संविधान की ज़रूरत क्यों?
संविधान बुनियादी नियमों का वह समूह है जिस पर पूरा देश सहमत होता है। यह देश के कानूनों की नींव है। इसकी ज़रूरत क्यों है? यह पाँच काम करता है।
- भरोसा और तालमेल: अलग-अलग समूह साथ रह पाते हैं क्योंकि सब साझा नियम जानते हैं।
- शक्ति किसके पास: यह तय करता है कि कानून कौन बनाएगा और उसे कैसे चुना जाएगा। भारत में जनता प्रतिनिधि चुनती है।
- शक्ति पर सीमा: सरकार भी बुनियादी अधिकार नहीं छीन सकती। इससे शासक शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर पाते।
- लोगों की आकांक्षाएँ: यह सरकार को न्यायपूर्ण समाज बनाने में मदद करता है, जैसे भेदभाव ख़त्म करना।
- पहचान: यह बताता है कि हम एक जनता के रूप में कौन हैं और किन मूल्यों को मानते हैं।
संविधान का प्राधिकार (सत्ता)
प्राधिकार यानी बात माने जाने का अधिकार। संविधान सर्वोच्च कानून है। अगर कोई सामान्य कानून इसके ख़िलाफ़ हो, तो अदालत उसे रद्द कर सकती है।
पर संविधान तभी चलता है जब लोग उसका सम्मान करें। तीन बातें उसे असली प्राधिकार देती हैं:
- कैसे बना (लागू करने का तरीका): लोगों के भरोसे वाले नेताओं ने बनाया, किसी शासक ने थोपा नहीं।
- क्या कहता है (मौलिक प्रावधान): इसके नियम निष्पक्ष हैं, इसलिए हर समूह को इसमें कुछ अच्छा मिलता है।
- संतुलित ढाँचा: शक्ति कई संस्थाओं (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाएँ) में बँटी है, इसलिए कोई एक समूह इसे नष्ट नहीं कर सकता। ज़रूरत पर बदल सकता है, पर बहुत आसानी से नहीं।
भारतीय संविधान का निर्माण
संविधान सभा
संविधान सभा वह संस्था है जिसने संविधान लिखा। इसके सदस्य 1946 में प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों ने चुने (कैबिनेट मिशन योजना के तहत)। पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। 1947 के विभाजन के बाद इसमें 299 सदस्य रहे। इसने लगभग 2 साल 11 महीने काम किया। संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ (अब गणतंत्र दिवस)।
काम कैसे हुआ
- दिसंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव ने लक्ष्य तय किए: न्याय और समानता वाला स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, संप्रभु गणराज्य।
- आठ मुख्य समितियों ने अलग विषयों का अध्ययन किया। नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद और राजेंद्र प्रसाद जैसे नेता इनके अध्यक्ष थे।
- डॉ. बी.आर. आंबेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति ने पाठ तैयार किया।
- हर धारा पर खुली बहस हुई। सदस्यों ने सिर्फ़ बहुमत से जीतने के बजाय आम सहमति की कोशिश की।
- सभा ने राष्ट्रीय आंदोलन के विचार आगे बढ़ाए: लोकतंत्र, अधिकार, समानता और एकता।
दूसरे संविधानों से लिए गए प्रावधान
निर्माताओं ने दूसरे संविधानों का अध्ययन किया, जो काम का था वह लिया और भारत के अनुसार बदला। यह सोच-समझकर सीखना था, आँख मूँदकर नकल नहीं।
- ब्रिटेन: संसदीय शासन, कानून का शासन, सर्वाधिक वोट से जीत वाली चुनाव प्रणाली, कानून बनाने की प्रक्रिया, अध्यक्ष (स्पीकर) की भूमिका।
- अमेरिका: मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता।
- आयरलैंड: राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व।
- फ़्रांस: स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श।
- कनाडा: मज़बूत केंद्र वाला संघ; बची हुई (अवशिष्ट) शक्तियाँ केंद्र के पास।
बाद में (1976) जोड़े गए मौलिक कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित थे।
करके देखें: अपनी कक्षा का संविधान
4 दोस्तों के साथ अपने समूह के 5 नियम लिखें: फ़ैसला कौन करेगा, नेता कैसे चुनेंगे, नेता क्या नहीं कर सकता, आप क्या पाना चाहते हैं, और समूह का नाम। फिर पूछें: क्या सब इन नियमों को मानेंगे? क्यों? अब 3D का आख़िरी (खुद खेलें) चरण खोलें और हर नियम को भारत के लिए गए किसी विचार से मिलाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संविधान = देश के सबसे ऊँचे नियमों का समूह
- काम: तालमेल, फ़ैसला कौन करे, शक्ति पर सीमा, आकांक्षाएँ, पहचान
- संविधान सभा: पहली बैठक 9 दिसंबर 1946; विभाजन के बाद 299 सदस्य
- अपनाया 26 नवंबर 1949 (संविधान दिवस); लागू 26 जनवरी 1950 (गणतंत्र दिवस)
- प्रारूप समिति अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. आंबेडकर; उद्देश्य प्रस्ताव: नेहरू (1946)
- उधार: ब्रिटेन (संसदीय शासन), अमेरिका (अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन), आयरलैंड (नीति-निर्देशक तत्त्व), फ़्रांस (स्वतंत्रता-समानता-बंधुत्व), कनाडा (मज़बूत केंद्र)
हल किए गए उदाहरण
1. एक नया शासक कहता है, 'सारे कानून मैं ख़ुद बनाऊँगा और कोई सवाल नहीं कर सकता।' संविधान का कौन-सा काम इसे रोकता है?
शक्ति पर सीमा लगाना। संविधान तय करता है कि सरकार क्या नहीं कर सकती, जैसे बुनियादी अधिकारों की रक्षा, इसलिए शासक मनमानी नहीं कर सकता।
2. संविधान सभा को पहली बैठक से संविधान अपनाने तक कितना समय लगा?
9 दिसंबर 1946 से 26 नवंबर 1949 तक: लगभग 3 साल, यानी करीब 2 साल 11 महीने 17 दिन।
3. भारत ने न्यायिक पुनरावलोकन अमेरिका से और संसदीय शासन ब्रिटेन से लिया। दोनों का अर्थ बताइए।
न्यायिक पुनरावलोकन: अदालत जाँच सकती है कि कोई कानून संविधान के अनुसार है या नहीं, और न हो तो रद्द कर सकती है। संसदीय शासन: प्रधानमंत्री और मंत्री संसद से आते हैं और तभी तक पद पर रहते हैं जब तक संसद का समर्थन है।
4. संविधान सभा सभी वयस्कों ने नहीं चुनी थी, फिर भी भारतीय संविधान को प्राधिकार क्यों मिला?
सदस्यों पर स्वतंत्रता आंदोलन के कारण जनता का गहरा भरोसा था, कई समूहों की बात सुनकर खुली बहस से यह बना, इसके नियम सब समूहों के लिए निष्पक्ष हैं और इसका ढाँचा शक्ति को संतुलित करता है। इसलिए लोगों ने इसे अपनाया।
आम गलतियाँ
- तारीख़ें मिलाना: 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया; 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
- संविधान को 'नकल' कहना। विचार लिए गए और भारत के अनुसार बदले गए।
- सोचना कि संविधान सिर्फ़ नियमों की सूची है। यह शक्ति पर सीमा भी लगाता है और आकांक्षाएँ भी बताता है।
- नीति-निर्देशक तत्त्वों को अमेरिका से मानना। ये आयरलैंड से आए; मौलिक अधिकार अमेरिका से।