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नियोजित विकास की राजनीति

आज़ादी के बाद भारत में बहस हुई कि विकास किस रास्ते से हो: बाज़ार का रास्ता या राज्य-नीत रास्ता। भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था चुनी और 1950 में योजना आयोग बनाया। पहली पंचवर्षीय योजना ने कृषि और सिंचाई पर ध्यान दिया; पी.सी. महालनोबिस की दूसरी योजना ने सार्वजनिक क्षेत्र से भारी उद्योग को आगे बढ़ाया। कृषि बनाम उद्योग और सार्वजनिक बनाम निजी पर बहस हुई। नतीजे: उद्योगों की नींव, आंशिक भूमि सुधार, हरित क्रांति और किसानों की नई राजनीतिक ताक़त।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. विकास के दो रास्ते: बाज़ार का रास्ता और राज्य-नीत रास्ता।
  2. भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था चुनी और 1950 में योजना आयोग बनाया।
  3. पहली योजना (1951-56): पहले कृषि, बाँध और सिंचाई।
  4. दूसरी योजना (1956-61): भारी उद्योग। तराज़ू खेती से हटकर झुका।
  5. नतीजे: उद्योगों की नींव, भूमि सुधार, हरित क्रांति, नई खाइयाँ।
  6. खुद करके देखें: स्लाइडर से पैसा खेती और कारख़ानों में बाँटिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सीधे अमेरिका या सोवियत संघ के रास्ते पर क्यों नहीं चले?

भारत आज़ादी के साथ वृद्धि और न्याय चाहता था, इसलिए दोनों से कुछ लिया: मिश्रित अर्थव्यवस्था।

क्या व्यापारियों ने नियोजन का विरोध किया?

नहीं। उद्योगपतियों के बॉम्बे प्लान ने भी सरकार से उद्योगों में निवेश माँगा।

शुरुआत खेती से क्यों?

विभाजन के बाद अनाज कम था। सिंचाई और खेती पहली ज़रूरत थी।

दूसरी योजना से कुछ लोग नाराज़ क्यों हुए?

पैसा भारी उद्योग की तरफ़ झुका; आलोचकों को लगा गाँव और किसान पीछे छूट गए।

क्या हरित क्रांति सबके लिए अच्छी रही?

अनाज बढ़ा, पर अमीर किसानों और कुछ इलाक़ों को ज़्यादा फ़ायदा हुआ।

अगर सारा पैसा कारख़ानों में जाए तो?

खुद करके देखें में 90% आज़माइए: अनाज और किसान पीछे छूटते हैं।

विकास को लेकर राजनीतिक मुक़ाबला

विकास का अर्थ है लोगों का बेहतर जीवन: ज़्यादा आय, भोजन, स्कूल, स्वास्थ्य और न्याय। 1950 के दशक में 'विकास' को अक्सर पश्चिम जैसा आधुनिक बनना माना जाता था, पर रास्ते पर मतभेद थे।

दो मॉडल

भारत का चुनाव: मिश्रित अर्थव्यवस्था में नियोजन

लगभग सभी, यहाँ तक कि उद्योगपति भी, मानते थे कि सरकार योजना बनाए। 1944 में बड़े उद्योगपतियों ने बॉम्बे प्लान दिया, जिसमें सरकार से उद्योगों में निवेश की माँग थी। भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था चुनी: सार्वजनिक और निजी क्षेत्र साथ-साथ।

मुख्य बहसें

शुरुआती क़दम: योजना आयोग और पहली योजनाएँ

योजना आयोग (1950)

मार्च 1950 में एक साधारण सरकारी प्रस्ताव से बना (संविधान से नहीं)। अध्यक्ष प्रधानमंत्री थे। इसने पंचवर्षीय योजनाएँ बनाईं। 2015 में इसकी जगह नीति आयोग आया।

पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56)

दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61)

नतीजे

करके देखें

3D स्लाइडर से पैसा उद्योग और कृषि में बाँटिए। अनुमान लगाइए कि 80% उद्योग पर क्या होगा, फिर कैप्शन पढ़िए। घर पर पूछिए: क्या आपके गाँव या खेत को किसी बाँध, नहर या नए बीज से फ़ायदा हुआ?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पहली योजना ने कृषि पर ध्यान क्यों दिया?

विभाजन से खेती को बड़ा धक्का लगा था और अनाज की कमी थी। ज़्यादा अनाज उगाना और सिंचाई बनाना सबसे पहली ज़रूरत थी।

2. कृषि और उद्योग के बीच चुनाव राजनीतिक क्यों है?

इससे तय होता है कि पहले किसके हित पूरे होंगे: किसान और गाँव या उद्योग और शहर। अलग-अलग समूह और दल अपनी-अपनी तरफ़ से तर्क देते हैं।

3. हरित क्रांति का एक अच्छा और एक बुरा असर बताइए।

अच्छा: अनाज उत्पादन बढ़ा और आयात पर निर्भरता घटी। बुरा: अमीर किसानों और पंजाब जैसे इलाक़ों को ज़्यादा फ़ायदा हुआ, खाई बढ़ी।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. योजना आयोग बना:
2. दूसरी पंचवर्षीय योजना का नेतृत्व किया:
3. बॉम्बे प्लान किसने दिया?
4. पहली योजना का मुख्य ज़ोर:
5. 2015 में योजना आयोग की जगह आया:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नियोजित विकास क्या है?

ऐसा विकास जिसमें सरकार लक्ष्य तय करती है और तय अवधि (जैसे पाँच साल) में पैसा कहाँ लगेगा, यह निश्चित करती है।

बॉम्बे प्लान क्या था?

1944 में बड़े उद्योगपतियों की योजना, जिसमें सरकार से उद्योग और बुनियादी ढाँचे में भारी निवेश की बात थी।

शुरुआती नियोजन के मुख्य नतीजे क्या थे?

भारी उद्योग और बाँधों की नींव, ज़मींदारी का ख़ात्मा, आंशिक भूमि सुधार और बाद में हरित क्रांति।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12विकास अनुभव (1947-90) और 1991 से आर्थिक सुधार
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12स्वतंत्र भारत में राजनीति

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