सांस्कृतिक परिवर्तन क्या है?
संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा तरीक़ा है: विश्वास, रीति-रिवाज़, मूल्य, खान-पान, पहनावा और भाषा। इनमें बदलाव को सांस्कृतिक परिवर्तन कहते हैं। भारत में औपनिवेशिक शासन और राष्ट्रीय आंदोलन से बड़े सांस्कृतिक बदलाव आए, पहले समाज सुधार आंदोलनों से और फिर उन प्रक्रियाओं से जिन्हें समाजशास्त्री संस्कृतीकरण, पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण और धर्मनिरपेक्षीकरण कहते हैं।
19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत के समाज सुधार आंदोलन
सुधारकों ने स्त्रियों और निचली जातियों को चोट पहुँचाने वाली प्रथाओं को चुनौती दी:
- राजा राममोहन राय (ब्रह्म समाज) ने सती के विरुद्ध अभियान चलाया; 1829 में इस पर रोक लगी।
- ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के लिए काम किया; 1856 में कानून बना।
- ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों और निचली जातियों के लिए स्कूल खोले और जातिगत असमानता के विरुद्ध सत्यशोधक समाज (1873) बनाया।
- सर सैयद अहमद ख़ान ने मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया (अलीगढ़, 1875)।
- पंडिता रमाबाई, श्री नारायण गुरु और कई अन्य ने स्त्रियों के लिए और जाति-नियमों के विरुद्ध काम किया।
यह सुधार नया कैसे था?
समाजशास्त्री सतीश सबरवाल आधुनिक संदर्भ के तीन पहलू बताते हैं:
- संचार के साधन: छापाख़ाना, अख़बार, रेल, जिससे विचार तेज़ी से फैले।
- संगठन के रूप: केवल जाति या गाँव के समूहों की जगह नई सभाएँ (समाज, सभा)।
- विचारों की प्रकृति: स्वतंत्रता और समानता जैसे उदार विचार, पुराने धर्मग्रंथों की नई व्याख्या के साथ, यह दिखाने के लिए कि सती जैसी प्रथाएँ उनमें अनिवार्य नहीं थीं।
सुधारकों में आपस में मतभेद भी थे और खुली बहसें होती थीं। सुधार आधुनिक भी था और भारतीय परंपराओं से जुड़ा भी।
संस्कृतीकरण
यह शब्द समाजशास्त्री एम. एन. श्रीनिवास ने दिया। संस्कृतीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें जाति-क्रम में नीचे की जाति किसी ऊँची (अक्सर 'द्विज') जाति के रीति-रिवाज़, कर्मकांड, विश्वास और जीवन-शैली अपनाकर ऊँचे स्थान का दावा करती है।
- उदाहरण: मांस और शराब छोड़ना, जनेऊ पहनना, ऊँची जाति के कर्मकांड और उपनाम अपनाना।
- परिणाम: स्थिति में बदलाव (समूह ऊपर जाता है) पर संरचना में बदलाव नहीं (सीढ़ी बनी रहती है)।
- आलोचनाएँ: यह मान लेता है कि ऊँची जाति के तरीक़े बेहतर हैं, इसलिए असमानता को सही ठहराता है; इससे दहेज और स्त्रियों पर पाबंदियाँ जैसी प्रथाएँ और समूहों में फैलीं; ऊपर उठने का दावा अक्सर दूसरे स्वीकार नहीं करते।
- वि-संस्कृतीकरण: दलित और पिछड़ी जातियों के आंदोलनों ने जाति-क्रम को ठुकराया और अपनी संस्कृति पर गर्व किया।
पश्चिमीकरण
श्रीनिवास ने पश्चिमीकरण को लगभग 150 वर्ष के ब्रिटिश शासन के कारण भारतीय समाज और संस्कृति में आए बदलाव कहा। यह कई स्तरों पर होता है:
- जीवन-शैली: पहनावा, खाना, मेज़ पर भोजन, अंग्रेज़ी भाषा, नई कलाएँ।
- विचार और मूल्य: मानवतावाद, समानता, अधिकार, लोकतंत्र, विज्ञान।
- पहले किसने अपनाया: ज़्यादातर ऊँची जातियों और नए मध्यम वर्ग ने, अंग्रेज़ी शिक्षा के ज़रिए।
पश्चिमीकरण और संस्कृतीकरण साथ-साथ हो सकते हैं: एक परिवार मांस छोड़ दे (संस्कृतीकरण) और बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल भेजे (पश्चिमीकरण)।
आधुनिकीकरण
पहले आधुनिकीकरण का अर्थ केवल तकनीक और उद्योग में 'प्रगति' था। समाजशास्त्र में इसका अर्थ है सोचने और जीने के ढंग में बदलाव:
- स्थानीय, संकीर्ण निष्ठाओं से सार्वभौमिक नियमों की ओर (सबके लिए एक कानून);
- जन्म से काम तय होने से योग्यता और चुनाव की ओर;
- भाग्य और रिवाज़ से तर्क और विज्ञान की ओर;
- निजी रिश्तों से अवैयक्तिक दफ़्तरों, बाज़ारों और चुनावों की ओर।
भारत में आधुनिकता ने परंपरा को पूरी तरह नहीं हटाया। पुराना और नया अक्सर मिल जाते हैं: सॉफ़्टवेयर इंजीनियर ज्योतिषी से सलाह ले सकता है; जाति संगठन चुनाव और इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं।
धर्मनिरपेक्षीकरण
पश्चिमी समाजशास्त्र में धर्मनिरपेक्षीकरण का अर्थ है सार्वजनिक जीवन पर धर्म का प्रभाव घटना: कानून, स्कूल, विज्ञान और काम धार्मिक नियमों से नहीं चलते। भारत में 'धर्मनिरपेक्ष' का अर्थ यह भी है कि राज्य सभी धर्मों को बराबर सम्मान देता है और किसी एक का पक्ष नहीं लेता।
पर भारतीय अनुभव मिला-जुला है। कई कर्मकांड और भव्य हो गए हैं, त्योहार बड़े सार्वजनिक आयोजन बन गए हैं, और राजनीति में धर्म व जाति का उपयोग होता है। कुछ कर्मकांड उद्देश्य में धर्मनिरपेक्ष भी हो गए: शादी हैसियत दिखाने या संबंध बनाने का मौक़ा बन जाती है। इसलिए भारत में धर्मनिरपेक्षीकरण असमान है।
चारों प्रक्रियाओं की तुलना
- संस्कृतीकरण: आदर्श एक ऊँची भारतीय जाति; दिशा जाति-क्रम में ऊपर।
- पश्चिमीकरण: आदर्श पश्चिम; जीवन-शैली और विचारों में बदलाव।
- आधुनिकीकरण: किसी एक संस्कृति से बँधा नहीं; तर्क, चुनाव और सार्वभौमिक नियमों की ओर।
- धर्मनिरपेक्षीकरण: सार्वजनिक जीवन में धर्म के स्थान में बदलाव।
परीक्षा कोना: इस इकाई के लगभग 5 अंक होते हैं। संभावित प्रश्न: संस्कृतीकरण की परिभाषा और एक आलोचना; 19वीं सदी का सुधार आधुनिक कैसे था; पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण में अंतर; धर्मनिरपेक्षता का भारतीय अर्थ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सांस्कृतिक परिवर्तन: समूह के विश्वासों, रिवाज़ों और मूल्यों में बदलाव।
- समाज सुधार: हानिकारक प्रथाओं (सती, बाल विवाह, छुआछूत) को ख़त्म करने का संगठित प्रयास।
- सबरवाल के तीन पहलू: संचार के साधन, संगठन के रूप, विचारों की प्रकृति।
- संस्कृतीकरण (एम. एन. श्रीनिवास): निचली जाति ऊँची जाति के रिवाज़ अपनाकर ऊपर उठती है।
- स्थिति में बदलाव, संरचना में नहीं।
- पश्चिमीकरण: पश्चिमी (ब्रिटिश) संपर्क से बदलाव; जीवन-शैली और विचार।
- आधुनिकीकरण: तर्क, विज्ञान, योग्यता और सार्वभौमिक नियमों की ओर।
- धर्मनिरपेक्षीकरण: सार्वजनिक जीवन पर धर्म का नियंत्रण घटना; भारतीय राज्य = सभी धर्मों को बराबर सम्मान।
हल किए गए उदाहरण
1. गाँव का एक जाति समूह मांस खाना छोड़ देता है, जनेऊ पहनने लगता है और ऊँची जाति का उपनाम माँगता है। यह कौन-सी प्रक्रिया है, और क्या इससे जातिगत असमानता ख़त्म होती है?
यह संस्कृतीकरण है। इससे समूह का दर्जा बढ़ सकता है, पर जाति की सीढ़ी ख़त्म नहीं होती; यह मान लेता है कि ऊँची जाति के रिवाज़ श्रेष्ठ हैं। इसलिए यह स्थिति का बदलाव है, संरचना का नहीं।
2. 19वीं सदी का सुधार आंदोलन पुराने ग्रंथों का हवाला देने के बावजूद 'आधुनिक' कैसे था?
इसने आधुनिक साधन अपनाए: विचार फैलाने के लिए छापाख़ाना और अख़बार, संगठित होने के लिए समाज जैसी नई सभाएँ, और समानता व स्वतंत्रता के उदार विचार। पुराने ग्रंथों का हवाला यह दिखाने के लिए था कि सती जैसी प्रथाओं का कोई सच्चा धार्मिक आधार नहीं। इसलिए साधन भी आधुनिक थे और कई विचार भी।
3. प्रिया का परिवार डाइनिंग टेबल पर चम्मच से खाता है और घर में अंग्रेज़ी बोलता है, पर उसकी दादी अब भी खाने के सारे पुराने जाति-नियम मानती हैं। प्रक्रियाएँ बताइए।
मेज़ पर खाना और अंग्रेज़ी बोलना जीवन-शैली में पश्चिमीकरण है। दादी के नियम दिखाते हैं कि परंपरा जारी है। भारत में यह मेल आम है: आधुनिक और पारंपरिक तरीक़े साथ-साथ चलते हैं।
4. पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण में अंतर बताइए।
पश्चिमीकरण का एक निश्चित स्रोत है: पश्चिम से संपर्क, जो पहनावे, खाने, भाषा और कुछ विचारों में दिखता है। आधुनिकीकरण का कोई एक संस्कृति आदर्श नहीं; यह तर्क, विज्ञान, योग्यता और सार्वभौमिक नियमों की ओर बदलाव है, जो भारतीय या पश्चिमी किसी भी रास्ते से आ सकता है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि संस्कृतीकरण से जाति ख़त्म होती है। इससे केवल एक समूह ऊपर जाता है; सीढ़ी बनी रहती है।
- पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण को एक समझना। एक पश्चिम की नकल है; दूसरा तर्क और सार्वभौमिक नियमों की बात है।
- कहना कि सुधारकों ने सारी परंपरा ठुकरा दी। कई ने सुधार के पक्ष में पुराने ग्रंथों की नई व्याख्या की।
- मान लेना कि धर्मनिरपेक्षीकरण से भारत में धर्म ख़त्म हो जाता है। कर्मकांड और त्योहार अक्सर बढ़े हैं; सार्वजनिक जीवन पर धर्म का नियंत्रण असमान रूप से घटता है।