निरपेक्ष ग़रीबी
निरपेक्ष ग़रीबी का मतलब जीने और सेहत की बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, साफ़ पानी, घर, कपड़े, बुनियादी इलाज) भी पूरी न होना। इसे एक स्थिर रेखा से मापते हैं, जैसे विश्व बैंक की लगभग 3 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (2021 की क़ीमतें)। सीबोम राउनट्री ने 1899 में यॉर्क में न्यूनतम भोजन की क़ीमत से इसे पहली बार मापा।
ख़ूबी: देशों और समय के बीच तुलना आसान। कमी: "बुनियादी" क्या है, यह जगह और समय के साथ बदलता है।
सापेक्ष ग़रीबी
सापेक्ष ग़रीबी का मतलब अपने समाज के सामान्य जीवन-स्तर से बहुत कम होना, जिससे आप सामान्य जीवन में भाग नहीं ले पाते। पीटर टाउनसेंड ने इसे उन चीज़ों की कमी कहा जिन्हें ज़्यादातर लोग सामान्य मानते हैं। आम रेखा: माध्यिका पारिवारिक आय का 60% (यूरोप, ब्रिटेन) या 50% (OECD)।
रेखा औसत आय के साथ खिसकती है, इसलिए सबके अमीर होने पर भी सापेक्ष ग़रीबी रह सकती है; कुछ कहते हैं यह ग़रीबी नहीं, असमानता मापती है। वंचना सूचकांक (गर्म घर, दिन में दो भोजन, सर्दी का कोट) गिनते हैं कि कितने लोगों के पास ये नहीं। सामाजिक बहिष्कार इससे बड़ा विचार है: नौकरी, सेवाओं और सामाजिक जीवन से बाहर रहना।
ग़रीब कौन है? ग़रीबी और संपत्ति का वितरण
- ज़्यादा ख़तरा: बच्चे, अकेले अभिभावक वाले परिवार (ज़्यादातर महिलाएँ मुखिया), दिव्यांग, बेरोज़गार और कम वेतन वाले, कुछ जातीय अल्पसंख्यक, बिना पेंशन वाले बुज़ुर्ग, और कई देशों में ग्रामीण परिवार।
- आय एक प्रवाह है (वेतन, मदद); संपत्ति एक भंडार है (मकान, ज़मीन, शेयर, बचत)। संपत्ति कहीं ज़्यादा असमान है: कई देशों में सबसे अमीर 10% के पास आधी से ज़्यादा।
- ग़रीबी अक्सर टिकाऊ है: कई लोग अंदर-बाहर होते हैं, पर कुछ सालों तक ग़रीब रहते हैं और नुकसान अगली पीढ़ी तक जाता है (वंचना का चक्र)।
ग़रीबी की व्याख्या: सांस्कृतिक और संरचनात्मक मत
व्यक्तिगत और सांस्कृतिक व्याख्याएँ
- ऑस्कर लुईस: ग़रीबी की संस्कृति (भाग्यवाद, आज के लिए जीना) परिवार में सीखी जाती है और आगे जाती है।
- चार्ल्स मरे: एक बढ़ता निम्नवर्ग (underclass) सरकारी मदद पर निर्भर है, जिसमें अपराध और परिवार टूटना ज़्यादा है। नव-दक्षिणपंथी (New Right) कहते हैं उदार मदद निर्भरता पैदा करती है।
संरचनात्मक व्याख्याएँ
- ग़रीबी अर्थव्यवस्था और समाज की बनावट से आती है: बेरोज़गारी, कम वेतन, असुरक्षित और गिग काम, भेदभाव।
- कौशल-ह्रास (de-skilling, ब्रेवरमैन): मशीनें और प्रबंधन कुशल काम को सरल टुकड़ों में बाँटते हैं, वेतन और नियंत्रण घटता है।
- वैश्वीकरण: कारख़ाने सस्ते देशों में चले जाते हैं, इलाक़ों में कामहीनता रह जाती है; नई नौकरियाँ अक्सर कम वेतन की।
- मार्क्सवादी: ग़रीबी वेतन कम रखकर पूँजीवाद की मदद करती है (श्रम की आरक्षित सेना)।
निम्नवर्ग विचार के आलोचक कहते हैं ज़्यादातर ग़रीब काम चाहते हैं और मुख्यधारा के मूल्य रखते हैं; समस्या अच्छी नौकरियों की कमी है।
ग़रीबी के कारण और प्रभाव (आर्थिक दृष्टि)
कारण: बेरोज़गारी, कम उत्पादकता और वेतन, कम शिक्षा और कौशल, बीमारी और दिव्यांगता, ज़्यादा आश्रित, भेदभाव, कमज़ोर सामाजिक सुरक्षा, ऊँची महँगाई, संघर्ष और आपदाएँ।
प्रभाव: ख़राब सेहत और कम जीवन-प्रत्याशा, कम परीक्षा परिणाम, कम ख़र्च और धीमी वृद्धि, तनाव और अपराध, कम सामाजिक गतिशीलता, और अगली पीढ़ी तक ग़रीबी।
कल्याणकारी उपाय
- कल्याणकारी राज्य: राज्य "जन्म से मृत्यु तक" सुरक्षा देता है: मदद, पेंशन, मुफ़्त इलाज और शिक्षा, सामाजिक आवास (जैसे 1945 के बाद ब्रिटेन, नॉर्डिक मॉडल)।
- साधन-परीक्षित मदद एक आय-सीमा से नीचे वालों को; सार्वभौमिक मदद एक समूह के सभी को (जैसे सभी बच्चे)।
- न्यूनतम वेतन, कर छूट, मुफ़्त स्कूल भोजन।
- भारत: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (सस्ता अनाज), मनरेगा (साल में 100 दिन ग्रामीण काम), पेंशन और सीधे नक़द हस्तांतरण।
बहस: नव-दक्षिणपंथ कहता है मदद निर्भरता बनाती है; सामाजिक लोकतंत्रवादी कहते हैं मदद बहुत कम है और ग़रीबी व्यवस्था से है; मार्क्सवादी कहते हैं कल्याण सिर्फ़ पूँजीवाद को नरम करता है।
करके देखें
अपने शहर के एक किशोर को सामान्य जीवन के लिए "ज़रूरी" 10 चीज़ें लिखिए। किसी बड़े रिश्तेदार से पूछिए कि आपकी उम्र में उनके पास कौन-सी थीं। सूची बदलती है: इसी लिए सापेक्ष ग़रीबी समय के साथ खिसकती है। 3D में सबकी आय बढ़ाइए और दोनों रेखाएँ देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निरपेक्ष ग़रीबी: आय बुनियादी ज़रूरतों की लागत से कम (स्थिर रेखा)
- सापेक्ष ग़रीबी: आय माध्यिका आय के 60% (या 50%) से कम
- माध्यिका: आयों को क्रम में रखने पर बीच का मान
- आय = पैसे का प्रवाह; संपत्ति = परिसंपत्तियों का भंडार
- ग़रीबी की संस्कृति / निम्नवर्ग = सांस्कृतिक मत
- बेरोज़गारी, कम वेतन, कौशल-ह्रास, वैश्वीकरण = संरचनात्मक मत
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश में माध्यिका आय 30,000 प्रति वर्ष है। 60% पर सापेक्ष ग़रीबी रेखा कहाँ होगी?
0.6 × 30,000 = 18,000। इससे कम वाले परिवार सापेक्ष ग़रीब हैं।
2. 5 परिवारों की आय: 8, 12, 20, 25, 40 (हज़ार)। 60% माध्यिका रेखा और ग़रीब परिवार गिनिए।
बीच का मान 20। 60% = 12। सिर्फ़ 8 वाला 12 से नीचे है (12 नीचे नहीं), तो 1 परिवार।
3. सबकी आय दोगुनी हो जाए तो निरपेक्ष और सापेक्ष ग़रीबी का क्या होगा?
निरपेक्ष ग़रीबी घटेगी, क्योंकि ज़्यादा लोग ज़रूरतें ख़रीद पाएँगे। सापेक्ष वही रहेगी, क्योंकि माध्यिका और 60% रेखा भी दोगुनी।
4. पुराने खनन शहर में लंबी बेरोज़गारी की एक सांस्कृतिक और एक संरचनात्मक व्याख्या दीजिए।
सांस्कृतिक: युवा कम उम्मीदें सीखते हैं और मदद पर टिकते हैं। संरचनात्मक: वैश्वीकरण से खदानें बंद हुईं, नई नौकरियाँ कम, कम वेतन की और अलग कौशल वाली।
5. सभी बच्चों को मुफ़्त स्कूल भोजन: सार्वभौमिक या साधन-परीक्षित?
सार्वभौमिक, क्योंकि समूह के हर बच्चे को मिलता है, आय चाहे जो हो।
आम गलतियाँ
- सोचना कि सापेक्ष ग़रीबी "असली ग़रीबी नहीं"। ऐसे लोग गर्मी, अच्छा भोजन या स्कूल गतिविधियाँ छोड़ सकते हैं।
- सापेक्ष रेखा के लिए माध्य (औसत) लेना। माध्यिका यानी बीच की आय लेनी है।
- आय और संपत्ति को मिलाना। आय आने वाला पैसा है; संपत्ति जो आपके पास है।
- निम्नवर्ग बहस का सिर्फ़ एक पक्ष लिखना। उत्तर में सांस्कृतिक और संरचनात्मक दोनों मत और मूल्यांकन चाहिए।