परिवार और घरेलू इकाई
घरेलू इकाई (household) यानी एक ही पते पर साथ रहने और जगह बाँटने वाले लोग (जैसे फ़्लैट में साथ रहने वाले छात्र)। परिवार यानी नातेदारी से जुड़े लोग: खून, शादी, साझेदारी या गोद लेना। ज़्यादातर परिवार एक घर में रहते हैं, पर हर घरेलू इकाई परिवार नहीं होती।
परिवार के चार कार्य
- प्रजनन: बच्चे पैदा करना ताकि समाज चलता रहे।
- समाजीकरण: बच्चों को भाषा, मूल्य और नियम सिखाना (प्राथमिक समाजीकरण)।
- आर्थिक: कमाई, भोजन, घर बाँटना; पहले खेत या दुकान में साथ काम भी।
- भावनात्मक सहारा: प्यार, देखभाल और सुरक्षित जगह।
परिवार के प्रकार
- एकल (nuclear): माता-पिता और उनके बच्चे।
- विस्तारित / संयुक्त (extended): तीन या ज़्यादा पीढ़ियाँ, या चाचा-ताऊ, चचेरे भाई-बहन साथ या पास रहते हैं।
- एकल-अभिभावक: एक माता या पिता और बच्चे; तलाक, मृत्यु, अलगाव या अपनी मर्ज़ी से।
- पुनर्गठित (सौतेला / मिश्रित): जोड़ा जिसमें कम से कम एक के पिछले रिश्ते से बच्चे हैं।
- समलैंगिक परिवार: एक ही लिंग के दो अभिभावक; कुछ देशों में कानूनी मान्यता।
- बीनपोल: कई पीढ़ियाँ ज़िंदा, पर हर पीढ़ी में कम बच्चे (लंबा और पतला)।
कौन-सा रूप आम है, यह अर्थव्यवस्था, धर्म, कानून और संस्कृति पर निर्भर करता है। उद्योग और शहरों ने अक्सर छोटे एकल परिवार बढ़ाए, पर कई जगह संयुक्त परिवार अब भी मज़बूत हैं।
परिवार के अंदर भूमिकाएँ और रिश्ते
दांपत्य भूमिकाएँ यानी घर में पति-पत्नी के काम।
- बँटी (पृथक) भूमिकाएँ: साफ़ बँटवारा। आमतौर पर आदमी कमाता है, औरत घर और बच्चे सँभालती है। खाली समय अलग-अलग।
- संयुक्त भूमिकाएँ: काम, फ़ैसले और खाली समय साझा।
भूमिकाएँ ज़्यादा साझा हुईं क्योंकि ज़्यादा महिलाएँ नौकरी करती हैं, कानून बराबरी देते हैं और पुरुषों के देखभाल करने पर सोच बदली। फिर भी दोहरा बोझ (dual burden) दिखता है: कई महिलाएँ नौकरी भी करती हैं और घर का ज़्यादातर काम भी।
बदलते रिश्ते
परिवार बाल-केंद्रित हुए हैं: कम बच्चे, हर बच्चे पर ज़्यादा समय-पैसा, बच्चों की ज़्यादा राय। दादा-दादी बच्चों की देखभाल में मदद करते हैं। पढ़ाई और महँगे घरों के कारण युवा देर तक माता-पिता के साथ रहते हैं। आधुनिकीकरण (उद्योग, शहर, शिक्षा, महिला अधिकार) हर देश में परिवार बदलता है, पर अलग गति से।
आलोचनाएँ और तलाक
अलग-अलग दृष्टिकोण
- प्रकार्यवादी: परिवार समाज की नींव है जो उसे स्थिर रखता है।
- मार्क्सवादी: परिवार पूँजीवाद की सेवा करता है: अमीरों की संपत्ति अगली पीढ़ी को देता है और अगले मज़दूर सस्ते में पालता है।
- नारीवादी: परिवार पितृसत्तात्मक हो सकता है; महिलाएँ बिना वेतन का काम ढोती हैं और घरेलू हिंसा झेल सकती हैं।
- अँधेरा पक्ष: परिवार के अंदर शोषण, उपेक्षा और झगड़े भी हो सकते हैं।
तलाक
कई देशों में लगभग 1950 के बाद तलाक तेज़ी से बढ़ा, फिर थमा। कारण:
- कानून: तलाक आसान और सस्ता हुआ।
- महिलाओं की आर्थिक आज़ादी: अपनी कमाई से दुखी शादी छोड़ सकती हैं।
- कम कलंक और धर्मनिरपेक्षीकरण: धर्म और शर्म का दबाव घटा।
- ऊँची उम्मीदें: लोग शादी से प्यार और बराबरी चाहते हैं, सिर्फ़ सुरक्षा नहीं।
असर: एकल-अभिभावक और पुनर्गठित परिवार बढ़े।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. तीन कॉलेज छात्र एक फ़्लैट में रहते हैं। वे परिवार हैं, घरेलू इकाई हैं या दोनों?
सिर्फ़ घरेलू इकाई। वे घर बाँटते हैं पर खून, शादी या गोद लेने से नहीं जुड़े।
2. रिया अपनी माँ, माँ के नए पति और उनके बेटे के साथ रहती है। यह कौन-सा परिवार है?
पुनर्गठित (सौतेला / मिश्रित) परिवार, क्योंकि एक साथी का पिछले रिश्ते से बच्चा है।
3. दांपत्य भूमिकाएँ ज़्यादा संयुक्त क्यों हुईं? दो कारण दो।
1. ज़्यादा महिलाएँ नौकरी करती हैं, इसलिए घर का काम बाँटना पड़ता है। 2. बराबरी के कानून और सोच से पुरुषों से भी खाना बनाने और बच्चों की देखभाल की उम्मीद है।
आम गलतियाँ
- परिवार और घरेलू इकाई को एक मानना। घरेलू इकाई घर से जुड़ी है; परिवार नातेदारी से।
- सोचना कि सिर्फ़ एकल परिवार ही "सामान्य" है। कई रूप होते हैं और सबका अध्ययन होता है।
- कहना कि अब भूमिकाएँ पूरी बराबर हैं। संयुक्त भूमिकाएँ बढ़ीं, पर अक्सर महिलाएँ अब भी ज़्यादा करती हैं (दोहरा बोझ)।
- तलाक बढ़ने का सिर्फ़ एक कारण लिखना। परीक्षा में कई चाहिए: कानून, आज़ादी, कलंक, उम्मीदें।