सांस्कृतिक विविधता क्या है?
संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा तरीका है: भाषा, खाना, कपड़े, त्योहार, कला, विश्वास और शिष्टाचार। इसे हम परिवार और समाज से सीखते हैं; जन्म से साथ नहीं लाते।
सांस्कृतिक विविधता का मतलब है कि कई अलग संस्कृतियाँ एक कस्बे, देश या दुनिया में साथ-साथ रहती हैं। कई सांस्कृतिक समूहों वाला समाज बहुसांस्कृतिक समाज कहलाता है।
विविधता से कई स्रोतों का खाना, संगीत, विचार और हुनर मिलता है। जब समूह एक-दूसरे को नहीं समझते या नौकरी, ज़मीन और ताक़त के लिए होड़ करते हैं तब टकराव भी हो सकता है। कई देशों के पुराने टकराव इसी से उपजे, इसलिए फ़र्क के साथ जीना हर नागरिक के लिए एक हुनर है। पूरे देश इसे कैसे सँभालते हैं, यह बहुसंस्कृतिवाद में है।
नृजातिकेंद्रितता और सांस्कृतिक सापेक्षवाद
नृजातिकेंद्रितता का मतलब है दूसरी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति के पैमाने से जाँचना और अपनी को सबसे अच्छा मानना। तब दूसरे रिवाज़ अजीब, मज़ाकिया या ग़लत लगते हैं।
सांस्कृतिक सापेक्षवाद इसकी उलटी आदत है: किसी रिवाज़ को परखने से पहले उसके अपने संदर्भ (इतिहास, जलवायु, विश्वास) में समझना। मोटी ऊनी पोशाक पहाड़ में समझदारी है और समुद्र-किनारे अजीब। कोई "बेहतर" नहीं। वे अलग जगहों के जवाब हैं।
सापेक्षवाद का मतलब "सब चलता है" नहीं है। यह पहले समझने का तरीका है। फ़ैसला उसके बाद, तथ्यों के साथ।
पूर्वाग्रह, रूढ़ छवि और सम्मान
रूढ़ छवि (stereotype) पूरे समूह की एक सरल, पक्की तस्वीर है ("ये सब एक जैसे हैं")। पूर्वाग्रह तथ्य जानने से पहले बनी राय है, आमतौर पर बुरी। जब पूर्वाग्रह काम बन जाए (नौकरी या सीट से मना करना) तो वह भेदभाव है।
- रूढ़ छवियाँ भूल जाती हैं कि एक समूह के लोग बहुत अलग होते हैं।
- पूर्वाग्रह सीखा जाता है, इसलिए भुलाया भी जा सकता है: लोगों से मिलो, खूब पढ़ो, प्यार से सवाल पूछो।
- सहिष्णुता (फ़र्क को सह लेना) पहला क़दम है। सम्मान (लोगों को बराबर मानकर क़दर करना) लक्ष्य है।
मुख्यधारा, उपसंस्कृति और प्रतिसंस्कृति
मुख्यधारा की संस्कृति (प्रभावी संस्कृति) वह है जिसे समाज के ज़्यादातर लोग मानते हैं और जो साझा नियम तय करती है। उपसंस्कृति बड़े समाज के भीतर साझा शैली वाला छोटा समूह है, जैसे स्कूल का बैंड, खेल-प्रशंसकों का समूह या कोई क्षेत्रीय समुदाय। यह रंग जोड़ती है पर मुख्य नियम मानती है।
प्रतिसंस्कृति कुछ मुख्य नियमों या मूल्यों को नकारती है और विकल्प देती है। समय के साथ उपसंस्कृतियों के विचार मुख्यधारा में पहुँच सकते हैं और संस्कृति बदलती है। फ़ैशन, बोलचाल और संगीत ऐसे ही बदलते हैं।
सीमा कहाँ है? सार्वभौमिक मानदंड और मानव अधिकार
अगर हर रिवाज़ का सम्मान करना है, तो जो रिवाज़ लोगों को चोट पहुँचाएँ उनका क्या? समाज इसका जवाब सार्वभौमिक मानदंडों से देते हैं: ऐसे बुनियादी अधिकार जो हर इंसान के हैं, चाहे उसकी संस्कृति कुछ भी हो, जैसे सुरक्षा, शिक्षा, बराबर सम्मान और आस्था की आज़ादी। ये मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) में दर्ज हैं।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ संस्कृति की भी रक्षा करती हैं। UNESCO की सांस्कृतिक विविधता पर सार्वभौमिक घोषणा (2001) कहती है कि मानवता के लिए सांस्कृतिक विविधता उतनी ही ज़रूरी है जितनी प्रकृति के लिए जैव विविधता, और विविधता के नाम पर मानव अधिकार नहीं तोड़े जा सकते।
इसलिए नियम के दो हिस्से हैं: फ़र्क का सम्मान करो (खाना, पहनावा, भाषा, त्योहार) और संस्कृति के नाम पर इंसान को नुक़सान कभी स्वीकार मत करो। सह-अस्तित्व यानी इन्हीं शर्तों पर शांति से साथ रहना।
करके देखो
अपनी कक्षा के लिए "संस्कृति कार्ड" बनाओ: तीन दोस्तों से एक त्योहार, एक खाना और एक पारिवारिक रिवाज़ के बारे में पूछो। एक बात लिखो जो तुम्हें पता नहीं थी। फिर एक रूढ़ छवि लिखो जो तुमने सुनी है और एक असली इंसान जो उसे ग़लत साबित करता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नृजातिकेंद्रितता = दूसरों को सिर्फ़ अपनी संस्कृति से जाँचना
- सांस्कृतिक सापेक्षवाद = पहले रिवाज़ को उसके अपने संदर्भ में समझना
- रूढ़ छवि = समूह की पक्की तस्वीर; पूर्वाग्रह = तथ्य से पहले राय; भेदभाव = अन्यायपूर्ण काम
- मुख्यधारा + उपसंस्कृति (शैली जोड़ती, नियम मानती) + प्रतिसंस्कृति (नियम नकारती)
- फ़र्क का सम्मान, पर नुक़सान कभी नहीं: सार्वभौमिक मानव अधिकार सीमा हैं
हल किए गए उदाहरण
1. बर्फ़ीले इलाक़े का एक बच्चा मार्च में मोटा कोट पहनता है; तटीय इलाक़े का बच्चा हँसता है। हँसने वाला बच्चा कौन-सा रवैया दिखा रहा है, और सापेक्षवाद क्या करता?
हँसने वाला बच्चा नृजातिकेंद्रितता दिखा रहा है: अपनी गरम जलवायु से जाँच रहा है। सापेक्षवाद "क्यों?" पूछता और जानता कि बर्फ़ीली जगह में मार्च में भी ठंड होती है, इसलिए कोट ठीक है।
2. कोई कहता है "उस गाँव के लोग सब कंजूस होते हैं"। यह क्या है और इसे कैसे परखें?
यह रूढ़ छवि है (और पूर्वाग्रह भी, अगर बोलने वाला उनसे मिला नहीं)। गाँव के कई लोगों से मिलकर परखो; पता चलेगा कि वे अलग-अलग हैं।
3. वर्गीकरण करो: (क) स्कूल का रॉक बैंड, (ख) वह राष्ट्रीय भाषा जो ज़्यादातर लोग बोलते हैं, (ग) एक समूह जो समाज के ड्रेस कोड को खुलेआम नकारता है।
(क) उपसंस्कृति, (ख) मुख्यधारा की संस्कृति, (ग) प्रतिसंस्कृति।
4. एक समुदाय कहता है कि एक रिवाज़ लड़कियों को स्कूल जाने से रोकता है और उसे "हमारी संस्कृति" बताता है। क्या सापेक्षवाद इसे स्वीकार करे?
नहीं। सापेक्षवाद रिवाज़ का कारण समझने में मदद करता है, पर सार्वभौमिक मानव अधिकार (जैसे शिक्षा का अधिकार) हर बच्चे की रक्षा करते हैं। नुक़सान सम्मान के घेरे के बाहर है।
5. एक कस्बे में दो त्योहार एक ही दिन पड़ते हैं। सम्मान दिखाने के दो तरीके लिखो।
शोर और जुलूस ऐसे तय करो कि टकराएँ नहीं, और एक-दूसरे को बधाई दो या मिलने जाओ। दोनों तरीके बिना नुक़सान पहुँचाए फ़र्क का सम्मान दिखाते हैं।
6. "पहला क़दम" से "लक्ष्य" तक क्रम लगाओ: सम्मान, सहिष्णुता, अज्ञान।
अज्ञान (जानना नहीं) → सहिष्णुता (सह लेना) → सम्मान (बराबर मानकर क़दर)। लक्ष्य सम्मान है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि सांस्कृतिक सापेक्षवाद का मतलब हर काम स्वीकार करना है। इसका मतलब पहले समझना है; इंसान को नुक़सान फिर भी मंज़ूर नहीं।
- पूर्वाग्रह और भेदभाव को एक समझना। पूर्वाग्रह राय है; भेदभाव अन्यायपूर्ण काम।
- उपसंस्कृति को "बुरी" कहना। उपसंस्कृति बस अपनी शैली वाला छोटा समूह है; वह हानिरहित और रचनात्मक हो सकती है।
- मानना कि विविधता सिर्फ़ जाति-नस्ल या धर्म की है। इसमें भाषा, क्षेत्र, खाना, उम्र, क्षमता और बहुत कुछ आता है।