चुनाव और लोकतंत्र
प्रत्यक्ष लोकतंत्र में सभी नागरिक हर फ़ैसले में हिस्सा लेते हैं, जैसे गाँव की ग्राम सभा। बड़े देश में यह संभव नहीं, इसलिए अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधि) लोकतंत्र होता है: लोग प्रतिनिधि चुनते हैं जो उनकी ओर से फ़ैसले लेते हैं।
चुनाव तीन काम करते हैं: लोग तय करते हैं कि कौन शासन करे, सरकार को शांति से हटा सकते हैं, और प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाते हैं। संविधान चुनाव के बुनियादी नियम तय करता है ताकि सत्ता वाली पार्टी उन्हें अपने फ़ायदे के लिए न बदल सके।
सर्वाधिक वोट से जीत (FPTP) और भारत ने इसे क्यों चुना
FPTP कैसे काम करती है
देश को निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटा जाता है। हर क्षेत्र एक प्रतिनिधि चुनता है। जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें, वह जीतता है, चाहे आधे से कम हों। इसे बहुलवादी प्रणाली भी कहते हैं। मतदाता उम्मीदवार को वोट देते हैं, सूची को नहीं।
समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR)
PR में पार्टी को उसके वोट प्रतिशत के अनुपात में सीटें मिलती हैं। 30% वोट तो लगभग 30% सीटें। इज़राइल और नीदरलैंड इसे अपनाते हैं। भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा और विधान परिषदों के चुनाव में PR का एक रूप (एकल संक्रमणीय मत) प्रयोग होता है।
भारत ने FPTP क्यों चुनी
- सरल: जो पढ़ नहीं सकते, वे भी आसानी से समझें।
- साफ़ संबंध: हर क्षेत्र का अपना प्रतिनिधि, जिसे लोग जवाबदेह ठहरा सकें।
- स्थिर सरकार: आम तौर पर एक पार्टी या गठबंधन को साफ़ बहुमत मिलता है।
- एकता: सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को कई सामाजिक समूहों के वोट चाहिए, सिर्फ़ एक के नहीं।
कमज़ोरी: कोई पार्टी बाक़ी पार्टियों के कुल वोट से बहुत कम वोट पाकर भी ढेर सारी सीटें जीत सकती है, यानी सीटें वोट से मेल न खाएँ।
आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र
FPTP में कुछ समूहों का कोई प्रतिनिधि न पहुँचे, ऐसा हो सकता है। इसलिए संविधान कुछ क्षेत्रों को अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित करता है। आरक्षित सीट पर केवल उसी समूह के उम्मीदवार लड़ सकते हैं, पर क्षेत्र के सभी मतदाता वोट देते हैं। यह पृथक निर्वाचन मंडल (जहाँ सिर्फ़ एक समूह वोट दे) नहीं है, जिसे निर्माताओं ने समाज को बाँटने वाला मानकर ठुकराया।
कौन-सी सीट आरक्षित होगी, यह परिसीमन आयोग तय करता है, जो एक स्वतंत्र संस्था है और इन समूहों की आबादी देखकर क्षेत्रों की सीमा खींचती है। लोकसभा में 84 सीटें SC और 47 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: 18 वर्ष या उससे ज़्यादा का हर नागरिक वोट दे सकता है, जाति, धर्म, लिंग, शिक्षा या धन कुछ भी हो। (1989 तक आयु 21 थी।)
- चुनाव लड़ने का अधिकार: सरल शर्तें (जैसे लोकसभा के लिए 25 वर्ष) पूरी करने वाला कोई भी नागरिक खड़ा हो सकता है।
- स्वतंत्र चुनाव आयोग (अनुच्छेद 324): मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त चुनाव की निगरानी करते हैं। आयोग मतदाता सूची बनाता है, कार्यक्रम तय करता है, आदर्श आचार संहिता लागू करता है, दोबारा मतदान का आदेश दे सकता है और चुनाव चिह्न देता है। मुख्य चुनाव आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है। पंचायत और नगर चुनावों के लिए राज्य चुनाव आयोग हैं।
- साधन: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), मतदाता पहचान पत्र, VVPAT पर्ची।
चुनाव सुधार
चुनाव बेहतर बनाने के कई सुझाव आए हैं:
- PR के क़रीब किसी प्रणाली पर विचार, ताकि सीटें वोट से बेहतर मेल खाएँ।
- संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए (2023 में इसका कानून बना, जो अगले परिसीमन के बाद लागू होगा)।
- पैसे की भूमिका पर रोक: कड़ी सीमाएँ और सरकारी ख़र्च से चुनाव का सुझाव।
- गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकना; उम्मीदवारों को पहले से ही अपनी संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड बताने होते हैं।
- प्रचार में जाति और धर्म के नाम पर वोट माँगने पर रोक।
- आयुक्तों की नियुक्ति को और स्वतंत्र बनाकर चुनाव आयोग को मज़बूत करना।
सिर्फ़ कानून से सब ठीक नहीं होगा: जागरूक मतदाता, आज़ाद मीडिया और सक्रिय नागरिक भी ज़रूरी हैं।
करके देखें: कक्षा का चुनाव गिनें
अपनी कक्षा में 3 या 4 उम्मीदवारों के साथ 'कक्षा कप्तान' का नकली चुनाव कराएँ। वोट गिनें। FPTP से कौन जीता? विजेता को कितने प्रतिशत वोट मिले? अब मान लीजिए 10 'सीटें' वोट के अनुपात में बँटनी हैं। हर उम्मीदवार को कितनी मिलेंगी? अपना अनुमान 3D के आख़िरी चरण के स्लाइडर से जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- FPTP: निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज़्यादा वोट = विजेता (50% ज़रूरी नहीं)
- PR: सीटों का % ≈ वोटों का %
- PR में पार्टी की सीटें = (पार्टी के वोट ÷ कुल वोट) × कुल सीटें
- मतदान आयु: 18 (61वाँ संशोधन, 1989); लोकसभा चुनाव लड़ने की आयु: 25
- चुनाव आयोग: अनुच्छेद 324; मुख्य चुनाव आयुक्त + चुनाव आयुक्त
- लोकसभा में आरक्षित सीटें: 84 SC + 47 ST
हल किए गए उदाहरण
1. एक क्षेत्र में A को 38,000, B को 33,000, C को 29,000 वोट मिले। FPTP में कौन जीता और कितने प्रतिशत से?
कुल = 1,00,000। A जीता: 38,000 ÷ 1,00,000 = 38%। 62% ने दूसरों को वोट दिया, फिर भी A जीता।
2. PR में सदन की 200 सीटें हैं। पार्टी X को 30% वोट मिले। कितनी सीटें?
200 का 30% = 0.30 × 200 = 60 सीटें।
3. पार्टी P को 40% वोट मिले पर FPTP में 70% सीटें। यह कैसे संभव है?
अगर P ज़्यादातर क्षेत्रों में थोड़े अंतर से भी पहले नंबर पर आए, तो वे सीटें जीत लेती है। हर सीट पर हारने वालों के वोट सीट में नहीं बदलते, इसलिए सीट का हिस्सा वोट के हिस्से से बहुत बड़ा हो सकता है।
4. SC के लिए आरक्षित क्षेत्र में क्या सामान्य वर्ग का मतदाता वोट दे सकता है?
हाँ। क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाता वोट देते हैं। केवल उम्मीदवार SC समूह का होना चाहिए।
5. तीन पार्टियों को 45%, 35% और 20% वोट मिले। PR से 20 सीटें बाँटिए।
20 का 45% = 9, 35% = 7, 20% = 4। जाँच: 9 + 7 + 4 = 20 सीटें।
6. मतदान के दिन से पहले चुनाव आयोग के दो काम बताइए।
वह मतदाता सूची बनाता और अपडेट करता है, और चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है। चुनाव घोषित होते ही वह आदर्श आचार संहिता भी लागू करता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि FPTP में जीतने के लिए 50% से ज़्यादा वोट चाहिए। सबसे ज़्यादा वोट काफ़ी हैं।
- सोचना कि आरक्षित सीट पर केवल SC/ST मतदाता वोट देते हैं। सब वोट देते हैं; सिर्फ़ उम्मीदवार आरक्षित हैं।
- कहना कि लोकसभा के लिए भारत PR अपनाता है। PR (एकल संक्रमणीय मत) राज्यसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए है।
- भारत के चुनाव आयोग को राज्य चुनाव आयोग समझना, जो पंचायत और नगर चुनाव कराते हैं।