नए देश के सामने तीन चुनौतियाँ
आज़ादी के समय भारत के सामने तीन बड़े काम थे:
- एकता: बहुत विविधता वाले देश को एक रखना।
- लोकतंत्र: जनता की चुनी सरकार चलाना और सबको अधिकार देना।
- विकास: ग़रीबी मिटाना और सबसे कमज़ोर लोगों तक मदद पहुँचाना।
कई विदेशी जानकार सोचते थे कि भारत टुकड़ों में बँट जाएगा। हमारे नेताओं ने विविधता का सम्मान करते हुए एकता का रास्ता चुना।
विभाजन, विस्थापन और पुनर्वास
विभाजन (अगस्त 1947) से भारत और पाकिस्तान बने। मुस्लिम लीग ने अलग देश की माँग की थी ('द्वि-राष्ट्र सिद्धांत')। मुस्लिम बहुल इलाक़े पाकिस्तान में गए, पर वे एक जगह नहीं थे: पाकिस्तान का एक पश्चिमी और एक पूर्वी हिस्सा बना। पंजाब और बंगाल बँट गए।
विस्थापन
लगभग 80 लाख लोगों को सीमा पार करनी पड़ी। दंगों में लाखों लोग मारे गए। महिलाओं का अपहरण हुआ, कई परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए। घर, काम और स्कूल छूट गए। बाद में दोनों सरकारों ने अगवा महिलाओं को वापस लाने का काम किया।
पुनर्वास
पुनर्वास यानी उजड़े लोगों को फिर से सामान्य ज़िंदगी शुरू करने में मदद। सरकार ने शरणार्थी शिविर चलाए, फिर ज़मीन, मकान, कर्ज़ और नौकरियाँ दीं। नई कॉलोनियाँ और शहर बसे। इसमें सालों लगे, और दर्द की यादें उससे भी लंबी रहीं।
इसका महत्व
विभाजन के बाद भारत के नेताओं ने तय किया कि भारत धर्मनिरपेक्ष राज्य होगा, जहाँ हर धर्म को बराबर अधिकार होंगे। शांति के लिए गांधीजी के अनशन और जनवरी 1948 में उनकी हत्या ने देश को झकझोरकर शांत किया।
देसी रियासतों का विलय
ब्रिटिश भारत में लगभग 565 देसी रियासतें थीं, जिन पर राजा राज करते थे और अंग्रेज़ों की सत्ता मानते थे। अंग्रेज़ों के जाते समय इन राजाओं से कहा गया कि वे भारत या पाकिस्तान में मिल सकते हैं या आज़ाद रह सकते हैं। इससे भारत सैकड़ों टुकड़ों में बँट सकता था।
यह कैसे हुआ
- गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और अधिकारी वी.पी. मेनन ने राजाओं से ज़्यादातर दोस्ताना बातचीत की।
- राजाओं ने विलय-पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए और रक्षा, विदेश मामले और संचार भारत को सौंपे।
- कई रियासतों की जनता भी भारत में मिलना चाहती थी।
कठिन मामले
- जूनागढ़: शासक पाकिस्तान में मिलना चाहता था; जनता के विरोध और जनमत-संग्रह के बाद यह भारत में मिला।
- हैदराबाद: निज़ाम आज़ाद रहना चाहता था; बातचीत नाकाम रही और रज़ाकारों ने लोगों पर ज़ुल्म किए, तब सितंबर 1948 में पुलिस कार्रवाई से यह भारत में आया।
- मणिपुर: राजा ने 1949 में नई चुनी विधानसभा से पूछे बिना विलय किया, इससे वहाँ आज भी नाराज़गी है।
- कश्मीर: अक्टूबर 1947 में सीमा पार से हमले के बाद शासक ने हस्ताक्षर किए।
राज्यों का पुनर्गठन
आज़ादी की लड़ाई में कांग्रेस ने भाषा के आधार पर राज्य बनाने का वादा किया था। विभाजन के बाद नेताओं को डर था कि इससे देश फिर बँट सकता है, इसलिए उन्होंने इंतज़ार किया।
- 1952: पोट्टि श्रीरामुलु ने तेलुगु भाषी राज्य के लिए अनशन किया और 56 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई। आंदोलन फैल गया।
- 1953: आंध्र प्रदेश बना। राज्य पुनर्गठन आयोग (फ़ज़ल अली, के.एम. पणिक्कर, एच.एन. कुंज़रू) बना।
- 1956: राज्य पुनर्गठन क़ानून से 14 राज्य और 6 केंद्रशासित प्रदेश बने, ज़्यादातर भाषा के आधार पर।
- बाद में: महाराष्ट्र और गुजरात (1960), नागालैंड (1963), पंजाब और हरियाणा (1966), मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा (1972), मिज़ोरम और अरुणाचल (1987), छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड (2000), तेलंगाना (2014)।
नतीजा
डर ग़लत निकला: भाषाई राज्यों से लोकतंत्र मज़बूत हुआ, स्थानीय भाषाओं को सम्मान मिला और भारत एक रहा। भाषा को ख़तरा नहीं, एक उचित आधार माना गया।
घर पर करके देखें
घर के किसी बड़े से पूछिए: 1956 या 2000 से पहले हमारा परिवार किस राज्य में था और वहाँ कौन-सी भाषा बोली जाती थी? अपने राज्य के बनने की एक छोटी समय-रेखा बनाइए। फिर 3D में हर चुनौती को उसके हल से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन चुनौतियाँ: एकता, लोकतंत्र, विकास
- विभाजन 1947: लगभग 80 लाख विस्थापित; पंजाब और बंगाल बँटे
- पुनर्वास = शिविर → ज़मीन, घर, कर्ज़, रोज़गार
- विलय-पत्र: रक्षा, विदेश मामले, संचार भारत को
- कठिन मामले: जूनागढ़, हैदराबाद (1948), मणिपुर (1949), कश्मीर (1947)
- आंध्र 1953 → राज्य पुनर्गठन आयोग → 1956 क़ानून: 14 राज्य + 6 केंद्रशासित प्रदेश
हल किए गए उदाहरण
1. विभाजन को 'द्वि-राष्ट्र' का नतीजा क्यों कहा जाता है?
मुस्लिम लीग का तर्क था कि हिंदू और मुसलमान दो राष्ट्र हैं, इसलिए दो देश चाहिए। विभाजन ने धार्मिक बहुलता वाले इलाक़ों के आधार पर ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में बाँटा।
2. विलय-पत्र पर हस्ताक्षर करके राजा कौन-से तीन विषय भारत को देता था?
रक्षा, विदेश मामले और संचार। बाक़ी मामले शुरू में रियासत के पास रहे।
3. नेताओं ने भाषाई राज्य बनाने में देर क्यों की?
अभी-अभी धर्म के आधार पर विभाजन हुआ था; उन्हें डर था कि भाषा पर बँटवारा एकता को फिर कमज़ोर करेगा। पोट्टि श्रीरामुलु के अनशन जैसे आंदोलनों ने दिखाया कि जनता की माँग मज़बूत और उचित थी।
4. हैदराबाद भारत में कैसे मिला, तीन चरणों में बताइए।
1) निज़ाम आज़ादी चाहता था और उसने यथास्थिति समझौता किया। 2) रियासत में रज़ाकारों ने लोगों पर हमले किए और किसान आंदोलन बढ़ा। 3) सितंबर 1948 में पुलिस कार्रवाई से निज़ाम का शासन ख़त्म हुआ और हैदराबाद भारत में मिल गया।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि सब रियासतें ज़बरदस्ती मिलाई गईं। लगभग सभी बातचीत से शांतिपूर्वक मिलीं; बस कुछ मामलों में सख़्ती हुई।
- 1953 और 1956 को मिला देना। पहले आंध्र बना (1953); पूरा क़ानून 1956 में आया।
- कहना कि भाषाई राज्यों ने भारत को तोड़ा। असल में इनसे एकता मज़बूत हुई।
- यह सोचना कि पाकिस्तान ज़मीन का एक ही टुकड़ा था। उसके पश्चिमी और पूर्वी दो हिस्से थे।