Ontario Grade 11 HSP3C Introduction to Anthropology, Psychology, and Sociology (Grade 11, College Preparation)
अध्याय: 4
1. A. Research and Inquiry Skills
A1 Exploring · A2 Investigating · A3 Processing Information · A4 Communicating and Reflecting
- मनोविज्ञान की प्रकृति: मन और व्यवहार का विज्ञान – मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो मानसिक प्रक्रियाओं (सोचना, याद करना), अनुभवों (अंदर की भावनाएँ) और व्यवहार (हम क्या करते हैं) का अध्ययन करता है। मानसिक प्रक्रियाएँ दिखती नहीं, इसलिए उन्हें व्यवहार से समझा जाता है। व्यवहार प्रकट (बाहर से दिखे) या अप्रकट (अंदर छिपा, जैसे तेज़ धड़कन) हो सकता है। मनोविज्ञान अपनी विधियों और सिद्धांतों वाला एक विषय है। प्रयोग करने और मस्तिष्क-शरीर पढ़ने के कारण यह प्राकृतिक विज्ञान है, और परिवार, समूह व संस्कृति में लोगों को पढ़ने के कारण सामाजिक विज्ञान भी। मन और मस्तिष्क जुड़े हैं, पर एक नहीं। "मनोवैज्ञानिक मन पढ़ लेते हैं" जैसी कई लोकप्रिय धारणाएँ सही नहीं हैं।
- मानवशास्त्र, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र: इंसान को पढ़ने के तीन तरीके – मानवशास्त्र, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र सामाजिक विज्ञान हैं: ये सबूतों से इंसानों को पढ़ते हैं। मानवशास्त्र इंसान को पूरा, ख़ासकर संस्कृति को, हर समय और जगह में पढ़ता है। इसकी चार शाखाएँ हैं (सांस्कृतिक, जैविक, पुरातत्व, भाषाई) और यह क्षेत्र-कार्य व सहभागी अवलोकन इस्तेमाल करता है। मनोविज्ञान व्यक्ति के मन और व्यवहार को पढ़ता है; इसके दृष्टिकोण हैं व्यवहारवादी, संज्ञानात्मक, जैविक, मनोविश्लेषणात्मक और मानवतावादी, और मुख्य विधि प्रयोग है। समाजशास्त्र समूहों, संस्थाओं और असमानता व पूर्वाग्रह जैसे पैटर्न को पढ़ता है; इसके परिप्रेक्ष्य हैं प्रकार्यवाद, संघर्ष सिद्धांत और प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद, और यह अक्सर सर्वे और आँकड़े इस्तेमाल करता है। तीनों समाजीकरण पढ़ते हैं, यानी हम परिवार, साथियों, स्कूल और मीडिया से अपनी संस्कृति कैसे सीखते हैं। हर विषय के प्रसिद्ध विचारक हैं, और सब नैतिक नियम मानते हैं: सहमति, कोई नुक़सान नहीं, निजता। अच्छे शोध का मतलब है साफ़ सवाल, योजना, भरोसेमंद प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत, ईमानदार हवाला और साफ़ प्रस्तुति।
2. B. Anthropology
B1 Theories, Perspectives, and Methodologies · B2 Explaining Human Behaviour and Culture · B3 Socialization
- मानवशास्त्र और संस्कृति – मानवशास्त्र (anthropology) इंसान का पूरा अध्ययन है: हमारा शरीर, हमारा अतीत, हमारी भाषाएँ और जीने का ढंग। संस्कृति किसी समूह का सीखा हुआ और साझा जीवन-ढंग है: लोग क्या बनाते, करते, बोलते और मानते हैं। संस्कृति सीखी जाती है, साझा होती है, प्रतीकों से भरी होती है, आपस में जुड़ी होती है और बदलती रहती है। मानवशास्त्री लोगों के साथ रहकर (सहभागी अवलोकन) इसे समझते हैं, और हर संस्कृति को उसकी अपनी नज़र से देखने की कोशिश करते हैं (सांस्कृतिक सापेक्षवाद), अपनी संस्कृति के पैमाने से नहीं (नृजातीय-केंद्रवाद)।
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
3. C. Psychology
C1 Theories, Perspectives, and Methodologies · C2 Human Mental Processes and Behaviour · C3 Socialization
- मनोविज्ञान की प्रकृति: मन और व्यवहार का विज्ञान – मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो मानसिक प्रक्रियाओं (सोचना, याद करना), अनुभवों (अंदर की भावनाएँ) और व्यवहार (हम क्या करते हैं) का अध्ययन करता है। मानसिक प्रक्रियाएँ दिखती नहीं, इसलिए उन्हें व्यवहार से समझा जाता है। व्यवहार प्रकट (बाहर से दिखे) या अप्रकट (अंदर छिपा, जैसे तेज़ धड़कन) हो सकता है। मनोविज्ञान अपनी विधियों और सिद्धांतों वाला एक विषय है। प्रयोग करने और मस्तिष्क-शरीर पढ़ने के कारण यह प्राकृतिक विज्ञान है, और परिवार, समूह व संस्कृति में लोगों को पढ़ने के कारण सामाजिक विज्ञान भी। मन और मस्तिष्क जुड़े हैं, पर एक नहीं। "मनोवैज्ञानिक मन पढ़ लेते हैं" जैसी कई लोकप्रिय धारणाएँ सही नहीं हैं।
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
4. D. Sociology
D1 Theories, Perspectives, and Methodologies · D2 Explaining Social Behaviour · D3 Socialization
- समाज और समाजशास्त्र का परिचय – समाज उन समूहों और रिश्तों का जाल है जिनमें हम जीते हैं। हर व्यक्ति अलग है, फिर भी हमेशा परिवार, कक्षा, गाँव जैसे समूहों का हिस्सा है। समाज एक नहीं, अनेक हैं, और हर समाज के अंदर लोगों को पैसा, सत्ता और सम्मान बराबर नहीं मिलता। समाज का वैज्ञानिक अध्ययन यानी समाजशास्त्र 19वीं सदी के यूरोप में जन्मा, जब तर्क, क्रांति और कारखानों ने जीवन तेज़ी से बदला। यह सामाजिक जीवन के लगभग हर हिस्से को पढ़ता है और अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, मनोविज्ञान और मानवविज्ञान से जुड़ा है।
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
- सामाजिक संस्थाओं को समझना – सामाजिक संस्था नियमों और भूमिकाओं का वह स्थायी ढाँचा है जो समाज की किसी बुनियादी ज़रूरत को पूरा करता है। परिवार, विवाह और नातेदारी जन्म, देखभाल और रिश्तेदारी को सँभालते हैं। काम और आर्थिक संस्थाएँ चीज़ें बनाने और बाँटने को सँभालती हैं, आज श्रम विभाजन, कारखानों और अनौपचारिक कामों के साथ। राजनीतिक संस्थाएँ तय करती हैं कि सत्ता किसके पास हो और उसे प्राधिकार, राज्य और कानून से वैध बनाती हैं। धर्म पवित्र के बारे में साझा विश्वास और अनुष्ठान देता है। शिक्षा अगली पीढ़ी को ज्ञान और मूल्य देती है, और रास्ते भी खोलती है और असमानता भी बनाए रख सकती है।