आपातकाल की पृष्ठभूमि
आर्थिक संदर्भ
'ग़रीबी हटाओ' से उम्मीदें बढ़ीं, पर 1971 के बाद जीवन कठिन हुआ: शरणार्थी और युद्ध का ख़र्च, अमेरिकी मदद बंद, 1973 में तेल के दाम तेज़ी से बढ़े, बारिश कम हुई, एक साल में क़ीमतें 20-23% बढ़ीं और बेरोज़गारी बढ़ी।
गुजरात और बिहार आंदोलन
- गुजरात (1974): छात्रों ने महँगाई, अनाज की कमी और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन किया (नवनिर्माण आंदोलन); राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा और 1975 में नए चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस हारी।
- बिहार (1974): छात्रों ने जयप्रकाश नारायण (जेपी) को नेतृत्व के लिए बुलाया। उन्होंने 'संपूर्ण क्रांति' (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक बदलाव) का आह्वान किया और राज्य सरकार को हटाने की माँग की। 1975 में उन्होंने संसद तक मार्च किया।
रेल हड़ताल (1974)
जॉर्ज फ़र्नांडिस के नेतृत्व में बेहतर वेतन और हालात की माँग हुई। सरकार ने इसे ग़ैरक़ानूनी घोषित किया।
न्यायपालिका से टकराव
- क्या संसद मौलिक अधिकार घटा सकती है, इस पर विवाद। केशवानंद भारती मामले (1973) में कहा गया कि संसद संविधान का मूल ढाँचा नहीं बदल सकती।
- 1973 में सरकार के ख़िलाफ़ फ़ैसला देने वाले तीन वरिष्ठ जजों को छोड़कर ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला माना गया।
आपातकाल की घोषणा
12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे.एम.एल. सिन्हा ने राज नारायण की याचिका पर इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित किया। सर्वोच्च न्यायालय ने अपील तक उन्हें सांसद रहने दिया, पर वोट देने से रोका। 25 जून को जेपी ने देशव्यापी विरोध का आह्वान किया और बलों से अवैध आदेश न मानने को कहा। उसी रात सरकार ने राष्ट्रपति से 'आंतरिक अशांति' के आधार पर अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल घोषित करवाया। मंत्रिमंडल को अगली सुबह बताया गया।
परिणाम
- प्रेस पर सेंसरशिप; कुछ अख़बारों ने विरोध में ख़ाली जगह छोड़ी।
- हज़ारों लोगों की निवारक नज़रबंदी (मीसा); आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध।
- अदालत जाने का अधिकार निलंबित; एडीएम जबलपुर (1976) मामले में इसे सही माना गया; न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना असहमत रहे।
- 42वाँ संशोधन (1976): कई बदलाव, लोकसभा का कार्यकाल छह साल किया।
- ज़्यादतियाँ: ज़बरन नसबंदी, दिल्ली में झुग्गियाँ उजाड़ना; इनका नेतृत्व संजय गांधी ने किया, जिनके पास कोई सरकारी पद नहीं था।
- विरोध में कुछ लोगों ने राष्ट्रीय सम्मान लौटाए (जैसे लेखक शिवराम कारंत, फणीश्वरनाथ 'रेणु')।
आपातकाल के बाद की राजनीति और सबक़
1977 के चुनाव
जनवरी 1977 में चुनाव घोषित हुए। विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई; जगजीवन राम और अन्य कांग्रेस छोड़कर आए। जनता पार्टी और सहयोगी जीते; कांग्रेस को सिर्फ़ 154 सीटें मिलीं और उत्तर भारत के कई राज्यों में एक भी नहीं। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। शाह आयोग ने ज़्यादतियों की जाँच की। जनता सरकार में एकता नहीं थी और वह 1979 में गिर गई; 1980 में कांग्रेस लौटी।
आपातकाल के सबक़
- भारत में लोकतंत्र ख़त्म करना कठिन है: लोगों ने ताक़तवर सरकार को वोट से हटा दिया।
- आपातकाल के अस्पष्ट नियम सुधारे गए: 44वें संशोधन (1978) ने 'आंतरिक अशांति' की जगह 'सशस्त्र विद्रोह' किया, मंत्रिमंडल की लिखित सलाह ज़रूरी की, और आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 सुरक्षित रखे।
- लोग नागरिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूक हुए; अदालतें अधिकारों की रक्षा में ज़्यादा सक्रिय हुईं; पीयूसीएल जैसे संगठन बने।
- पुलिस और नौकरशाही को तटस्थ रहना चाहिए, सत्ताधारी दल का औज़ार नहीं बनना चाहिए।
बहस
समर्थकों का कहना था कि अव्यवस्था के ख़िलाफ़ स्थिरता और ग़रीबों के लिए कार्यक्रम (बीस-सूत्री कार्यक्रम) ज़रूरी थे। आलोचकों का कहना था कि आंदोलन लोकतांत्रिक विरोध था और आपातकाल एक नेता की सत्ता बचाने के लिए लगाया गया।
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आपातकाल: 25 जून 1975 - मार्च 1977 (अनु. 352, 'आंतरिक अशांति')
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फ़ैसला: 12 जून 1975 (राज नारायण मामला)
- जेपी: 'संपूर्ण क्रांति' (बिहार आंदोलन 1974)
- 42वाँ संशोधन 1976; एडीएम जबलपुर 1976
- 1977: जनता पार्टी जीती; मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री; शाह आयोग
- 44वाँ संशोधन 1978: 'सशस्त्र विद्रोह', अनु. 20-21 सुरक्षित
हल किए गए उदाहरण
1. आपातकाल का तात्कालिक कारण क्या था?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने (12 जून 1975) इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किया; फिर जेपी ने बड़े विरोध का आह्वान किया। सरकार ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगा दिया।
2. 44वें संशोधन ने दुरुपयोग कैसे रोका?
राष्ट्रीय आपातकाल सिर्फ़ युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह पर (आंतरिक अशांति पर नहीं), मंत्रिमंडल की लिखित सलाह ज़रूरी, और जीवन व स्वतंत्रता के अधिकार हमेशा सुरक्षित।
3. 1977 एक मोड़ क्यों है?
पहली बार कांग्रेस केंद्र में सत्ता से बाहर हुई; मतदाताओं ने दिखाया कि अधिकार छीनने वाली सरकार को वे सज़ा देंगे।
आम गलतियाँ
- कहना कि आपातकाल अनुच्छेद 356 से लगा। यह अनुच्छेद 352 था।
- 42वें संशोधन (आपातकाल में बना) और 44वें (दुरुपयोग रोकने वाला) को मिला देना।
- यह मानना कि जेपी सरकार में थे। वे विपक्षी आंदोलन के नेता थे।
- यह सोचना कि जनता सरकार पाँच साल चली। वह 1979 में गिर गई।