क्षेत्र और राष्ट्र
क्षेत्रीय आकांक्षा किसी क्षेत्र के लोगों की माँग है: ज़्यादा अधिकार, अपनी भाषा या संस्कृति का सम्मान, या विकास में उचित हिस्सा। भारत का तरीक़ा: विविधता ख़तरा नहीं; माँगों को लोकतांत्रिक ढंग से, बातचीत, विशेष प्रावधानों और नए राज्यों से सुलझाना।
1980 का दशक तनाव का दौर था: जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर और तमिलनाडु में। कुछ माँगें हिंसक हुईं; ज़्यादातर बाद में समझौते से सुलझीं।
जम्मू और कश्मीर
- तीन क्षेत्र: जम्मू (मैदान और पहाड़), कश्मीर घाटी और लद्दाख, जिनकी आकांक्षाएँ और समुदाय अलग हैं।
- 1947: सीमा पार से हमले के बाद शासक हरि सिंह ने विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। शेख़ अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ़्रेंस) ने सरकार चलाई।
- अनुच्छेद 370 से राज्य को विशेष दर्जा और अपना संविधान मिला।
- राजनीति: नेशनल कॉन्फ़्रेंस का लंबा शासन, केंद्र से विवाद, 1987 का संदिग्ध चुनाव, फिर 1989 से सीमा पार से समर्थित उग्रवाद। कई कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी।
- 2019: अनुच्छेद 370 हटा; राज्य दो केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बदला।
पंजाब
- 1966: पंजाबी भाषी राज्य बना (हरियाणा और हिमाचल के इलाक़े अलग हुए)।
- 1973: अकाली दल का आनंदपुर साहिब प्रस्ताव: राज्यों को ज़्यादा स्वायत्तता, संघवाद और सिख पहचान का सम्मान।
- एक छोटा हिस्सा हथियारबंद उग्रवाद की ओर गया। जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार: उग्रवादियों को हटाने के लिए सेना स्वर्ण मंदिर में गई; इससे बहुत से सिखों को ठेस पहुँची।
- 31 अक्टूबर 1984: प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या; दिल्ली और दूसरी जगहों पर सिख-विरोधी हिंसा हुई। न्याय धीरे मिला; 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में माफ़ी माँगी।
- 1985: शांति के लिए राजीव गांधी-हरचंद सिंह लोंगोवाल समझौता। कुछ साल हिंसा चली; 1992 के चुनावों से हालात सामान्य हुए।
पूर्वोत्तर
सात राज्य (और बाद में सिक्किम) एक पतले ज़मीनी गलियारे से शेष भारत से जुड़े हैं; यहाँ कई जनजातियाँ और भाषाएँ हैं और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है।
1. स्वायत्तता की माँग
ग़ैर-असमिया समूह अपने राज्य चाहते थे: नागालैंड (1963), मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा (1972), मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश (1987)। दूसरों को छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदें मिलीं (जैसे बोडो)।
2. अलगाववादी आंदोलन
- मिज़ोरम: 1959 के अकाल के बाद लालडेंगा के नेतृत्व में मिज़ो नेशनल फ़्रंट ने आज़ादी के लिए संघर्ष किया। बातचीत से मिज़ो समझौता (1986) हुआ; लालडेंगा मुख्यमंत्री बने। आज मिज़ोरम सबसे शांत राज्यों में है।
- नागालैंड: ए.ज़ेड. फ़िज़ो के नेतृत्व में नगा समूहों ने आज़ादी माँगी; कुछ समूहों ने समझौते किए, बातचीत जारी है।
3. बाहरी लोगों के ख़िलाफ़ आंदोलन
ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के नेतृत्व में असम आंदोलन (1979-85) ने मुख्यतः बांग्लादेश से अवैध प्रवासन का विरोध किया और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियाँ माँगीं। यह असम समझौते (1985) से ख़त्म हुआ; एजीपी ने सरकार बनाई।
अन्य क्षेत्रीय आंदोलन और समायोजन
- द्रविड़ आंदोलन (तमिलनाडु): ई.वी. रामासामी 'पेरियार' ने शुरू किया; जातिगत वर्चस्व और हिंदी थोपने के ख़िलाफ़। डीएमके (सी.एन. अन्नादुरई) 1967 में जीती; तब से क्षेत्रीय दल राज्य में सरकार चलाते हैं। इसने सिर्फ़ लोकतांत्रिक तरीक़े अपनाए।
- सिक्किम: भारत के संरक्षण में राजतंत्र था; लोकतंत्र समर्थक आंदोलन और 1975 के जनमत-संग्रह के बाद भारत का 22वाँ राज्य बना।
- गोवा: 1961 में भारतीय सेना ने पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया; 1967 के जनमत सर्वेक्षण में लोगों ने महाराष्ट्र से अलग रहना चुना; 1987 में राज्य बना।
सबक़
- क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा हैं, राष्ट्र-विरोधी नहीं।
- सबसे अच्छा जवाब: बातचीत और समायोजन, बल नहीं।
- सत्ता की साझेदारी: क्षेत्रों और छोटे राज्यों की केंद्र में भी आवाज़ हो।
- क्षेत्रों के बीच आर्थिक असंतुलन से शिकायतें पैदा होती हैं।
- संविधान का लचीलापन (अनु. 371 के प्रावधान, छठी अनुसूची) मदद करता है।
करके देखें
खुद करके देखें के बटनों से पाँच आंदोलन देखिए। हर एक को स्वा (स्वायत्तता), अ (अलगाव) या बा (बाहरी लोगों का विरोध) में रखिए और उसके समझौते या हल का नाम लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- माँगों के तीन प्रकार: स्वायत्तता, अलगाव, बाहरी लोगों का विरोध
- आनंदपुर साहिब 1973 → ब्लू स्टार 1984 → राजीव-लोंगोवाल समझौता 1985
- मिज़ो समझौता 1986 (लालडेंगा)
- असम आंदोलन 1979-85 → असम समझौता 1985
- सिक्किम 1975; गोवा मुक्त 1961, जनमत सर्वेक्षण 1967
- अनु. 370 (जम्मू-कश्मीर) 2019 में हटा; अनु. 371 और छठी अनुसूची क्षेत्रों की रक्षा करते हैं
हल किए गए उदाहरण
1. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव क्या था?
1973 में अकाली दल का प्रस्ताव, जिसमें राज्यों को ज़्यादा स्वायत्तता, मज़बूत संघवाद और सिख पहचान के सम्मान की माँग थी।
2. मिज़ोरम सफलता की कहानी क्यों है?
दो दशकों के सशस्त्र संघर्ष के बाद सरकार और एमएनएफ ने 1986 का समझौता किया; विद्रोही नेता मुख्यमंत्री बने और शांति लौटी।
3. असम आंदोलन क्या चाहता था?
अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें हटाना, असमिया पहचान की रक्षा और स्थानीय लोगों को नौकरी। यह 1985 के असम समझौते से ख़त्म हुआ।
आम गलतियाँ
- हर क्षेत्रीय माँग को राष्ट्र-विरोधी कहना। ज़्यादातर लोकतांत्रिक होती हैं।
- असम समझौता (1985) और मिज़ो समझौता (1986) को मिला देना।
- कहना कि गोवा महाराष्ट्र में मिल गया। लोगों ने अलग रहने के लिए वोट दिया।
- यह सोचना कि द्रविड़ आंदोलन हिंसक था। उसने लोकतांत्रिक तरीक़े अपनाए।