South 고등학교 2학년 Contemporary Society and Ethics
अध्याय: 6
1. Ethics in modern life
What ethics is and types of ethics · Eastern and Western approaches
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
2. Bioethics and ecological ethics
Life and death · Love, sex and gender · Views of nature
- जैवनैतिकता: जीवविज्ञान और चिकित्सा में सही क्या है – जैवनैतिकता पूछती है कि जीवविज्ञान और चिकित्सा जो करने देते हैं, क्या हमें वह करना चाहिए। इसके चार सिद्धांत हैं: स्वायत्तता (पसंद का सम्मान), हितकारिता (भला करो), अहानिकारिता (नुक़सान न करो) और न्याय (बराबरी)। मानव गरिमा का अर्थ है कि इंसान कभी सिर्फ़ साधन नहीं, इसलिए सूचित सहमति ज़रूरी है। चिकित्सीय क्लोनिंग सख़्त नियमों से कहीं-कहीं मान्य है; इंसान की प्रजनन क्लोनिंग ज़्यादातर देशों में प्रतिबंधित है। जीवन की शुरुआत और अंत के सवाल फ़ायदों बनाम जोखिमों और मूल्यों पर तौले जाते हैं।
- सम्मान, सहमति और लैंगिक समानता: किशोरों के लिए यौन-नैतिकता – यौन-नैतिकता का मतलब है अपने शरीर और दूसरे लोगों के साथ सम्मान से पेश आना। सहमति साफ़, अपनी मर्ज़ी की और जानकारी वाली होनी चाहिए, और कभी भी बदली जा सकती है। दबाव, डर या ताक़त के कारण कही "हाँ" मान्य नहीं है। हर लिंग के व्यक्ति के अधिकार बराबर हैं और कोई भी भरोसेमंद बड़े से मदद माँग सकता है।
- पर्यावरण नीतिशास्त्र: किसकी परवाह करें? – पर्यावरण नीतिशास्त्र पूछता है कि प्रकृति, जानवरों और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है। नैतिक परवाह का एक घेरा सोचिए। मानव-केंद्रित दृष्टि में सिर्फ़ इंसान अंदर हैं; प्रकृति का साधन-मूल्य है। संवेदनवाद (बेंथम, सिंगर) दर्द महसूस करने वाले जानवर जोड़ता है: पशु कल्याण कहता है दुख घटाओ, पशु अधिकार (रीगन) कहता है जानवरों को सिर्फ़ साधन मत बनाओ। जीव-केंद्रित दृष्टि (श्वाइत्ज़र, टेलर) हर जीव को मूल्य देती है। पारिस्थितिकी-केंद्रित दृष्टि (लियोपोल्ड की भूमि नैतिकता, गहन पारिस्थितिकी) पूरे तंत्र को महत्व देती है। कई पूर्वी और आदिवासी परंपराएँ इंसान को प्रकृति का हिस्सा मानती हैं। पीढ़ियों के बीच न्याय और सतत विकास भावी लोगों को जोड़ते हैं।
3. Science and digital ethics
Ethics of research · ICT and new media ethics · Ethical AI
- विज्ञान और तकनीक में नैतिकता – विज्ञान और तकनीक बड़ी ताक़त देते हैं, इसलिए हम सिर्फ़ "क्या हम कर सकते हैं?" नहीं, "क्या हमें करना चाहिए?" भी पूछते हैं। विज्ञान की नैतिकता का मतलब है फ़ायदे और ख़तरे को तौलना, लोगों, जानवरों और प्रकृति को सुरक्षित रखना, आँकड़ों में ईमानदार रहना, नतीजों के उपयोग की ज़िम्मेदारी लेना, और विज्ञान के बड़े फ़ैसलों में नागरिकों को हिस्सेदार बनाना।
- डिजिटल पदचिह्न और नेट शिष्टाचार – डिजिटल पदचिह्न वह डेटा का निशान है जो हम ऑनलाइन छोड़ते हैं। सक्रिय पदचिह्न जान-बूझकर साझा होते हैं (पोस्ट, कमेंट, फ़ॉर्म); निष्क्रिय पदचिह्न हमारी जानकारी के बिना इकट्ठे होते हैं (कुकीज़, ब्राउज़िंग हिस्ट्री, लोकेशन, IP पता)। ये मिटाना कठिन है और बाद में दूसरे देख सकते हैं। हम डिजिटल समाज में रहते हैं जहाँ पढ़ाई, बैंकिंग, ख़रीदारी और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं; इसका ज़िम्मेदार उपयोगकर्ता डिजिटल नागरिक (नेटिज़न) है। नेट शिष्टाचार: नैतिक (कॉपीराइट मानें, भरोसेमंद जानकारी), सम्मानजनक (निजता, विविधता, बुलिंग नहीं) और ज़िम्मेदार (ज़्यादा निजी बातें नहीं, ट्रोल को जवाब नहीं)। संचार शिष्टाचार: सटीक, विनम्र, विश्वसनीय; सोशल मीडिया शिष्टाचार: सोच-समझकर पासवर्ड और प्राइवेसी, अपलोड से पहले सोचें, साझा करने से पहले जाँचें।
- AI नैतिकता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निष्पक्ष और सुरक्षित उपयोग – AI डेटा से पैटर्न सीखकर फ़ैसले करता है। AI नैतिकता पूछती है: क्या ये फ़ैसले निष्पक्ष, सुरक्षित और सम्मानजनक हैं? मुख्य मुद्दे: पक्षपात (अनुचित डेटा से अनुचित नतीजे), निजता (निजी डेटा के लिए सहमति और सुरक्षा), पारदर्शिता (AI ने क्यों तय किया, यह पता हो), जवाबदेही (इंसान ज़िम्मेदार रहे), सुरक्षा और दुरुपयोग (डीपफ़ेक, झूठी ख़बरें), और सामाजिक असर (नौकरियाँ, डिजिटल खाई, पर्यावरण)। ज़िम्मेदार AI का मतलब है इन सबकी जाँच उपयोग से पहले और बाद में।
4. Democratic citizens and ethics
Work ethics · Individual and common good · Fair distribution
- कार्य-नैतिकता और करियर नैतिकता – कार्य-नैतिकता वे मूल्य हैं जो तय करते हैं कि हम अपना काम कैसे करें: ईमानदारी, ज़िम्मेदारी, निष्पक्षता, सम्मान और सुरक्षा। काम हमें पैसा, विकास और दूसरों की सेवा का मौक़ा देता है। हर पेशे के अपने विशेष कर्तव्य होते हैं, जैसे डॉक्टर का राज़ रखना या इंजीनियर का सुरक्षा पहले रखना। कठिन चुनाव में एक सीढ़ी मदद करती है: रुको, तथ्य जानो, देखो किस पर असर, विकल्प लिखो, चुनो और जाँचो।
- नागरिक नैतिकता: सामूहिक हित, नागरिक और राज्य – नागरिक नैतिकता यह सिखाती है कि समाज के सदस्य के रूप में हमें कैसे व्यवहार करना चाहिए। साझे कुएँ की तरह मेरा हित और सबका हित टकरा सकते हैं। उचित बँटवारे से साधन सबके लिए बचा रहता है। नागरिकों के कर्तव्य हैं, अधिकारियों को ईमानदार रहना है, और अन्यायपूर्ण क़ानून का शांतिपूर्वक विरोध सविनय अवज्ञा कहलाता है।
- सामाजिक न्याय: सबको उचित हिस्सा – न्याय = हर व्यक्ति को उसका उचित हक़ देना। सामाजिक न्याय समाज में चीज़ों, सेवाओं और अवसरों के उचित बँटवारे के बारे में है। तीन सिद्धांत मार्गदर्शन करते हैं: बराबर वालों से बराबर बर्ताव, मेहनत और कौशल के अनुपात में इनाम, और विशेष ज़रूरत पर अतिरिक्त मदद। इनमें संतुलन चाहिए। जॉन रॉल्स ने कहा कि समाज के नियम 'अज्ञानता के पर्दे' के पीछे से चुनें, यानी यह जाने बिना कि हमें कौन सी जगह मिलेगी; तब समझदार व्यक्ति सबसे कमज़ोर की रक्षा करेगा। सामाजिक न्याय की शुरुआत सबकी बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, पानी, घर, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यूनतम मज़दूरी) पूरी करने से होती है। तरीके पर मतभेद है: मुक्त बाज़ार वाले खुली प्रतियोगिता और छोटा राज्य चाहते हैं; दूसरे राज्य से कल्याण चाहते हैं। भारत दोनों मिलाता है।
5. Culture and economic ethics
Art and morality · Consumption ethics · Multiculturalism
- कला का दर्शन: कला क्या है, और क्यों ज़रूरी है? – कला का दर्शन (सौंदर्यशास्त्र का हिस्सा) पूछता है: कला क्या है, सुंदरता क्या है, क्या रुचि सिर्फ़ निजी है, रचनाकार कौन है, और क्या कला सच दिखा सकती है? जवाब बदलते रहे हैं: "कला प्रकृति की नक़ल है" से "कला भावना है" तक और "विचार ही कला है" तक।
- नैतिक उपभोग – नैतिक उपभोग का मतलब है ख़रीदते समय यह सोचना कि चीज़ किसने बनाई और प्रकृति से क्या लिया। फ़ेयर ट्रेड में मज़दूर को सही हिस्सा मिलता है; कम ख़रीदने, पुरानी या मरम्मत की चीज़ें अपनाने से पदचिह्न घटता है। बहुत से छोटे चुनाव दुकानों का माल बदल देते हैं।
- सांस्कृतिक विविधता – सांस्कृतिक विविधता का मतलब है अलग-अलग जीवन-शैली वाले कई समूह साथ रहते हैं। नृजातिकेंद्रितता दूसरों को अपनी संस्कृति से जाँचती है; सांस्कृतिक सापेक्षवाद पहले रिवाज़ को उसके अपने संदर्भ में समझता है। पूर्वाग्रह और रूढ़ छवियाँ सम्मान में रुकावट हैं। समाज में मुख्यधारा, उपसंस्कृतियाँ और प्रतिसंस्कृतियाँ होती हैं। सार्वभौमिक मानव अधिकार सीमा तय करते हैं: फ़र्क का सम्मान हो, इंसान को नुक़सान नहीं।
6. Ethics of peace and coexistence
Social conflict and integration · Unification and peace on the peninsula · International justice
- शांति शिक्षा: लोग स्थायी शांति कैसे बनाते हैं – शांति का मतलब सिर्फ़ 'युद्ध नहीं' नहीं है। नकारात्मक शांति = लड़ाई नहीं। सकारात्मक शांति = सबके लिए न्याय, भरोसा और अच्छा जीवन। हिंसा तीन तरह की होती है: प्रत्यक्ष (मारना, युद्ध), संरचनात्मक (अन्यायी नियम जो लोगों को गरीब रखें) और सांस्कृतिक (ऐसे विचार जो नुकसान को सामान्य दिखाएँ)। विचारकों ने रास्ते दिए: मोज़ी ने सबसे बराबर प्रेम और हमलावर युद्ध का विरोध सिखाया; कांट ने कहा न्यायपूर्ण सरकारें, आज़ाद देशों का संघ और मेहमानों से अच्छा बर्ताव शांति को स्थायी बनाते हैं; गांधी ने अहिंसक विरोध दिखाया। टकराव क़दम-दर-क़दम सुलझता है: शांत हों, सुनें, ज़रूरत खोजें, उपाय सोचें, समझौता करें। बँटवारे या युद्ध के बाद मेल-मिलाप पुल की तरह बनता है: बातचीत, सच, माफ़ी, व्यापार, परिवार मिलन और साझा काम। जर्मनी (1990) और दक्षिण अफ़्रीका का सत्य आयोग इसके उदाहरण हैं; कोरियाई प्रायद्वीप जैसे बँटे लोग आज भी शांतिपूर्ण एकीकरण पर चर्चा करते हैं।
- वैश्विक न्याय: उचित व्यापार, सहायता और असमानता घटाना – वैश्विक न्याय यह पूछता है कि दुनिया के देशों और लोगों के बीच क्या उचित है। आमदनी में बहुत असमानता है। उचित व्यापार (fair trade) उत्पादकों को सही दाम देता है, और विकास सहायता (ODA) ग़रीब देशों को स्कूल, स्वास्थ्य और रोज़गार बनाने में मदद करती है। असली न्याय के लिए शांति, ईमानदार नियम और ग़रीब देशों की आवाज़ भी ज़रूरी है।