National Year 11 Sociology
अध्याय: 2
1. 3.5 Crime and deviance
3.5.1 Social construction of crime and deviance · 3.5.2 Social control · 3.5.3 Criminal and deviant behaviour · 3.5.4 Data on crime
- विचलन और सामाजिक नियंत्रण – विचलन वह व्यवहार है जो समूह द्वारा अपेक्षित मानदंड तोड़ता है। सामाजिक मानदंड रिवाज़ से आते हैं; क़ानूनी मानदंड क़ानून हैं, जिन्हें तोड़ना अपराध या अपचार (delinquency) है। विचलन सापेक्ष है: समूह और समय के साथ बदलता है। समाज अनौपचारिक और औपचारिक नियंत्रण से, सकारात्मक व नकारात्मक प्रतिबंधों के ज़रिए व्यवस्था बनाए रखता है। सिद्धांत विचलन को तनाव, समूह से सीखने, कमज़ोर सामाजिक बंधनों और ठप्पे से समझाते हैं, जिससे कलंक और विचलित करियर बन सकता है। सरकारी अपराध आँकड़ों में बहुत-सा अपराध छिपा रह जाता है।
2. 3.6 Social stratification
3.6.1 Functionalist theory of stratification · 3.6.2 Socio-economic class · 3.6.3 Life chances · 3.6.4 Poverty as a social issue · 3.6.5 Power and authority · 3.6.6 Power relationships
- सामाजिक स्तरीकरण – सामाजिक स्तरीकरण का मतलब है समाज का लोगों के समूहों को परतों (स्तरों) में ऊँचा-नीचा रखना। ऊपर की परतों को ज़्यादा धन, शक्ति और सम्मान मिलता है। चार मुख्य व्यवस्थाएँ हैं: दासता, जागीर, जाति और वर्ग। वर्ग आय, संपत्ति, व्यवसाय और शिक्षा से तय होता है। प्रकार्यवादी कहते हैं असमान इनाम समाज के काम आते हैं; संघर्षवादी कहते हैं इससे अमीर ऊपर बने रहते हैं। एक परत से दूसरी में जाना सामाजिक गतिशीलता है।
- सामाजिक असमानता: जीवन अवसर और शक्ति – सामाजिक असमानता का मतलब है कि कुछ समूहों को समाज के इनाम (पैसा, सेहत, शिक्षा, सम्मान, शक्ति) ज़्यादा मिलते हैं। मैक्स वेबर ने इन अच्छी चीज़ों को पाने की संभावना को जीवन अवसर (life chances) कहा। जीवन अवसर वर्ग, लिंग, जातीयता, आयु और दिव्यांगता से बदलते हैं, जैसे जीवन-प्रत्याशा, परीक्षा परिणाम, वेतन और सुरक्षा में। शक्ति का अर्थ विरोध के बावजूद अपनी बात मनवाना; सत्ता वह शक्ति जिसे लोग वैध मानें। शक्ति के अंतर दिखते हैं कि सरकार, कंपनी और परिवार में कौन नेतृत्व करता है। क़ानून, शिक्षा और आंदोलनों से कई अंतर घटे हैं, पर ख़त्म नहीं हुए, और संपत्ति जैसे कुछ अंतर बढ़े हैं।
- ग़रीबी: अर्थ, माप, कारण और उपाय – निरपेक्ष ग़रीबी का मतलब जीने की बुनियादी चीज़ें (भोजन, पानी, घर, कपड़े) भी न होना। विश्व बैंक की अत्यधिक ग़रीबी रेखा लगभग 3 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (2021 की क़ीमतें) है। सापेक्ष ग़रीबी का मतलब अपने समाज के सामान्य स्तर से बहुत कम होना, अक्सर माध्यिका आय के 60% से नीचे, जिससे लोग सामान्य जीवन में शामिल नहीं हो पाते। ग़रीबी बराबर नहीं बँटी: बच्चे, अकेले अभिभावक, दिव्यांग, बेरोज़गार, कुछ अल्पसंख्यक और ग्रामीण परिवार ज़्यादा ख़तरे में हैं, और संपत्ति आय से भी ज़्यादा असमान है। सांस्कृतिक व्याख्याएँ परिवार में सीखे मूल्यों या मदद पर निर्भर "निम्नवर्ग" को दोष देती हैं; संरचनात्मक व्याख्याएँ कम वेतन, बेरोज़गारी, असुरक्षित और कौशल-रहित काम, वैश्वीकरण और कटौती को। उपायों में नक़द मदद, पेंशन, न्यूनतम वेतन और मुफ़्त सेवाएँ हैं, और निर्भरता पर बहस है।
- सत्ता: उचित शक्ति कहाँ से आती है? – शक्ति दूसरों से काम करवाने की क्षमता है; सत्ता वह शक्ति है जिसे लोग उचित (वैध) मानते हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र और शुक्रनीति जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों ने कहा कि शासक दंड (उचित सज़ा), न्याय और बल (रक्षा की ताक़त) से सत्ता बनाए रखता है। आज भारत में सत्ता संविधान से आती है, जो न्याय और सुरक्षा का वादा करता है और हर पद की सीमा तय करता है। नागरिक चुनाव से संस्थाओं को सत्ता देते हैं, और संस्थाएँ उन्हें जवाब देती हैं। सत्ता पारंपरिक, करिश्माई या कानूनी-तार्किक हो सकती है।