आय, संपत्ति और उनका वितरण
आय समय के साथ आने वाला पैसा है (प्रवाह): मज़दूरी, वेतन, लाभ, किराया, ब्याज और सरकारी सहायता। संपत्ति किसी एक समय पर तुम्हारे पास जो है (स्टॉक): घर, ज़मीन, बचत, शेयर, सोना।
संपत्ति से आय होती है (किराया, ब्याज), और आय बचाकर संपत्ति बनती है। इसलिए संपत्ति की असमानता आमतौर पर आय की असमानता से बहुत ज़्यादा होती है।
बाज़ार अर्थव्यवस्था में ज़्यादातर आय उत्पादन के साधनों से आती है: श्रम को मज़दूरी, भूमि को लगान, पूँजी को ब्याज और उद्यम को लाभ। इन साधनों में बँटवारा कार्यात्मक वितरण है; लोगों या परिवारों में बँटवारा व्यक्तिगत वितरण है।
असमानता मापना: पंचमक, लॉरेंज़ वक्र और गिनी गुणांक
पंचमक हिस्से: परिवारों को आय के क्रम में रखो, 20-20% के पाँच समूह बनाओ और हर समूह का कुल आय में % निकालो। 20:20 अनुपात = सबसे अमीर 20% का हिस्सा ÷ सबसे ग़रीब 20% का हिस्सा।
लॉरेंज़ वक्र में x-अक्ष पर लोगों का संचयी % और y-अक्ष पर आय का संचयी % होता है। तिरछी रेखा पूर्ण समानता की रेखा है। वक्र इसके नीचे जितना झुके, असमानता उतनी ज़्यादा।
गिनी गुणांक = A ÷ (A + B), जहाँ A रेखा और वक्र के बीच का क्षेत्र और B वक्र के नीचे का क्षेत्र है। यह 0 (सब बराबर) से 1 (सारी आय एक के पास) तक होता है; कभी-कभी % में (0–100) लिखते हैं। मोटे मान: नॉर्डिक देश लगभग 0.25–0.28; भारत लगभग 0.33–0.35 (उपभोग के आधार पर); अमेरिका लगभग 0.39–0.41; दक्षिण अफ़्रीका लगभग 0.6।
हल किया विचार
A + B आधा वर्ग है, तो B = 0.3 हो तो A = 0.5 − 0.3 = 0.2 और गिनी = 0.2 ÷ 0.5 = 0.4।
सीमाएँ: अलग-अलग आकार के वक्रों का गिनी एक हो सकता है; गिनी यह नहीं बताता कि देश अमीर है या ग़रीब; सर्वे में बहुत अमीर लोग और अनौपचारिक क्षेत्र छूट सकते हैं।
ग़रीबी, असमानता के कारण और असर
निरपेक्ष ग़रीबी: भोजन, पानी, घर, कपड़े जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी पर्याप्त न होना। विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय रेखा लगभग 3 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति (2021 की क़ीमतें) है। सापेक्ष ग़रीबी: अपने समाज के दूसरे लोगों से बहुत कम होना, अक्सर माध्यिका (median) आय के 50% या 60% से कम।
असमानता के कारण
- शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य में अंतर।
- विरासत में मिली संपत्ति और ज़मीन।
- तकनीक और वैश्वीकरण, जो ऊँचे कौशल वाले काम का वेतन बढ़ाते हैं।
- लिंग, जाति, नस्ल या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव।
- बेरोज़गारी, अनौपचारिक नौकरियाँ, कमज़ोर मोलभाव शक्ति।
- ऐसी कर व्यवस्था जो संपत्ति से होने वाली आय को छूट देती है।
असर
- कुछ असमानता मेहनत, पढ़ाई और जोखिम उठाने का प्रोत्साहन देती है।
- बहुत ज़्यादा असमानता सामाजिक गतिशीलता, स्वास्थ्य और भरोसा घटाती है, अपराध बढ़ा सकती है और अमीरों को राजनीतिक ताक़त देती है।
- ग़रीब अतिरिक्त आय का बड़ा हिस्सा ख़र्च करते हैं, इसलिए बहुत ज़्यादा असमानता माँग को कमज़ोर कर सकती है।
गाँव-शहर, आदिवासी समुदाय, महिलाएँ, प्रवासी और दिव्यांग लोग अक्सर अतिरिक्त रुकावटें झेलते हैं।
ग़रीबी और असमानता कम करने की नीतियाँ
- प्रगतिशील आयकर: ज़्यादा कमाने वाले ज़्यादा प्रतिशत कर देते हैं, तो कर के बाद आय पास-पास आती है।
- हस्तांतरण भुगतान (सहायता): पेंशन, बाल सहायता, बेरोज़गारी भत्ता, नक़द सहायता (जैसे भारत में किसानों के लिए पीएम-किसान)।
- सार्वजनिक सेवाएँ: मुफ़्त स्कूल, स्वास्थ्य और आवास ग़रीबों का जीवन-स्तर उठाते हैं।
- न्यूनतम मज़दूरी और रोज़गार गारंटी (जैसे मनरेगा: ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का भुगतान वाला काम)।
- संपत्ति और विरासत कर, भूमि सुधार।
- भेदभाव के ख़िलाफ़ समान अवसर क़ानून।
समझौते (trade-offs): बहुत ऊँचे कर काम या निवेश का प्रोत्साहन घटा सकते हैं, और कुछ पैसा प्रशासन में ख़र्च होता है। अगर ज़्यादा कमाते ही सहायता बंद हो जाए, तो ग़रीबी का जाल बन सकता है। अच्छी नीति न्याय (समता) और दक्षता के बीच संतुलन रखती है।
करके देखो
5 दोस्तों से पूछो कि पिछले हफ़्ते उन्होंने कितने पन्ने पढ़े। उन्हें क्रम में रखो, हर एक का कुल में हिस्सा निकालो और ग्राफ़ पेपर पर लॉरेंज़ वक्र बनाओ। क्या तुम्हारी कक्षा 'बराबर पढ़ने वाली' है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गिनी गुणांक G = A ÷ (A + B), 0 ≤ G ≤ 1
- इकाई वर्ग पर A + B = 1/2, इसलिए G = 1 − 2B
- 20:20 अनुपात = सबसे अमीर 20% का हिस्सा ÷ सबसे ग़रीब 20% का हिस्सा
- सापेक्ष ग़रीबी रेखा = माध्यिका आय का 50% या 60%
हल किए गए उदाहरण
1. पंचमक हिस्से 4%, 9%, 15%, 22%, 50% हैं। 20:20 अनुपात निकालो।
अनुपात = 50 ÷ 4 = 12.5। सबसे अमीर 20% को सबसे ग़रीब 20% से 12.5 गुना आय मिलती है।
2. इकाई वर्ग पर बने लॉरेंज़ चित्र में वक्र के नीचे का क्षेत्र B = 0.32 है। गिनी गुणांक निकालो।
A + B = 0.5, तो A = 0.5 − 0.32 = 0.18। G = 0.18 ÷ 0.5 = 0.36।
3. हिस्से 5%, 10%, 15%, 25%, 45% से लॉरेंज़ वक्र के बिंदु निकालो।
संचयी: 20% → 5%, 40% → 15%, 60% → 30%, 80% → 55%, 100% → 100%। बिंदु (20,5), (40,15), (60,30), (80,55), (100,100) को (0,0) से जोड़ो।
4. किसी देश में माध्यिका आय ₹30,000 प्रति माह है। 60% पर सापेक्ष ग़रीबी रेखा निकालो।
0.6 × 30,000 = ₹18,000 प्रति माह। इससे कम आय वाले परिवार सापेक्ष ग़रीबी में हैं।
5. देश X का गिनी 0.28 और देश Y का 0.52 है। कौन ज़्यादा असमान है और उनके वक्र कैसे दिखेंगे?
Y ज़्यादा असमान है। उसका लॉरेंज़ वक्र समानता रेखा से बहुत दूर झुकेगा; X का वक्र रेखा के पास रहेगा।
6. ₹5 लाख तक आय पर 10% और ₹5 लाख से ऊपर 30% कर है। ₹8 लाख कमाने वाला कितना कर देगा, और क्या यह कर प्रगतिशील है?
कर = 10% × 5 लाख + 30% × 3 लाख = 0.5 + 0.9 = ₹1.4 लाख। औसत दर = 1.4 ÷ 8 = 17.5%, जो ₹5 लाख वाले की 10% दर से ज़्यादा है, इसलिए कर प्रगतिशील है।
आम गलतियाँ
- आय और संपत्ति को एक समझना। आय प्रवाह है (प्रति माह या साल); संपत्ति स्टॉक है (एक समय पर)।
- यह सोचना कि ऊँचा गिनी = अमीर देश। गिनी बँटवारे की बराबरी मापता है, आय की मात्रा नहीं।
- लॉरेंज़ वक्र को समानता रेखा के ऊपर बनाना। वह हमेशा रेखा पर या उसके नीचे होता है।
- निरपेक्ष और सापेक्ष ग़रीबी को एक मानना। कोई व्यक्ति निरपेक्ष रेखा से ऊपर होकर भी सापेक्ष रूप से ग़रीब हो सकता है।