राष्ट्रवाद: जोड़ने और तोड़ने वाली शक्ति
राष्ट्रवाद किसी राष्ट्र से जुड़ाव की भावना और उस पर बने राजनीतिक विचार व आंदोलन हैं।
- इसने छोटे राज्यों को जोड़कर बड़े राज्य बनाए, जैसे 19वीं सदी में जर्मनी और इटली।
- इसने एशिया और अफ़्रीका के उपनिवेशवाद-विरोधी स्वतंत्रता संग्रामों को प्रेरणा दी, भारत समेत।
- इसने बड़े साम्राज्य (ऑस्ट्रो-हंगेरियन, ऑटोमन) तोड़े भी और कहीं-कहीं नफ़रत, युद्ध और अल्पसंख्यकों पर हिंसा भी कराई।
इसलिए राष्ट्रवाद न पूरी तरह अच्छा है न पूरी तरह बुरा। सवाल यह है कि वह किस तरह का राष्ट्रवाद है।
राष्ट्र क्या है?
राष्ट्र परिवार या कबीले (जहाँ लोग एक-दूसरे को जानते हैं) से अलग है और कोई भौतिक वस्तु नहीं। यह ऐसा समुदाय है जो इसलिए है क्योंकि उसके सदस्य मानते हैं कि वे एक-दूसरे के हैं। आम साझी विशेषताएँ:
- साझा विश्वास: एक राष्ट्र के रूप में साथ रहने की इच्छा।
- इतिहास: अतीत, कहानियों और स्मृतियों की साझी समझ जो साझी पहचान देती है।
- भू-क्षेत्र / मातृभूमि: वह धरती जिसे लोग अपना साझा घर मानते हैं। (एक ही धरती पर अलग समूहों के दावे टकराव ला सकते हैं।)
- साझे राजनीतिक आदर्श: राज्य की साझी सोच, जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और अधिकार।
- साझी राजनीतिक पहचान: नागरिक ख़ुद को एक राजनीतिक समुदाय का सदस्य मानते हैं।
ज़रूरी नहीं: एक धर्म, एक भाषा या एक नस्ल। इन्हें थोपने से अल्पसंख्यकों को चोट पहुँचती है। भारत की राष्ट्रीयता साझे लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिकी है, एक संस्कृति पर नहीं।
राष्ट्रीय आत्म-निर्णय
आत्म-निर्णय किसी राष्ट्र का स्वयं शासन करने और अपना भविष्य तय करने का दावा है, आमतौर पर अपने राज्य के ज़रिए।
- 19वीं सदी के यूरोप में 'एक संस्कृति, एक राज्य' के विचार ने सीमाएँ बदलीं, अक्सर बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन और हिंसा के साथ।
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एशिया और अफ़्रीका के उपनिवेशों ने आत्म-निर्णय का दावा किया और आज़ाद राज्य बने।
- समस्या: लगभग हर राज्य में कई सांस्कृतिक समूह हैं। हर समूह अलग राज्य माँगे तो विभाजन कभी ख़त्म नहीं होगा।
- आज का बेहतर जवाब: लोकतांत्रिक राज्य अलगाव की जगह समूहों को अधिकार, मान्यता और स्वायत्तता (जैसे विशेष प्रावधान, भाषाई अधिकार, क्षेत्रीय स्वशासन) देकर ऐसे दावे पूरे कर सकते हैं।
राष्ट्रवाद और बहुलवाद
बहुलवाद = एक समाज में अनेक संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों को स्वीकार करना और उनका सम्मान करना।
- लोकतांत्रिक राष्ट्र अल्पसंख्यकों को अधिकार दे: अपनी भाषा, संस्कृति और धर्म बनाए रखने और अपनी संस्थाएँ चलाने के।
- वह संविधान पर आधारित साझी नागरिक पहचान बनाए, और लोगों को दूसरी पहचानें भी रखने दे।
- सब पर एक संस्कृति थोपने से गुस्सा और अलगाववाद पैदा होता है; विविधता का सम्मान अपनापन देता है और राष्ट्र को एक रखता है।
भारत का संविधान यही रास्ता अपनाता है: कई भाषाओं को मान्यता, अल्पसंख्यकों को सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार, और राष्ट्र को राज्यों का संघ कहा गया। स्वस्थ राष्ट्रवाद समावेशी है, आक्रामक नहीं।
परीक्षा टिप्स
नागरिकता और राष्ट्रवाद मिलकर लगभग 8 अंक। आम सवाल: राष्ट्र की विशेषताएँ, राष्ट्र 'कल्पित' समुदाय क्यों, आत्म-निर्णय का अर्थ और समस्याएँ, और राष्ट्रवाद बहुलवाद के साथ कैसे चल सकता है। मुख्य उदाहरण के रूप में भारत की अनेकता में एकता लें।
घर पर करके देखें
परिवार के तीन लोगों से पूछें: 'आपको भारतीय होने का एहसास किस बात से होता है?' उत्तर लिखें। उन्हें विश्वास, इतिहास, मातृभूमि, आदर्श और पहचान में बाँटें। क्या किसी ने एक भाषा या धर्म कहा? चर्चा करें कि भारत को उसकी ज़रूरत क्यों नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राष्ट्रवाद: राष्ट्र से जुड़ाव की भावना और उस पर बने आंदोलन।
- राष्ट्र: लोगों का समुदाय जो मानते हैं कि वे एक-दूसरे के हैं।
- विशेषताएँ: साझा विश्वास, इतिहास, मातृभूमि, राजनीतिक आदर्श, राजनीतिक पहचान।
- आत्म-निर्णय: किसी राष्ट्र का स्वयं शासन का दावा।
- स्वायत्तता: बड़े राज्य के अंदर किसी समूह का स्वशासन।
- बहुलवाद: एक समाज में अनेक संस्कृतियों, भाषाओं और आस्थाओं का सम्मान।
हल किए गए उदाहरण
1. राष्ट्रवाद के जोड़ने और तोड़ने का एक-एक उदाहरण दीजिए।
जोड़ना: 19वीं सदी में छोटे राज्यों का मिलकर जर्मनी और इटली बनना, या भारत के स्वतंत्रता संग्राम का लोगों को एक करना। तोड़ना: प्रथम विश्व युद्ध के बाद बड़े साम्राज्यों का टूटना।
2. राष्ट्र को विश्वास पर आधारित समुदाय क्यों कहते हैं?
राष्ट्र के सदस्य ज़्यादातर दूसरे सदस्यों से कभी नहीं मिलते, फिर भी वे जुड़ाव महसूस करते हैं। राष्ट्र इसी साझे विश्वास और कल्पना से है, किसी भौतिक चीज़ से नहीं।
3. क्या भारत को राष्ट्र होने के लिए एक भाषा चाहिए?
नहीं। भारत साझे इतिहास, मातृभूमि, लोकतांत्रिक आदर्शों और राजनीतिक पहचान से एक है। कई भाषाओं को मान्यता है; एक थोपने से एकता को चोट पहुँच सकती है।
4. एक सांस्कृतिक समूह अलग राज्य माँगता है। लोकतंत्र क्या विकल्प दे सकता है?
अधिकार और मान्यता: भाषाई और सांस्कृतिक अधिकार, विशेष प्रावधान और क्षेत्रीय स्वायत्तता, ताकि समूह देश के अंदर रहकर अपने कई मामले स्वयं चला सके।
5. राष्ट्रवाद हानिकारक कब बनता है?
जब वह एक संस्कृति को श्रेष्ठ बताए, उसे अल्पसंख्यकों पर थोपे या दूसरे राष्ट्रों के विरुद्ध हो जाए, तो नफ़रत, भेदभाव और युद्ध ला सकता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि राष्ट्र के लिए एक धर्म या एक भाषा ज़रूरी है।
- राष्ट्र और राज्य को हमेशा एक मान लेना। राज्य राजनीतिक संगठन है; राष्ट्र विश्वास पर बना समुदाय।
- यह सोचना कि आत्म-निर्णय का मतलब हमेशा अलग राज्य है। यह स्वायत्तता और अधिकारों से भी पूरा हो सकता है।
- यह मानना कि बहुलवाद राष्ट्र को कमज़ोर करता है। विविधता का सम्मान अक्सर एकता मज़बूत करता है।