South 고등학교 3학년 Classics and Ethics
अध्याय: 4
1. Relationship with oneself
Living as a moral agent · Cultivating the mind · The categorical imperative
- आत्म-पहचान: मैं कौन हूँ और उसे कैसे जिऊँ? – पहचान ख़ुद के बारे में तुम्हारा बोध है: तुम्हारी भूमिकाएँ, मूल्य, ताक़तें और सपने। हम आत्म-चिंतन से ख़ुद को जानते हैं। आत्म-सम्मान यह है कि हम ख़ुद को कितना मूल्यवान मानते हैं। मज़बूत नैतिक पहचान का मतलब है कि हमारे काम हमारे मूल्यों से मेल खाते हैं।
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
2. Relationships with others
Happiness as ultimate end · Ren (benevolence) · Humans as relational beings
- सद्गुण नीतिशास्त्र: अच्छा इंसान कैसे बनें – सद्गुण नीतिशास्त्र पूछता है "मुझे कैसा इंसान बनना चाहिए?", सिर्फ़ "कौन-सा नियम मानूँ?" नहीं। हर कर्म में इरादा, साधन, कर्म और परिणाम होते हैं। सुकरात ने सिखाया कि सद्गुण ज्ञान है। प्लेटो ने आत्मा के तीन हिस्सों (बुद्धि, उत्साह, इच्छा) को चार मूल सद्गुणों से जोड़ा: प्रज्ञा, साहस, संयम और न्याय। अरस्तू ने कहा कि हर लक्ष्य अंत में यूडेमोनिया (अच्छा जीवन) की ओर जाता है, और हर नैतिक सद्गुण दो दोषों के बीच का स्वर्णिम मध्य है, जो आदत से बनता है और व्यावहारिक बुद्धि से पहचाना जाता है।
- कन्फ़्यूशियसवाद – कन्फ़्यूशियसवाद जीने का एक तरीका है, जो चीन के शिक्षक कन्फ़्यूशियस (लगभग 551–479 ई.पू.) ने सिखाया। इसके केंद्र में हैं रेन (दूसरों के प्रति दया) और ली (आदरपूर्ण व्यवहार)। इन्हें पाँच रिश्तों में निभाकर इंसान अच्छा बनता है: शासक-प्रजा, माता-पिता और संतान, पति-पत्नी, बड़े-छोटे और मित्र। मेंशियस ने कहा कि मानव स्वभाव जन्म से अच्छा है, अंकुर की तरह; ज़ुन्ज़ी ने कहा कि उसे शिक्षा और नियमों से ढालना पड़ता है। नव-कन्फ़्यूशियसवाद (लगभग 11वीं-12वीं सदी) ने इन विचारों को ब्रह्मांड की व्याख्या और आत्म-सुधार से जोड़ा।
3. Society and community
Just state and just person · Integrity in public office · Outcome vs procedural justice
- सामाजिक न्याय: सबको उचित हिस्सा – न्याय = हर व्यक्ति को उसका उचित हक़ देना। सामाजिक न्याय समाज में चीज़ों, सेवाओं और अवसरों के उचित बँटवारे के बारे में है। तीन सिद्धांत मार्गदर्शन करते हैं: बराबर वालों से बराबर बर्ताव, मेहनत और कौशल के अनुपात में इनाम, और विशेष ज़रूरत पर अतिरिक्त मदद। इनमें संतुलन चाहिए। जॉन रॉल्स ने कहा कि समाज के नियम 'अज्ञानता के पर्दे' के पीछे से चुनें, यानी यह जाने बिना कि हमें कौन सी जगह मिलेगी; तब समझदार व्यक्ति सबसे कमज़ोर की रक्षा करेगा। सामाजिक न्याय की शुरुआत सबकी बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, पानी, घर, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यूनतम मज़दूरी) पूरी करने से होती है। तरीके पर मतभेद है: मुक्त बाज़ार वाले खुली प्रतियोगिता और छोटा राज्य चाहते हैं; दूसरे राज्य से कल्याण चाहते हैं। भारत दोनों मिलाता है।
- नागरिक नैतिकता: सामूहिक हित, नागरिक और राज्य – नागरिक नैतिकता यह सिखाती है कि समाज के सदस्य के रूप में हमें कैसे व्यवहार करना चाहिए। साझे कुएँ की तरह मेरा हित और सबका हित टकरा सकते हैं। उचित बँटवारे से साधन सबके लिए बचा रहता है। नागरिकों के कर्तव्य हैं, अधिकारियों को ईमानदार रहना है, और अन्यायपूर्ण क़ानून का शांतिपूर्वक विरोध सविनय अवज्ञा कहलाता है।
4. Nature and transcendence
Greatest happiness principle · Non-action and nature today · Ethics within religions
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
- ताओवाद (दाओवाद) – ताओवाद प्राचीन चीन की सोच है कि हमें दाओ, यानी प्रकृति की 'राह' के साथ तालमेल में जीना चाहिए। लाओज़ी (ताओ ते चिंग) ने कोमलता, सरलता और वू वेई, यानी बिना ज़ोर लगाए कर्म, सिखाया। ज़ुआंगज़ी ने कहानियों से दिखाया कि बड़ा-छोटा, अच्छा-बुरा जैसे विचार हमारे नज़रिए पर निर्भर हैं, इसलिए हमें स्वतंत्र और लचीला होना चाहिए। यिन और यांग बताते हैं कि विपरीत चीज़ें एक-दूसरे को संतुलित करती हैं। आज वू वेई का अर्थ है प्रकृति और अपनी सीमाओं के साथ काम करना, उनसे लड़ना नहीं।