Germany Jahrgangsstufe 10 Economics and Law (WSG-W track)
अध्याय: 5
1. Companies in economy and society
Companies in the economy and society
- विचार से स्टार्टअप तक: उद्यमिता – उद्यमी ज़मीन, श्रम और पूँजी को जोड़कर और जोखिम उठाकर एक विचार को व्यवसाय में बदलता है। नए विचार पुराने तरीकों की जगह लेते हैं, जिसे अर्थशास्त्री रचनात्मक विनाश कहते हैं। स्टार्टअप निवेशकों, बैंकों, इनक्यूबेटरों, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं, और MSME कहलाने वाले छोटे उद्यमों की मदद से बढ़ते हैं। व्यवसाय योजना विचार, लागत और ग्राहकों का नक्शा है। लाभ-हानि विवरण बिक्री − लागत दिखाता है, और तुलन पत्र परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
2. Law as a framework for action
Public law and youth criminal law
- आपराधिक कानून (Criminal Law): अपराध और बचाव – आपराधिक कानून बताता है कि राज्य किन कामों को अपराध मानता है और उनकी सज़ा क्या है। ज़्यादातर अपराधों के दो हिस्से होते हैं: दोषी कार्य (actus reus) और दोषी मन (mens rea)। अपराध व्यक्ति के विरुद्ध (घातक जैसे हत्या; गैर-घातक जैसे हमला) या संपत्ति के विरुद्ध (चोरी, लूट, सेंधमारी, धोखाधड़ी, संपत्ति को नुकसान) हो सकते हैं। अपराध करने की कोशिश (प्रयास) भी अपराध है। आत्मरक्षा, दबाव, पागलपन या आपराधिक ज़िम्मेदारी की उम्र से कम होना जैसे बचाव दोष हटा या घटा सकते हैं। अभियुक्त निर्दोष माना जाता है; अभियोजन को उचित संदेह से परे दोष साबित करना होता है।
3. Economic action on markets
Markets and price formation
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
4. Decisions from a behavioural economics view
Decisions from a behavioural economics view
- व्यवहारिक अर्थशास्त्र: असली लोग कैसे निर्णय लेते हैं – पारंपरिक अर्थशास्त्र मानता है कि लोग पूरी तरह तर्कसंगत हैं: सब विकल्प जानते हैं, लागत और लाभ तौलते हैं और हमेशा सबसे अच्छा चुनते हैं। व्यवहारिक अर्थशास्त्र मनोविज्ञान और प्रयोगों से दिखाता है कि असल में लोग कैसे चुनते हैं। हमारी तर्कसंगतता समय, जानकारी और दिमाग़ी क्षमता से सीमित है, इसलिए हम शॉर्टकट (अनुमानी नियम) अपनाते हैं, जिनसे एंकरिंग, उपलब्धता, भेड़चाल, हानि से बचाव, वर्तमान पूर्वाग्रह और फ़्रेमिंग जैसे पूर्वाग्रह आते हैं। लोग निष्पक्षता और सामाजिक मानदंडों की भी परवाह करते हैं। सरकारें और कंपनियाँ इन विचारों से 'नज' और 'चयन संरचना' बनाती हैं, जैसे डिफ़ॉल्ट विकल्प। नज चुनने की आज़ादी रखते हैं पर नैतिक सवाल भी उठाते हैं।
5. Profile area (economics-social science school)
Companies and economy: extension · Law: extension · Markets: extension · Behavioural economics: extension · Economics project
- विचार से स्टार्टअप तक: उद्यमिता – उद्यमी ज़मीन, श्रम और पूँजी को जोड़कर और जोखिम उठाकर एक विचार को व्यवसाय में बदलता है। नए विचार पुराने तरीकों की जगह लेते हैं, जिसे अर्थशास्त्री रचनात्मक विनाश कहते हैं। स्टार्टअप निवेशकों, बैंकों, इनक्यूबेटरों, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं, और MSME कहलाने वाले छोटे उद्यमों की मदद से बढ़ते हैं। व्यवसाय योजना विचार, लागत और ग्राहकों का नक्शा है। लाभ-हानि विवरण बिक्री − लागत दिखाता है, और तुलन पत्र परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
- क़ानून का शासन (Rule of Law) – क़ानून के शासन (विधि का शासन) का अर्थ है कि सरकार और उसके नेता समेत हर व्यक्ति एक-से, पहले से ज्ञात क़ानून माने, जिन्हें निष्पक्ष और स्वतंत्र अदालतें बराबरी से लागू करें। मुख्य सिद्धांत हैं: क़ानून की सर्वोच्चता, क़ानून के सामने समानता, साफ़ और सार्वजनिक क़ानून, निष्पक्ष सुनवाई, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों का पृथक्करण। क़ानून खुली प्रक्रिया से बनते-बदलते हैं, अदालतें उन्हें संविधान या अधिकार-पत्र पर परख सकती हैं, और देश संधियों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून मानते हैं।
- पूर्ण प्रतियोगिता और कीमत निर्धारण – पूर्ण प्रतियोगिता में बहुत सारी फ़र्में एक जैसी वस्तु बहुत सारे खरीदारों को बेचती हैं, इसलिए हर फ़र्म कीमत स्वीकारक है। बाज़ार कीमत वहाँ तय होती है जहाँ बाज़ार माँग = बाज़ार पूर्ति (Qd = Qs)। माँग बढ़े तो कीमत और मात्रा दोनों बढ़ती हैं; पूर्ति बढ़े तो कीमत घटती है और मात्रा बढ़ती है।
- व्यवहारिक अर्थशास्त्र: असली लोग कैसे निर्णय लेते हैं – पारंपरिक अर्थशास्त्र मानता है कि लोग पूरी तरह तर्कसंगत हैं: सब विकल्प जानते हैं, लागत और लाभ तौलते हैं और हमेशा सबसे अच्छा चुनते हैं। व्यवहारिक अर्थशास्त्र मनोविज्ञान और प्रयोगों से दिखाता है कि असल में लोग कैसे चुनते हैं। हमारी तर्कसंगतता समय, जानकारी और दिमाग़ी क्षमता से सीमित है, इसलिए हम शॉर्टकट (अनुमानी नियम) अपनाते हैं, जिनसे एंकरिंग, उपलब्धता, भेड़चाल, हानि से बचाव, वर्तमान पूर्वाग्रह और फ़्रेमिंग जैसे पूर्वाग्रह आते हैं। लोग निष्पक्षता और सामाजिक मानदंडों की भी परवाह करते हैं। सरकारें और कंपनियाँ इन विचारों से 'नज' और 'चयन संरचना' बनाती हैं, जैसे डिफ़ॉल्ट विकल्प। नज चुनने की आज़ादी रखते हैं पर नैतिक सवाल भी उठाते हैं।