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लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती महँगाई, गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलन, जेपी की संपूर्ण क्रांति, रेल हड़ताल और न्यायपालिका से टकराव ने सरकार पर दबाव बढ़ाया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किया, जिसके बाद 25 जून 1975 को अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लगा। प्रेस पर सेंसर लगा, नेता जेल गए और अधिकार निलंबित हुए। 1977 में मतदाताओं ने कांग्रेस को हराया और जनता पार्टी की सरकार बनी। सबक़: भारत में लोकतंत्र ख़त्म करना कठिन है, 44वें संशोधन से आपातकाल के नियम कड़े हुए और लोग नागरिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूक हुए।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दबाव बढ़ा: महँगाई, गुजरात और बिहार आंदोलन, जेपी, रेल हड़ताल।
  2. जून 1975: अदालत का फ़ैसला, फिर अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल।
  3. लोकतंत्र के खंभों पर ताला: प्रेस, अदालतें, विपक्ष, अधिकार।
  4. 1977: मतदाताओं ने कांग्रेस को हराया; जनता पार्टी को 295 सीटें।
  5. सबक़: 44वाँ संशोधन और जागरूक नागरिक लोकतंत्र बचाते हैं।
  6. खुद करके देखें: सामान्य समय और आपातकाल के बीच बदलिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

1975 से पहले लोग नाराज़ क्यों थे?

महँगाई तेज़ी से बढ़ी, नौकरियाँ कम थीं और भ्रष्टाचार था, इसलिए छात्र और मज़दूर आंदोलन करने लगे।

क्या आपातकाल क़ानूनी था?

यह अनुच्छेद 352 की क़ानूनी शक्ति से लगा, पर बहुतों को लगा कि एक नेता को सत्ता में रखने के लिए इसका दुरुपयोग हुआ।

आम लोगों के लिए क्या बदला?

ख़बरों पर सेंसर लगा, नेता जेल गए और लोग अधिकारों के लिए अदालत नहीं जा सकते थे।

क्या लोगों ने आपातकाल स्वीकार किया?

नहीं। 1977 में उन्होंने वोट से कांग्रेस को हटा दिया।

क्या ऐसा आपातकाल फिर उसी तरह लग सकता है?

अब कठिन है: 44वें संशोधन के बाद केवल सशस्त्र विद्रोह पर, लिखित सलाह से, और जीवन व स्वतंत्रता सुरक्षित रहते हैं।

आपातकाल की पृष्ठभूमि

आर्थिक संदर्भ

'ग़रीबी हटाओ' से उम्मीदें बढ़ीं, पर 1971 के बाद जीवन कठिन हुआ: शरणार्थी और युद्ध का ख़र्च, अमेरिकी मदद बंद, 1973 में तेल के दाम तेज़ी से बढ़े, बारिश कम हुई, एक साल में क़ीमतें 20-23% बढ़ीं और बेरोज़गारी बढ़ी।

गुजरात और बिहार आंदोलन

रेल हड़ताल (1974)

जॉर्ज फ़र्नांडिस के नेतृत्व में बेहतर वेतन और हालात की माँग हुई। सरकार ने इसे ग़ैरक़ानूनी घोषित किया।

न्यायपालिका से टकराव

आपातकाल की घोषणा

12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे.एम.एल. सिन्हा ने राज नारायण की याचिका पर इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित किया। सर्वोच्च न्यायालय ने अपील तक उन्हें सांसद रहने दिया, पर वोट देने से रोका। 25 जून को जेपी ने देशव्यापी विरोध का आह्वान किया और बलों से अवैध आदेश न मानने को कहा। उसी रात सरकार ने राष्ट्रपति से 'आंतरिक अशांति' के आधार पर अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल घोषित करवाया। मंत्रिमंडल को अगली सुबह बताया गया।

परिणाम

आपातकाल के बाद की राजनीति और सबक़

1977 के चुनाव

जनवरी 1977 में चुनाव घोषित हुए। विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई; जगजीवन राम और अन्य कांग्रेस छोड़कर आए। जनता पार्टी और सहयोगी जीते; कांग्रेस को सिर्फ़ 154 सीटें मिलीं और उत्तर भारत के कई राज्यों में एक भी नहीं। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। शाह आयोग ने ज़्यादतियों की जाँच की। जनता सरकार में एकता नहीं थी और वह 1979 में गिर गई; 1980 में कांग्रेस लौटी।

आपातकाल के सबक़

  1. भारत में लोकतंत्र ख़त्म करना कठिन है: लोगों ने ताक़तवर सरकार को वोट से हटा दिया।
  2. आपातकाल के अस्पष्ट नियम सुधारे गए: 44वें संशोधन (1978) ने 'आंतरिक अशांति' की जगह 'सशस्त्र विद्रोह' किया, मंत्रिमंडल की लिखित सलाह ज़रूरी की, और आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 सुरक्षित रखे।
  3. लोग नागरिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूक हुए; अदालतें अधिकारों की रक्षा में ज़्यादा सक्रिय हुईं; पीयूसीएल जैसे संगठन बने।
  4. पुलिस और नौकरशाही को तटस्थ रहना चाहिए, सत्ताधारी दल का औज़ार नहीं बनना चाहिए।

बहस

समर्थकों का कहना था कि अव्यवस्था के ख़िलाफ़ स्थिरता और ग़रीबों के लिए कार्यक्रम (बीस-सूत्री कार्यक्रम) ज़रूरी थे। आलोचकों का कहना था कि आंदोलन लोकतांत्रिक विरोध था और आपातकाल एक नेता की सत्ता बचाने के लिए लगाया गया।

करके देखें

3D में सामान्य/आपातकाल बटन दबाइए। हर खंभे के लिए एक पंक्ति लिखिए कि अख़बार, जज, विपक्षी नेता और आम नागरिक का जीवन कैसे बदलता है। किसी बुज़ुर्ग से पूछिए कि उन्हें 1975-77 की क्या याद है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. आपातकाल का तात्कालिक कारण क्या था?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने (12 जून 1975) इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किया; फिर जेपी ने बड़े विरोध का आह्वान किया। सरकार ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगा दिया।

2. 44वें संशोधन ने दुरुपयोग कैसे रोका?

राष्ट्रीय आपातकाल सिर्फ़ युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह पर (आंतरिक अशांति पर नहीं), मंत्रिमंडल की लिखित सलाह ज़रूरी, और जीवन व स्वतंत्रता के अधिकार हमेशा सुरक्षित।

3. 1977 एक मोड़ क्यों है?

पहली बार कांग्रेस केंद्र में सत्ता से बाहर हुई; मतदाताओं ने दिखाया कि अधिकार छीनने वाली सरकार को वे सज़ा देंगे।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. आपातकाल कब घोषित हुआ?
2. 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किसने किया?
3. 1975 का आपातकाल किस अनुच्छेद से लगा?
4. पहले ग़ैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री:
5. आपातकाल की ज़्यादतियों की जाँच किसने की?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय आपातकाल क्या है?

अनुच्छेद 352 के तहत विशेष स्थिति जब केंद्र को अतिरिक्त शक्तियाँ मिलती हैं; 1978 से यह केवल युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह पर लग सकता है।

जेपी कौन थे?

जयप्रकाश नारायण, स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी, जिन्होंने बिहार आंदोलन का नेतृत्व किया और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया।

शाह आयोग क्या था?

न्यायमूर्ति जे.सी. शाह की अध्यक्षता में 1977 में बना आयोग, जिसने आपातकाल की ज़्यादतियों की जाँच की।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12स्वतंत्र भारत में राजनीति

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