Germany Jahrgangsstufe 13 Politics and Society
अध्याय: 5
1. Sociological theories of modern society
Sociological theories of modern society
- पाश्चात्य समाजशास्त्री: मार्क्स, दुर्खाइम और वेबर – समाजशास्त्र यूरोप में तीन बड़े बदलावों से जन्मा: ज्ञानोदय (तर्क पर भरोसा), फ्रांसीसी क्रांति (स्वतंत्रता, समानता) और औद्योगिक क्रांति (कारख़ाने, शहर, मज़दूरी)। कार्ल मार्क्स ने कहा कि उत्पादन का ढंग समाज को आकार देता है और इतिहास वर्गों के संघर्ष से आगे बढ़ता है, जैसे पूँजीपति और मज़दूर। एमिल दुर्खाइम ने कहा कि समाज एकता से जुड़ा रहता है: सरल समाजों में यांत्रिक (लोग एक जैसे) और आधुनिक समाजों में सावयवी (लोग अलग काम करते और एक-दूसरे पर निर्भर)। मैक्स वेबर ने कहा कि समाजशास्त्र को लोगों के कामों का अर्थ समझना चाहिए (व्याख्यात्मक समाजशास्त्र), आदर्श प्रारूप को मापने का औज़ार बनाया, और नौकरशाही को नियमों पर चलने वाला आधुनिक संगठन बताया।
2. Modernisation and life together in Germany
Modernisation and family life in Germany
- समाजशास्त्र में परिवार – एक घर में रहने वाले सभी लोग घरेलू इकाई (household) हैं; खून, शादी, साझेदारी या गोद लेने से जुड़े लोग परिवार हैं। परिवार के चार मुख्य काम हैं: बच्चे पैदा करना और पालना, समाजीकरण, आर्थिक सहारा और भावनात्मक देखभाल। परिवार कई रूपों में होते हैं: एकल, संयुक्त (विस्तारित), एकल-अभिभावक, पुनर्गठित (सौतेला), समलैंगिक और बीनपोल परिवार। घर के काम पहले बँटे हुए थे, अब ज़्यादा साझे हैं, पर अक्सर महिलाएँ अब भी ज़्यादा काम करती हैं। प्रकार्यवादी परिवार को समाज के लिए अच्छा मानते हैं, जबकि मार्क्सवादी और नारीवादी इसकी कमियाँ दिखाते हैं। 1950 के बाद कई देशों में तलाक बढ़ा: नए कानून, महिलाओं की कमाई, कम कलंक और शादी से ऊँची उम्मीदें।
3. Social inequality and social mobility
Social inequality and mobility
- सामाजिक विषमता और बहिष्कार के स्वरूप – सामाजिक विषमता का मतलब है कि कुछ समूहों को पैसा, सम्मान और पहचान ज़्यादा मिलती है, और कुछ को कम। यह योग्यता से नहीं, जन्म वाले समूह से तय होता है। सामाजिक बहिष्कार का मतलब है लोगों को समाज के पूरे जीवन से बाहर रखना। इस पाठ में जाति और अस्पृश्यता, जनजाति और आदिवासी संघर्ष, अन्य पिछड़ा वर्ग, स्त्रियों की समानता की लड़ाई और दिव्यांगों के अधिकार आसान शब्दों में समझेंगे।
4. The welfare state and current challenges
The welfare state and its challenges
- कल्याणकारी राज्य और सामाजिक सुरक्षा – कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जो लोगों को जीवन के बड़े जोखिमों से बचाता है: बीमारी, नौकरी छूटना, बुढ़ापा, विकलांगता और ग़रीबी। इसके लिए एक सुरक्षा-जाल होता है जिसके तीन हिस्से हैं। सामाजिक बीमा वेतन से लिए गए अंशदान से चलता है। सामाजिक सहायता करों से ज़रूरतमंदों को मिलती है। स्कूल और अस्पताल जैसी सार्वजनिक सेवाएँ सबके लिए खुली हैं। देश इन्हें अलग-अलग ढंग से मिलाते हैं: उदार (कम कर, थोड़ी मदद), रूढ़िवादी (मदद नौकरी से जुड़ी) और सामाजिक-लोकतांत्रिक (ऊँचा कर, सबके लिए मदद)। आज बढ़ती उम्र, बढ़ता ख़र्च, वैश्वीकरण और अनौपचारिक काम इसकी चुनौतियाँ हैं।
5. International conflicts and international law
International conflicts and international law
- अंतर्राष्ट्रीय कानून: राज्य नियम कैसे बनाते और निभाते हैं – अंतर्राष्ट्रीय कानून वे नियम हैं जिन्हें राज्य (और अंतर्राष्ट्रीय संगठन) आपसी व्यवहार में बाध्यकारी मानते हैं। कोई विश्व संसद या विश्व पुलिस नहीं है, इसलिए राज्य खुद नियम बनाते हैं, मुख्य रूप से संधियों और रिवाजों से, साथ में कानून के सामान्य सिद्धांत; अदालती फ़ैसले और विद्वानों के लेख नियम समझने में मदद करते हैं। यह बराबर संप्रभु राज्यों के विचार (1648) से संयुक्त राष्ट्र (1945) और मानव अधिकार कानून (1948 से) तक बढ़ा। संयुक्त राष्ट्र और उसका अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय शांति बनाए रखने और विवाद सुलझाने में मदद करते हैं। राज्य बातचीत, मध्यस्थता, पंच निर्णय या अदालत से विवाद सुलझाते हैं। हर देश तय करता है कि संधि उसके अपने (नगरपालिका/राष्ट्रीय) कानून में कैसे आए: एकवादी देश सीधे लागू करते हैं; भारत और ब्रिटेन जैसे द्वैतवादी देशों में संसद का अधिनियम चाहिए।