तीनों सामाजिक विज्ञान क्या पढ़ते हैं
सामाजिक विज्ञान सबूतों के आधार पर इंसान और समाज को पढ़ता है। तीन क़रीबी विषय हैं:
- मानवशास्त्र (anthropology): इंसान का पूरा अध्ययन, ख़ासकर संस्कृति (साझा विश्वास, रीति-रिवाज, भाषा, औज़ार), हर समय और हर जगह।
- मनोविज्ञान (psychology): मन और व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन, आम तौर पर व्यक्ति का।
- समाजशास्त्र (sociology): समाज, समूहों और सामाजिक संस्थाओं (परिवार, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, धर्म, सरकार) और असमानता जैसे पैटर्न का अध्ययन।
ये एक-दूसरे से मिलते हैं: जैसे दादागिरी (बुलिंग) के सवाल का मनोवैज्ञानिक पहलू (दबंग की भावनाएँ), समाजशास्त्रीय पहलू (स्कूल का माहौल, ताक़त) और मानवशास्त्रीय पहलू (अलग संस्कृतियाँ इसे कैसे देखती हैं) होता है।
मानवशास्त्र: शाखाएँ, विचारक और विधियाँ
चार शाखाएँ:
- सांस्कृतिक (सामाजिक) मानवशास्त्र: आज के जीने के तरीके, रिश्तेदारी, रस्में, अर्थव्यवस्था।
- जैविक (शारीरिक) मानवशास्त्र: मानव विकास, शरीर, वानर-परिवार।
- पुरातत्व: वस्तुओं और अवशेषों से पुराने समाज।
- भाषाई मानवशास्त्र: भाषा और वह सोच व संस्कृति को कैसे आकार देती है।
मुख्य विचारक: फ़्रांज़ बोआस (सांस्कृतिक सापेक्षवाद: हर संस्कृति को उसके अपने मानकों से परखें), ब्रोनिस्लाव मैलिनोव्स्की (सहभागी अवलोकन के साथ लंबा क्षेत्र-कार्य), मार्गरेट मीड (संस्कृति बड़े होने को कैसे आकार देती है), क्लॉड लेवी-स्ट्रॉस (मिथकों में पैटर्न)। विचारधाराएँ: प्रकार्यवाद, सांस्कृतिक सापेक्षवाद, संरचनावाद।
विधियाँ: क्षेत्र-कार्य, सहभागी अवलोकन, साक्षात्कार, वंशावली, खुदाई। मानवशास्त्री यह भी पढ़ते हैं कि संस्कृतियाँ प्रसार (diffusion) (विचारों का फैलना), आत्मसात्करण (assimilation) (अल्पसंख्यक का मुख्य संस्कृति अपनाना) और वैश्वीकरण से कैसे बदलती हैं।
मनोविज्ञान: दृष्टिकोण, विचारक और विधियाँ
- व्यवहारवादी (पावलोव, स्किनर): व्यवहार अनुकूलन, इनाम और सज़ा से सीखा जाता है।
- संज्ञानात्मक (पियाजे): हम कैसे सोचते, याद रखते और समस्या सुलझाते हैं।
- जैविक: दिमाग़, तंत्रिकाएँ, हार्मोन और जीन।
- मनोविश्लेषणात्मक (फ़्रायड): छिपी, अचेतन इच्छाएँ और शुरुआती बचपन।
- मानवतावादी (मैस्लो, रोजर्स): स्वतंत्र इच्छा, आत्मसम्मान और अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचना (मैस्लो का आवश्यकता-सोपान)।
विधियाँ: प्रयोग (एक चर बदलें, दूसरा मापें, बाकी सब एक-सा रखें), व्यक्ति-अध्ययन, अवलोकन, प्रश्नावली। मनोविज्ञान बताता है कि प्रकृति (जीन), पालन-पोषण (माहौल) और साथियों का दबाव जैसी परिस्थितियाँ व्यक्ति के काम को कैसे आकार देती हैं।
समाजशास्त्र: परिप्रेक्ष्य, विचारक और विधियाँ
- प्रकार्यवाद (एमिल दुर्खीम): हर संस्था का एक काम है जो समाज को स्थिर रखता है, जैसे शरीर के अंग।
- संघर्ष सिद्धांत (कार्ल मार्क्स): समूह पैसे और ताक़त के लिए होड़ करते हैं; समाज में जीतने और हारने वाले हैं।
- प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (मैक्स वेबर के विचार, जॉर्ज एच. मीड): लोग रोज़ के मेलजोल में अर्थ बनाते हैं।
- नारीवादी परिप्रेक्ष्य: लिंग ताक़त और अवसर को कैसे आकार देता है।
समाजशास्त्री पूर्वाग्रह (किसी समूह के प्रति नकारात्मक सोच) और भेदभाव (अनुचित व्यवहार), वर्ग, विचलन और संस्थाओं में बदलाव, जैसे छोटे परिवार या ऑनलाइन पढ़ाई, पढ़ते हैं। विधियाँ: सर्वे, आँकड़े, साक्षात्कार, मीडिया की सामग्री का विश्लेषण।
समाजीकरण: जहाँ तीनों मिलते हैं
समाजीकरण अपने समाज के मानदंड, मूल्य और कौशल सीखने की जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। समाजीकरण के अभिकरण:
- परिवार: पहला और आम तौर पर सबसे मज़बूत (प्राथमिक) अभिकरण।
- साथी समूह: हमउम्र दोस्त, किशोरावस्था में बहुत असरदार।
- स्कूल: नियम, टीमवर्क, साझा पाठ्यक्रम।
- मीडिया: फ़िल्में, गेम, सोशल मीडिया।
- धर्म, कार्यस्थल और राज्य भी।
मानवशास्त्री दिखाते हैं कि समाजीकरण संस्कृतियों में अलग है; मनोवैज्ञानिक दिखाते हैं कि यह व्यक्तित्व के गुण कैसे बनाता है; समाजशास्त्री दिखाते हैं कि यह लैंगिक भूमिकाओं जैसी सामाजिक संरचनाएँ कैसे आगे बढ़ाता है। अकेलेपन में पले बच्चों के मामलों से पता चलता है कि सामाजिक संपर्क के बिना भाषा और सामाजिक कौशल सामान्य रूप से नहीं बनते, हालाँकि ऐसे अध्ययनों में गंभीर नैतिक समस्याएँ हैं।
सामाजिक विज्ञानों में शोध करना
- योजना: साफ़ सवाल और परिकल्पना (जाँचा जा सकने वाला अनुमान) लिखें।
- इकट्ठा करें: प्राथमिक डेटा (अपना सर्वे, साक्षात्कार, अवलोकन, प्रयोग) और द्वितीयक डेटा (शोध पत्रिकाएँ, जनगणना, किताबें)।
- स्रोत परखें: लेखक, तारीख़, सबूत, पक्षपात।
- नैतिकता: सूचित सहमति, कोई नुक़सान नहीं, बीच में हटने का अधिकार, गोपनीयता।
- विश्लेषण: डेटा तालिका और ग्राफ़ में, पैटर्न खोजें, याद रखें कि सहसंबंध कारण नहीं है।
- ईमानदारी: हर स्रोत का मानक तरीके से हवाला दें; कभी नकल या झूठा डेटा नहीं।
- बताएँ और सोचें: सही शब्दों में रिपोर्ट, पोस्टर या भाषण; फिर सोचें कि क्या बेहतर करेंगे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मानवशास्त्र = संस्कृति; मनोविज्ञान = व्यक्ति का मन और व्यवहार; समाजशास्त्र = समूह और समाज
- मानवशास्त्र की चार शाखाएँ: सांस्कृतिक, जैविक, पुरातत्व, भाषाई
- मनोविज्ञान के दृष्टिकोण: व्यवहारवादी, संज्ञानात्मक, जैविक, मनोविश्लेषणात्मक, मानवतावादी
- समाजशास्त्र के परिप्रेक्ष्य: प्रकार्यवाद, संघर्ष सिद्धांत, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (+ नारीवादी)
- मुख्य विधियाँ: क्षेत्र-कार्य (मानवशास्त्र), प्रयोग (मनोविज्ञान), सर्वे (समाजशास्त्र)
हल किए गए उदाहरण
1. एक शोधकर्ता मछुआरों के गाँव में एक साल रहता है, काम और त्योहारों में शामिल होता है, ताकि समुद्र के बारे में उनके विश्वास समझ सके। कौन-सा विषय और विधि?
किसी संस्कृति में रहकर उसे पढ़ना मानवशास्त्र है, क्षेत्र-कार्य और सहभागी अवलोकन से।
2. छात्रों के दो समूह शब्दों की सूची याद करते हैं। एक 8 घंटे सोता है, दूसरा 4 घंटे, फिर दोनों की परीक्षा होती है। कौन-सा विषय और विधि?
एक चर (नींद) का व्यक्ति की स्मृति पर असर जाँचा गया: मनोविज्ञान, प्रयोग विधि से।
3. एक अध्ययन में पाया गया कि अमीर परिवारों के बच्चे ज़्यादा विश्वविद्यालय जाते हैं। कौन-सा परिप्रेक्ष्य कहेगा कि इससे अमीरों की ताक़त बनी रहती है?
संघर्ष सिद्धांत, जो शिक्षा जैसी संस्थाओं को ऐसी जगह मानता है जहाँ समूह होड़ करते हैं और ताक़तवर अपना फ़ायदा बनाए रखते हैं।
आम गलतियाँ
- सोचना कि मनोविज्ञान सिर्फ़ मानसिक बीमारी के बारे में है। यह सारी सोच, भावना और व्यवहार पढ़ता है।
- सोचना कि मानवशास्त्र सिर्फ़ प्राचीन या "अजीब" लोगों को पढ़ता है। यह आधुनिक शहरों समेत सभी इंसानों को पढ़ता है।
- पूर्वाग्रह (सोच) और भेदभाव (काम) को एक समझना।
- मानना कि दो चीज़ों का साथ होना साबित करता है कि एक दूसरी का कारण है। सहसंबंध कारण नहीं है।