आपराधिक कानून क्या है?
आपराधिक कानून कानून का वह हिस्सा है जो बताता है कि कौन-से काम अपराध हैं और उनकी सज़ा क्या है।
अपराध को केवल पीड़ित के नहीं, पूरे समाज के विरुद्ध गलत माना जाता है। इसलिए मुक़दमा राज्य (अभियोजन) चलाता है, पीड़ित नहीं।
यह दीवानी (सिविल) कानून से अलग है, जहाँ एक व्यक्ति दूसरे पर मुक़दमा करता है, जैसे टूटे अनुबंध के लिए, और पैसे (हर्जाना) माँगता है।
ज़्यादातर देशों के मूल विचार: कानून के बिना अपराध नहीं (काम तभी अपराध है जब पहले से कानून ने ऐसा कहा हो); सज़ा अपराध के अनुपात में हो; अभियुक्त निर्दोष माना जाए।
अपराध के तत्व: दोषी कार्य और दोषी मन
Actus reus (लैटिन: दोषी कार्य) शारीरिक हिस्सा है: कोई काम, कभी-कभी कर्तव्य होते हुए काम न करना (जैसे माता-पिता का बच्चे को खाना न देना), और उससे हुआ परिणाम।
Mens rea (दोषी मन) मानसिक हिस्सा है: इरादा (परिणाम चाहना) या लापरवाही से जोखिम लेना (खतरा देखकर भी उठाना)। कुछ छोटे अपराधों में उपेक्षा (सामान्य सावधानी न बरतना) काफ़ी है।
कारण-संबंध: काम से ही नुकसान हुआ हो।
कुछ कठोर दायित्व वाले अपराध, जैसे कई ट्रैफ़िक और खाद्य-सुरक्षा नियम, में दोषी मन ज़रूरी ही नहीं।
व्यक्ति के विरुद्ध अपराध: घातक और गैर-घातक
घातक अपराध (किसी की मृत्यु):
- हत्या: मारने या गंभीर चोट पहुँचाने के इरादे से गैरकानूनी रूप से जान लेना। सबसे गंभीर अपराध।
- गैर-इरादतन हत्या (आपराधिक मानव-वध): हत्या जैसा पूरा इरादा न हो, जैसे किसी खतरनाक गैरकानूनी काम या घोर लापरवाही से मृत्यु, या जब आंशिक बचाव (जैसे अचानक उकसावा) लागू हो।
गैर-घातक अपराध (चोट, मृत्यु नहीं), हल्के से गंभीर: हमला (किसी को तुरंत बल का डर दिखाना), मारपीट (गैरकानूनी छूना या बल), साधारण चोट, गंभीर (घोर) चोट, इरादे के साथ या बिना।
संपत्ति के विरुद्ध अपराध
- चोरी: किसी और की चीज़ बेईमानी से, हमेशा रखने के इरादे से लेना।
- लूट: बल या बल की धमकी से चोरी।
- सेंधमारी (घर में घुसकर चोरी): चोरी या नुकसान के लिए बिना अनुमति इमारत में घुसना।
- धोखाधड़ी: झूठ या छल से पैसा या संपत्ति पाना (ऑनलाइन ठगी भी)।
- संपत्ति को नुकसान (रिष्टि): जानबूझकर या लापरवाही से किसी की संपत्ति तोड़ना या बिगाड़ना।
प्रयास और अधूरे अपराध
प्रयास तब है जब व्यक्ति अपराध के इरादे से ऐसा काम करे जो सिर्फ़ तैयारी से आगे हो, पर अपराध पूरा न हो।
सब्बल खरीदना तैयारी है। खिड़की तोड़कर खोलना सेंधमारी का प्रयास है।
दूसरे अधूरे अपराध: आपराधिक षड्यंत्र (दूसरों के साथ अपराध करने की सहमति) और अपराध के लिए उकसाना या मदद करना (दुष्प्रेरण)।
बचाव (Defences)
- आत्मरक्षा (निजी प्रतिरक्षा): खुद, दूसरों या संपत्ति को बचाने के लिए उचित बल।
- दबाव (duress): मौत या गंभीर चोट की धमकी से मजबूर होना।
- पागलपन (विकृतचित्तता): इतनी गंभीर मानसिक बीमारी कि व्यक्ति को पता ही न हो कि वह क्या कर रहा है या कि यह गलत है।
- नशा: शायद ही पूरा बचाव; अपनी मर्ज़ी से नशा करना आम तौर पर माफ़ी नहीं देता।
- सहमति: कुछ हल्के संपर्क (जैसे खेल) में चलती है, गंभीर चोट में नहीं।
पूरे बचाव से बरी होते हैं। आंशिक बचाव हत्या को गैर-इरादतन हत्या बना देते हैं।
कानूनी ज़िम्मेदारी और किशोर आपराधिक कानून
आपराधिक ज़िम्मेदारी की उम्र से छोटे बच्चे दोषी नहीं ठहराए जा सकते। यह उम्र अलग-अलग है: जैसे भारत में 7 (12 तक समझ की जाँच के साथ), इंग्लैंड में 10, जर्मनी और कोरिया में 14।
इससे बड़े किशोरों के मामले आम तौर पर किशोर न्यायालय (भारत में किशोर न्याय बोर्ड) देखते हैं। उद्देश्य सज़ा से ज़्यादा सुधार और शिक्षा है: चेतावनी, सामुदायिक सेवा, परामर्श, और बहुत कम मामलों में हिरासत। उनके नाम आम तौर पर गुप्त रखे जाते हैं।
आपराधिक प्रक्रिया और अभियुक्त के अधिकार
सामान्य रास्ता: अपराध की सूचना → पुलिस जाँच → गिरफ़्तारी → आरोप → मुक़दमा → फ़ैसला → सज़ा → अपील।
ज़्यादातर कानूनी व्यवस्थाओं में अधिकार: गिरफ़्तारी का कारण जानना; चुप रहना; वकील (पैसे न हों तो मुफ़्त); जल्दी जज के सामने पेश होना; निष्पक्ष, खुला मुक़दमा; निर्दोष माना जाना; दोष उचित संदेह से परे साबित हो; एक ही अपराध के लिए दो बार मुक़दमा न हो।
सज़ाएँ: जुर्माना, सामुदायिक सेवा, परिवीक्षा (प्रोबेशन) और कारावास। उद्देश्य: डर पैदा करना, समाज की रक्षा, अपराधी का सुधार और नुकसान की भरपाई।
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जज बनिए: 3D फ़्री-प्ले में हर मामला चुनिए। देखने से पहले लिखिए: दोषी काम है? दोषी मन? कोई बचाव? फिर बत्तियाँ मिलाइए। अपना मामला बनाइए और का + म − ब से जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अपराध = दोषी कार्य (actus reus) + दोषी मन (mens rea)
- दोषी मन के स्तर: इरादा > जानबूझकर जोखिम > उपेक्षा
- हत्या = गैरकानूनी जान लेना + मारने या गंभीर चोट का इरादा
- चोरी = बेईमानी से लेना + दूसरे की संपत्ति + रखने का इरादा
- लूट = चोरी + बल
- प्रयास = इरादा + तैयारी से आगे का काम
- सबूत का भार: अभियोजन पर, उचित संदेह से परे
हल किए गए उदाहरण
1. आशा कैफ़े के स्टैंड से छाता उठाती है, सच में मानती है कि वह उसका है। क्या यह चोरी है?
लेने का काम (दोषी कार्य) हुआ, पर बेईमानी नहीं, इसलिए चोरी का दोषी मन नहीं। यह चोरी नहीं। पता चलने पर उसे लौटा देना चाहिए।
2. बहस में रवि एक आदमी को धक्का देता है। वह गिरकर सिर पर चोट से मर जाता है। रवि मारना या गंभीर चोट नहीं चाहता था। हत्या या गैर-इरादतन हत्या?
धक्का गैरकानूनी काम है जिससे मृत्यु हुई, पर मारने या गंभीर चोट का इरादा नहीं था। यह गैर-इरादतन हत्या (हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानव-वध) है, हत्या नहीं।
3. सैम रात में खुली खिड़की से लैपटॉप चुराने घुसता है पर गलियारे में पकड़ा जाता है। कौन-से अपराध?
चोरी के इरादे से बिना अनुमति घुसना सेंधमारी है, जो घुसते ही पूरी हो जाती है। लैपटॉप लेना पूरा नहीं हुआ, इसलिए चोरी का प्रयास भी है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि अपराध का मुक़दमा पीड़ित चलाता है। आपराधिक मामलों में राज्य मुक़दमा चलाता है; पीड़ित गवाह होता है।
- हर जान लेने को हत्या मानना। हत्या के लिए इरादा चाहिए; उसके बिना अक्सर गैर-इरादतन हत्या होती है।
- लूट और सेंधमारी में गड़बड़ी। लूट में व्यक्ति पर बल होता है; सेंधमारी में बिना अनुमति इमारत में घुसना।
- सोचना कि अभियुक्त को अपनी बेगुनाही साबित करनी है। अभियोजन को उचित संदेह से परे दोष साबित करना होता है।