France Terminale Economic and Social Sciences (specialty)
अध्याय: 3
1. Economics
Economic growth · International trade and production · Fighting unemployment · Financial crises and regulation · Economic policy in Europe
- आर्थिक संवृद्धि: देश हर साल ज़्यादा कैसे बनाता है – आर्थिक संवृद्धि यानी देश के वास्तविक GDP में बढ़त: एक साल में बनी सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, कीमत-वृद्धि का असर हटाकर। संवृद्धि दर वास्तविक GDP का प्रतिशत बदलाव है। प्रति व्यक्ति GDP बताता है कि औसतन हर व्यक्ति के हिस्से कितना उत्पादन आया। व्यापार चक्र में संवृद्धि प्रवृत्ति के ऊपर-नीचे होती है, जिससे उत्पादन अंतर बनता है। संवृद्धि ज़्यादा और बेहतर साधनों (मज़दूर, कौशल, मशीनें, तकनीक) से आती है; इससे आय और नौकरियाँ बढ़ती हैं, पर प्रदूषण, असमानता और महँगाई भी आ सकती है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार – देशों की सीमाओं के पार वस्तुओं और सेवाओं का ख़रीदना-बेचना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है। बाहर बेचना निर्यात और बाहर से ख़रीदना आयात है। इससे देश को विदेशी मुद्रा, विकास और रोज़गार मिलते हैं, और कंपनियों को लाभ और नए बाज़ार। निर्यात और आयात तय चरणों से होते हैं और इनमें साख पत्र, बिल ऑफ़ लेडिंग जैसे कई प्रलेख लगते हैं। WTO (1995) व्यापार के नियम बनाता है और बाधाएँ घटाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: आधार, संतुलन, WTO और पत्तन – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान है। यह वस्तु-विनिमय से शुरू हुआ, रेशम मार्ग जैसे रास्तों पर बढ़ा, क्रूर दास व्यापार और औपनिवेशिक व्यापार से गुज़रा, और उद्योगों के साथ फैला। देश इसलिए व्यापार करते हैं क्योंकि वे संसाधन, जनसंख्या, विकास, विदेशी निवेश और परिवहन में अलग हैं। व्यापार संतुलन निर्यात और आयात की तुलना है। व्यापार द्विपक्षीय या बहुपक्षीय हो सकता है; मुक्त व्यापार रुकावटें घटाता है, जबकि राशिपातन विदेश में लागत से कम पर माल बेचता है। WTO विश्व नियम बनाता है, प्रादेशिक समूह पड़ोसियों को जोड़ते हैं, और कई तरह के पत्तन व्यापार के द्वार हैं।
- बेरोज़गारी: अर्थ, दर, प्रकार, नुकसान और उपाय – कोई व्यक्ति बेरोज़गार तब है जब उसके पास नौकरी नहीं, वह काम कर सकता है, और सक्रिय रूप से काम ढूँढ रहा है। श्रम बल यानी सभी रोज़गार वाले और सभी बेरोज़गार। बेरोज़गारी दर = बेरोज़गार ÷ श्रम बल × 100। अर्थशास्त्री कारण के हिसाब से इसे बाँटते हैं: घर्षणात्मक (नौकरियों के बीच), संरचनात्मक (कौशल या जगह नौकरियों से मेल नहीं खाती), चक्रीय (कुल माँग में मंदी) और मौसमी (कुछ ही महीने काम)। बेरोज़गारी से व्यक्ति की आय जाती है, देश का उत्पादन और कर घटता है, और सेहत व समाज को नुकसान होता है। चक्रीय के लिए सरकार ख़र्च और ब्याज दर का सहारा लेती है; बाक़ी के लिए प्रशिक्षण, जानकारी और आवागमन। कुछ बेरोज़गारी हमेशा रहती है; सबसे कम टिकाऊ स्तर को प्राकृतिक दर कहते हैं।
- वित्तीय संकट और नियमन – वित्तीय संकट बैंकों या बाज़ारों पर भरोसा अचानक टूटने का नाम है। यह अक्सर सट्टे के बुलबुले से शुरू होता है: कीमतें असली मूल्य से कहीं ऊपर चली जाती हैं क्योंकि लोग सिर्फ़ दोबारा बेचने के लिए ख़रीदते हैं। बुलबुला फूटने पर निवेशक और बैंक पैसा खोते हैं, जमाकर्ता घबराते हैं और असफलता एक बैंक से दूसरे में फैलती है। फिर बैंक कर्ज़ देना रोक देते हैं, कंपनियाँ उत्पादन और नौकरियाँ घटाती हैं और संकट वास्तविक अर्थव्यवस्था तक पहुँच जाता है। 1930 की महामंदी और 2008 का संकट मशहूर उदाहरण हैं। पर्यवेक्षक जोखिम घटाने के लिए नियम बनाते हैं, जैसे शोधन क्षमता अनुपात का न्यूनतम स्तर (जोखिम वाली संपत्तियों के मुकाबले पूँजी)।
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।
2. Sociology and political science
Social structure of France · School and social destiny · Social mobility · Changes in work and employment · Political engagement
- सामाजिक स्तरीकरण – सामाजिक स्तरीकरण का मतलब है समाज का लोगों के समूहों को परतों (स्तरों) में ऊँचा-नीचा रखना। ऊपर की परतों को ज़्यादा धन, शक्ति और सम्मान मिलता है। चार मुख्य व्यवस्थाएँ हैं: दासता, जागीर, जाति और वर्ग। वर्ग आय, संपत्ति, व्यवसाय और शिक्षा से तय होता है। प्रकार्यवादी कहते हैं असमान इनाम समाज के काम आते हैं; संघर्षवादी कहते हैं इससे अमीर ऊपर बने रहते हैं। एक परत से दूसरी में जाना सामाजिक गतिशीलता है।
- शिक्षा का समाजशास्त्र: स्कूल क्या करते हैं और परिणाम अलग क्यों होते हैं – समाजशास्त्री पूछते हैं कि स्कूल समाज के लिए क्या करता है और कुछ समूह बेहतर क्यों करते हैं। प्रकार्यवादी कहते हैं कि शिक्षा साझा मूल्य बनाती है, नौकरी के कौशल सिखाती है और योग्यता से लोगों को भूमिकाएँ देती है। मार्क्सवादी कहते हैं कि स्कूल छिपे पाठ्यक्रम के ज़रिए असमान कार्यस्थल की नक़ल करता है, जिससे वर्ग असमानता आगे बढ़ती है। परिणाम सामाजिक वर्ग, लिंग और जातीयता के आधार पर अलग होते हैं: घर के कारण (पैसा, सांस्कृतिक पूँजी, भाषा, माता-पिता की मदद) और स्कूल के कारण (लेबलिंग, सेटिंग-स्ट्रीमिंग, स्व-पूर्ण भविष्यवाणी, छात्र उपसंस्कृति)। सरकारें नीति से स्कूल बदलती हैं: चयन, बाज़ारीकरण, निजीकरण और समानता के उपाय। ज़्यादा बच्चों का स्कूल पहुँचना (विस्तार) अपने आप सबको बराबर अवसर (लोकतंत्रीकरण) नहीं देता।
- सामाजिक गतिशीलता – सामाजिक गतिशीलता का मतलब है एक सामाजिक परत से दूसरी परत में जाना। यह माता-पिता और संतान के बीच हो सकती है (अंतर-पीढ़ी) या एक ही जीवन में (अंतः-पीढ़ी)। नतीजा ऊपर, नीचे या वहीं रहना (पुनरुत्पादन) हो सकता है। समाजशास्त्री इसे गतिशीलता तालिका से नापते हैं। कुछ बदलाव नौकरियों का ढाँचा बदलने से होता है (संरचनात्मक गतिशीलता); बाकी बताता है कि मौके कितने बराबर हैं (सामाजिक तरलता)। पढ़ाई, घर का पैसा, संस्कृति, जान-पहचान और अर्थव्यवस्था, सब मिलकर तय करते हैं कि कौन आगे बढ़ता है।
- श्रम बाज़ार (Labour Market) – श्रम बाज़ार में मज़दूर अपना समय और हुनर बेचते हैं और नियोक्ता उसे खरीदते हैं। कंपनी को मज़दूर इसलिए चाहिए क्योंकि लोग उसका सामान खरीदते हैं (व्युत्पन्न माँग)। मज़दूरी बढ़े तो ज़्यादा लोग काम को तैयार होते हैं। मज़दूरी वहाँ तय होती है जहाँ माँग और पूर्ति मिलती हैं। न्यूनतम मज़दूरी वेतन बढ़ा सकती है पर नौकरियाँ घटा भी सकती है। यूनियन, एक बड़ा नियोक्ता (मोनोप्सनी), हुनर, भेदभाव और नई तकनीक भी मज़दूरी बदलते हैं।
- नागरिक सहभागिता: नागरिक कैसे भाग लेते हैं – नागरिक सहभागिता यानी अपने समुदाय और देश के जीवन में भाग लेना। यह एक सीढ़ी जैसी है: जानकारी रखें, वोट दें, समूहों से जुड़ें, स्वेच्छा से सेवा करें, फिर आयोजन और अभियान करें। नागरिक चुनाव में प्रतिनिधि चुनते हैं और जनमत संग्रह में एक प्रश्न का सीधा उत्तर देते हैं। वे राजनीतिक दलों (जो सरकार चलाना चाहते हैं), मज़दूर संघों (जो मज़दूरों की रक्षा करते हैं) और संगठनों या NGO (जो साझा उद्देश्य के लिए काम करते हैं) से जुड़ते हैं। चुनावों के बीच वे याचिका पर हस्ताक्षर करते हैं, सेवा करते हैं, स्थानीय झगड़ों में मध्यस्थता करते हैं और तथ्य जाँचकर ऑनलाइन अभियान चलाते हैं। व्हिसलब्लोअर छिपे ग़लत काम उजागर करते हैं, और स्वतंत्र प्रेस व जनमत उसे कार्रवाई में बदलते हैं। कोई सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करना ये सब कौशल सिखाता है: योजना, टीमवर्क और ज़िम्मेदारी।
3. Joint perspectives
Inequality and social justice · Environmental policy
- आय असमानता – आय असमानता का मतलब है कि लोगों के बीच आय बराबर नहीं बँटी है। अर्थशास्त्री लोगों को सबसे ग़रीब से सबसे अमीर तक क्रम में रखकर 20-20% के पाँच समूहों (पंचमक, quintiles) में बाँटते हैं और उनके हिस्से की तुलना करते हैं। लॉरेंज़ वक्र लोगों के संचयी % के सामने आय का संचयी % दिखाता है; यह समानता की सीधी रेखा से जितना ज़्यादा झुके, असमानता उतनी ज़्यादा। गिनी गुणांक = A ÷ (A + B) इसे 0 (पूरी समानता) से 1 (सारी आय एक व्यक्ति के पास) के बीच एक संख्या बना देता है। संपत्ति (जो तुम्हारे पास है) आमतौर पर आय (जो तुम कमाते हो) से ज़्यादा असमान होती है। सरकार प्रगतिशील कर, सहायता, न्यूनतम मज़दूरी और मुफ़्त शिक्षा-स्वास्थ्य से असमानता घटाती है।
- पर्यावरण नीति: समाज प्रकृति की रक्षा कैसे करता है – पर्यावरण नीति वे क़ानून, कर, नियम और समझौते हैं जिनसे समाज हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों की रक्षा करता है। इसकी ज़रूरत इसलिए है क्योंकि प्रदूषण एक बाहरी लागत है: प्रदूषक दूसरों को हुए नुक़सान का पैसा नहीं देता, और साझा संसाधन (हवा, नदियाँ, समुद्र) ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं। मुख्य उपाय: विनियमन (सीमाएँ, मानक, प्रतिबंध, पर्यावरण प्रभाव आकलन), बाज़ार उपाय (प्रदूषण कर, सीमा और व्यापार परमिट, साफ़ विकल्पों पर सब्सिडी), संरक्षित क्षेत्र और जानकारी (लेबल, रिपोर्ट)। मुख्य सिद्धांत: प्रदूषक भुगतान करे, रोकथाम, एहतियात और सतत विकास। लोगों को स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार है और उसकी रक्षा का कर्तव्य भी। नीति स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर चलती है, क्योंकि प्रदूषण हर सीमा पार करता है। समाज तीन रास्तों में संतुलन बनाता है: दोहन, परिरक्षण या संरक्षण (समझदारी से उपयोग)।