National Year 10 Sociology
अध्याय: 5
1. 3.1 The sociological approach
3.1 Key sociological ideas
- समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण: समाजशास्त्री समाज को कैसे देखते हैं – समाजशास्त्र समाज और समूहों में लोगों के व्यवहार का अध्ययन है। सहमति दृष्टि (प्रकार्यवाद) समाज को साझा मूल्यों पर मिलकर चलने वाले अंगों जैसा देखती है; संघर्ष दृष्टि (मार्क्सवाद, नारीवाद) समूहों को शक्ति के लिए होड़ करते देखती है। संरचनात्मक दृष्टि बड़ी व्यवस्थाओं को, अंतःक्रियावादी दृष्टि रोज़ की आमने-सामने की बातचीत के अर्थों को देखती है। दुर्खीम, मार्क्स, वेबर, पार्सन्स, मीड और ओकली जैसी नारीवादी विचारकों ने ये विचार दिए।
2. 3.2 Social structures, social processes and social issues
3.2 Social structures, processes and issues
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
3. 3.3 Families
3.3.1 Functions of families · 3.3.2 Family forms · 3.3.3 Conjugal role relationships · 3.3.4 Changing relationships within families · 3.3.5 Criticisms of families · 3.3.6 Divorce
- समाजशास्त्र में परिवार – एक घर में रहने वाले सभी लोग घरेलू इकाई (household) हैं; खून, शादी, साझेदारी या गोद लेने से जुड़े लोग परिवार हैं। परिवार के चार मुख्य काम हैं: बच्चे पैदा करना और पालना, समाजीकरण, आर्थिक सहारा और भावनात्मक देखभाल। परिवार कई रूपों में होते हैं: एकल, संयुक्त (विस्तारित), एकल-अभिभावक, पुनर्गठित (सौतेला), समलैंगिक और बीनपोल परिवार। घर के काम पहले बँटे हुए थे, अब ज़्यादा साझे हैं, पर अक्सर महिलाएँ अब भी ज़्यादा काम करती हैं। प्रकार्यवादी परिवार को समाज के लिए अच्छा मानते हैं, जबकि मार्क्सवादी और नारीवादी इसकी कमियाँ दिखाते हैं। 1950 के बाद कई देशों में तलाक बढ़ा: नए कानून, महिलाओं की कमाई, कम कलंक और शादी से ऊँची उम्मीदें।
4. 3.4 Education
3.4.1 Roles and functions of education · 3.4.2 Education and capitalism · 3.4.3 Educational achievement · 3.4.4 Processes within schools
- शिक्षा का समाजशास्त्र: स्कूल क्या करते हैं और परिणाम अलग क्यों होते हैं – समाजशास्त्री पूछते हैं कि स्कूल समाज के लिए क्या करता है और कुछ समूह बेहतर क्यों करते हैं। प्रकार्यवादी कहते हैं कि शिक्षा साझा मूल्य बनाती है, नौकरी के कौशल सिखाती है और योग्यता से लोगों को भूमिकाएँ देती है। मार्क्सवादी कहते हैं कि स्कूल छिपे पाठ्यक्रम के ज़रिए असमान कार्यस्थल की नक़ल करता है, जिससे वर्ग असमानता आगे बढ़ती है। परिणाम सामाजिक वर्ग, लिंग और जातीयता के आधार पर अलग होते हैं: घर के कारण (पैसा, सांस्कृतिक पूँजी, भाषा, माता-पिता की मदद) और स्कूल के कारण (लेबलिंग, सेटिंग-स्ट्रीमिंग, स्व-पूर्ण भविष्यवाणी, छात्र उपसंस्कृति)। सरकारें नीति से स्कूल बदलती हैं: चयन, बाज़ारीकरण, निजीकरण और समानता के उपाय। ज़्यादा बच्चों का स्कूल पहुँचना (विस्तार) अपने आप सबको बराबर अवसर (लोकतंत्रीकरण) नहीं देता।
5. 3.7 Sociological research methods
3.7 Research design · 3.7 Methods and data · 3.7 Evaluating research
- समाजशास्त्रीय शोध विधियाँ – समाजशास्त्री समाज को शोध से समझते हैं, कदम-दर-कदम: विषय चुनो, उद्देश्य या परिकल्पना लिखो, छोटा पायलट अध्ययन करो, नमूना चुनो, आँकड़े जुटाओ, विश्लेषण करो और निष्कर्ष निकालो। नमूना पूरी आबादी में से चुना गया छोटा समूह है; यह प्रतिनिधि होना चाहिए ताकि नतीजे सब पर लागू हों। मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं (प्रश्नावली, संरचित साक्षात्कार, सरकारी आँकड़े); गुणात्मक आँकड़े शब्द और अर्थ हैं (असंरचित साक्षात्कार, अवलोकन, दस्तावेज़)। प्राथमिक आँकड़े शोधकर्ता खुद जुटाता है; द्वितीयक पहले से मौजूद होते हैं। अच्छा शोध विश्वसनीय (दोहराने पर वही नतीजा), वैध (सच्ची तस्वीर) और प्रतिनिधि होता है। विधि का चुनाव व्यावहारिक (समय, पैसा, पहुँच), नैतिक (सहमति, गोपनीयता, नुकसान न हो) और सैद्धांतिक कारणों से होता है: प्रत्यक्षवादी (positivist) संख्याएँ पसंद करते हैं, व्याख्यावादी (interpretivist) लोगों के अर्थ समझना।