National Year 12 Sociology
अध्याय: 7
1. 4.1.1 Education
4.1.1 Role and functions of education · 4.1.1 Differential achievement · 4.1.1 Processes within schools · 4.1.1 Educational policy
- शिक्षा का समाजशास्त्र: स्कूल क्या करते हैं और परिणाम अलग क्यों होते हैं – समाजशास्त्री पूछते हैं कि स्कूल समाज के लिए क्या करता है और कुछ समूह बेहतर क्यों करते हैं। प्रकार्यवादी कहते हैं कि शिक्षा साझा मूल्य बनाती है, नौकरी के कौशल सिखाती है और योग्यता से लोगों को भूमिकाएँ देती है। मार्क्सवादी कहते हैं कि स्कूल छिपे पाठ्यक्रम के ज़रिए असमान कार्यस्थल की नक़ल करता है, जिससे वर्ग असमानता आगे बढ़ती है। परिणाम सामाजिक वर्ग, लिंग और जातीयता के आधार पर अलग होते हैं: घर के कारण (पैसा, सांस्कृतिक पूँजी, भाषा, माता-पिता की मदद) और स्कूल के कारण (लेबलिंग, सेटिंग-स्ट्रीमिंग, स्व-पूर्ण भविष्यवाणी, छात्र उपसंस्कृति)। सरकारें नीति से स्कूल बदलती हैं: चयन, बाज़ारीकरण, निजीकरण और समानता के उपाय। ज़्यादा बच्चों का स्कूल पहुँचना (विस्तार) अपने आप सबको बराबर अवसर (लोकतंत्रीकरण) नहीं देता।
2. 4.1.2 Methods in context
4.1.2 Methods in context
- समाजशास्त्रीय शोध विधियाँ – समाजशास्त्री समाज को शोध से समझते हैं, कदम-दर-कदम: विषय चुनो, उद्देश्य या परिकल्पना लिखो, छोटा पायलट अध्ययन करो, नमूना चुनो, आँकड़े जुटाओ, विश्लेषण करो और निष्कर्ष निकालो। नमूना पूरी आबादी में से चुना गया छोटा समूह है; यह प्रतिनिधि होना चाहिए ताकि नतीजे सब पर लागू हों। मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं (प्रश्नावली, संरचित साक्षात्कार, सरकारी आँकड़े); गुणात्मक आँकड़े शब्द और अर्थ हैं (असंरचित साक्षात्कार, अवलोकन, दस्तावेज़)। प्राथमिक आँकड़े शोधकर्ता खुद जुटाता है; द्वितीयक पहले से मौजूद होते हैं। अच्छा शोध विश्वसनीय (दोहराने पर वही नतीजा), वैध (सच्ची तस्वीर) और प्रतिनिधि होता है। विधि का चुनाव व्यावहारिक (समय, पैसा, पहुँच), नैतिक (सहमति, गोपनीयता, नुकसान न हो) और सैद्धांतिक कारणों से होता है: प्रत्यक्षवादी (positivist) संख्याएँ पसंद करते हैं, व्याख्यावादी (interpretivist) लोगों के अर्थ समझना।
3. 4.1.3 Theory and methods: research methods
4.1.3 Research methods
- समाजशास्त्रीय शोध विधियाँ – समाजशास्त्री समाज को शोध से समझते हैं, कदम-दर-कदम: विषय चुनो, उद्देश्य या परिकल्पना लिखो, छोटा पायलट अध्ययन करो, नमूना चुनो, आँकड़े जुटाओ, विश्लेषण करो और निष्कर्ष निकालो। नमूना पूरी आबादी में से चुना गया छोटा समूह है; यह प्रतिनिधि होना चाहिए ताकि नतीजे सब पर लागू हों। मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं (प्रश्नावली, संरचित साक्षात्कार, सरकारी आँकड़े); गुणात्मक आँकड़े शब्द और अर्थ हैं (असंरचित साक्षात्कार, अवलोकन, दस्तावेज़)। प्राथमिक आँकड़े शोधकर्ता खुद जुटाता है; द्वितीयक पहले से मौजूद होते हैं। अच्छा शोध विश्वसनीय (दोहराने पर वही नतीजा), वैध (सच्ची तस्वीर) और प्रतिनिधि होता है। विधि का चुनाव व्यावहारिक (समय, पैसा, पहुँच), नैतिक (सहमति, गोपनीयता, नुकसान न हो) और सैद्धांतिक कारणों से होता है: प्रत्यक्षवादी (positivist) संख्याएँ पसंद करते हैं, व्याख्यावादी (interpretivist) लोगों के अर्थ समझना।
4. 4.2.1 Topic option 1 (choose one): Culture and identity
4.2.1 Culture and identity
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
5. 4.2.2 Topic option 1 (choose one): Families and households
4.2.2 Families and households
- समाजशास्त्र में परिवार – एक घर में रहने वाले सभी लोग घरेलू इकाई (household) हैं; खून, शादी, साझेदारी या गोद लेने से जुड़े लोग परिवार हैं। परिवार के चार मुख्य काम हैं: बच्चे पैदा करना और पालना, समाजीकरण, आर्थिक सहारा और भावनात्मक देखभाल। परिवार कई रूपों में होते हैं: एकल, संयुक्त (विस्तारित), एकल-अभिभावक, पुनर्गठित (सौतेला), समलैंगिक और बीनपोल परिवार। घर के काम पहले बँटे हुए थे, अब ज़्यादा साझे हैं, पर अक्सर महिलाएँ अब भी ज़्यादा काम करती हैं। प्रकार्यवादी परिवार को समाज के लिए अच्छा मानते हैं, जबकि मार्क्सवादी और नारीवादी इसकी कमियाँ दिखाते हैं। 1950 के बाद कई देशों में तलाक बढ़ा: नए कानून, महिलाओं की कमाई, कम कलंक और शादी से ऊँची उम्मीदें।
6. 4.2.3 Topic option 1 (choose one): Health
4.2.3 Health
- स्वास्थ्य का समाजशास्त्र: स्वास्थ्य जैविक भी है और सामाजिक भी – स्वास्थ्य का समाजशास्त्र पूछता है कि समाज कैसे तय करता है कि कौन बीमार पड़ेगा, बीमारी क्या मानी जाएगी और इलाज किसे मिलेगा। जैव-चिकित्सीय मॉडल बीमारी को शरीर की ख़राबी मानता है जिसे डॉक्टर ठीक करते हैं; सामाजिक मॉडल कहता है कि स्वास्थ्य और बीमारी के विचार समाज बनाता है और ये संस्कृति, समय और समूहों के साथ बदलते हैं। पार्सन्स की 'बीमार की भूमिका' बीमार को कर्तव्यों से छूट देती है, अगर वह ठीक होने की कोशिश करे। वर्ग, लिंग, नृजातीयता और क्षेत्र के हिसाब से स्वास्थ्य के अवसर असमान हैं, जो एक सामाजिक ढलान बनाते हैं। इसके चार स्पष्टीकरण हैं: कृत्रिम आँकड़ा, सामाजिक चयन, सांस्कृतिक/व्यवहारवादी और भौतिक/संरचनात्मक। इलाज तक पहुँच भी असमान है; उल्टा देखभाल नियम कहता है कि सबसे ज़रूरतमंद को अक्सर सबसे कम मिलता है। अंतःक्रियावादी मानसिक बीमारी को कुछ हद तक कलंक वाला ठप्पा मानते हैं, संरचनावादी उसे सामाजिक कारणों वाली वास्तविक बीमारी। चिकित्सा और स्वास्थ्य उद्योग को प्रकार्यवादी, मार्क्सवादी, नारीवादी और इलिच जैसे आलोचक अलग-अलग देखते हैं; इलिच आयट्रोजेनेसिस (चिकित्सा से हुई हानि) की चेतावनी देते हैं।
7. 4.2.4 Topic option 1 (choose one): Work, poverty and welfare
4.2.4 Work, poverty and welfare
- ग़रीबी: अर्थ, माप, कारण और उपाय – निरपेक्ष ग़रीबी का मतलब जीने की बुनियादी चीज़ें (भोजन, पानी, घर, कपड़े) भी न होना। विश्व बैंक की अत्यधिक ग़रीबी रेखा लगभग 3 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (2021 की क़ीमतें) है। सापेक्ष ग़रीबी का मतलब अपने समाज के सामान्य स्तर से बहुत कम होना, अक्सर माध्यिका आय के 60% से नीचे, जिससे लोग सामान्य जीवन में शामिल नहीं हो पाते। ग़रीबी बराबर नहीं बँटी: बच्चे, अकेले अभिभावक, दिव्यांग, बेरोज़गार, कुछ अल्पसंख्यक और ग्रामीण परिवार ज़्यादा ख़तरे में हैं, और संपत्ति आय से भी ज़्यादा असमान है। सांस्कृतिक व्याख्याएँ परिवार में सीखे मूल्यों या मदद पर निर्भर "निम्नवर्ग" को दोष देती हैं; संरचनात्मक व्याख्याएँ कम वेतन, बेरोज़गारी, असुरक्षित और कौशल-रहित काम, वैश्वीकरण और कटौती को। उपायों में नक़द मदद, पेंशन, न्यूनतम वेतन और मुफ़्त सेवाएँ हैं, और निर्भरता पर बहस है।