1960 के दशक में राजनीतिक बदलाव
उत्तराधिकार की चुनौती
मई 1964 में नेहरू का निधन हुआ। बाहर के कई लोग अराजकता की उम्मीद कर रहे थे, पर लाल बहादुर शास्त्री आसानी से प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1965 में पाकिस्तान से युद्ध में देश का नेतृत्व किया और 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया। जनवरी 1966 में ताशकंद में उनका निधन हुआ। फिर कांग्रेस सांसदों के मतदान में इंदिरा गांधी ने मोरारजी देसाई को हराया। उनका साथ देने वाले वरिष्ठ नेताओं को सिंडिकेट कहा गया (के. कामराज, एस.के. पाटिल, अतुल्य घोष, एस. निजलिंगप्पा, एन. संजीव रेड्डी)।
चौथा आम चुनाव, 1967
- कठिन समय: दो बार मानसून नाकाम, अनाज की कमी, बढ़ती महँगाई, रुपये का अवमूल्यन (1966), आंदोलन और हड़तालें।
- ग़ैर-कांग्रेसवाद: राम मनोहर लोहिया का तर्क था कि कांग्रेस को हराने के लिए विपक्षी दल एक हों।
- नतीजा: लोकसभा में कांग्रेस की सीटें 283 रह गईं और वह लगभग नौ राज्यों में हार गई। विश्लेषकों ने इसे राजनीतिक भूकंप कहा।
- तमिलनाडु में हिंदी-विरोधी आंदोलन के बाद डीएमके को पूर्ण बहुमत मिला।
गठबंधन और दल-बदल
कई राज्यों में संयुक्त विधायक दल (संविद) की गठबंधन सरकारें बनीं, जिनमें अक्सर उलटे विचारों वाले दल साथ थे (जैसे बिहार में समाजवादी, भाकपा और जनसंघ साथ)। दल-बदल आम हो गया: हरियाणा में विधायक गया लाल ने दो हफ़्तों में तीन बार पाला बदला ('आया राम, गया राम')।
कांग्रेस प्रणाली की पुनर्स्थापना
इंदिरा बनाम सिंडिकेट
इंदिरा गांधी अपना नियंत्रण और वामपंथी झुकाव वाला एजेंडा चाहती थीं (दस-सूत्री कार्यक्रम: बैंकों का राष्ट्रीयकरण, भूमि सुधार, सार्वजनिक वितरण, राजाओं के विशेषाधिकार ख़त्म करना)।
1969 का विभाजन
- 1969 का राष्ट्रपति चुनाव: सिंडिकेट के उम्मीदवार एन. संजीव रेड्डी थे; इंदिरा ने निर्दलीय वी.वी. गिरि को बढ़ावा दिया और सांसदों-विधायकों से 'अंतरात्मा की आवाज़' पर वोट करने को कहा। गिरि जीते।
- पार्टी बँट गई: कांग्रेस (ओ) यानी संगठन (सिंडिकेट) और कांग्रेस (आर) यानी रिक्विज़िशनिस्ट (इंदिरा)। इंदिरा ने इसे समाजवादियों और रूढ़िवादियों की लड़ाई बताया।
- उन्होंने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969) किया और बाद में पूर्व शासकों के प्रिवी पर्स ख़त्म किए (26वाँ संशोधन, 1971)।
1971 का चुनाव और पुनर्स्थापना
- विपक्ष (कांग्रेस ओ, जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, एसएसपी) ने महागठबंधन बनाया: नारा 'इंदिरा हटाओ'।
- इंदिरा: 'ग़रीबी हटाओ'। कांग्रेस (आर) ने 352 सीटें जीतीं।
- 1971 के बांग्लादेश युद्ध की जीत और 1972 के राज्य चुनावों ने उनकी लोकप्रियता और बढ़ाई।
क्या यह वही कांग्रेस थी?
नहीं। पुरानी प्रणाली गुटों और स्थानीय नेताओं का गठबंधन थी। नई कांग्रेस एक नेता की लोकप्रियता पर टिकी थी, उसे ग़रीबों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों का समर्थन था, और संगठन कमज़ोर था। प्रभुत्व लौटा, पर उसका स्वरूप बदल गया।
करके देखें
खुद करके देखें वाले बटनों से 1962, 1967 और 1971 की तुलना कीजिए। पहले अनुमान लगाइए कि कौन-सा साल सबसे नीचे है। फिर अपने शब्दों में दो नारे लिखिए: एक 1967 के विपक्ष के लिए और एक 1971 की इंदिरा के लिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1964 नेहरू → शास्त्री; 1966 → इंदिरा गांधी
- 1967: 'राजनीतिक भूकंप'; कांग्रेस लगभग 9 राज्य हारी; संविद गठबंधन
- ग़ैर-कांग्रेसवाद: राम मनोहर लोहिया
- दल-बदल: 'आया राम, गया राम' (गया लाल, हरियाणा)
- 1969 विभाजन: कांग्रेस (ओ) सिंडिकेट बनाम कांग्रेस (आर) इंदिरा; वी.वी. गिरि राष्ट्रपति
- 1971: 'ग़रीबी हटाओ'; कांग्रेस (आर) 352 सीटें
हल किए गए उदाहरण
1. 1967 को राजनीतिक भूकंप क्यों कहते हैं?
1952 से लगभग हर जगह राज करने वाली कांग्रेस अचानक लगभग नौ राज्यों में हार गई और लोकसभा में मुश्किल से बहुमत बचा पाई।
2. सिंडिकेट क्या था?
कांग्रेस के ताक़तवर वरिष्ठ नेताओं का समूह, जो संगठन पर नियंत्रण रखता था और जिसने शास्त्री और फिर इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवाया, यह सोचकर कि इंदिरा उनकी बात मानेंगी।
3. 1969 के राष्ट्रपति चुनाव से विभाजन कैसे हुआ?
इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार संजीव रेड्डी के ख़िलाफ़ 'अंतरात्मा की आवाज़' के ज़रिए वी.वी. गिरि का समर्थन किया। गिरि जीते और पार्टी कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर) में बँट गई।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि 1967 में कांग्रेस लोकसभा हार गई। उसने कम बहुमत बचाया; कई राज्य हारे।
- कांग्रेस (ओ) (सिंडिकेट) और कांग्रेस (आर) (इंदिरा) को उलट देना।
- यह सोचना कि 1971 का 'महागठबंधन' इंदिरा का था। वह विपक्ष का था।
- कहना कि पुनर्स्थापित कांग्रेस नेहरू वाली ही थी। वह एक नेता की लोकप्रियता पर टिकी थी।