"राष्ट्र" के दो अर्थ
राष्ट्र शब्द के दो मुख्य अर्थ हैं।
- राजनीतिक (नागरिक) राष्ट्र: किसी राज्य के सभी नागरिक, चाहे उनका मूल कुछ भी हो। उन्हें साझा क़ानून और अधिकार जोड़ते हैं।
- सांस्कृतिक-जातीय राष्ट्र: साझा भाषा, रीति-रिवाज, धर्म, इतिहास और "हम" की भावना से जुड़ा समूह।
कई देशों में ये दोनों पूरी तरह नहीं मिलते। एक राज्य में एक बड़ा सांस्कृतिक राष्ट्र और भीतर छोटे समूह हो सकते हैं। इन छोटे समूहों को अल्पसंख्यक कहते हैं।
अल्पसंख्यक कौन हैं? प्रकार और उदाहरण
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक नागरिकों का ऐसा समूह है जिसकी अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास है, जो मुख्य समूह से छोटा है और जिसका "मातृ-राष्ट्र" (अपना राज्य) कहीं और है, जैसे पोलैंड में जर्मन या यूक्रेनी। जातीय अल्पसंख्यक का अपना राज्य नहीं होता, जैसे रोमा, लेम्को, तातार और कराइट। क्षेत्रीय भाषा समूह किसी क्षेत्रीय भाषा को जीवित रखता है; पोलैंड में यह काशुबियन लोग हैं।
पोलैंड का 2005 का क़ानून 9 राष्ट्रीय अल्पसंख्यक (बेलारूसी, चेक, लिथुआनियाई, जर्मन, आर्मीनियाई, रूसी, स्लोवाक, यूक्रेनी और यहूदी) और 4 जातीय अल्पसंख्यक (कराइट, लेम्को, रोमा, तातार) तथा एक क्षेत्रीय भाषा, काशुबियन, गिनाता है। जर्मन, यूक्रेनी और बेलारूसी सबसे बड़े समूहों में हैं। कुल मिलाकर अल्पसंख्यक हर 100 लोगों में कुछ ही हैं।
प्रवासी वे लोग हैं जो रहने या काम के लिए दूसरे देश जाते हैं। शरणार्थी युद्ध या ख़तरे से भागकर सुरक्षा माँगते हैं। ये अल्पसंख्यक के बराबर नहीं हैं, पर समय के साथ उनके बच्चे नए अल्पसंख्यक समुदाय का हिस्सा बन सकते हैं।
1939 के बाद पोलैंड की राष्ट्रीय बनावट कैसे बदली
दूसरे विश्व युद्ध से पहले पोलैंड में हर तीन में से लगभग एक व्यक्ति ग़ैर-पोलिश समूह का था: यूक्रेनी, यहूदी, बेलारूसी, जर्मन और दूसरे लोग पूरे देश के शहरों और गाँवों में रहते थे।
फिर युद्ध आया। नरसंहार (होलोकॉस्ट) ने पोलैंड के अधिकतर यहूदी समुदाय को मिटा दिया। 1945 के बाद सीमाएँ बदलीं, लोगों को हटाया या जाने पर मजबूर किया गया, और पोलैंड लगभग पूरी तरह पोलिश हो गया: 10 में से 9 से ज़्यादा लोग। इसी इतिहास की वजह से आज अल्पसंख्यक छोटे हैं, और इसे याद रखना ज़रूरी है। (यहाँ सीमाओं की जगह बिंदु हैं, नक्शा नहीं।)
अल्पसंख्यकों के अधिकार और राज्य की नीति
पहला नियम है क़ानून के सामने बराबरी: मूल, भाषा या धर्म के कारण किसी से बुरा बर्ताव नहीं हो सकता। पोलैंड का संविधान (1997) अल्पसंख्यक नागरिकों को अपनी भाषा, रीतियाँ और परंपराएँ बचाने, अपनी संस्कृति बढ़ाने और अपने स्कूल व सांस्कृतिक संस्थान बनाने की आज़ादी भी देता है।
2005 का क़ानून व्यावहारिक मदद जोड़ता है: स्कूलों में अल्पसंख्यक भाषा की पढ़ाई, सांस्कृतिक संस्थाओं को धन, और जिन नगरों में अल्पसंख्यक कम से कम 20% निवासी हैं वहाँ दूसरी सहायक भाषा (जैसे द्विभाषी सड़क-नाम)। अल्पसंख्यकों की चुनावी समितियों को संसद में सीट पाने के लिए आम 5% वोट नहीं चाहिए। कई देशों में ऐसे नियम हैं: जैसे भारत के अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों की भाषा, संस्कृति और शिक्षण संस्थाओं की रक्षा करते हैं। संयुक्त राष्ट्र की 1992 की घोषणा भी अल्पसंख्यक अधिकारों पर है।
एक साथ कई पहचानें
आप एक साथ क्षेत्रीय (जैसे काशुबियन), राष्ट्रीय (पोलिश), नागरिक (संविधान को मानने वाला और सार्वजनिक जीवन में भाग लेने वाला नागरिक) और यूरोपीय (यूरोपीय संघ का सदस्य) महसूस कर सकते हैं। पहचान प्याज़ की परतों या लाल बिंदु के चारों ओर के घेरों जैसी है। एक से ज़्यादा परतें होने से आप कम वफ़ादार नहीं होते। आप और समृद्ध होते हैं।
अनुकूलन या आत्मसात?
अनुकूलन (acculturation) तब होता है जब दो समूह मिलते हैं और हर एक दूसरे की कुछ रीतियाँ सीखता है, पर अपनी पहचान रखता है। बच्चा स्कूल में पोलिश और घर में यूक्रेनी बोलता है।
आत्मसात (assimilation) तब होता है जब कोई समूह धीरे-धीरे अपनी भाषा और रीतियाँ छोड़कर बहुसंख्यक में घुल जाता है। यह स्वेच्छा से हो सकता है, पर ज़बरदस्ती का आत्मसात गरिमा को चोट देता है। आधुनिक लोकतंत्र अनुकूलन वाला समावेश पसंद करते हैं: साझा नियम और अपनी संस्कृति बचाने की आज़ादी।
अल्पसंख्यक समुदायों के जाने-माने लोग
अल्पसंख्यकों ने विज्ञान, कला और सार्वजनिक जीवन को समृद्ध किया है। उदाहरण: लुडविक ज़ामेनहोफ़, बिआलिस्तोक के यहूदी चिकित्सक, ने अंतरराष्ट्रीय भाषा एस्पेरांतो बनाई। यानुश कोरचाक, पोलिश-यहूदी शिक्षक और चिकित्सक, ने अनाथालय चलाया और बच्चों के अधिकारों पर लिखा। अलेक्सांदर मायकोव्स्की काशुबियन लेखक और चिकित्सक थे जिन्होंने काशुबियन भाषा और संस्कृति को जीवित रखने में मदद की।
विदेशी-द्वेष, नस्लवाद और यहूदी-विरोध का विरोध
ज़ेनोफ़ोबिया (विदेशी-द्वेष) अजनबियों या विदेशियों से डर या नफ़रत है। नस्लवाद यह मानना है कि कुछ "नस्लें" दूसरों से बेहतर हैं। यहूदी-विरोध (antisemitism) यहूदियों से नफ़रत है। तीनों इंसान को इंसान की जगह एक लेबल मानते हैं। ये मज़ाक, रूढ़ियों ("वे सब तो...") या बाहर करने से शुरू होकर हिंसा तक पहुँच सकते हैं।
विरोध कैसे करें: तथ्य जाँचो, रूढ़ियाँ ठुकराओ, नफ़रत वाले मज़ाक न दोहराओ, नरमी से बोलो, निशाना बने व्यक्ति का साथ दो, धमकी हो तो शिक्षक या पुलिस को बताओ, और इतिहास सीखो (जैसे होलोकॉस्ट को याद करके)। नफ़रत भरी बातें और हिंसा ज़्यादातर देशों में क़ानून के ख़िलाफ़ हैं।
खुद करके देखो: दोस्त के साथ एक आम रूढ़ि लिखो जो तुमने सुनी है, फिर उसे तोड़ने वाले तीन सच्चे तथ्य या कहानियाँ लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राजनीतिक राष्ट्र = राज्य के सभी नागरिक।
- सांस्कृतिक-जातीय राष्ट्र = साझा भाषा, रीतियाँ और इतिहास।
- अल्पसंख्यक = अपनी भाषा, धर्म या संस्कृति वाला छोटा समूह।
- अनुकूलन = एक-दूसरे से सीखो और अपनी पहचान रखो।
- आत्मसात = समूह बहुसंख्यक में घुलकर मिट जाता है।
- पहचान = क्षेत्र + राष्ट्र + नागरिक + यूरोप (और भी)।
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश में 4 करोड़ नागरिक हैं। 20 लाख अल्पसंख्यक भाषा बोलते हैं। यह कितना हिस्सा है और क्या यह अल्पसंख्यक है?
20 लाख / 4 करोड़ = 0.05 = 100 में 5। यह अपनी भाषा वाला छोटा समूह है, इसलिए हाँ, यह अल्पसंख्यक है।
2. काशुबिया की एक लड़की कहती है "मैं काशुबियन, पोलिश, नागरिक और यूरोपीय हूँ"। उसने कौन सी पहचानें गिनाईं?
क्षेत्रीय (काशुबियन), राष्ट्रीय (पोलिश), नागरिक और यूरोपीय। वह चारों पहचानें बिना टकराव के साथ रखती है।
3. एक परिवार घर की भाषा और त्योहार रखता है, पर बच्चे स्कूल की भाषा भी बढ़िया बोलते हैं। अनुकूलन या आत्मसात?
अनुकूलन: परिवार नई संस्कृति सीखता है और अपनी भी रखता है।
4. सहपाठी मज़ाक करता है "फलाँ देश के सब लोग चोर हैं"। समस्या और एक जवाब बताओ।
यह रूढ़ि है जो विदेशी-द्वेष को बढ़ा सकती है। शांति से कहो: "पूरे समूह के बारे में यह सच नहीं। लेबल से इंसान को मत परखो", और बात न रुके तो शिक्षक को बताओ।
आम गलतियाँ
- राष्ट्र, राज्य और देश को बिल्कुल एक मान लेना। एक राज्य में कई राष्ट्र हो सकते हैं और एक राष्ट्र कई राज्यों में फैला हो सकता है।
- प्रवासियों और शरणार्थियों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक समझ लेना।
- यह मानना कि आत्मसात हमेशा बेहतर है। ज़बरदस्ती का आत्मसात गरिमा को चोट देता है।
- एक ही पहचान को असली मानना। लोग एक साथ क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और यूरोपीय हो सकते हैं।