बाज़ार संरचना क्या है?
बाज़ार संरचना यानी फ़र्म किस तरह के बाज़ार में बेचती है। चार सवालों से बाज़ार पहचानते हैं:
- विक्रेता (और ख़रीदार) कितने हैं?
- माल एक-जैसा है या अलग?
- नई फ़र्मों का आना-जाना कितना आसान है (प्रवेश बाधाएँ)?
- एक फ़र्म कीमत पर कितना नियंत्रण रखती है?
| पूर्ण प्रतियोगिता | एकाधिकारी प्रतियोगिता | अल्पाधिकार | एकाधिकार | |
|---|---|---|---|---|
| फ़र्में | बहुत ज़्यादा | बहुत | कुछ | एक |
| माल | समरूप | विभेदित | समरूप या अलग | अनोखा |
| प्रवेश | मुक्त | आसान | कठिन | रुका हुआ |
| कीमत शक्ति | नहीं (कीमत स्वीकारक) | थोड़ी | बड़ी, पर परस्पर निर्भर | कीमत निर्धारक |
कम फ़र्मों वाले बाज़ार संकेंद्रित कहलाते हैं। n-फ़र्म संकेंद्रण अनुपात = सबसे बड़ी n फ़र्मों का कुल बिक्री में हिस्सा (जैसे शीर्ष 4)।
पूर्ण प्रतियोगिता
विशेषताएँ: बहुत सारे छोटे ख़रीदार-विक्रेता, समरूप माल, मुक्त प्रवेश और निकास, पूर्ण जानकारी, कोई परिवहन या बिक्री लागत नहीं।
हर फ़र्म बहुत छोटी है, इसलिए कीमत स्वीकारक है: उसका माँग वक्र बाज़ार कीमत पर सपाट है, P = AR = MR। वह MR = MC पर उत्पादन करती है।
लाभ के प्रकार: सामान्य लाभ वह न्यूनतम लाभ है जो फ़र्म को उद्योग में बनाए रखे (अवसर लागत सहित TR = TC)। इससे ऊपर असामान्य (अधिसामान्य) लाभ है, नीचे हानि।
अल्पकाल → दीर्घकाल: असामान्य लाभ नई फ़र्में खींचता है; पूर्ति बढ़ती है, कीमत गिरती है, जब तक सिर्फ़ सामान्य लाभ न बचे। हानि में फ़र्में निकलती हैं और कीमत वापस बढ़ती है। अल्पकाल में जब तक कीमत औसत परिवर्ती लागत (AVC) ढकती है, फ़र्म उत्पादन जारी रखती है (बंद होने का बिंदु)।
एकाधिकारी प्रतियोगिता
बहुत फ़र्में विभेदित माल बेचती हैं: मिलता-जुलता, पर हर एक का अपना ब्रांड, गुणवत्ता, डिज़ाइन या जगह। प्रवेश आसान है।
- हर फ़र्म का माँग वक्र नीचे ढलता है, यानी कीमत पर थोड़ी ताक़त।
- फ़र्में विज्ञापन, ब्रांड और बाज़ार आला (niche) यानी ख़ास ज़रूरत वाले छोटे ग्राहक समूह के ज़रिए मुकाबला करती हैं।
- अल्पकाल: असामान्य लाभ संभव। दीर्घकाल: नई फ़र्में नकल करती हैं, हर फ़र्म की माँग घटती है, लाभ सामान्य हो जाता है।
अल्पाधिकार और खेल सिद्धांत
कुछ बड़ी फ़र्में बाज़ार का ज़्यादातर हिस्सा रखती हैं और प्रवेश बाधाएँ ऊँची हैं। मुख्य लक्षण परस्पर निर्भरता: हर फ़र्म का सबसे अच्छा फ़ैसला प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भर है।
खेल सिद्धांत (game theory) इन फ़ैसलों को समझाता है। लाभ-ग्रिड में दोनों कीमत ऊँची रखें तो बड़ा लाभ बाँटें, पर हर एक कीमत घटाने को ललचाता है। दोनों घटाएँ तो दोनों कम कमाएँ। यह कैदी की दुविधा है, और वह स्थिति जहाँ कोई अकेले बदलना न चाहे, नैश संतुलन है।
- गठजोड़ (collusion): फ़र्में कीमत या उत्पादन पर समझौता करती हैं (कार्टेल)। ज़्यादातर देशों में ग़ैरक़ानूनी।
- कीमत नेतृत्व: एक बड़ी फ़र्म कीमत तय करे, बाकी पीछे चलें।
- गैर-कीमत प्रतियोगिता: लॉयल्टी योजनाएँ, विज्ञापन, बेहतर सेवा।
- कीमतें अक्सर अटकी (sticky) रहती हैं: कीमत युद्ध का डर।
समय के साथ बाज़ार बदलते हैं: नई तकनीक, विलय और नवाचार बाज़ार खोल या बंद कर सकते हैं (प्रतियोगिता की गतिशीलता, रचनात्मक विनाश)।
एकाधिकार और कीमत विभेद
शुद्ध एकाधिकार: ऐसे माल का अकेला विक्रेता जिसका कोई निकट विकल्प नहीं। (व्यवहार में, देश के नियम के अनुसार 25% या 40% से ज़्यादा हिस्से वाली फ़र्म को भी एकाधिकार शक्ति वाली माना जा सकता है।)
प्रवेश बाधाएँ: पेटेंट और कॉपीराइट, सरकारी लाइसेंस, मुख्य कच्चे माल पर नियंत्रण, बड़े पैमाने की किफ़ायतें (प्राकृतिक एकाधिकार जैसे जल नेटवर्क), और मज़बूत ब्रांड।
एकाधिकारी कीमत निर्धारक है। वह MR = MC पर उत्पादन तय करता है और कीमत माँग वक्र से पढ़ता है। पूर्ण प्रतियोगिता की तुलना में: ऊँची कीमत, कम उत्पादन, दीर्घकाल में भी असामान्य लाभ संभव, और कल्याण हानि (deadweight loss)। संभावित लाभ: बड़े पैमाने की किफ़ायत और शोध के लिए पैसा।
कीमत विभेद: एक ही माल अलग समूहों को अलग कीमत पर (छात्र टिकट, व्यस्त और ख़ाली समय के रेल किराए)। शर्तें: कीमत तय करने की ताक़त, समूहों की अलग कीमत लोच, और समूहों के बीच दोबारा बेचना संभव न हो।
फ़र्मों के उद्देश्य और प्रतिस्पर्धा-योग्य बाज़ार
उद्देश्य: ज़्यादातर मॉडल लाभ अधिकतमीकरण (MR = MC) मानते हैं। फ़र्में आगम अधिकतमीकरण (MR = 0), बिक्री या बाज़ार हिस्से की वृद्धि, टिके रहना या सामाजिक लक्ष्य भी चुन सकती हैं। मालिक और प्रबंधक अलग चीज़ें चाह सकते हैं (स्वामित्व और नियंत्रण का अलगाव)।
प्रतिस्पर्धा-योग्य बाज़ार (contestable market): जहाँ प्रवेश और निकास सस्ता हो (डूबी लागत कम)। एक या कुछ फ़र्में हों तब भी "आओ-कमाओ-जाओ" प्रवेश का डर कीमतें प्रतियोगी स्तर के पास रखता है।
दीर्घकालीन लागत: फ़र्म बढ़ने पर औसत लागत पहले घटती है (पैमाने की किफ़ायतें) और बाद में बढ़ सकती है (पैमाने की अकिफ़ायतें)। जहाँ बड़ा पैमाना बहुत सस्ता हो, वहाँ कम फ़र्में टिकती हैं और बाज़ार संकेंद्रित होता है।
कई देशों के प्रतिस्पर्धा प्राधिकरण विलयों पर नज़र रखते और कार्टेलों पर रोक लगाते हैं ताकि उपभोक्ता सुरक्षित रहें।
करके देखें
आपका परिवार जो पाँच चीज़ें ख़रीदता है, उनकी सूची बनाओ (सब्ज़ी, मोबाइल प्लान, बाल कटवाना, रेल टिकट, कोल्ड ड्रिंक)। हर एक के लिए गिनो कितने विक्रेता चुन सकते हो, माल एक-जैसा है या अलग, और नया धंधा शुरू करना आसान है या नहीं। फिर चरण 6 के पैमाने पर रखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लाभ अधिकतमीकरण: MR = MC
- पूर्ण प्रतियोगिता: P = AR = MR (कीमत स्वीकारक)
- सामान्य लाभ: TR = TC (अवसर लागत सहित); असामान्य लाभ: TR > TC
- अल्पकाल में बंद होने का नियम: तभी उत्पादन जब P ≥ AVC
- n-फ़र्म संकेंद्रण अनुपात = सबसे बड़ी n फ़र्मों का कुल बाज़ार हिस्सा (%)
- आगम अधिकतमीकरण: MR = 0
हल किए गए उदाहरण
1. एक बाज़ार की शीर्ष चार फ़र्मों के हिस्से 30%, 25%, 15% और 10% हैं। 4-फ़र्म संकेंद्रण अनुपात और संरचना बताओ।
CR4 = 30 + 25 + 15 + 10 = 80%। कुछ फ़र्मों के पास ज़्यादातर बिक्री, इसलिए अल्पाधिकार।
2. बाज़ार कीमत ₹24 प्रति kg है, पर एक गेहूँ किसान ₹26 माँगता है। क्या होगा और क्यों?
कुछ नहीं बिकेगा। गेहूँ समरूप है, ख़रीदार कीमत जानते हैं और विक्रेता बहुत हैं, इसलिए ख़रीदार दूसरी जगह जाते हैं। पूर्ण प्रतियोगी फ़र्म कीमत स्वीकारक है।
3. एक कैफ़े चेन असामान्य लाभ कमा रही है। एकाधिकारी प्रतियोगिता में दीर्घकाल में क्या होगा?
प्रवेश आसान है, इसलिए नए कैफ़े खुलते हैं। हर कैफ़े की माँग घटती है जब तक सिर्फ़ सामान्य लाभ न बचे।
4. दो एयरलाइन ऊँचा या नीचा किराया चुनती हैं। लाभ (A, B): ऊँचा-ऊँचा 10, 10; A नीचा-B ऊँचा 14, 3; A ऊँचा-B नीचा 3, 14; नीचा-नीचा 5, 5। हर एक क्या चुनेगी?
B कुछ भी करे, A को नीचा चुनने में ज़्यादा मिलता है (14 > 10, 5 > 3)। B के लिए भी यही। तो दोनों नीचा चुनती हैं और 5-5 पाती हैं: नैश संतुलन, जबकि दोनों 10 पसंद करतीं।
5. सिनेमा वयस्कों से ₹300 और छात्रों से ₹150 लेता है। यह किन शर्तों पर चलता है?
सिनेमा के पास कीमत तय करने की ताक़त है, छात्र कीमत के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हैं, और छात्र सस्ते टिकट दोबारा नहीं बेच सकते (पहचान पत्र जाँचा जाता है)।
6. एक ही जल कंपनी शहर को सबसे सस्ता पानी क्यों दे सकती है?
पाइप नेटवर्क बहुत महँगा है। एक फ़र्म यह स्थिर लागत सब उपयोगकर्ताओं में बाँटती है, तो औसत लागत सबसे कम। दो नेटवर्क से लागत दोगुनी। यह प्राकृतिक एकाधिकार है, जिसे आमतौर पर नियंत्रित किया जाता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि एकाधिकारी कोई भी कीमत ले सकता है। उसे भी माँग वक्र मानना पड़ता है: ऊँची कीमत पर कम बिक्री।
- सामान्य लाभ को रोज़ की भाषा में "शून्य लाभ" समझना। इसमें वह इनाम शामिल है जो मालिक कहीं और कमा सकता था।
- एकाधिकारी प्रतियोगिता (बहुत फ़र्में, अलग माल) को एकाधिकार (एक फ़र्म) समझ लेना।
- मान लेना कि कम फ़र्में हमेशा ऊँची कीमत देती हैं। बाज़ार प्रतिस्पर्धा-योग्य हो तो नए आने का डर कीमत नीचे रखता है।