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एक दल के प्रभुत्व का दौर

भारत का पहला आम चुनाव (1951-52) तब तक दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था, जिसमें लगभग 17 करोड़ मतदाता थे। कांग्रेस ने यह और अगले दो चुनाव जीते, इसलिए 1967 तक के समय को एक दल के प्रभुत्व का दौर कहते हैं। आज़ादी की लड़ाई की विरासत, हर जगह फैला संगठन और सामाजिक-वैचारिक गठबंधन होने के कारण कांग्रेस का दबदबा रहा; उसके भीतर गुटों को जगह मिलती थी। समाजवादी, कम्युनिस्ट, भारतीय जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी जैसे छोटे विपक्षी दलों ने आलोचना करके लोकतंत्र को जीवित रखा।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. लोकतंत्र की नींव: 17 करोड़ मतदाता, चुनाव चिह्न और मतपेटियाँ, 1951-52।
  2. कांग्रेस ने लोकसभा की 489 में से 364 सीटें जीतीं। भाकपा 16 के साथ दूसरे नंबर पर।
  3. लगभग 45% वोट से लगभग 74% सीटें: सबसे आगे वाला जीते प्रणाली।
  4. कांग्रेस कई समूहों की एक छतरी थी, जिसके भीतर गुट थे।
  5. विपक्षी दल छोटे थे, पर कांग्रेस पर अंकुश रखते थे।
  6. खुद करके देखें: वोट का स्लाइडर खिसकाइए और सीटें बदलती देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अनपढ़ लोग वोट कैसे देते थे?

हर दल का एक चिह्न और अलग मतपेटी थी, इसलिए लोग बिना पढ़े अपनी पसंद पहचान लेते थे।

क्या लोगों के पास कांग्रेस के सिवा कोई विकल्प नहीं था?

विकल्प थे। कई दल लड़े, पर ज़्यादातर सीटें कांग्रेस ने जीतीं।

45% वोट सीटों का बहुमत कैसे बनता है?

हर सीट सबसे आगे वाला उम्मीदवार जीतता है। जब बाक़ी वोट बँटते हैं, तो सबसे बड़ा दल आधे से कम वोट से भी कई सीटें जीत लेता है।

एक ही बड़ा दल था तो बहस कहाँ होती थी?

कांग्रेस के भीतर गुट खुलकर बहस करते थे, और बाहर छोटे विपक्षी दल आलोचना करते थे।

छोटे विपक्षी दलों को क्यों पढ़ें?

उन्होंने सरकार पर अंकुश रखा और बाद में बड़े दल बने।

लोकतंत्र की नींव: पहला आम चुनाव

भारत ने शुरू से ही सार्वभौम वयस्क मताधिकार अपनाया: हर वयस्क (तब 21 साल) वोट दे सकता था। जनवरी 1950 में चुनाव आयोग बना, जिसके प्रमुख सुकुमार सेन थे।

कई आलोचक कहते थे कि इतना ग़रीब और अनपढ़ देश निष्पक्ष चुनाव नहीं करा सकता। नतीजों ने उन्हें ग़लत साबित किया: हारने वालों ने भी नतीजे माने। बाद में एक मतपत्र पर निशान लगाने का तरीक़ा (1957 से) और फिर ईवीएम (2004 तक पूरी तरह) आई।

पहले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व

1952 में कांग्रेस ने 489 में से 364 सीटें जीतीं, और 1957 व 1962 में भी बड़ी जीत पाई। लगभग सभी राज्यों में भी उसकी सरकार थी। एक अपवाद: 1957 में केरल में ई.एम.एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी जीती, जो दुनिया की पहली चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकारों में से एक थी। 1959 में अनुच्छेद 356 से इसे बर्ख़ास्त कर दिया गया।

इतना दबदबा क्यों?

प्रभुत्व की प्रकृति

भारत का एक दलीय प्रभुत्व लोकतांत्रिक था: कई दल खुलकर चुनाव लड़ते थे। यह उन देशों जैसा नहीं था जहाँ दूसरे दलों पर रोक थी (जैसे पुराना सोवियत संघ, या मेक्सिको की PRI, जो संदिग्ध चुनावों से राज करती रही)।

सामाजिक और वैचारिक गठबंधन के रूप में कांग्रेस

कांग्रेस में किसान और उद्योगपति, शहर और गाँव, मज़दूर और मालिक, कई जातियाँ और धर्म साथ थे। उसमें वाम और दक्षिण दोनों विचार थे। पार्टी के भीतर के समूहों को गुट कहते हैं, जिन्हें कांग्रेस ने जगह दी। इस तरह विपक्ष का कुछ काम कांग्रेस के भीतर ही हो जाता था। इसे कांग्रेस प्रणाली कहते हैं (रजनी कोठारी का विचार)।

विपक्षी दलों का उदय

विपक्ष की भूमिका

छोटे होकर भी इन दलों ने नीतियों की आलोचना की, सरकार को जवाबदेह रखा और आगे के नेता तैयार किए। नेहरू इनका सम्मान करते थे; पहले मंत्रिमंडल में आंबेडकर और एस.पी. मुखर्जी जैसे ग़ैर-कांग्रेसी भी थे।

करके देखें

3D में सबसे बड़े दल के वोट का स्लाइडर खिसकाइए। पहले अनुमान लगाइए: 45% वोट पर उसे आधी से ज़्यादा सीटें मिलेंगी या कम? फिर जाँचिए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कांग्रेस 45% वोट से 74% सीटें कैसे जीत गई?

सबसे आगे वाला जीते प्रणाली में हर सीट सबसे ज़्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार को मिलती है। विपक्ष के वोट कई दलों में बँट गए, इसलिए कांग्रेस आधे से कम वोट लेकर भी ज़्यादातर सीटें जीत गई।

2. भारत के एक दलीय प्रभुत्व को लोकतांत्रिक क्यों कहते हैं?

दूसरे दल चुनाव लड़ने और आलोचना करने को आज़ाद थे; चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष थे। कांग्रेस इसलिए जीती क्योंकि लोगों ने उसे चुना, इसलिए नहीं कि दूसरों पर रोक थी।

3. गुट क्या है? कांग्रेस में उसकी भूमिका बताइए।

गुट किसी दल के भीतर का समूह है, जिसके अपने नेता और विचार होते हैं। कांग्रेस ने गुटों को जगह दी, जो एक-दूसरे को संतुलित करते थे और एक ही दल में अलग-अलग हितों को आवाज़ देते थे।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
2. 1952 लोकसभा में कांग्रेस की सीटें:
3. 1957 में किस राज्य ने कम्युनिस्ट सरकार चुनी?
4. स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक:
5. किसी दल के भीतर के समूह कहलाते हैं:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक दल के प्रभुत्व का क्या अर्थ है?

ऐसी स्थिति जिसमें एक ही दल बार-बार चुनाव जीतता है, जबकि दूसरे दल भी मौजूद हैं और खुलकर लड़ते हैं।

कांग्रेस प्रणाली क्या है?

यह विचार कि कांग्रेस अपने कई समूहों और गुटों के साथ ख़ुद एक दल-व्यवस्था जैसी थी, और छोटे विपक्षी दल बाहर से दबाव बनाते थे।

एक दल के प्रभुत्व का दौर कब कमज़ोर हुआ?

1967 के चुनावों में, जब कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता से बाहर हो गई।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12स्वतंत्र भारत में राजनीति

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