तर्कसंगत चुनाव और उसकी सीमाएँ
सामान्य आर्थिक मॉडल में लोग तर्कसंगत हैं: पसंद साफ़ है, पूरी जानकारी है और वे सीमांत लाभ और लागत की तुलना करके उपयोगिता अधिकतम करते हैं। फ़र्में लाभ अधिकतम करती हैं। यह मॉडल सरल और अक्सर उपयोगी है।
व्यवहारिक अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र को मनोविज्ञान से जोड़ता है और प्रयोगों से जाँचता है कि लोग असल में कैसे चुनते हैं। इसका पहला बड़ा विचार है सीमित तर्कसंगतता (bounded rationality) (हर्बर्ट साइमन)। निर्णय सीमित होते हैं:
- सीमित जानकारी से (हर कीमत नहीं जान सकते),
- सीमित समय से,
- बहुत से विकल्पों की तुलना की सीमित दिमाग़ी क्षमता से।
इसलिए लोग अक्सर संतोषजनक चुनाव (satisficing) करते हैं: सबसे अच्छा ढूँढने के बजाय पहला 'काफ़ी अच्छा' विकल्प। सीमित आत्म-नियंत्रण भी मायने रखता है: पता है कि बचत अच्छी है, फिर भी नहीं करते।
अनुमानी नियम और पूर्वाग्रह
अनुमानी नियम (heuristic) एक दिमाग़ी शॉर्टकट है। यह मेहनत बचाता है पर पूर्वाग्रह (bias) ला सकता है: नियमित, अनुमानित ग़लती।
- एंकरिंग: पहले सुने अंक पर ज़्यादा भरोसा। ऊँची 'मूल कीमत' सेल कीमत को सौदा बना देती है।
- उपलब्धता: जो उदाहरण आसानी से याद आए, उसे ज़्यादा संभव मानना। विमान दुर्घटना की ख़बर के बाद उड़ान का ख़तरा बड़ा लगता है।
- भेड़चाल (herd behaviour): दूसरों की नकल, जैसे भीड़ वाला ढाबा बेहतर लगना; शेयर बाज़ार के बुलबुले।
- हानि से बचाव (loss aversion): नुकसान बराबर लाभ से लगभग दोगुना भारी लगता है।
- फ़्रेमिंग: एक ही बात अलग शब्दों में: '90% वसा-मुक्त' '10% वसा' से अच्छा लगता है।
- वर्तमान पूर्वाग्रह: अभी को ज़्यादा, भविष्य को कम महत्व (बचत की जगह नाश्ता)।
- यथास्थिति पूर्वाग्रह: जो पहले से तय है, उसी पर टिके रहना।
सामाजिक मानदंड, निष्पक्षता और अल्टीमेटम खेल
सामाजिक मानदंड व्यवहार के अलिखित नियम हैं। दूसरे क्या करते हैं और क्या सोचते हैं, इसका हम पर असर होता है।
लोग सिर्फ़ अपने पैसे की नहीं, निष्पक्षता की भी परवाह करते हैं। अल्टीमेटम खेल में A को 10 सिक्के मिलते हैं और वह कुछ B को देने का प्रस्ताव करता है। B माने तो बँटवारा, मना करे तो दोनों को शून्य। पूरी तरह स्वार्थी B, 1 सिक्का भी ले लेगा। पर कई देशों के प्रयोगों में ज़्यादातर A, 4–5 सिक्के देते हैं और 2–3 से कम के प्रस्ताव अक्सर ठुकराए जाते हैं। लोग अन्याय को सज़ा देने के लिए कीमत चुकाते हैं।
डिक्टेटर खेल में B मना नहीं कर सकता, फिर भी कई A कुछ देते हैं। यह परोपकार दिखाता है। दुकानें भी जानती हैं: बारिश में छाते का दाम बढ़ाने वाली दुकान को लोग अन्यायी मान सकते हैं।
नज, चयन संरचना और नैतिकता
चयन संरचना (choice architecture) यानी विकल्प किस तरह रखे गए हैं: क्रम, डिफ़ॉल्ट, शब्द। नज (nudge) (थेलर और सनस्टीन) व्यवहार को अनुमानित तरीके से बदलता है, बिना किसी विकल्प पर रोक लगाए और बिना पैसे के प्रोत्साहन को ज़्यादा बदले।
- डिफ़ॉल्ट चुनाव: पेंशन में अपने-आप नामांकन (opt-out) से बचत बहुत बढ़ती है।
- सीमित चुनाव: विकल्प कम रखना ताकि लोग उलझें नहीं।
- अनिवार्य चुनाव: जैसे लाइसेंस बनवाते समय अंगदान पर हाँ/ना चुनना ज़रूरी।
- स्थान: कैंटीन में फल आँखों के स्तर पर।
- सामाजिक तुलना: 'आपने 80% पड़ोसियों से ज़्यादा बिजली ख़र्च की'।
- चेतावनी की फ़्रेमिंग: तंबाकू के पैकेट पर बड़े चित्र।
ताक़त और सीमाएँ
नज सस्ते हैं और आज़ादी बनाए रखते हैं। पर असर घट सकता है, सब पर काम नहीं करते और अकेले ग़रीबी जैसी बड़ी समस्याएँ हल नहीं करते। कंपनियाँ 'डार्क पैटर्न' से लोगों को उनके हित के विरुद्ध भी धकेल सकती हैं (छिपी फ़ीस, मुश्किल से रद्द होने वाली सदस्यता)।
नैतिक सवाल
क्या सरकार का चुनाव मोड़ना सही है? समर्थक इसे उदारवादी पितृत्ववाद कहते हैं: लोगों को उस ओर ले जाना जो वे पूरी जानकारी में चुनते, और बाहर निकलने की छूट। आलोचक हेरफेर, 'अच्छा' कौन तय करे और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हैं। एक अच्छी जाँच: अगर लोगों को नज के बारे में बता दिया जाए, तब भी क्या वह ठीक लगेगा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तर्कसंगत चुनाव: जहाँ सीमांत लाभ = सीमांत लागत
- सीमित तर्कसंगतता: सीमित जानकारी, समय और दिमाग़ी क्षमता
- अनुमानी नियम: दिमाग़ी शॉर्टकट; पूर्वाग्रह: उससे होने वाली अनुमानित ग़लती
- एंकरिंग, उपलब्धता, भेड़चाल, फ़्रेमिंग, वर्तमान पूर्वाग्रह, यथास्थिति पूर्वाग्रह
- हानि से बचाव: नुकसान बराबर लाभ से लगभग 2 गुना भारी
- अल्टीमेटम खेल: B मना करे → दोनों को 0
- नज: विकल्प हटाए बिना चयन संरचना बदलना
हल किए गए उदाहरण
1. एक फ़ोन का विज्ञापन: '₹30,000 था, अब ₹22,000'। वैसा ही दूसरा फ़ोन सीधे ₹22,000 में। लोग पहले को बेहतर सौदा मानते हैं। कौन सा पूर्वाग्रह?
चरण 1: दोनों की कीमत बराबर है। चरण 2: फ़र्क़ सिर्फ़ पहले दिखे अंक ₹30,000 का है। चरण 3: वह अंक एंकर बनकर ₹22,000 को कम दिखाता है। चरण 4: यह एंकरिंग है।
2. 100 सिक्कों के अल्टीमेटम खेल में A, B को 10 देता है। स्वार्थी तर्कसंगत B को मान लेना चाहिए। B क्यों मना कर सकता है और इससे क्या पता चलता है?
चरण 1: मानने पर B को 10, A को 90; मना करने पर दोनों को 0। चरण 2: पैसे के हिसाब से 10 > 0, इसलिए मानक मॉडल 'हाँ' कहता है। चरण 3: B को 90–10 अन्यायपूर्ण लग सकता है और वह A को सज़ा देने के लिए 10 छोड़ देता है। चरण 4: लोग सिर्फ़ अपने लाभ की नहीं, निष्पक्षता की भी क़द्र करते हैं।
3. एक कंपनी पेंशन योजना को opt-in से opt-out करती है। सदस्यता 45% से 88% हो जाती है। समझाइए।
चरण 1: योजना के पैसे में कुछ नहीं बदला। चरण 2: केवल डिफ़ॉल्ट बदला। चरण 3: यथास्थिति पूर्वाग्रह और आलस से ज़्यादातर लोग डिफ़ॉल्ट पर रहते हैं। चरण 4: opt-out में डिफ़ॉल्ट बचत है, इसलिए सदस्यता उछलती है। यह चयन संरचना से नज है।
4. मूल्यांकन करें: 'मीठे पेय कम करने के लिए सरकार को कर की जगह नज अपनाने चाहिए।'
पक्ष में: छोटे डिफ़ॉल्ट कप, पानी पहले रखना सस्ते हैं और आज़ादी रखते हैं। विपक्ष में: असर छोटा या अस्थायी; ज़्यादा पीने वाले अनदेखा कर सकते हैं; चीनी कर कीमत बदलता है और स्वास्थ्य के लिए पैसा जुटाता है। निष्कर्ष: नज, कर और जानकारी के साथ सबसे अच्छा काम करते हैं और पारदर्शी होने चाहिए।
आम गलतियाँ
- कहना कि व्यवहारिक अर्थशास्त्र लोगों को मूर्ख मानता है। यह कहता है कि लोग अनुमानित रूप से सीमित हैं, और उनकी ग़लतियों का पैटर्न है।
- हर नीति को नज कहना। प्रतिबंध या भारी कर नज नहीं है; नज सारे विकल्प खुले रखता है।
- एंकरिंग और फ़्रेमिंग को मिला देना। एंकरिंग संदर्भ अंक की बात है; फ़्रेमिंग एक ही जानकारी के शब्दों की।
- अल्टीमेटम खेल में कम प्रस्ताव ठुकराने को हर तरह से अतार्किक मानना। यह पैसा अधिकतम नहीं करता, पर निष्पक्षता और साख की दृष्टि से तर्कसंगत हो सकता है।