नागरिकता: पूर्ण और समान सदस्यता
नागरिकता किसी राजनीतिक समुदाय, आमतौर पर एक देश, की पूर्ण और समान सदस्यता है।
- नागरिकों को अधिकार मिलते हैं: वोट, देश और विदेश में सुरक्षा, सार्वजनिक सेवाएँ, देश में कहीं भी रहने और काम करने की आज़ादी।
- नागरिकों के कर्तव्य भी हैं: उचित कानून मानना, कर देना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान, सार्वजनिक जीवन में भाग लेना।
- नागरिकता केवल कानूनी दर्जा नहीं। यह नागरिकों के आपसी संबंध भी है: एक-दूसरे को बराबर मानना।
राज्यविहीन लोगों जैसे बिना नागरिकता वाले लोग इनमें से कई अधिकार नहीं माँग सकते, जिससे पता चलता है कि सदस्यता कितनी कीमती है।
बराबर अधिकार और उनके लिए संघर्ष
नागरिकता के बराबर अधिकार यूँ ही नहीं मिले; कई संघर्ष से जीते गए:
- यूरोप में मज़दूरों ने वोट और काम की उचित शर्तों के लिए संघर्ष किया।
- कई देशों में महिलाओं ने वोट और बराबर दर्जे के लिए आंदोलन किए।
- अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन ने अश्वेत अमेरिकियों के साथ नस्ली अलगाव का विरोध किया।
- भारत में स्वतंत्रता संग्राम और समाज सुधार आंदोलनों ने बराबर गरिमा के लिए संघर्ष किया।
आज की चुनौतियाँ: एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले गरीब प्रवासियों को विरोध झेलना पड़ सकता है; झुग्गीवासियों के पास पानी, शौचालय और सुरक्षित घर नहीं होते; आदिवासी और वनवासी अपनी ज़मीन बचाने के लिए संघर्ष करते हैं। भारतीय नागरिकों को देश में कहीं भी आने-जाने, रहने और काम करने का अधिकार है, इसलिए इन समूहों से बराबर बर्ताव होना चाहिए। पूर्ण नागरिकता = ऐसे अधिकार जो रोज़ के जीवन में काम करें, केवल कागज़ पर नहीं।
नागरिक और राष्ट्र
आधुनिक राज्य नागरिकता को राष्ट्र से जोड़ते हैं। हर राज्य तय करता है कि उसका नागरिक कौन बन सकता है। कुछ राज्य संकरा विचार अपनाते हैं (जैसे एक धर्म या भाषा); कुछ साझा कानूनों और मूल्यों पर आधारित नागरिक विचार अपनाते हैं।
भारत के संविधान ने बहुत विविध समाज के लिए समावेशी विचार चुना। नागरिकता इन तरीकों से मिल सकती है:
- भारत में जन्म (कानून की शर्तों के साथ)
- वंश: माता या पिता भारतीय हों
- पंजीकरण
- देशीयकरण: तय समय तक भारत में रहा विदेशी आवेदन कर सकता है
धर्म, जाति, लिंग या भाषा आधार नहीं हैं। इससे हर पृष्ठभूमि के लोग ख़ुद को बराबर सदस्य महसूस करते हैं।
सार्वभौमिक और विश्व नागरिकता
सार्वभौमिक नागरिकता का आदर्श है कि हर व्यक्ति किसी न किसी राज्य का पूरा सदस्य हो। पर असल में बहुत से लोग युद्ध, उत्पीड़न या भूख के बाद राज्यविहीन या शरणार्थी बन जाते हैं। वे शिविरों में या अवैध प्रवासी बनकर बिना अधिकारों के रहते हैं। उन्हें उचित रूप से कैसे शामिल करें, यह बड़ा नैतिक और राजनीतिक सवाल है।
विश्व नागरिकता कहती है कि हम एक मानव समुदाय के हैं। जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद और शरणार्थी जैसी समस्याएँ सीमाएँ पार करती हैं; विश्व मीडिया और यात्रा हमें जोड़ते हैं। इसलिए हमें हर जगह मानवाधिकारों की परवाह करनी चाहिए।
सीमाएँ: कोई विश्व सरकार नहीं जो हमारे अधिकारों की रक्षा करे; यह अब भी हमारा अपना राज्य करता है। इसलिए विश्व नागरिकता राष्ट्रीय नागरिकता को पूरक बनाती है, उसकी जगह नहीं लेती।
परीक्षा टिप्स
नागरिकता और राष्ट्रवाद मिलकर लगभग 8 अंक। आम सवाल: नागरिकता का अर्थ, बराबर अधिकारों के लिए संघर्ष, भारत नागरिकता कैसे देता है, राज्यविहीन लोगों की समस्या, और विश्व बनाम राष्ट्रीय नागरिकता।
घर पर करके देखें
एक हफ़्ते में नागरिक के रूप में आपने जिन पाँच अधिकारों का उपयोग किया, उनकी सूची बनाएँ (स्कूल, सड़क, अस्पताल, सुरक्षा...)। फिर कल्पना करें कि आप राज्यविहीन हैं: कौन से अधिकार खो देंगे? तीन पंक्ति में लिखें कि किसी राज्य का सदस्य होना क्यों ज़रूरी है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नागरिकता: राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता।
- नागरिक के अधिकार: वोट, सुरक्षा, सार्वजनिक सेवाएँ, आने-जाने की आज़ादी।
- नागरिक के कर्तव्य: उचित कानून मानना, कर देना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान।
- भारतीय नागरिकता के तरीके: जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण।
- राज्यविहीन व्यक्ति: जिसे कोई राज्य नागरिक नहीं मानता।
- सार्वभौमिक नागरिकता: हर व्यक्ति कहीं का पूरा सदस्य।
- विश्व नागरिकता: पूरी मानवता से जुड़ाव और परवाह।
हल किए गए उदाहरण
1. ओडिशा का एक मज़दूर चेन्नई में काम करता है। कुछ स्थानीय लोग कहते हैं बाहरी लोग चले जाएँ। समान नागरिकता क्या कहती है?
हर भारतीय नागरिक को भारत में कहीं भी आने-जाने, रहने और काम करने का अधिकार है। मज़दूर पूरा नागरिक है और उससे बराबर बर्ताव होना चाहिए।
2. नागरिकता के बराबर अधिकारों के लिए एक संघर्ष का उदाहरण दीजिए।
वोट के अधिकार के लिए महिला आंदोलन; अमेरिका में नस्ली अलगाव के विरुद्ध नागरिक अधिकार आंदोलन; उचित वेतन के लिए मज़दूर आंदोलन।
3. शरणार्थियों की समस्या सार्वभौमिक नागरिकता के लिए चुनौती क्यों है?
शरणार्थी अपना राज्य छोड़ चुके हैं और शायद कहीं नागरिक न माने जाएँ, इसलिए उनके अधिकार सुरक्षित नहीं। सार्वभौमिक नागरिकता कहती है कि हर व्यक्ति कहीं का सदस्य हो।
4. भारतीय नागरिकता पाने के चार तरीके बताइए।
जन्म, वंश, पंजीकरण और देशीयकरण (कानून की शर्तों के साथ)।
5. क्या विश्व नागरिकता राष्ट्रीय नागरिकता की जगह ले सकती है?
अभी नहीं। विश्व नागरिकता हर जगह के लोगों की परवाह सिखाती है, पर कोई विश्व राज्य हमारे अधिकारों की रक्षा नहीं करता। कानूनी सुरक्षा अब भी राष्ट्रीय नागरिकता देती है।
आम गलतियाँ
- नागरिकता को केवल पासपोर्ट मानना। यह अधिकारों और कर्तव्यों वाली पूर्ण और समान सदस्यता है।
- यह सोचना कि बराबर अधिकार हमेशा मुफ़्त मिले। कई संघर्ष से जीते गए।
- कहना कि भारत धर्म के आधार पर नागरिकता देता है। इसका संवैधानिक विचार समावेशी है।
- कहना कि विश्व नागरिकता ने राष्ट्रीय नागरिकता को बेकार कर दिया।