Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II Civics (extended level)
अध्याय: 5
1. The human person – concepts and aspects
Philosophical views of the person
- प्राचीन दर्शन: पहले सवालों से स्टोइकवाद तक – दर्शन (फ़िलॉसफ़ी) का अर्थ है 'ज्ञान से प्रेम'। लगभग 600 ई.पू. में यूनानी विचारकों ने प्रकृति को मिथक की बजाय तर्क (लोगोस) से समझाना शुरू किया। सुकरात-पूर्व दार्शनिकों ने मूल तत्व (आर्खे) खोजा: पानी, हवा, आग, न बदलने वाला सत् या परमाणु। फिर सोफ़िस्ट और सुकरात इंसानी जीवन की ओर मुड़े; सुकरात को सवाल पूछने के लिए मृत्युदंड मिला (प्लेटो की 'अपोलॉजी' में)। प्लेटो ने रूपों का सिद्धांत दिया; अरस्तू ने अवलोकन से तर्कशास्त्र और विज्ञान बनाया। बाद में स्टोइक, एपिक्यूरियन, सिनिक और सिसरो-सेनेका जैसे रोमनों ने पूछा कि अच्छा, शांत जीवन कैसे जिएँ।
2. The common good
Common good and social justice
- सामाजिक न्याय: सबको उचित हिस्सा – न्याय = हर व्यक्ति को उसका उचित हक़ देना। सामाजिक न्याय समाज में चीज़ों, सेवाओं और अवसरों के उचित बँटवारे के बारे में है। तीन सिद्धांत मार्गदर्शन करते हैं: बराबर वालों से बराबर बर्ताव, मेहनत और कौशल के अनुपात में इनाम, और विशेष ज़रूरत पर अतिरिक्त मदद। इनमें संतुलन चाहिए। जॉन रॉल्स ने कहा कि समाज के नियम 'अज्ञानता के पर्दे' के पीछे से चुनें, यानी यह जाने बिना कि हमें कौन सी जगह मिलेगी; तब समझदार व्यक्ति सबसे कमज़ोर की रक्षा करेगा। सामाजिक न्याय की शुरुआत सबकी बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, पानी, घर, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यूनतम मज़दूरी) पूरी करने से होती है। तरीके पर मतभेद है: मुक्त बाज़ार वाले खुली प्रतियोगिता और छोटा राज्य चाहते हैं; दूसरे राज्य से कल्याण चाहते हैं। भारत दोनों मिलाता है।
3. Societies and communities
Family, religion and power · The state and citizenship · Nation and minorities
- सत्ता: उचित शक्ति कहाँ से आती है? – शक्ति दूसरों से काम करवाने की क्षमता है; सत्ता वह शक्ति है जिसे लोग उचित (वैध) मानते हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र और शुक्रनीति जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों ने कहा कि शासक दंड (उचित सज़ा), न्याय और बल (रक्षा की ताक़त) से सत्ता बनाए रखता है। आज भारत में सत्ता संविधान से आती है, जो न्याय और सुरक्षा का वादा करता है और हर पद की सीमा तय करता है। नागरिक चुनाव से संस्थाओं को सत्ता देते हैं, और संस्थाएँ उन्हें जवाब देती हैं। सत्ता पारंपरिक, करिश्माई या कानूनी-तार्किक हो सकती है।
- राज्य और सरकार: राज्य किससे बनता है – राज्य एक राजनीतिक समुदाय है जिसके चार तत्व हैं: स्थायी जनसंख्या, निश्चित क्षेत्र, सरकार और संप्रभुता (अंदर सबसे ऊँची शक्ति, बाहर स्वतंत्रता)। सरकार वह टीम है जो राज्य चलाती है और बदलती रहती है; राज्य बना रहता है। राज्य इसमें अलग होते हैं कि फ़ैसला कौन करता है (लोकतंत्र, राजतंत्र, तानाशाही), शक्ति कैसे बँटी है (एकात्मक या संघीय) और वे नागरिकों के लिए कितना करते हैं।
- राष्ट्र और अल्पसंख्यक: बराबरी से साथ रहना – राष्ट्र का एक अर्थ है किसी राज्य के सभी नागरिक (राजनीतिक राष्ट्र) और दूसरा अर्थ है साझा भाषा, संस्कृति और इतिहास वाला समूह (सांस्कृतिक राष्ट्र)। अल्पसंख्यक छोटे समूह हैं जिनकी अपनी भाषा, धर्म या संस्कृति होती है। उनके अधिकार संविधान और क़ानून से सुरक्षित होते हैं। इंसान की एक साथ कई पहचानें होती हैं, और हमें नस्लवाद, विदेशी-द्वेष और यहूदी-विरोध का विरोध करना चाहिए।
4. Societies and socialisation
Types of society and socialisation
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
5. Social differences
Mobility and stratification · Inequality and social problems
- सामाजिक स्तरीकरण – सामाजिक स्तरीकरण का मतलब है समाज का लोगों के समूहों को परतों (स्तरों) में ऊँचा-नीचा रखना। ऊपर की परतों को ज़्यादा धन, शक्ति और सम्मान मिलता है। चार मुख्य व्यवस्थाएँ हैं: दासता, जागीर, जाति और वर्ग। वर्ग आय, संपत्ति, व्यवसाय और शिक्षा से तय होता है। प्रकार्यवादी कहते हैं असमान इनाम समाज के काम आते हैं; संघर्षवादी कहते हैं इससे अमीर ऊपर बने रहते हैं। एक परत से दूसरी में जाना सामाजिक गतिशीलता है।
- सामाजिक विषमता और बहिष्कार के स्वरूप – सामाजिक विषमता का मतलब है कि कुछ समूहों को पैसा, सम्मान और पहचान ज़्यादा मिलती है, और कुछ को कम। यह योग्यता से नहीं, जन्म वाले समूह से तय होता है। सामाजिक बहिष्कार का मतलब है लोगों को समाज के पूरे जीवन से बाहर रखना। इस पाठ में जाति और अस्पृश्यता, जनजाति और आदिवासी संघर्ष, अन्य पिछड़ा वर्ग, स्त्रियों की समानता की लड़ाई और दिव्यांगों के अधिकार आसान शब्दों में समझेंगे।