सामाजिक गतिशीलता क्या है?
सामाजिक गतिशीलता का मतलब है एक सामाजिक परत (वर्ग या प्रस्थिति समूह) से दूसरी में जाना। परत यानी मिलते-जुलते काम, आय और सम्मान वाले लोगों का समूह।
- अंतर-पीढ़ी गतिशीलता (Intergenerational): संतान की स्थिति की तुलना माता-पिता से। जैसे किसान का बेटा पायलट बनता है।
- अंतः-पीढ़ी गतिशीलता (Intragenerational, करियर गतिशीलता): एक ही व्यक्ति के जीवन में बदलाव। जैसे क्लर्क बैंक मैनेजर बनता है।
- ऊर्ध्वाधर (Vertical) गतिशीलता ऊपर या नीचे होती है। क्षैतिज (Horizontal) गतिशीलता बराबर स्तर के दूसरे काम में जाना है, जैसे नर्स से शिक्षक।
- भौगोलिक गतिशीलता (शहर या देश बदलना) अक्सर साथ आती है, पर यह वही चीज़ नहीं है।
खुले समाज में, जहाँ स्थिति उपलब्धि से तय होती है, गतिशीलता ज़्यादा होती है। बंद समाज में, जहाँ जन्म तय करता है, कम।
ऊर्ध्वगामी, अधोगामी और पुनरुत्पादन
माता-पिता और संतान की तुलना करने पर तीन नतीजे होते हैं:
- ऊर्ध्वगामी गतिशीलता: संतान ऊँची परत में पहुँचती है।
- अधोगामी गतिशीलता: संतान नीची परत में रहती है।
- पुनरुत्पादन (स्थिरता): संतान उसी परत में रहती है। इसे सामाजिक पुनरुत्पादन कहते हैं, क्योंकि समाज अपनी परतें अगली पीढ़ी में दोहराता है।
कभी-कभी डिग्री होने पर भी लोग खुद को नीचे महसूस करते हैं, क्योंकि जो डिग्री पहले बड़ी नौकरी दिलाती थी, अब मध्यम नौकरी दिलाती है। इसे डिग्रियों का विरोधाभास कहते हैं: ज़्यादा लोगों के पास डिग्री हो, तो हर डिग्री की क़ीमत घटती है।
गतिशीलता तालिका और उसकी सीमाएँ
गतिशीलता तालिका एक ग्रिड है। पंक्तियाँ = माता-पिता की परत (मूल)। स्तंभ = संतान की आज की परत (गंतव्य)। हर खाने में लोगों की गिनती होती है।
- तिरछी रेखा (diagonal) उन लोगों को दिखाती है जो उसी परत में रहे।
- गंतव्य तालिका (बहिर्प्रवाह): पंक्ति के साथ पढ़ें। "मज़दूरों के 100 बच्चों में कितने मैनेजर बने?"
- भर्ती तालिका (अंतर्प्रवाह): स्तंभ में नीचे पढ़ें। "आज के 100 मैनेजरों में कितनों के माता-पिता मज़दूर थे?"
सीमाएँ:
- कुछ ही बड़े समूह लिए जाते हैं, तो समूह के अंदर के छोटे बदलाव छिप जाते हैं।
- पुराने सर्वे अक्सर सिर्फ़ पिता और बेटे की तुलना करते थे, महिलाएँ छूट जाती थीं।
- समय के साथ काम का अर्थ बदलता है: 1960 का क्लर्क और आज का क्लर्क एक जैसी स्थिति नहीं।
- तालिका बताती है कितने लोग बदले, यह नहीं कि क्यों।
संरचनात्मक गतिशीलता और सामाजिक तरलता
कुल (प्रेक्षित) गतिशीलता तालिका में दिखने वाला सब कुछ है। इसके दो हिस्से हैं:
- संरचनात्मक गतिशीलता: नौकरियों के ढाँचे में बदलाव से मजबूरन होने वाला बदलाव। खेती घटे और दफ़्तर बढ़ें, तो किसानों के कई बच्चों को दूसरे काम करने ही पड़ते हैं। यह तब भी होता है जब मौके बराबर न हुए हों।
- सामाजिक तरलता (शुद्ध या सापेक्ष गतिशीलता): ढाँचे का असर हटाकर, मूल और गंतव्य का संबंध कितना मज़बूत है। समाजशास्त्री मैनेजर के बच्चे और मज़दूर के बच्चे के ऊपर पहुँचने की संभावना की तुलना करते हैं। संभावना पास-पास हो तो समाज तरल और ज़्यादा न्यायपूर्ण है।
कई देशों के अध्ययन बताते हैं कि 20वीं सदी में कुल गतिशीलता बढ़ी, ज़्यादातर ढाँचे के बदलाव से, जबकि तरलता धीरे-धीरे ही सुधरी।
सामाजिक गतिशीलता के कारण
कौन आगे बढ़ेगा, यह कई बातें तय करती हैं:
- शिक्षा: डिग्री रास्ते खोलती है, पर बहुत लोगों के पास वही डिग्री हो तो उसकी क़ीमत घटती है।
- आर्थिक पूँजी: ट्यूशन, किताबें, शांत कमरा और पढ़ने का समय।
- सांस्कृतिक पूँजी (पियरे बोर्दियू): भाषा, पढ़ने की आदत और स्कूल कैसे चलता है इसकी समझ। स्कूल अक्सर पढ़े-लिखे परिवारों की संस्कृति को इनाम देता है।
- सामाजिक पूँजी: परिवार की जान-पहचान, जो सलाह, इंटर्नशिप और नौकरी में मदद करती है।
- परिवार का आकार और ढाँचा, और आकांक्षाएँ: परिवार क्या संभव मानता है।
- तर्कसंगत चुनाव (रेमों बूदों): परिवार लंबी पढ़ाई का ख़र्च और जोखिम तौलते हैं। ग़रीब परिवार बराबर अंक होने पर भी पहले रुक सकता है।
- अर्थव्यवस्था और नीति: नए क्षेत्र, मुफ़्त शिक्षा, छात्रवृत्ति और आरक्षण मौके बढ़ा सकते हैं। भारत में शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए है।
गतिशीलता को ढाँचे (अर्थव्यवस्था, स्कूल, क़ानून) और व्यक्तिगत मेहनत दोनों आकार देते हैं, अकेला कोई एक नहीं।
करके देखें
अपने परिवार या पड़ोसी (अनुमति लेकर) की तीन पीढ़ियों की तालिका बनाइए। दादा/दादी, माता/पिता और अपना (या जो काम आप करना चाहते हैं) मुख्य काम लिखिए। हर एक को परत में रखिए: श्रमिक, मध्य या उच्च। हर क़दम को ऊपर, नीचे या वहीं लिखिए। फिर पूछिए: क्या यह काम 50 साल पहले था? नहीं, तो बदलाव का कुछ हिस्सा संरचनात्मक था।
3D के खुले खेल में दफ़्तरी काम 4 और बराबरी 0 रखिए, फिर बराबरी 4 कीजिए। देखिए कौन-सा स्लाइडर स्लेटी तिरछी रेखा को ज़्यादा खाली करता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सामाजिक गतिशीलता = सामाजिक परतों के बीच आना-जाना
- अंतर-पीढ़ी = माता-पिता बनाम संतान; अंतः-पीढ़ी = एक ही जीवन में
- ऊर्ध्वाधर (ऊपर/नीचे) बनाम क्षैतिज (बराबर स्तर)
- कुल गतिशीलता = संरचनात्मक गतिशीलता + शुद्ध गतिशीलता (तरलता)
- गंतव्य तालिका = पंक्ति पढ़ें; भर्ती तालिका = स्तंभ पढ़ें
- तालिका की तिरछी रेखा = पुनरुत्पादन (स्थिरता)
- पूँजी: आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक (बोर्दियू)
हल किए गए उदाहरण
1. बढ़ई की बेटी वकील बनती है। गतिशीलता का प्रकार बताइए।
संतान की तुलना माता-पिता से: अंतर-पीढ़ी। वकील बढ़ई से ऊँची परत: ऊर्ध्वगामी। उत्तर: ऊर्ध्वगामी अंतर-पीढ़ी गतिशीलता।
2. एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर नौकरी छोड़कर लगभग उतनी ही आय और सम्मान वाली स्कूल शिक्षक बनती है। यह कौन-सा प्रकार है?
बराबर स्तर, अलग काम: क्षैतिज गतिशीलता। यह अंतः-पीढ़ी भी है, क्योंकि उसके अपने करियर में हुआ।
3. तालिका में मज़दूरों के 100 बच्चे: 55 मज़दूर, 35 मध्य, 10 उच्च। कितने प्रतिशत पुनरुत्पादित हुए और कितने ऊपर गए?
पुनरुत्पादन = जो मज़दूर परत में रहे = 55/100 = 55%। ऊपर गए = 35 + 10 = 45%। तीन परतों वाली तालिका में सबसे नीचे से कोई नीचे नहीं जा सकता।
4. आज के 200 मैनेजरों में 30 के माता-पिता मज़दूर थे। यह कौन-सी तालिका है और क्या बताती है?
यह स्तंभ (आज के मैनेजर) पढ़ती है, इसलिए भर्ती (अंतर्प्रवाह) तालिका है। 30 ÷ 200 = 15% मैनेजर मज़दूर परिवारों से हैं, यानी ऊपर की परत ज़्यादातर ऊँची परतों से भरी जाती है।
5. 1960 से 2020 तक खेती के काम कुल नौकरियों के 60% से घटकर 20% रह गए। स्कूल के मौके न बदलें तब भी गतिशीलता क्यों होगी?
नौकरियों का ढाँचा ही बदल गया। किसानों के सारे बच्चे किसान नहीं बन सकते थे क्योंकि वे काम ख़त्म हो गए, इसलिए कई कारख़ाने और दफ़्तर के कामों में गए। यह संरचनात्मक गतिशीलता है, बराबर मौकों का सबूत नहीं।
आम गलतियाँ
- पंक्ति और स्तंभ उलझाना: पंक्ति से गंतव्य (बच्चे कहाँ गए), स्तंभ से भर्ती (लोग कहाँ से आए)।
- यह मानना कि ज़्यादा कुल गतिशीलता यानी समाज न्यायपूर्ण है। इसका बड़ा हिस्सा संरचनात्मक हो सकता है; तरलता देखिए।
- हर बदलाव को ऊर्ध्वगामी कहना। बराबर स्तर का दूसरा काम क्षैतिज है।
- यह कहना कि सिर्फ़ मेहनत मायने रखती है। परिवार की पूँजी, स्कूल और अर्थव्यवस्था भी तय करते हैं।