pressure Groups) – दबाव समूह लोगों का संगठित समूह है जिसका एक साझा उद्देश्य होता है और जो चुनाव लड़े बिना सरकार की नीति पर असर डालना चाहता है। हित (वर्गीय) समूह अपने सदस्यों की बात करते हैं; उद्देश्य (प्रचारक) समूह पूरे समाज के लिए किसी विचार के लिए लड़ते हैं। अंदरूनी समूहों से सरकार सलाह लेती है; बाहरी समूह प्रदर्शन और मीडिया से काम करते हैं। तरीक़े: लॉबिंग, अभियान, याचिका, प्रत्यक्ष कार्रवाई और अदालत। लॉबिस्ट, थिंक टैंक, कंपनियाँ और मीडिया भी असर डालते हैं। बहुलवादी कहते हैं समूह शक्ति बाँटकर लोकतंत्र मज़बूत करते हैं; अभिजनवादी कहते हैं अमीर, पहुँच वाले समूह हावी रहते हैं।
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
3. 3.3.1 Core ideologies
Liberalism · Conservatism · Socialism
- राजनीतिक विचारधारा: राजनीति के बड़े सवालों के अलग-अलग जवाब – राजनीतिक विचारधारा लोगों, समाज और राज्य के बारे में जुड़े हुए विचारों का सेट है, साथ में समाज को बनाए रखने या बदलने की योजना। हम राजनीतिक विचार राजनीतिक समाजीकरण से सीखते हैं (परिवार, स्कूल, दोस्त, मीडिया, घटनाएँ)। “वाम” और “दक्षिण” शब्द 1789 की फ़्रांसीसी सभा में बैठने की जगह से आए। मुख्य विचारधाराएँ हैं उदारवाद (व्यक्ति की आज़ादी और अधिकार), रूढ़िवाद (परंपरा, व्यवस्था, धीमा बदलाव) और समाजवाद (समानता, साझा धन)। इनके अलावा नारीवाद, पर्यावरणवाद, अराजकतावाद, बहुसंस्कृतिवाद और राष्ट्रवाद। दो धुरियों वाला मॉडल (अर्थव्यवस्था और आज़ादी-सत्ता) एक रेखा से बेहतर तस्वीर देता है। विचारधाराएँ दलों के घोषणापत्र और नीतियाँ तय करती हैं, और जनमत सर्वेक्षण से इन्हें नापा जाता है।
4. 3.3.2 Other ideologies (choose one)
Nationalism · Feminism · Multiculturalism · Anarchism · Ecologism
- राष्ट्रवाद: राष्ट्र, आत्म-निर्णय और बहुलवाद – राष्ट्रवाद एक ताक़तवर शक्ति है: इसने छोटे राज्यों को जोड़ा, भारत जैसे स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरणा दी, और साम्राज्य भी तोड़े व टकराव भी कराए। राष्ट्र कोई भौतिक चीज़ नहीं; यह ऐसा समुदाय है जो इसलिए है क्योंकि उसके सदस्य मानते हैं कि वे एक-दूसरे के हैं। राष्ट्र साझा विश्वास, इतिहास की साझी समझ, मातृभूमि से जुड़ाव, साझे राजनीतिक आदर्श और साझी राजनीतिक पहचान पर टिका है; एक धर्म या भाषा ज़रूरी नहीं। राष्ट्रीय आत्म-निर्णय किसी समूह का स्वयं शासन का दावा है; उपनिवेशवाद के बाद इससे कई नए राज्य बने, पर हर समूह का अलग राज्य असंभव है, इसलिए आज यह अक्सर लोकतांत्रिक राज्य के अंदर अधिकारों और स्वायत्तता से पूरा होता है। जब राष्ट्र सब समूहों की पहचान का सम्मान और अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है, तो राष्ट्रवाद और बहुलवाद साथ चल सकते हैं।
- राजनीतिक विचारधारा: राजनीति के बड़े सवालों के अलग-अलग जवाब – राजनीतिक विचारधारा लोगों, समाज और राज्य के बारे में जुड़े हुए विचारों का सेट है, साथ में समाज को बनाए रखने या बदलने की योजना। हम राजनीतिक विचार राजनीतिक समाजीकरण से सीखते हैं (परिवार, स्कूल, दोस्त, मीडिया, घटनाएँ)। “वाम” और “दक्षिण” शब्द 1789 की फ़्रांसीसी सभा में बैठने की जगह से आए। मुख्य विचारधाराएँ हैं उदारवाद (व्यक्ति की आज़ादी और अधिकार), रूढ़िवाद (परंपरा, व्यवस्था, धीमा बदलाव) और समाजवाद (समानता, साझा धन)। इनके अलावा नारीवाद, पर्यावरणवाद, अराजकतावाद, बहुसंस्कृतिवाद और राष्ट्रवाद। दो धुरियों वाला मॉडल (अर्थव्यवस्था और आज़ादी-सत्ता) एक रेखा से बेहतर तस्वीर देता है। विचारधाराएँ दलों के घोषणापत्र और नीतियाँ तय करती हैं, और जनमत सर्वेक्षण से इन्हें नापा जाता है।