सामाजिक स्तरीकरण क्या है?
स्तरीकरण शब्द स्तर से बना है, यानी परत, जैसे चट्टान की परतें। समाज में लोगों के समूह परतों में ऊँचे-नीचे रखे जाते हैं। ऊपर की परतों को अच्छी चीज़ें ज़्यादा मिलती हैं: धन, शक्ति और सम्मान।
- यह सामाजिक है: इसे लोगों ने बनाया, प्रकृति ने नहीं।
- यह पीढ़ियों तक चलता है: बच्चे अक्सर माता-पिता की परत में रहते हैं।
- यह हर समाज में है, बस रूप अलग है।
- इसके साथ ऐसी मान्यताएँ होती हैं जो इसे सही दिखाती हैं।
स्तरीकरण सिर्फ़ अंतर नहीं है। लंबा या छोटा होना अंतर है। अमीर या ग़रीब होना, और इस कारण अच्छा या बुरा व्यवहार पाना, असमानता है।
चार व्यवस्थाएँ: दासता, जागीर, जाति, वर्ग
बंद व्यवस्थाएँ
बंद व्यवस्था में जन्म से जगह तय होती है। जन्म से मिली प्रस्थिति को प्रदत्त प्रस्थिति कहते हैं।
- दासता: कुछ लोग दूसरों की संपत्ति माने जाते थे। अब यह हर जगह प्रतिबंधित है।
- जागीर (एस्टेट): मध्यकालीन यूरोप में सामंत, पादरी और किसान, सबके अलग अधिकार।
- जाति: जन्म से मिला समूह, काम, भोजन और विवाह के पुराने नियमों के साथ। भारत का संविधान छुआछूत और जातिगत भेदभाव पर रोक लगाता है।
खुली व्यवस्था: वर्ग
वर्ग समान आर्थिक स्थिति वाले लोगों का समूह है। शिक्षा और काम से एक वर्ग से दूसरे में जा सकते हैं। मेहनत से पाई प्रस्थिति अर्जित प्रस्थिति कहलाती है।
सामाजिक-आर्थिक वर्ग कैसे तय होता है?
शोधकर्ता सामाजिक-आर्थिक वर्ग इन बातों से तय करते हैं:
- आय: हर महीने या साल की कमाई।
- संपत्ति: जो आपके पास है, जैसे घर, ज़मीन, बचत।
- व्यवसाय: काम का प्रकार और उसका सम्मान।
- शिक्षा: पढ़ाई के साल और डिग्रियाँ।
एक सरल मॉडल में उच्च, मध्य और श्रमिक वर्ग होते हैं, और कुछ लोग ग़रीबी में। कार्ल मार्क्स ने दो मुख्य वर्ग देखे: कारख़ानों-ज़मीन के मालिक और अपना श्रम बेचने वाले मज़दूर। मैक्स वेबर ने कहा तीन बातें मायने रखती हैं: वर्ग (धन), प्रस्थिति (इज़्ज़त) और शक्ति (दूसरों से काम करवाने की क्षमता)।
सिद्धांत: प्रकार्यवादी और संघर्ष
प्रकार्यवादी सिद्धांत (डेविस और मूर, 1945)
कुछ काम ज़्यादा ज़रूरी हैं और लंबी पढ़ाई माँगते हैं, जैसे सर्जन। योग्य लोगों को लाने के लिए समाज इन्हें ज़्यादा वेतन और सम्मान देता है। इसलिए असमानता समाज को ठीक चलाती है।
आलोचना
- कुछ ऊँचे वेतन वाले काम बहुत ज़रूरी नहीं, और कुछ बहुत ज़रूरी काम (नर्स, सफ़ाईकर्मी) कम वेतन पाते हैं।
- अमीर बच्चों को अच्छे स्कूल मिलते हैं, तो दौड़ शुरू से बराबर नहीं।
- ग़रीब प्रतिभाशाली बच्चों को मौक़ा नहीं मिलता, प्रतिभा बेकार जाती है।
संघर्ष सिद्धांत (मार्क्स और बाद के विचारक)
ऊपर की परत के पास ज़्यादातर साधन हैं और वह इनसे अपनी जगह बचाती है, जैसे धन और अच्छी पढ़ाई बच्चों को देकर। असमानता ज़रूरी नहीं, बनाए रखी जाती है।
सामाजिक गतिशीलता
सामाजिक गतिशीलता का मतलब है एक परत से दूसरी में जाना।
- ऊर्ध्वगामी: ऊपर की परत में जाना। अधोगामी: नीचे जाना।
- क्षैतिज: उसी स्तर का नया काम।
- अंतः-पीढ़ी: एक ही व्यक्ति के जीवन में बदलाव।
- अंतर-पीढ़ी: माता-पिता और संतान के बीच बदलाव।
शिक्षा, शहरों में नए काम, भेदभाव-विरोधी क़ानून और आरक्षण गतिशीलता बढ़ाते हैं। ग़रीबी, कमज़ोर स्कूल और पूर्वाग्रह इसे घटाते हैं।
खुद करके देखें
3D में बंद व्यवस्था चुनें और मेहनत को 4 पर ले जाएँ। पहले अंदाज़ा लगाएँ: क्या व्यक्ति ऊपर जाएगा? फिर जाँचें। अब खुली व्यवस्था चुनें। घर पर किसी बड़े से पूछें कि उनके माता-पिता क्या काम करते थे। उनके अपने काम से तुलना करें। गतिशीलता ऊपर, नीचे या नहीं हुई?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्तरीकरण = समूहों को परतों (स्तरों) में ऊँचा-नीचा रखना
- बंद व्यवस्था: दासता, जागीर, जाति → प्रदत्त प्रस्थिति
- खुली व्यवस्था: वर्ग → अर्जित प्रस्थिति
- वर्ग के आधार: आय · संपत्ति · व्यवसाय · शिक्षा
- वेबर: वर्ग (धन) · प्रस्थिति (सम्मान) · शक्ति
- गतिशीलता: ऊर्ध्वगामी / अधोगामी / क्षैतिज; अंतः / अंतर-पीढ़ी
हल किए गए उदाहरण
1. दुकानदार का बेटा सॉफ़्टवेयर इंजीनियर बनता है। गतिशीलता का प्रकार बताइए।
ऊर्ध्वगामी (पिता से ऊपर) और अंतर-पीढ़ी (दो पीढ़ियों के बीच)।
2. एक शिक्षक उसी वेतन पर दूसरे स्कूल में जाता है। यह कौन सी गतिशीलता है?
क्षैतिज गतिशीलता: काम बदला पर परत वही रही।
3. सर्जन के ऊँचे वेतन को प्रकार्यवादी कैसे समझाते हैं? एक आलोचना भी दीजिए।
सर्जरी ज़रूरी है और लगभग 10 साल की पढ़ाई चाहिए, इसलिए ऊँचा वेतन प्रतिभा को खींचता है। आलोचना: नर्सें भी ज़रूरी हैं पर कम वेतन पाती हैं, और कई ग़रीब प्रतिभाशाली बच्चे डॉक्टरी की पढ़ाई का ख़र्च नहीं उठा पाते।
4. जाति को बंद और वर्ग को खुली व्यवस्था क्यों कहते हैं?
जाति जन्म से तय है (प्रदत्त)। वर्ग आय, काम और शिक्षा से बनता है, जिन्हें बदला जा सकता है (अर्जित)।
आम गलतियाँ
- हर अंतर को स्तरीकरण मानना। स्तरीकरण का मतलब है असमान इनाम वाली ऊँची-नीची परतें।
- आय और संपत्ति को एक मानना। आय कमाई है; संपत्ति वह है जो आपके पास है।
- वर्ग को पूरी तरह खुला मानना। माता-पिता का धन और स्कूल कुछ बच्चों को आगे से शुरुआत देते हैं।
- यह सोचना कि दोनों सिद्धांत असमानता के होने पर असहमत हैं। दोनों मानते हैं यह है; असहमति इसके कारण और ज़रूरत पर है।