South 고등학교 2학년 Society and Culture
अध्याय: 4
1. Understanding and researching social phenomena
Nature of social phenomena · Quantitative and qualitative methods · Data collection methods · Research ethics
- समाजशास्त्रीय शोध विधियाँ – समाजशास्त्री समाज को शोध से समझते हैं, कदम-दर-कदम: विषय चुनो, उद्देश्य या परिकल्पना लिखो, छोटा पायलट अध्ययन करो, नमूना चुनो, आँकड़े जुटाओ, विश्लेषण करो और निष्कर्ष निकालो। नमूना पूरी आबादी में से चुना गया छोटा समूह है; यह प्रतिनिधि होना चाहिए ताकि नतीजे सब पर लागू हों। मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं (प्रश्नावली, संरचित साक्षात्कार, सरकारी आँकड़े); गुणात्मक आँकड़े शब्द और अर्थ हैं (असंरचित साक्षात्कार, अवलोकन, दस्तावेज़)। प्राथमिक आँकड़े शोधकर्ता खुद जुटाता है; द्वितीयक पहले से मौजूद होते हैं। अच्छा शोध विश्वसनीय (दोहराने पर वही नतीजा), वैध (सच्ची तस्वीर) और प्रतिनिधि होता है। विधि का चुनाव व्यावहारिक (समय, पैसा, पहुँच), नैतिक (सहमति, गोपनीयता, नुकसान न हो) और सैद्धांतिक कारणों से होता है: प्रत्यक्षवादी (positivist) संख्याएँ पसंद करते हैं, व्याख्यावादी (interpretivist) लोगों के अर्थ समझना।
- शोध नैतिकता: शोध सही तरीके से कैसे करें – शोध नैतिकता वे नियम हैं जो शोध को सुरक्षित और निष्पक्ष रखते हैं। पाँच बड़े नियम: नुकसान न करो, सूचित सहमति लो, गोपनीयता रखो, आँकड़ों में ईमानदार रहो, और हर स्रोत को श्रेय दो। अच्छे शोध में अच्छी विधि और अच्छा व्यवहार दोनों चाहिए।
2. Social structure and change
Structure and the individual · Groups and organisations · Deviance · Social change
- समाज और समाजशास्त्र का परिचय – समाज उन समूहों और रिश्तों का जाल है जिनमें हम जीते हैं। हर व्यक्ति अलग है, फिर भी हमेशा परिवार, कक्षा, गाँव जैसे समूहों का हिस्सा है। समाज एक नहीं, अनेक हैं, और हर समाज के अंदर लोगों को पैसा, सत्ता और सम्मान बराबर नहीं मिलता। समाज का वैज्ञानिक अध्ययन यानी समाजशास्त्र 19वीं सदी के यूरोप में जन्मा, जब तर्क, क्रांति और कारखानों ने जीवन तेज़ी से बदला। यह सामाजिक जीवन के लगभग हर हिस्से को पढ़ता है और अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, मनोविज्ञान और मानवविज्ञान से जुड़ा है।
- विचलन और सामाजिक नियंत्रण – विचलन वह व्यवहार है जो समूह द्वारा अपेक्षित मानदंड तोड़ता है। सामाजिक मानदंड रिवाज़ से आते हैं; क़ानूनी मानदंड क़ानून हैं, जिन्हें तोड़ना अपराध या अपचार (delinquency) है। विचलन सापेक्ष है: समूह और समय के साथ बदलता है। समाज अनौपचारिक और औपचारिक नियंत्रण से, सकारात्मक व नकारात्मक प्रतिबंधों के ज़रिए व्यवस्था बनाए रखता है। सिद्धांत विचलन को तनाव, समूह से सीखने, कमज़ोर सामाजिक बंधनों और ठप्पे से समझाते हैं, जिससे कलंक और विचलित करियर बन सकता है। सरकारी अपराध आँकड़ों में बहुत-सा अपराध छिपा रह जाता है।
- गाँव और नगर में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्था – सामाजिक परिवर्तन यानी समाज के ढाँचे में बड़ा और टिकाऊ बदलाव। यह धीमा (उद्विकासीय) या अचानक (क्रांतिकारी) हो सकता है, और ढाँचे, विचार या मूल्य बदल सकता है। इसके कारण हैं पर्यावरण, तकनीक और अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति। सामाजिक व्यवस्था दूसरा पहलू है: समाज साझा मूल्यों, प्रभुत्व, सत्ता और कानून से स्थिर रहता है। व्यवस्था को प्रतिरोध, अपराध और हिंसा चुनौती देते हैं। गाँव, कस्बा और नगर आकार, घनत्व और काम में अलग हैं, और सब अपने ढंग से बदलते हैं।
3. Everyday culture and cultural change
Views of popular culture · Media effects · Subcultures and mainstream · Cultural change and conflict
- लोकप्रिय संस्कृति: जो लाखों लोग पसंद करते हैं, और क्यों यह मायने रखता है – लोकप्रिय संस्कृति वह संगीत, फ़िल्में, टीवी, गेम, फ़ैशन, खेल, मीम और सितारे हैं जिन्हें बहुत सारे आम लोग पसंद करते हैं। जनसंचार माध्यम इसे लाखों लोगों तक एक साथ पहुँचाते हैं, खासकर 1950 के बाद से। कुछ विचारक इसे "संस्कृति उद्योग" मानते हैं जो निष्क्रिय जनता को एक जैसे उत्पाद बेचता है; दूसरे मानते हैं कि दर्शक सक्रिय हैं, चुनते और बदलते हैं। उपसंस्कृतियाँ अपनी शैली बनाती हैं, जो बाद में मुख्यधारा में आकर दुनिया भर में फैल सकती है।
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
- सांस्कृतिक विविधता – सांस्कृतिक विविधता का मतलब है अलग-अलग जीवन-शैली वाले कई समूह साथ रहते हैं। नृजातिकेंद्रितता दूसरों को अपनी संस्कृति से जाँचती है; सांस्कृतिक सापेक्षवाद पहले रिवाज़ को उसके अपने संदर्भ में समझता है। पूर्वाग्रह और रूढ़ छवियाँ सम्मान में रुकावट हैं। समाज में मुख्यधारा, उपसंस्कृतियाँ और प्रतिसंस्कृतियाँ होती हैं। सार्वभौमिक मानव अधिकार सीमा तय करते हैं: फ़र्क का सम्मान हो, इंसान को नुक़सान नहीं।
- सांस्कृतिक परिवर्तन: संस्कृतियाँ कैसे फैलती, मिलती और बढ़ती हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का तरीका है: खाना, कपड़े, भाषा, विश्वास और औज़ार। यह कभी रुकती नहीं। जब आदतें एक समूह से दूसरे तक फैलती हैं (प्रसार), जब लंबे संपर्क में समूह आदतें मिला लेते हैं (मेल या acculturation), और जब लोग अपने समूह में नए विचार बनाते हैं (आविष्कार), तब सांस्कृतिक परिवर्तन होता है।
4. Inequality and social welfare
Theories of inequality · Forms of inequality today · Welfare states
- आय असमानता – आय असमानता का मतलब है कि लोगों के बीच आय बराबर नहीं बँटी है। अर्थशास्त्री लोगों को सबसे ग़रीब से सबसे अमीर तक क्रम में रखकर 20-20% के पाँच समूहों (पंचमक, quintiles) में बाँटते हैं और उनके हिस्से की तुलना करते हैं। लॉरेंज़ वक्र लोगों के संचयी % के सामने आय का संचयी % दिखाता है; यह समानता की सीधी रेखा से जितना ज़्यादा झुके, असमानता उतनी ज़्यादा। गिनी गुणांक = A ÷ (A + B) इसे 0 (पूरी समानता) से 1 (सारी आय एक व्यक्ति के पास) के बीच एक संख्या बना देता है। संपत्ति (जो तुम्हारे पास है) आमतौर पर आय (जो तुम कमाते हो) से ज़्यादा असमान होती है। सरकार प्रगतिशील कर, सहायता, न्यूनतम मज़दूरी और मुफ़्त शिक्षा-स्वास्थ्य से असमानता घटाती है।
- कल्याणकारी राज्य और सामाजिक सुरक्षा – कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जो लोगों को जीवन के बड़े जोखिमों से बचाता है: बीमारी, नौकरी छूटना, बुढ़ापा, विकलांगता और ग़रीबी। इसके लिए एक सुरक्षा-जाल होता है जिसके तीन हिस्से हैं। सामाजिक बीमा वेतन से लिए गए अंशदान से चलता है। सामाजिक सहायता करों से ज़रूरतमंदों को मिलती है। स्कूल और अस्पताल जैसी सार्वजनिक सेवाएँ सबके लिए खुली हैं। देश इन्हें अलग-अलग ढंग से मिलाते हैं: उदार (कम कर, थोड़ी मदद), रूढ़िवादी (मदद नौकरी से जुड़ी) और सामाजिक-लोकतांत्रिक (ऊँचा कर, सबके लिए मदद)। आज बढ़ती उम्र, बढ़ता ख़र्च, वैश्वीकरण और अनौपचारिक काम इसकी चुनौतियाँ हैं।