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क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

भारत अनेक क्षेत्रों का राष्ट्र है। क्षेत्रीय माँगों से डरने के बजाय भारतीय लोकतंत्र उन्हें समायोजित करने की कोशिश करता है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और पूर्वोत्तर में स्वायत्तता, अलगाव या बाहरी लोगों के ख़िलाफ़ माँगें उठीं, कभी-कभी हिंसा के साथ। इनमें से ज़्यादातर बातचीत और समझौतों से सुलझीं, जैसे राजीव-लोंगोवाल समझौता (1985), असम समझौता (1985) और मिज़ो समझौता (1986)। द्रविड़ आंदोलन, गोवा और सिक्किम दूसरे रास्ते दिखाते हैं। सबक़: क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतंत्र का हिस्सा हैं, और सत्ता की साझेदारी व न्यायपूर्ण विकास भारत को एक रखते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कई क्षेत्र एक मंच पर: विविधता के साथ एकता।
  2. जम्मू-कश्मीर: विलय, विशेष दर्जा, उग्रवाद, 2019 का बदलाव।
  3. पंजाब: स्वायत्तता की माँग (1973), संकट (1984), समझौता (1985)।
  4. पूर्वोत्तर: स्वायत्तता, अलगाव और बाहरी लोगों के ख़िलाफ़ आंदोलन।
  5. समायोजन: बल नहीं, बातचीत और समझौते।
  6. खुद करके देखें: कोई आंदोलन चुनिए और उसकी माँग व हल देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या क्षेत्रीय माँगें राष्ट्र के ख़िलाफ़ हैं?

नहीं। ये लोकतंत्र का सामान्य हिस्सा हैं; भारत इन्हें संविधान के भीतर पूरा करने की कोशिश करता है।

जम्मू-कश्मीर ख़ास क्यों था?

यह विशेष परिस्थितियों में मिला था और 2019 तक अनुच्छेद 370 था; इसके तीन क्षेत्रों की आकांक्षाएँ भी अलग हैं।

पंजाब के अकाली क्या चाहते थे?

राज्यों के लिए ज़्यादा स्वायत्तता और सिख पहचान का सम्मान (आनंदपुर साहिब, 1973)।

क्या पूर्वोत्तर के सभी आंदोलन एक जैसे हैं?

नहीं। कुछ ने स्वायत्तता माँगी, कुछ ने अलगाव, और कुछ ने बाहरी लोगों का विरोध किया।

ज़्यादातर टकराव कैसे सुलझे?

बातचीत और समझौतों से, जैसे पंजाब, असम और मिज़ो समझौते।

क्षेत्र और राष्ट्र

क्षेत्रीय आकांक्षा किसी क्षेत्र के लोगों की माँग है: ज़्यादा अधिकार, अपनी भाषा या संस्कृति का सम्मान, या विकास में उचित हिस्सा। भारत का तरीक़ा: विविधता ख़तरा नहीं; माँगों को लोकतांत्रिक ढंग से, बातचीत, विशेष प्रावधानों और नए राज्यों से सुलझाना।

1980 का दशक तनाव का दौर था: जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर और तमिलनाडु में। कुछ माँगें हिंसक हुईं; ज़्यादातर बाद में समझौते से सुलझीं।

जम्मू और कश्मीर

पंजाब

पूर्वोत्तर

सात राज्य (और बाद में सिक्किम) एक पतले ज़मीनी गलियारे से शेष भारत से जुड़े हैं; यहाँ कई जनजातियाँ और भाषाएँ हैं और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है।

1. स्वायत्तता की माँग

ग़ैर-असमिया समूह अपने राज्य चाहते थे: नागालैंड (1963), मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा (1972), मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश (1987)। दूसरों को छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदें मिलीं (जैसे बोडो)।

2. अलगाववादी आंदोलन

3. बाहरी लोगों के ख़िलाफ़ आंदोलन

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के नेतृत्व में असम आंदोलन (1979-85) ने मुख्यतः बांग्लादेश से अवैध प्रवासन का विरोध किया और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियाँ माँगीं। यह असम समझौते (1985) से ख़त्म हुआ; एजीपी ने सरकार बनाई।

अन्य क्षेत्रीय आंदोलन और समायोजन

सबक़

  1. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा हैं, राष्ट्र-विरोधी नहीं।
  2. सबसे अच्छा जवाब: बातचीत और समायोजन, बल नहीं।
  3. सत्ता की साझेदारी: क्षेत्रों और छोटे राज्यों की केंद्र में भी आवाज़ हो।
  4. क्षेत्रों के बीच आर्थिक असंतुलन से शिकायतें पैदा होती हैं।
  5. संविधान का लचीलापन (अनु. 371 के प्रावधान, छठी अनुसूची) मदद करता है।

करके देखें

खुद करके देखें के बटनों से पाँच आंदोलन देखिए। हर एक को स्वा (स्वायत्तता), अ (अलगाव) या बा (बाहरी लोगों का विरोध) में रखिए और उसके समझौते या हल का नाम लिखिए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव क्या था?

1973 में अकाली दल का प्रस्ताव, जिसमें राज्यों को ज़्यादा स्वायत्तता, मज़बूत संघवाद और सिख पहचान के सम्मान की माँग थी।

2. मिज़ोरम सफलता की कहानी क्यों है?

दो दशकों के सशस्त्र संघर्ष के बाद सरकार और एमएनएफ ने 1986 का समझौता किया; विद्रोही नेता मुख्यमंत्री बने और शांति लौटी।

3. असम आंदोलन क्या चाहता था?

अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें हटाना, असमिया पहचान की रक्षा और स्थानीय लोगों को नौकरी। यह 1985 के असम समझौते से ख़त्म हुआ।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव कब पास हुआ?
2. मिज़ो नेशनल फ़्रंट के नेता:
3. सिक्किम भारत का राज्य कब बना?
4. असम आंदोलन का मुख्य नेतृत्व किसने किया?
5. कौन-सी अनुसूची जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्त परिषदें देती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय राजनीति में क्षेत्रवाद क्या है?

किसी क्षेत्र की विशेष पहचान और हितों को माँगों और आंदोलनों के ज़रिए व्यक्त करना, आमतौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर।

असम समझौता क्या था?

1985 में केंद्र सरकार और आसू के बीच हुआ समझौता, जिसने असम आंदोलन ख़त्म किया और अवैध प्रवासन पर क़दम उठाने का वादा किया।

क्षेत्रों के लिए संविधान का लचीलापन क्यों अहम है?

अनुच्छेद 371 और छठी अनुसूची जैसे विशेष प्रावधान अलग-अलग क्षेत्रों को भारत के भीतर अपने रीति-रिवाज और स्वशासन बनाए रखने देते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12स्वतंत्र भारत में राजनीति

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