South 고등학교 2학년 Law and Society
अध्याय: 4
1. Private life and law
Family law · Contracts and obligations · Property rights
- पारिवारिक क़ानून: विवाह, माता-पिता और बच्चे – पारिवारिक क़ानून दीवानी (निजी) क़ानून का हिस्सा है जो विवाह, पति-पत्नी के संबंध, माता-पिता और बच्चे, तलाक़, भरण-पोषण, संरक्षकता और गोद लेने से जुड़ा है। ज़्यादातर देशों में वैध विवाह के लिए दो वयस्क चाहिए जो अपनी मर्ज़ी से सहमत हों, पहले से विवाहित न हों, नज़दीकी रिश्तेदार न हों, और विवाह पंजीकृत हो। पति-पत्नी के अधिकार और कर्तव्य बराबर हैं। माता-पिता बच्चे की देखभाल, भरण-पोषण और पढ़ाई करते हैं, और बच्चे से जुड़ा हर फ़ैसला 'बच्चे के सर्वोत्तम हित' से होता है। बिना माता-पिता की देखभाल वाले बच्चों को संरक्षकता, पालक देखभाल और गोद लेने से सुरक्षा मिलती है।
- संपत्ति क़ानून: स्वामित्व और संपत्ति के अधिकार – स्वामित्व (ownership) किसी चीज़ पर सबसे मज़बूत अधिकार है। इसमें तीन शक्तियाँ होती हैं: चीज़ को अपने पास रखना (कब्ज़ा), उसका इस्तेमाल करना और उससे कमाना, और उसे बेचना, देना या बदलना (निपटान)। संपत्ति निजी, साझा, सहकारी या सार्वजनिक हो सकती है। क़ानून मालिक की रक्षा करता है, पर सीमाएँ भी हैं: दूसरों को नुक़सान नहीं पहुँचा सकते, और सार्वजनिक ज़रूरत के लिए राज्य उचित मुआवज़ा देकर संपत्ति ले सकता है।
2. State and law
Rule of law and democracy · Constitutional principles and rights · Criminal law · Courts and the Constitutional Court
- क़ानून का शासन (Rule of Law) – क़ानून के शासन (विधि का शासन) का अर्थ है कि सरकार और उसके नेता समेत हर व्यक्ति एक-से, पहले से ज्ञात क़ानून माने, जिन्हें निष्पक्ष और स्वतंत्र अदालतें बराबरी से लागू करें। मुख्य सिद्धांत हैं: क़ानून की सर्वोच्चता, क़ानून के सामने समानता, साफ़ और सार्वजनिक क़ानून, निष्पक्ष सुनवाई, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों का पृथक्करण। क़ानून खुली प्रक्रिया से बनते-बदलते हैं, अदालतें उन्हें संविधान या अधिकार-पत्र पर परख सकती हैं, और देश संधियों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून मानते हैं।
- संविधान: क्यों और कैसे? – संविधान किसी देश की बुनियादी नियम-पुस्तिका है। यह भरोसा बनाता है, बताता है कि शक्ति किसके पास है, उस शक्ति पर सीमा लगाता है और लोगों की आकांक्षाएँ बताता है। भारत का संविधान 1946 से 1949 तक संविधान सभा ने खुली बहस से लिखा और दूसरे संविधानों से अच्छे विचार लेकर उन्हें भारत के अनुसार ढाला।
- आपराधिक कानून (Criminal Law): अपराध और बचाव – आपराधिक कानून बताता है कि राज्य किन कामों को अपराध मानता है और उनकी सज़ा क्या है। ज़्यादातर अपराधों के दो हिस्से होते हैं: दोषी कार्य (actus reus) और दोषी मन (mens rea)। अपराध व्यक्ति के विरुद्ध (घातक जैसे हत्या; गैर-घातक जैसे हमला) या संपत्ति के विरुद्ध (चोरी, लूट, सेंधमारी, धोखाधड़ी, संपत्ति को नुकसान) हो सकते हैं। अपराध करने की कोशिश (प्रयास) भी अपराध है। आत्मरक्षा, दबाव, पागलपन या आपराधिक ज़िम्मेदारी की उम्र से कम होना जैसे बचाव दोष हटा या घटा सकते हैं। अभियुक्त निर्दोष माना जाता है; अभियोजन को उचित संदेह से परे दोष साबित करना होता है।
3. Social life and law
Workers' rights · Social security law · Modern legal relations and IP
- रोज़गार क़ानून: किसी के लिए काम करने के नियम – रोज़गार क़ानून (श्रम क़ानून) नियोक्ता और कर्मचारी के रिश्ते के नियम हैं। रोज़गार अनुबंध तब बनता है जब कोई व्यक्ति वेतन के बदले, नियोक्ता के निर्देश में (अधीनता) काम करता है। अनुबंध स्थायी, निश्चित अवधि, एजेंसी के ज़रिए अस्थायी, अंशकालिक या दूरस्थ हो सकता है; सिविल या फ़्रीलांस अनुबंध नौकरी नहीं है। कर्मचारी के अधिकार हैं (कम से कम न्यूनतम वेतन, सीमित घंटे, आराम और सवेतन छुट्टी, सुरक्षित कार्यस्थल, बराबर व्यवहार, उत्पीड़न से मुक्ति) और कर्तव्य हैं (सावधान काम, वैध निर्देश मानना, वफ़ादारी, सुरक्षा नियम)। नियोक्ता क़ानून के भीतर काम व्यवस्थित कर सकता है और अनुशासन दे सकता है। सकल वेतन कर और सामाजिक बीमा से पहले का है, शुद्ध बाद का; नियोक्ता की कुल लागत ज़्यादा होती है। ट्रेड यूनियन सामूहिक समझौते करती हैं। अनुबंध इस्तीफ़े, वैध कारण और निष्पक्ष प्रक्रिया वाली बर्ख़ास्तगी, आपसी सहमति या अवधि ख़त्म होने से समाप्त होता है।
- कल्याणकारी राज्य और सामाजिक सुरक्षा – कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जो लोगों को जीवन के बड़े जोखिमों से बचाता है: बीमारी, नौकरी छूटना, बुढ़ापा, विकलांगता और ग़रीबी। इसके लिए एक सुरक्षा-जाल होता है जिसके तीन हिस्से हैं। सामाजिक बीमा वेतन से लिए गए अंशदान से चलता है। सामाजिक सहायता करों से ज़रूरतमंदों को मिलती है। स्कूल और अस्पताल जैसी सार्वजनिक सेवाएँ सबके लिए खुली हैं। देश इन्हें अलग-अलग ढंग से मिलाते हैं: उदार (कम कर, थोड़ी मदद), रूढ़िवादी (मदद नौकरी से जुड़ी) और सामाजिक-लोकतांत्रिक (ऊँचा कर, सबके लिए मदद)। आज बढ़ती उम्र, बढ़ता ख़र्च, वैश्वीकरण और अनौपचारिक काम इसकी चुनौतियाँ हैं।
- डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार – बौद्धिक संपदा (IP) मन की रचना है, जैसे कहानी, गीत, प्रोग्राम, आविष्कार या लोगो। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) निर्माता को उसके उपयोग पर नियंत्रण देते हैं। कॉपीराइट रचनात्मक कार्य (लेख, संगीत, कला, सॉफ़्टवेयर कोड) को बनते ही अपने-आप बचाता है; पेटेंट नए, उपयोगी आविष्कार को लगभग 20 साल बचाता है और इसके लिए आवेदन करना पड़ता है; ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगो और नारे बचाता है। साहित्यिक चोरी दूसरे का काम बिना श्रेय अपना बताना है। उल्लंघन सुरक्षित IP को बिना अनुमति इस्तेमाल करना है। सार्वजनिक लाइसेंस से निर्माता अपनी शर्तों पर साझा करते हैं: रचनात्मक कार्यों के लिए क्रिएटिव कॉमन्स (BY, SA, NC, ND), और सॉफ़्टवेयर के लिए GPL (कॉपीलेफ़्ट: बदला संस्करण खुला रहे) और Apache (उदार: नोटिस रखकर बंद उत्पाद में भी)।
4. School life and law
Rights of students and youth · School violence and law · Getting legal help
- बाल अधिकार: हर बच्चे का हक़ – 18 वर्ष से कम उम्र का हर व्यक्ति बच्चा है। बच्चों के सारे मानव अधिकार हैं और उन्हें खास संरक्षण भी मिलता है, क्योंकि वे अभी बढ़ रहे हैं और बड़ों पर निर्भर हैं। मुख्य अंतरराष्ट्रीय संधि है संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (UNCRC), जो 20 नवंबर 1989 को अपनाया गया, 54 अनुच्छेदों के साथ। 196 देशों ने इसे माना है, किसी भी दूसरी मानव अधिकार संधि से ज़्यादा। चार मूल सिद्धांत हर अधिकार को दिशा देते हैं: भेदभाव नहीं, बच्चे का सर्वोत्तम हित, जीवन-अस्तित्व-विकास का अधिकार, और बच्चे की राय का सम्मान। अधिकार चार समूहों में हैं: जीवन व अस्तित्व (जीवन, स्वास्थ्य, भोजन, साफ़ पानी), विकास (शिक्षा, खेल, संस्कृति, जानकारी), संरक्षण (हिंसा, दुर्व्यवहार, उपेक्षा, शोषण, बाल श्रम, तस्करी और युद्ध से) और सहभागिता (सुने जाने, राय रखने, समूह बनाने का हक़)। पहली ज़िम्मेदारी माता-पिता की है; सरकार को कानून और सेवाएँ (स्कूल, स्वास्थ्य, बाल आयोग, अदालतें, हेल्पलाइन) देनी होती हैं। UN बाल अधिकार समिति देखती है कि देश वादे निभा रहे हैं या नहीं। स्कूल में छात्रों को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान (शारीरिक दंड नहीं), निष्पक्ष व्यवहार और अपनी बात कहने का हक़ है, और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने का कर्तव्य भी। युवा संरक्षण कानून हानिकारक काम, नाबालिगों को शराब-तंबाकू बेचने, ऑनलाइन नुकसान को सीमित करते हैं और किशोर अपराधियों के लिए अलग न्याय व्यवस्था रखते हैं।
- सुरक्षा शिक्षा: घर, सड़क और लोगों के बीच सुरक्षित रहना – सुरक्षा का मतलब है खतरे को जल्दी पहचानना और नुकसान से पहले कदम उठाना। जोखिम = संभावना × नुकसान। आग में निकास साफ़ रखो और सीढ़ी लो, सड़क पर नियम मानो और हेलमेट या सीट बेल्ट पहनो, हाथ धोओ और दवा सही लो, और किसी असुरक्षित हालत में: ना कहो, दूर जाओ, भरोसेमंद बड़े को बताओ।