National Year 12 Politics
अध्याय: 2
1. 3.1.1 The government of the UK
The nature and sources of the British Constitution · The structure and role of Parliament · The Prime Minister and cabinet · The judiciary · Devolution
- संविधान: क्यों और कैसे? – संविधान किसी देश की बुनियादी नियम-पुस्तिका है। यह भरोसा बनाता है, बताता है कि शक्ति किसके पास है, उस शक्ति पर सीमा लगाता है और लोगों की आकांक्षाएँ बताता है। भारत का संविधान 1946 से 1949 तक संविधान सभा ने खुली बहस से लिखा और दूसरे संविधानों से अच्छे विचार लेकर उन्हें भारत के अनुसार ढाला।
- विधायिका – संसद वह जगह है जहाँ चुने हुए प्रतिनिधि कानून बनाते हैं, मुद्दों पर बहस करते हैं, बजट पास करते हैं और सरकार को जवाबदेह रखते हैं। भारत की संसद के दो सदन हैं: जनता द्वारा चुनी लोकसभा और राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा। विधेयक वाचन, समिति की जाँच और दोनों सदनों के मतदान से गुज़रकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून बनता है। समितियाँ बारीक काम करती हैं और दल-बदल विरोधी कानून जैसे नियम संसद में अनुशासन रखते हैं।
- कार्यपालिका – कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो कानूनों और नीतियों को लागू करता है। देशों में अध्यक्षात्मक, संसदीय या अर्ध-अध्यक्षात्मक कार्यपालिका होती है। भारत में संसदीय कार्यपालिका है: राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख हैं, जबकि असली शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास है, जो तभी तक रहते हैं जब तक लोकसभा का समर्थन है। सिविल सेवक (नौकरशाही) स्थायी कार्यपालिका हैं।
- न्यायपालिका – न्यायपालिका विवाद सुलझाती है और संविधान व हमारे अधिकारों की रक्षा करती है। निष्पक्ष रहने के लिए उसे सरकार और संसद से स्वतंत्र होना चाहिए। भारत में एक एकीकृत न्याय व्यवस्था है, जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय है। सर्वोच्च न्यायालय के पास मूल, रिट, अपीलीय और सलाहकारी क्षेत्राधिकार हैं। न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका से अदालतें अधिकार बचाती हैं, पर उन्हें दूसरे अंगों की भूमिका के साथ संतुलन भी रखना होता है।
- शक्ति हस्तांतरण: सत्ता को नीचे सौंपना – शक्ति हस्तांतरण (devolution) में केंद्रीय संसद अपनी कुछ शक्तियाँ क्षेत्रीय या स्थानीय संस्थाओं को सौंपती है, पर अंतिम क़ानूनी अधिकार (संप्रभुता) अपने पास रखती है। यह संघवाद से अलग है, जहाँ लिखित संविधान शक्ति बाँटता है और केंद्र उसे अकेले वापस नहीं ले सकता। सबसे जाना-माना उदाहरण यूनाइटेड किंगडम है: 1999 से स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की अपनी चुनी हुई संस्थाएँ हैं जिनके पास स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी शक्तियाँ हैं, जबकि रक्षा, विदेश नीति और आप्रवासन वेस्टमिंस्टर के पास आरक्षित हैं। हस्तांतरण असमान है: हर राष्ट्र को अलग शक्तियाँ मिलीं और इंग्लैंड की अपनी संसद नहीं, सिर्फ़ मेयर और परिषदें हैं। इससे नीतियों में अंतर, अंग्रेज़ी वोटों पर बहस और संघ के भविष्य पर सवाल उठे हैं।
2. 3.1.2 The politics of the UK
Democracy and participation · Elections and referendums · Political parties · Pressure groups · The European Union
- लोकतंत्र: सिद्धांत, चुनाव और सत्ता पर रोक – लोकतंत्र में आख़िरी ताक़त जनता के पास होती है। इसके मुख्य सिद्धांत हैं: राजनीतिक समानता, बहुमत का शासन पर अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित, विधि का शासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, और सत्ता पर सीमाएँ। लोग सीधे (जनमत संग्रह) या चुने हुए प्रतिनिधियों के ज़रिए फ़ैसला करते हैं। चुनाव का नियम (FPTP या आनुपातिक प्रणाली) तय करता है कि सीटें किसे मिलेंगी। संविधान सत्ता को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में बाँटता है ताकि हर अंग दूसरे पर नज़र रखे। चुनावों के बीच भी नागरिक मीडिया, दबाव समूह, अदालत, याचिका और शांतिपूर्ण विरोध से नीति पर असर डालते हैं।
- चुनाव और प्रतिनिधित्व – बड़े लोकतंत्र में लोग चुनाव से प्रतिनिधि चुनते हैं। भारत 'सर्वाधिक वोट से जीत' (FPTP) प्रणाली अपनाता है: हर निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला जीतता है। कुछ सीटें SC और ST उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। स्वतंत्र चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराता है, और सुधार चुनावों को और साफ़-सुथरा बनाने की कोशिश करते हैं।
- राजनीतिक दल – राजनीतिक दल ऐसे लोगों का समूह है जो चुनाव लड़ने और सत्ता पाने के लिए साथ आते हैं। दल सात मुख्य काम करते हैं, चुनाव लड़ने से लेकर लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तक। भारत में राष्ट्रीय और राज्य दलों वाली बहुदलीय व्यवस्था है। दलों के सामने अंदरूनी लोकतंत्र की कमी, धनबल जैसी चुनौतियाँ हैं और कुछ सुधार हुए हैं।
- दबाव समूह (Pressure Groups) – दबाव समूह लोगों का संगठित समूह है जिसका एक साझा उद्देश्य होता है और जो चुनाव लड़े बिना सरकार की नीति पर असर डालना चाहता है। हित (वर्गीय) समूह अपने सदस्यों की बात करते हैं; उद्देश्य (प्रचारक) समूह पूरे समाज के लिए किसी विचार के लिए लड़ते हैं। अंदरूनी समूहों से सरकार सलाह लेती है; बाहरी समूह प्रदर्शन और मीडिया से काम करते हैं। तरीक़े: लॉबिंग, अभियान, याचिका, प्रत्यक्ष कार्रवाई और अदालत। लॉबिस्ट, थिंक टैंक, कंपनियाँ और मीडिया भी असर डालते हैं। बहुलवादी कहते हैं समूह शक्ति बाँटकर लोकतंत्र मज़बूत करते हैं; अभिजनवादी कहते हैं अमीर, पहुँच वाले समूह हावी रहते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।