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भारत में सांस्कृतिक परिवर्तन: समाज सुधार, संस्कृतीकरण और अन्य प्रक्रियाएँ

सांस्कृतिक परिवर्तन यानी लोगों के विचारों, रीति-रिवाज़ों और मूल्यों में बदलाव। 19वीं सदी के भारत में समाज सुधारकों ने सती, बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह पर रोक और छुआछूत जैसी प्रथाओं के विरुद्ध संघर्ष किया, और छापाख़ाने व सभाओं जैसे नए साधन अपनाए। बाद के सांस्कृतिक परिवर्तन के लिए समाजशास्त्री चार शब्द इस्तेमाल करते हैं: संस्कृतीकरण (निचली जाति ऊँची जाति के रिवाज़ अपनाकर ऊपर उठती है), पश्चिमीकरण (पश्चिमी संपर्क से बदलाव), आधुनिकीकरण (तर्क, विज्ञान और चुनाव की ओर) और धर्मनिरपेक्षीकरण (सार्वजनिक जीवन पर धर्म का नियंत्रण घटना)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1800 के दशक में सुधारकों ने सती, बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह पर रोक और छुआछूत के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। उन्होंने नए साधन अपनाए: छापाख़ाना, अख़बार और नई सभाएँ।
  2. संस्कृतीकरण: निचली जाति ऊँची जाति के रिवाज़, जैसे खान-पान और कर्मकांड, अपनाकर दर्जा बढ़ाना चाहती है। समूह ऊपर चढ़ता है, पर जाति की सीढ़ी बनी रहती है।
  3. पश्चिमीकरण: पश्चिम के संपर्क से आया बदलाव। यह कपड़ों, खाने और भाषा में दिखता है, और समानता व अधिकार जैसे विचारों में भी।
  4. आधुनिकीकरण: 'जन्म और भाग्य तय करेंगे' से हटकर तर्क, विज्ञान और अपनी पसंद की ओर बढ़ना। सब पर एक जैसे नियम लागू होते हैं।
  5. धर्मनिरपेक्षीकरण: अदालत, स्कूल और काम जैसे सार्वजनिक जीवन पर धर्म का नियंत्रण घटता है। धर्म रहता है, पर ज़्यादा निजी मामला बनकर।
  6. अब आपकी बारी। कोई प्रक्रिया चुनिए और उसका असली उदाहरण देखिए। फिर अपने परिवार का एक बदलाव उससे मिलाइए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सुधारक पुराने शास्त्रों का हवाला देते थे, तो वे आधुनिक कैसे हुए?

उनके साधन (प्रेस, सभाएँ) और कई विचार (समानता, स्वतंत्रता) आधुनिक थे। वे पुराने ग्रंथों से यह दिखाते थे कि बुरी प्रथाएँ सचमुच ज़रूरी नहीं थीं।

अगर संस्कृतीकरण से निचली जाति ऊपर उठ जाए, तो क्या जाति ख़त्म हो गई?

नहीं। समूह ऊपर जाता है, पर सीढ़ी बनी रहती है। यह स्थिति का बदलाव है, संरचना का नहीं।

क्या पश्चिमीकरण केवल कपड़ों और खाने तक है?

नहीं। इससे समानता, लोकतंत्र और अधिकार जैसे विचार भी आए।

क्या आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण एक ही हैं?

नहीं। आधुनिकीकरण का अर्थ है तर्क, विज्ञान और सार्वभौमिक नियम, जिनके लिए किसी एक संस्कृति की नकल ज़रूरी नहीं।

क्या धर्मनिरपेक्षीकरण का अर्थ है कि लोग धार्मिक नहीं रहते?

नहीं। सार्वजनिक जीवन पर धर्म का नियंत्रण घटता है, पर निजी आस्था, कर्मकांड और त्योहार जारी रह सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं।

क्या एक परिवार में एक से ज़्यादा प्रक्रियाएँ दिख सकती हैं?

हाँ। आख़िरी चरण में हर बटन चुनिए: एक परिवार एक साथ संस्कृतीकरण और पश्चिमीकरण दोनों कर सकता है।

सांस्कृतिक परिवर्तन क्या है?

संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा तरीक़ा है: विश्वास, रीति-रिवाज़, मूल्य, खान-पान, पहनावा और भाषा। इनमें बदलाव को सांस्कृतिक परिवर्तन कहते हैं। भारत में औपनिवेशिक शासन और राष्ट्रीय आंदोलन से बड़े सांस्कृतिक बदलाव आए, पहले समाज सुधार आंदोलनों से और फिर उन प्रक्रियाओं से जिन्हें समाजशास्त्री संस्कृतीकरण, पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण और धर्मनिरपेक्षीकरण कहते हैं।

19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत के समाज सुधार आंदोलन

सुधारकों ने स्त्रियों और निचली जातियों को चोट पहुँचाने वाली प्रथाओं को चुनौती दी:

यह सुधार नया कैसे था?

समाजशास्त्री सतीश सबरवाल आधुनिक संदर्भ के तीन पहलू बताते हैं:

सुधारकों में आपस में मतभेद भी थे और खुली बहसें होती थीं। सुधार आधुनिक भी था और भारतीय परंपराओं से जुड़ा भी।

संस्कृतीकरण

यह शब्द समाजशास्त्री एम. एन. श्रीनिवास ने दिया। संस्कृतीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें जाति-क्रम में नीचे की जाति किसी ऊँची (अक्सर 'द्विज') जाति के रीति-रिवाज़, कर्मकांड, विश्वास और जीवन-शैली अपनाकर ऊँचे स्थान का दावा करती है।

पश्चिमीकरण

श्रीनिवास ने पश्चिमीकरण को लगभग 150 वर्ष के ब्रिटिश शासन के कारण भारतीय समाज और संस्कृति में आए बदलाव कहा। यह कई स्तरों पर होता है:

पश्चिमीकरण और संस्कृतीकरण साथ-साथ हो सकते हैं: एक परिवार मांस छोड़ दे (संस्कृतीकरण) और बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल भेजे (पश्चिमीकरण)।

आधुनिकीकरण

पहले आधुनिकीकरण का अर्थ केवल तकनीक और उद्योग में 'प्रगति' था। समाजशास्त्र में इसका अर्थ है सोचने और जीने के ढंग में बदलाव:

भारत में आधुनिकता ने परंपरा को पूरी तरह नहीं हटाया। पुराना और नया अक्सर मिल जाते हैं: सॉफ़्टवेयर इंजीनियर ज्योतिषी से सलाह ले सकता है; जाति संगठन चुनाव और इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं।

धर्मनिरपेक्षीकरण

पश्चिमी समाजशास्त्र में धर्मनिरपेक्षीकरण का अर्थ है सार्वजनिक जीवन पर धर्म का प्रभाव घटना: कानून, स्कूल, विज्ञान और काम धार्मिक नियमों से नहीं चलते। भारत में 'धर्मनिरपेक्ष' का अर्थ यह भी है कि राज्य सभी धर्मों को बराबर सम्मान देता है और किसी एक का पक्ष नहीं लेता।

पर भारतीय अनुभव मिला-जुला है। कई कर्मकांड और भव्य हो गए हैं, त्योहार बड़े सार्वजनिक आयोजन बन गए हैं, और राजनीति में धर्म व जाति का उपयोग होता है। कुछ कर्मकांड उद्देश्य में धर्मनिरपेक्ष भी हो गए: शादी हैसियत दिखाने या संबंध बनाने का मौक़ा बन जाती है। इसलिए भारत में धर्मनिरपेक्षीकरण असमान है।

चारों प्रक्रियाओं की तुलना

परीक्षा कोना: इस इकाई के लगभग 5 अंक होते हैं। संभावित प्रश्न: संस्कृतीकरण की परिभाषा और एक आलोचना; 19वीं सदी का सुधार आधुनिक कैसे था; पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण में अंतर; धर्मनिरपेक्षता का भारतीय अर्थ।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. गाँव का एक जाति समूह मांस खाना छोड़ देता है, जनेऊ पहनने लगता है और ऊँची जाति का उपनाम माँगता है। यह कौन-सी प्रक्रिया है, और क्या इससे जातिगत असमानता ख़त्म होती है?

यह संस्कृतीकरण है। इससे समूह का दर्जा बढ़ सकता है, पर जाति की सीढ़ी ख़त्म नहीं होती; यह मान लेता है कि ऊँची जाति के रिवाज़ श्रेष्ठ हैं। इसलिए यह स्थिति का बदलाव है, संरचना का नहीं।

2. 19वीं सदी का सुधार आंदोलन पुराने ग्रंथों का हवाला देने के बावजूद 'आधुनिक' कैसे था?

इसने आधुनिक साधन अपनाए: विचार फैलाने के लिए छापाख़ाना और अख़बार, संगठित होने के लिए समाज जैसी नई सभाएँ, और समानता व स्वतंत्रता के उदार विचार। पुराने ग्रंथों का हवाला यह दिखाने के लिए था कि सती जैसी प्रथाओं का कोई सच्चा धार्मिक आधार नहीं। इसलिए साधन भी आधुनिक थे और कई विचार भी।

3. प्रिया का परिवार डाइनिंग टेबल पर चम्मच से खाता है और घर में अंग्रेज़ी बोलता है, पर उसकी दादी अब भी खाने के सारे पुराने जाति-नियम मानती हैं। प्रक्रियाएँ बताइए।

मेज़ पर खाना और अंग्रेज़ी बोलना जीवन-शैली में पश्चिमीकरण है। दादी के नियम दिखाते हैं कि परंपरा जारी है। भारत में यह मेल आम है: आधुनिक और पारंपरिक तरीक़े साथ-साथ चलते हैं।

4. पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण में अंतर बताइए।

पश्चिमीकरण का एक निश्चित स्रोत है: पश्चिम से संपर्क, जो पहनावे, खाने, भाषा और कुछ विचारों में दिखता है। आधुनिकीकरण का कोई एक संस्कृति आदर्श नहीं; यह तर्क, विज्ञान, योग्यता और सार्वभौमिक नियमों की ओर बदलाव है, जो भारतीय या पश्चिमी किसी भी रास्ते से आ सकता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. संस्कृतीकरण शब्द किसने दिया?
2. सती प्रथा पर रोक कब लगी?
3. ब्रिटिश संपर्क से पहनावे, खाने और भाषा में आए बदलाव कहलाते हैं:
4. अदालतों और स्कूलों पर धर्म का नियंत्रण घटना है:
5. संस्कृतीकरण की एक आलोचना कौन-सी है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृतीकरण आसान शब्दों में क्या है?

जब निचली जाति ऊँची जाति के रिवाज़ और कर्मकांड अपनाकर सामाजिक दर्जा बढ़ाना चाहे। यह शब्द एम. एन. श्रीनिवास का है।

पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण में क्या अंतर है?

पश्चिमीकरण पश्चिमी संपर्क से आया बदलाव है (जीवन-शैली, विचार)। आधुनिकीकरण तर्क, विज्ञान, योग्यता और सार्वभौमिक नियमों की ओर बदलाव है, जो किसी एक संस्कृति से बँधा नहीं।

19वीं सदी के भारत के प्रमुख समाज सुधारक कौन थे?

राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले, सर सैयद अहमद ख़ान, पंडिता रमाबाई और श्री नारायण गुरु, और अन्य।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12सांस्कृतिक परिवर्तन

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