बच्चा कौन है, और खास अधिकार क्यों?
अभिसमय के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र का हर व्यक्ति बच्चा है, जब तक किसी देश का कानून वयस्कता पहले तय न करे।
बच्चे पूरे इंसान हैं और उनके सारे मानव अधिकार हैं। उन्हें खास अधिकार और अतिरिक्त संरक्षण भी मिलता है क्योंकि:
- वे शरीर और मन से अभी बढ़ रहे हैं;
- भोजन, देखभाल और सुरक्षा के लिए बड़ों पर निर्भर हैं;
- आमतौर पर वोट नहीं दे सकते या अकेले अदालत नहीं जा सकते;
- बचपन का नुकसान (भूख, हिंसा, स्कूल न जाना) पूरी ज़िंदगी पर असर डाल सकता है।
एक ज़रूरी विचार है विकसित होती क्षमताएँ: बच्चा जितना बड़ा और समझदार होता है, उसे उतनी ज़्यादा बात कहने और खुद फ़ैसले लेने की आज़ादी मिलती है।
अधिकार वह है जिसका हर व्यक्ति हक़दार है। एक व्यक्ति का अधिकार दूसरों (माता-पिता, शिक्षक, सरकार) पर उसका सम्मान, रक्षा और पूरा करने का कर्तव्य बनाता है।
संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (UNCRC)
समय-रेखा:
- 1924: बाल अधिकारों की जिनेवा घोषणा (राष्ट्र संघ): पाँच छोटे सिद्धांत।
- 1959: UN बाल अधिकार घोषणा: दस सिद्धांत, कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं।
- 1979: अंतरराष्ट्रीय बाल वर्ष; संधि पर काम शुरू।
- 20 नवंबर 1989: UN महासभा ने अभिसमय अपनाया; 1990 में लागू।
- 2000 और 2011: तीन वैकल्पिक प्रोटोकॉल: युद्ध में बच्चे, बच्चों की बिक्री व यौन शोषण, और एक शिकायत प्रक्रिया जिससे बच्चे UN तक मामला ले जा सकें।
मुख्य तथ्य: 54 अनुच्छेद (1–41 अधिकार बताते हैं; बाकी बताते हैं कि यह कैसे काम करता है)। 196 देश इसके पक्षकार हैं, किसी भी दूसरी मानव अधिकार संधि से ज़्यादा; अमेरिका ने हस्ताक्षर किए पर अनुसमर्थन नहीं किया।
जो देश इसका अनुसमर्थन करता है, वह अपने कानून और नीतियाँ इसके अनुसार बनाने का वादा करता है। हर पाँच साल में वह UN बाल अधिकार समिति (18 स्वतंत्र विशेषज्ञ) को रिपोर्ट भेजता है, जो सुझाव देती है। बच्चे और NGO भी अपनी रिपोर्ट भेज सकते हैं। UNICEF देशों को अधिकार लागू करने में मदद करता है।
चार मूल सिद्धांत और अधिकारों के चार समूह
चार मूल सिद्धांत
- भेदभाव नहीं (अनु. 2): हर बच्चे को हर अधिकार, चाहे लिंग, धर्म, भाषा, विकलांगता, अमीरी-गरीबी, मूल या माता-पिता की स्थिति कुछ भी हो।
- बच्चे का सर्वोत्तम हित (अनु. 3): बच्चों के बारे में हर फ़ैसले में, चाहे अदालत, स्कूल, सरकार या कल्याण संस्था करे, बच्चे के लिए सबसे अच्छा क्या है, यह सबसे पहले सोचा जाए।
- जीवन, अस्तित्व और विकास (अनु. 6): सरकार बच्चों को जीने और पूरी क्षमता तक बढ़ने में हर संभव मदद करे।
- बच्चे की राय का सम्मान (अनु. 12): जिन बातों का बच्चों पर असर हो, उन पर वे राय रख सकें, और उनकी उम्र व समझ के हिसाब से उसे गंभीरता से लिया जाए।
अधिकारों के चार समूह
| समूह | उदाहरण |
|---|---|
| जीवन व अस्तित्व | जीवन, जन्म से नाम और राष्ट्रीयता, स्वास्थ्य सेवा, पौष्टिक भोजन, साफ़ पानी, अच्छा जीवन-स्तर |
| विकास | मुफ़्त प्राथमिक शिक्षा, आराम और खेल, संस्कृति और धर्म, जानकारी तक पहुँच, माता-पिता की देखभाल, विकलांग बच्चों को मदद |
| संरक्षण | हिंसा, दुर्व्यवहार और उपेक्षा से; हानिकारक बाल श्रम से; तस्करी और यौन शोषण से; नशे से; 15 (प्रोटोकॉल में 18) से कम उम्र में सेना में भर्ती से; किशोर न्याय में निष्पक्ष व्यवहार; शरणार्थी और अनाथ बच्चों की खास देखभाल |
| सहभागिता | अभिव्यक्ति, विचार, अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता; मिलने और समूह बनाने की आज़ादी; निजता; अदालत और फ़ैसलों में सुने जाने का हक़ |
अधिकार अविभाज्य हैं: बच्चे को सब एक साथ चाहिए। जो बच्चा स्कूल जाता है पर घर पर पिटता है, वह अपने अधिकारों का आनंद नहीं ले रहा।
घर और देश में बाल अधिकारों की रक्षा
कर्तव्य किसके हैं?
- माता-पिता या अभिभावक: परवरिश की पहली ज़िम्मेदारी, बच्चे के सर्वोत्तम हित में।
- सरकार: कानून बनाती है, स्कूल और स्वास्थ्य पर पैसा लगाती है, परिवारों की मदद करती है, बाल संरक्षण सेवाएँ और अदालतें चलाती है।
- स्कूल, डॉक्टर, समाज-सेवक, पुलिस: बच्चा खतरे में हो तो सूचना दें और कदम उठाएँ।
- समाज और मीडिया: बच्चों की गरिमा और निजता का सम्मान करें।
देश अभिसमय को अपने कानून में कैसे लाते हैं (ऐसे उदाहरण कई देशों में, आपके अपने देश में भी, मिलेंगे):
- संविधान या बाल अधिकार कानून;
- शिकायत सुनने वाला बाल लोकपाल या आयुक्त (नॉर्वे ने 1981 में पहला बनाया; कई यूरोपीय देशों में है; भारत में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग);
- काम की न्यूनतम उम्र और 18 से कम उम्र वालों के लिए खतरनाक काम पर रोक;
- मुफ़्त, अनिवार्य स्कूली शिक्षा (भारत का शिक्षा का अधिकार कानून 2009; दुनिया भर में ऐसे कानून);
- दुर्व्यवहार और यौन शोषण के ख़िलाफ़ कानून (भारत का POCSO कानून 2012);
- अलग किशोर न्याय व्यवस्था, जो सज़ा नहीं, सुधार पर ध्यान देती है;
- मुफ़्त बाल हेल्पलाइन (भारत में 1098; कई यूरोपीय देशों में 116 111);
- युद्ध, विस्थापन या आपदा से प्रभावित बच्चों के लिए सुरक्षित जगह, पढ़ाई, मानसिक सहारा और परिवार ढूँढने में मदद।
अधिकार टूटें तो बच्चा या बड़ा स्कूल प्रशासन, बाल संरक्षण सेवा, लोकपाल, पुलिस या अदालत जा सकता है। देश के भीतर रास्ते आज़माने के बाद, कुछ देशों में UN समिति (तीसरा वैकल्पिक प्रोटोकॉल) या क्षेत्रीय अदालतों में शिकायत की जा सकती है।
छात्रों के अधिकार और युवा संरक्षण
स्कूल में छात्रों के अधिकार
- शिक्षा जो व्यक्तित्व, प्रतिभा और मानव अधिकारों व पर्यावरण के प्रति सम्मान बढ़ाए (अनु. 28–29)।
- सुरक्षा और सम्मान: अनुशासन गरिमा के साथ हो; कई देशों में शारीरिक दंड और अपमान पर रोक है।
- बदमाशी (bullying) और भेदभाव से सुरक्षा।
- निष्पक्ष प्रक्रिया: निलंबन जैसी बड़ी सज़ा से पहले छात्र को कारण बताया जाए और उसकी बात सुनी जाए।
- आवाज़: छात्र परिषद, कक्षा सभा, सर्वे।
- निजता: निजी जानकारी, डायरी और फ़ोन बिना ठोस कारण साझा या जाँचे न जाएँ।
युवा संरक्षण कानून
कानून युवाओं को उन चीज़ों से बचाते हैं जो उनके विकास को नुकसान पहुँचा सकती हैं: किशोरों के काम के घंटे और रात के काम पर सीमा, नाबालिगों को शराब, तंबाकू और जुआ बेचने पर रोक, फ़िल्मों और खेलों की उम्र-रेटिंग, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और डेटा के नियम, हानिकारक सामग्री पर नियंत्रण। ये सीमाएँ खुद एक तरह का संरक्षण अधिकार हैं।
अधिकार और ज़िम्मेदारी
अधिकार के साथ दूसरों का सम्मान आता है। अभिव्यक्ति की आज़ादी में सहपाठियों का अपमान या बदमाशी शामिल नहीं। अपने अधिकार माँगना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना सीखना ज़िम्मेदार नागरिक बनने का हिस्सा है।
करके देखो: अपने दिन की अधिकार-जाँच
सुबह उठने से रात सोने तक अपना दिन लिखो। हर काम (नाश्ता, स्कूल, खेल, दोस्तों से बात, ऑनलाइन चैट) के आगे लिखो कि वह किस अधिकार समूह से जुड़ा है: जीवन व अस्तित्व, विकास, संरक्षण या सहभागिता। फिर सोचो कि कहीं कोई बच्चा जिसके पास आज यह अधिकार नहीं, और एक चीज़ जो मदद कर सकती है। 3D में स्थितियाँ चुनकर अपने जवाब जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बच्चा = 18 वर्ष से कम उम्र का हर व्यक्ति (UNCRC अनु. 1)
- UNCRC: 20 नवंबर 1989 को अपनाया, 54 अनुच्छेद, 196 पक्षकार देश, 3 वैकल्पिक प्रोटोकॉल
- 4 सिद्धांत: भेदभाव नहीं (अनु. 2), सर्वोत्तम हित (अनु. 3), जीवन व विकास (अनु. 6), बच्चे की राय (अनु. 12)
- 4 समूह: जीवन व अस्तित्व, विकास, संरक्षण, सहभागिता
- बच्चे का अधिकार → माता-पिता, सरकार और समाज का कर्तव्य
हल किए गए उदाहरण
1. तलाक के बाद अदालत को तय करना है कि 10 साल का बच्चा किस माता-पिता के साथ रहेगा। कौन-से सिद्धांत लागू होंगे?
फ़ैसला बच्चे के सर्वोत्तम हित (अनु. 3) से होना चाहिए, और बच्चे की राय उसकी उम्र-समझ के हिसाब से सुनी जानी चाहिए (अनु. 12)। सवाल यह नहीं कि माता-पिता को क्या सुविधाजनक है।
2. 13 साल का बच्चा स्कूल जाने की जगह ईंट-भट्ठे पर रोज़ 10 घंटे काम करता है। कौन-से अधिकार टूटे?
आर्थिक शोषण और हानिकारक काम से संरक्षण (अनु. 32), शिक्षा का अधिकार (अनु. 28) और आराम-खेल का अधिकार (अनु. 31)। सरकार को बाल श्रम कानून लागू करने और परिवार की मदद करनी चाहिए।
3. एक स्कूल व्हीलचेयर वाले बच्चे को दाखिला नहीं देता। कौन-सा सिद्धांत टूटा?
भेदभाव नहीं (अनु. 2), और विकलांग बच्चों का शिक्षा व समावेश का अधिकार (अनु. 23 और 28)। स्कूल को रैंप जैसे उचित बदलाव करने चाहिए।
4. छात्र परिषद प्रधानाचार्य से लंच ब्रेक का समय बदलने को कहती है। यह कौन-सा अधिकार समूह है?
सहभागिता: अपने पर असर डालने वाली बातों पर राय रखने और सुने जाने का हक़ (अनु. 12) और समूह में मिलने का हक़ (अनु. 15)।
5. कोई देश अभिसमय मान ले पर फिर भी बच्चे खदानों में काम करें, तो समस्या क्यों है?
अनुसमर्थन एक वादा है; सरकार को कानून बनाकर लागू करने, स्कूलों पर खर्च करने और गरीब परिवारों की मदद भी करनी होती है। UN समिति अपनी समीक्षा में यह बताएगी और कदम सुझाएगी।
आम गलतियाँ
- सोचना कि बाल अधिकार का मतलब बच्चे जो चाहें करें। अधिकार बच्चों की भलाई की रक्षा करते हैं और उम्र के साथ बढ़ते हैं; इनके साथ दूसरों का सम्मान भी आता है।
- सोचना कि कर्तव्य सिर्फ़ सरकार का है। माता-पिता, स्कूल और समाज की भी ज़िम्मेदारी है।
- सोचना कि अभिसमय सिर्फ़ इच्छाओं की सूची है। अनुसमर्थन करने वाले देशों के लिए यह बाध्यकारी संधि है जिसकी नियमित अंतरराष्ट्रीय समीक्षा होती है।
- सोचना कि सहभागिता का मतलब सारे फ़ैसले बच्चे करें। इसका मतलब है उनकी राय सुनी जाए और उम्र-समझ के हिसाब से गंभीरता से ली जाए।