न्याय क्या है?
आसान शब्दों में न्याय = हर व्यक्ति को उसका उचित हक़ देना। कई संस्कृतियों के पुराने विचारकों ने इसे अच्छे समाज से जोड़ा: प्राचीन यूनान में प्लेटो ने सुकरात की बहसों के ज़रिए इस पर चर्चा की; चीन में कन्फ़्यूशियस ने कहा शासक गलत करने वालों को दंड और अच्छे लोगों को इनाम दे; भारत में धर्म और न्याय के विचार ने शासक के कर्तव्य को न्याय से जोड़ा। जर्मन विचारक इमैनुएल कांट ने कहा हर व्यक्ति की गरिमा है, इसलिए हर किसी को पूरा विकास करने का मौका मिले।
सामाजिक न्याय इसे समाज पर लागू करता है: चीज़ें (आय, ज़मीन, नौकरी), सेवाएँ (स्कूल, स्वास्थ्य) और अवसर लोगों में कैसे बँटें। हमारी प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का वादा करती है।
न्यायपूर्ण बँटवारा: तीन सिद्धांत
- बराबर वालों से बराबर बर्ताव: इंसान होने के नाते सबके अधिकार बराबर; जाति, धर्म या लिंग से भेद नहीं। समान काम के लिए समान वेतन।
- समानुपातिक न्याय: इनाम मेहनत, कौशल और जोखिम के अनुपात में। वर्षों पढ़ाई करने वाला सर्जन ज़्यादा कमा सकता है।
- विशेष ज़रूरतों को मान्यता: विकलांग लोगों या लंबे समय तक दबाए गए समूहों को बराबर मौके के लिए अतिरिक्त मदद चाहिए।
ये कभी-कभी अलग दिशा में खींचते हैं, इसलिए न्यायपूर्ण समाज को इनमें संतुलन रखना होता है। भारत में भूमि सुधार, आरक्षण और विकलांगजन की सहायता इसी के प्रयास हैं।
जॉन रॉल्स: अज्ञानता का पर्दा
अमेरिकी विचारक जॉन रॉल्स ने पूछा: जब हर कोई अपने फ़ायदे के नियम चाहता है, तो उचित नियम कैसे चुनें?
- सोचिए हमें समाज के नियम तय करने हैं, पर यह जानने से पहले कि हमारी जगह क्या होगी: अमीर या गरीब, स्त्री या पुरुष, कौन सी जाति या समुदाय, स्वस्थ या विकलांग।
- यही अज्ञानता का पर्दा है। इसके पीछे समझदार व्यक्ति सबसे बुरी स्थिति सोचेगा और ऐसे नियम चुनेगा जो सबसे कमज़ोर की रक्षा करें, क्योंकि वह स्वयं वहाँ हो सकता है।
- यह दान नहीं; यह तर्कसंगत स्वार्थ है जो निष्पक्षता तक ले जाता है। असमानता तभी ठीक है जब उससे सबसे कमज़ोर को भी लाभ हो।
सामाजिक न्याय की खोज
न्यायपूर्ण समाज पहले यह पक्का करता है कि सब स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकें, यानी न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतें: पर्याप्त भोजन, साफ़ पानी, घर, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और न्यूनतम मज़दूरी। इसे मापने (जैसे गरीबी रेखा कहाँ हो) और देने के तरीके पर लोगों में मतभेद है।
भारतीय उदाहरण: बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा, मध्याह्न भोजन, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, राशन दुकानों पर सस्ता अनाज, और ग्रामीण काम की गारंटी। न्यूनतम पक्का होने के बाद लोग उचित प्रतियोगिता कर सकते हैं।
मुक्त बाज़ार बनाम राज्य हस्तक्षेप
| मुक्त बाज़ार का पक्ष | राज्य हस्तक्षेप का पक्ष | |
|---|---|---|
| मान्यता | खुली प्रतियोगिता प्रतिभा और मेहनत को इनाम देती; सस्ता, बेहतर सामान | बाज़ार उन्हें भूल जाता जो पैसा नहीं दे सकते; असमानता बढ़ा सकता |
| राज्य की भूमिका | छोटी: कानून और अनुबंध की रक्षा, शायद न्यूनतम सुविधा | बड़ी: स्कूल, स्वास्थ्य, रोज़गार, कल्याण |
| चिंता | सरकारी सेवाएँ धीमी या कम गुणवत्ता वाली हो सकती हैं | निजी सेवाएँ गरीब के लिए बहुत महँगी हो सकती हैं |
भारत समेत कई देश मिश्रित रास्ता अपनाते हैं: बहुत सी चीज़ों के लिए बाज़ार, और बुनियादी ज़रूरतों व पीछे छूटे लोगों के लिए राज्य।
परीक्षा टिप्स
यह अध्याय लगभग 6 अंक का है। आम सवाल: उदाहरण सहित न्याय के तीन सिद्धांत, रॉल्स का अज्ञानता का पर्दा, बुनियादी ज़रूरतें, मुक्त बाज़ार बनाम राज्य पर बहस। 'बाज़ार बनाम राज्य' वाले उत्तर का अंत संतुलित निष्कर्ष से करें।
घर पर करके देखें
10 बिस्कुट परिवार के 4 सदस्यों में बाँटें: एक ने सबसे ज़्यादा घर का काम किया, एक बीमार है, दो बराबर हैं। हर नियम आज़माएँ: बराबर हिस्सा, मेहनत के हिसाब से, बीमार को ज़्यादा। फिर रॉल्स वाला खेल: एक व्यक्ति बाँटे और सबसे आख़िर में उठाए। लिखें क्या बदला।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- न्याय: हर व्यक्ति को उसका उचित हक़ देना।
- सामाजिक न्याय: समाज में चीज़ों, सेवाओं और अवसरों का उचित बँटवारा।
- बराबर वालों से बराबर बर्ताव; समानुपातिक इनाम; विशेष ज़रूरत पर अतिरिक्त।
- अज्ञानता का पर्दा (रॉल्स): अपनी जगह जाने बिना नियम चुनना।
- सबसे कमज़ोर: समाज के सबसे कम सुविधा वाले लोग।
- न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतें: भोजन, पानी, घर, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यूनतम मज़दूरी।
- मिश्रित तरीका: बाज़ार और राज्य का कल्याण साथ-साथ।
हल किए गए उदाहरण
1. एक कंपनी एक ही काम के लिए महिला को पुरुष से कम वेतन देती है। न्याय का कौन सा सिद्धांत टूटा?
बराबर वालों से बराबर बर्ताव: एक जैसे काम के लिए लिंग से परे एक जैसा वेतन होना चाहिए।
2. अस्पताल में डॉक्टर सहायक से ज़्यादा कमाता है। क्या यह अन्याय है?
ज़रूरी नहीं। समानुपातिक न्याय के अनुसार वर्षों का प्रशिक्षण, कौशल और ज़िम्मेदारी ज़्यादा वेतन को उचित बना सकते हैं, बशर्ते सहायक को भी उचित, सम्मानजनक वेतन मिले।
3. रॉल्स के अज्ञानता के पर्दे के पीछे व्यक्ति मुफ़्त शिक्षा का समर्थन क्यों करेगा?
क्योंकि उसे पता नहीं कि वह गरीब घर में पैदा होगा या नहीं। अगर होगा, तो मुफ़्त शिक्षा उसका मौका बचाएगी। इसलिए तर्कसंगत स्वार्थ उसे समर्थन की ओर ले जाता है।
4. बुनियादी ज़रूरतें पूरी करके सामाजिक न्याय की ओर ले जाने वाली दो भारतीय योजनाएँ बताइए।
स्कूलों में मध्याह्न भोजन (भोजन और हाज़िरी) और राशन दुकानों पर सस्ता अनाज (खाद्य सुरक्षा)। और भी: ग्रामीण रोज़गार गारंटी, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र।
5. दोनों पक्ष रखिए: क्या स्वास्थ्य सेवा मुक्त बाज़ार पर छोड़ दी जाए?
पक्ष में: निजी अस्पताल प्रतियोगिता करते, नई तकनीक और विकल्प लाते हैं। विपक्ष में: गरीब इलाज का ख़र्च नहीं उठा पाते, और स्वास्थ्य बुनियादी ज़रूरत है। संतुलित मत: निजी अस्पतालों के साथ मज़बूत सरकारी अस्पताल और गरीबों के लिए बीमा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि न्याय का मतलब हमेशा सबको बिल्कुल एक जैसा देना है।
- कहना कि रॉल्स दान चाहते थे। उनका तर्क था कि पर्दे के पीछे तर्कसंगत स्वार्थ निष्पक्षता लाता है।
- न्यायपूर्ण बँटवारा समझाते समय 'विशेष ज़रूरत' वाला सिद्धांत भूल जाना।
- मुक्त बाज़ार बनाम राज्य वाले उत्तर में केवल एक पक्ष लिखना।